Parvati Stotram

बोलते चलो बोलते चलो शेरावाली के जयकारे बोलते चलो लिरिक्स (Bolte chalo bolte chalo sherawali ke jaykaare bolte chalo Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

4,033 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण फलश्रुति, धार्मिक लाभ एवं प्रभाव

शेरावाली माता की आराधना से जीवन को सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

बोलते चलो बोलते चलो शेरावाली के जयकारे बोलते चलो। सुख-दुख में तेरा ध्यान करे, शेरावाली के जयकारे बोलते चलो। हाथ में चूड़ियां, सिर पे चोला, बिन तेरा कौन सहारा? तेरे दर पे आकर मैं सबको दुआ दे दूं। सुख-दुख में तेरा ध्यान करे, शेरावाली के जयकारे बोलते चलो। जो भी तुझसे मांगे, वो उसकी हो भरपूर। तेरे नाम से होती है सच्ची हर मुश्किल दूर। सुख-दुख में तेरा ध्यान करे, शेरावाली के जयकारे बोलते चलो।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय देवी दुर्गा, जिन्हें शेरावाली के नाम से भी जाना जाता है, की स्तुति करना है। यहां 'बोलते चलो' का अर्थ है निरंतर माता के जयकारे लगाना। जब हम कहते हैं 'सुख-दुख में तेरा ध्यान करे', तो यह सन्देश प्रकट होता है कि मां दुर्गा हमारे प्रत्येक सुख-दुख में हमारे साथ हैं। भजन हमें प्रेरित करता है कि हमें हमेशा माता का स्मरण करना चाहिए, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो, क्योंकि माता की कृपा से हर समस्या का समाधान संभव है। इस भजन में माता के प्रति भक्ति और समर्पण का भाव व्यक्त किया गया है जो भक्ति मार्ग को दर्शाता है।

इस भजन का भावार्थ गहरे आध्यात्मिक अनुभवों को समेटे हुए है। जब हम माता के नाम का जाप करते हैं, तो हमारे मन में शांति और संतोष का संचार होता है। यह भजन हमें बताता है कि किसी भी संकट या कठिनाई में माता का नाम हमारे लिए एक मजबूत सहारा बनता है। मां की कृपा से हमें अपने जीवन की सभी समस्याओं का सामना करने का साहस मिलता है। वास्तव में, शेरावाली माता की आराधना से भक्त को मानसिक शक्ति और सुकून प्राप्त होता है। यह भाव भक्तों को प्रोत्साहित करता है कि वे समस्याओं से न भागें, बल्कि माता का नाम लेकर उनका सामना करें।

भक्ति मार्ग में, इस भजन का स्थान महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि कैसे भक्तों को अपनी आस्था को मजबूत करना चाहिए। 'हाथ में चूड़ियां, सिर पे चोला' जैसे शब्दों में देवी के प्रति श्रद्धा और प्रेम की अभिव्यक्ति है। मां दुर्गा की उपासना के फलस्वरूप भक्तों को शांति, सुरक्षा, और प्रेम की अनुभूति होती है। भक्ति की यह साधना हमें आत्मिक शुद्धता के मार्ग पर ले जाती है और हमें अपने जीवन के उद्देश्य को पहचानने में मदद करती है। इसका प्रभाव न केवल भक्ति में, बल्कि हमारे दैनिक जीवन में आत्मसंतोष के रूप में अनुभव होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

शेरावाली माता का स्थान हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण है। पुराणों में माता दुर्गा का अनेक बार उल्लेख मिलता है। देवी दुर्गा को शक्ति और साहस की देवी माना जाता है, जो भक्तों के संकट का नाश करती हैं। भक्तों द्वारा उनका स्मरण करके जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त की जा सकती है। रामायण और महाभारत में भी माता दुर्गा की महिमा का वर्णन मिलता है, जहां वे अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। इस भजन के माध्यम से हम माता की चरणों में श्रद्धा व्यक्त करते हैं और अपनी समस्याओं का समाधान खोजते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। शेरावाली माता के जयकारे का जाप करने से मानसिक तनाव में कमी आती है और आंतरिक शांति की प्राप्ति होती है। यह प्रार्थना भक्तों को आत्मविश्वास और साहस देती है, जिससे वे अपने संकटों का सामना करते हैं। इसे नियमित रूप से करने से समस्त रुकावटें दूर होती हैं और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन का पाठ प्रात:काल या संध्या के समय करना विशेष लाभकारी होता है। पूजा स्थली पर दीया जलाना चाहिए और देवी को फूलों एवं मिठाई का भोग अर्पित करना चाहिए। पूजा के समय ध्यान का चित्त केंद्रित रखा जाए और भक्तिपूर्ण मन से माता का स्मरण किया जाए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन कब और किस अवसर पर गाया जाता है?

यह भजन मुख्य रूप से दुर्गा पूजा, नवरात्रि, और अन्य धार्मिक अवसरों पर गाया जाता है, जब भक्त माता दुर्गा की आराधना करते हैं।

शेरावाली माता की महिमा क्या है?

शेरावाली माता को शक्ति, सुरक्षा, और संजीवनी का प्रतीक माना जाता है। उनके प्रति श्रद्धा से भक्तों की सभी बाधाएं दूर होती हैं।

क्या इस भजन का गायन मानसिक शांति के लिए लाभदायक है?

हाँ, इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, सुख और संतोष प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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