Parvati Stotram

तू सुमिरन कर राधे राधे तेरे कष्ट सभी मिट जायेंगे (Tu sumiran kar raadhe raadhe tere Kasth sabhi mit jayenge Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

113 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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तू सुमिरन कर राधे राधे तेरे कष्ट सभी मिट जायेंगे (Tu sumiran kar raadhe raadhe tere Kasth sabhi mit jayenge Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

अपडेटेड तिथि: जनवरी 2025 | श्रेणी: कृष्ण भजन एवं संकीर्तन | पढ़ने का समय: 12 मिनट

सनातन धर्म और भक्ति परंपरा में श्री राधा-कृष्ण का नाम संकीर्तन समस्त दुखों का निवारण करने वाला परम औषधि माना गया है। प्रस्तुत पावन भजन "तू सुमिरन कर राधे राधे तेरे कष्ट सभी मिट जायेंगे" जीवात्मा को निराशा के अंधकार से निकालकर प्रेम और भक्ति के प्रकाश की ओर ले जाने वाला एक अत्यंत प्रेरणादायक दिव्य गीत है। कलियुग में नामस्मरण को ही भवसागर से तरने का एकमात्र सुलभ साधन बताया गया है, और जब यह नाम श्री राधारानी के चरणों से जुड़ जाता है, तो साधक के जीवन के समस्त संताप स्वतः ही शांत हो जाते हैं। इस लेख में हम इस भजन के संपूर्ण बोल, इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, भावार्थ और जीवन में इसके महत्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ स्थायी (मुखड़ा) ॥

तू सुमिरन कर राधे राधे, तेरे कष्ट सभी मिट जायेंगे,
राधे नाम की शक्ति से, सब भाग, तुम्हारे जागेंगे।
तू सुमिरन कर राधे राधे...

॥ अंतरा १ ॥

दुख की आंधी जब भी आए, मन को कभी न तू घबराए,
राधा नाम का दीप जलाकर, अंधकार सब दूर भगाए।
चरणों से लिपट जा जो उनके, सारे बंधन कट जाएंगे,
तू सुमिरन कर राधे राधे, तेरे कष्ट सभी मिट जायेंगे।

॥ अंतरा २ ॥

दुनिया वाले ठुकराएंगे, अपने भी मुंह मोड़ जाएंगे,
वृंदावन की कुंज गलिन में, सांवरिया तुझे अपनाएंगे।
राधे-राधे जो नित गाए, प्राण उसी के बच जाएंगे,
तू सुमिरन कर राधे राधे, तेरे कष्ट सभी मिट जायेंगे।

॥ अंतरा ३ ॥

प्रेम दीवानी ब्रज की रानी, सबकी सुनती कथा कहानी,
जो भी इनकी शरण में आया, उसकी हुई अजब जिंदगानी।
कृपा कटाक्ष जो हो जाए, भवसागर से तर जाएंगे,
तू सुमिरन कर राधे राधे, तेरे कष्ट सभी मिट जायेंगे।

॥ समापन / रिफ्रेन ॥

राधे राधे रट ले बन्दे, सारे पाप धुल जाएंगे,
तू सुमिरन कर राधे राधे, तेरे कष्ट सभी मिट जायेंगे।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल कुछ शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक साधना पद्धति है जो मानव मन को ईश्वरीय चेतना से जोड़ती है। इस भजन का प्रत्येक चरण जीवन के संघर्षों से जूझ रहे मनुष्य को एक नई दिशा और आशा प्रदान करता है। आइए इसका विस्तृत भावार्थ समझें:

मुखड़े का भाव:

भजन के मुखड़े में कवि या संत भक्त को संबोधित करते हुए कहते हैं कि हे मनुष्य! तू बाहरी दुनिया की चिंताओं को छोड़कर निरंतर श्री 'राधे-राधे' का स्मरण कर। ऐसा करने से तेरे जीवन के समस्त दैहिक, दैविक और भौतिक कष्ट स्वतः ही समाप्त हो जाएंगे। राधारानी का नाम इतनी शक्तिशाली है कि इसके स्मरण मात्र से सोई हुई तकदीर और भाग्य के द्वार खुल जाते हैं।

अंतरों का आध्यात्मिक अर्थ:

जीवन में जब दुखों और संकटों का तूफान (दुख की आंधी) आता है, तब मनुष्य का मन विचलित हो जाता है। ऐसे समय में धैर्य खोने के बजाय यदि वह राधा नाम रूपी दीप को अपने अंतर्मन में प्रज्वलित कर ले, तो निराशा का अंधकार हमेशा के लिए भाग जाता है। संसार का यह नियम है कि जब व्यक्ति विपत्ति में होता है, तो अपने भी मुंह मोड़ लेते हैं, परंतु वृंदावन बिहारी श्री कृष्ण और राधारानी की कृपा जिसे मिल जाती है, उसे इस संसार में किसी का भय नहीं रहता। राधारानी की करुणा इतनी अगाध है कि उनके एक मात्र 'कृपा कटाक्ष' (तिरछी नजर) से जीव इस भवसागर को आसानी से पार कर जाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • सर्वोच्च भक्ति का प्रतीक: यह भजन गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय और बृज की प्रेम लक्षणा भक्ति का जीवंत दर्शन कराता है, जहां भगवान से भी पहले उनके आल्हादिनी शक्ति श्री राधा रानी का नाम लिया जाता है।
  • मानसिक शांति और तनाव मुक्ति: कलियुग की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक अशांति और अवसाद से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए यह संकीर्तन किसी अचूक औषधि से कम नहीं है।
  • शरणागति का भाव: यह भजन सिखाता है कि अपनी योग्यताओं पर अहंकार करने के बजाय पूर्ण रूप से श्री राधा-कृष्ण के चरणों में समर्पित हो जाना चाहिए।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को गाने या सुनने के लिए किसी कठोर नियम की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि प्रेम और भक्ति के मार्ग में केवल भाव की प्रधानता होती है। फिर भी, इसे निम्नलिखित अवसरों और विधियों से करने पर विशेष लाभ मिलता है:

उपयुक्त समय (Best Timing)

ब्रह्म मूहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) या संध्या बेला में पूजा के समय इस भजन का गान मन को अत्यधिक शांति और ऊर्जा प्रदान करता है।

स्थान एवं वातावरण (Ambience)

घर के मंदिर में दीपक प्रज्वलित करके, या संध्या समय सत्संग और संकीर्तन के दौरान समूह में इस भजन का गायन अत्यंत आनंददायक होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
सुमिरन स्मरण करना, बार-बार नाम जपना ईश्वर के स्वरूप और नाम का निरंतर मानसिक जप
राधे श्री राधा रानी (वृंदावन की स्वामिनी) भगवान कृष्ण की आल्हादिनी शक्ति और करुणा की मूर्ति
कष्ट दुख, पीड़ा, संताप कर्मों के फल स्वरूप मिलने वाले मानसिक व शारीरिक क्लेश
कुंज गलिन वृंदावन के लता-कुंजों की गलियां दिव्य लीलाओं का गोपनीय और पावन स्थल
कृपा कटाक्ष प्रेम भरी तिरछी दृष्टि भक्त पर ईश्वर की अहेतुकी कृपा का बरसना

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तू सुमिरन कर राधे राधे तेरे कष्ट सभी मिट जायेंगे
आराध्य देवी-देवता श्री राधा रानी एवं भगवान श्री कृष्ण
संगीत शैली पारंपरिक संकीर्तन / बृज लोक भजन
भाषा सरल हिंदी / ब्रजभाषा मिश्रित
प्रमुख भाव शरणागति, भक्ति, विश्वास और करुणा
उपयोगी अवसर दैनिक पूजा, सत्संग, एकादशी, जन्माष्टमी, राधाष्टमी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी विपत्तियां और संकट क्यों न आएं, यदि मनुष्य निरंतर श्री राधा रानी के नाम का स्मरण करता रहे, तो उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उसे भगवान की शरण प्राप्त होती है।

हाँ, इस भजन को किसी भी समय, सुबह या शाम के वक्त, पूजा के दौरान या मानसिक तनाव के समय शांति पाने के लिए गाया या सुना जा सकता है। नामस्मरण के लिए कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं है।

राधा नाम के स्मरण से मन की चंचलता समाप्त होती है, अहंकार गलता है, और हृदय में परम शांति, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे कठिन परिस्थितियां भी सहज लगने लगती हैं।

यह भजन मुख्य रूप से गौड़ीय वैष्णव और पुष्टिमार्क जैसी ब्रज भक्ति परंपराओं से प्रेरित है, जहां राधा-कृष्ण की युग्म उपासना को मोक्ष का मार्ग माना गया है।

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संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

यह लेख पारंपरिक भक्ति ग्रंथों, संतों के वचनों और लोक परंपराओं के संदर्भ में पाठकों की आध्यात्मिक रुचि के लिए तैयार किया गया है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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