Parvati Stotram

तेरी शरण में आया मैं बाबा मेरी लाज रखना (tere sharan mein aaya main baaba meri laaj rakhna lyrics in hindi) - Bhaktilok

115 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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तेरी शरण में आया मैं बाबा मेरी लाज रखना - संपूर्ण परिचय एवं भक्ति भाव

सनातन संस्कृति और भक्ति परंपरा में संकीर्तन, स्मरण और शरणागति को मोक्ष का सुगम मार्ग बताया गया है। "तेरी शरण में आया मैं बाबा मेरी लाज रखना (tere sharan mein aaya main baaba meri laaj rakhna lyrics in hindi)" भजन ईश्वरीय करुणा और भक्त के अगाध विश्वास का एक अत्यंत पावन और भावपूर्ण प्रतीक है। जब जीवात्मा सांसारिक प्रपंचों, दुखों और चिंताओं से घिरकर चारों ओर से निराश हो जाती है, तब वह अपनी संपूर्ण श्रद्धा और अहंकार को त्यागकर एकमात्र परमात्मा के चरणों में शरण लेती है। इस भजन का प्रत्येक शब्द साधक के भीतर छिपे विरह, विनय और समर्पण के भाव को जागृत करता है। बाबा के दरबार में किसी भी भक्त की पुकार कभी अनसुनी नहीं जाती, और यही विश्वास इस भजन की मूल आत्मा है। चाहे संकट का समय हो या आनंद का अवसर, भगवान के चरणों में अर्पित यह प्रार्थना मनुष्य को मानसिक संबल और आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण बोल, उसका गहरा दार्शनिक अर्थ, गायन की विधि और जीवन पर पड़ने वाले उसके सकारात्मक प्रभावों का गहन विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics


स्थायी (मुखड़ा):

तेरी शरण में आया मैं बाबा मेरी लाज रखना,
बिगड़ी किस्मत बना देना, हर संकट से मुझे बचा लेना।

अंतरा 1:

दुनिया के ठुकराए हुओं को, तूने ही गले लगाया है,
जो भी तेरे द्वार पे आया, उसने अमृत पाया है।
मैं भी हूँ दर का भिखारी तेरे, मुझको भी सहारा देना,
तेरी शरण में आया मैं बाबा मेरी लाज रखना।

अंतरा 2:

माया के इस अंधकार में, रास्ता मुझे दिखलाना,
भटक ना जाए मन मेरा, चरण कमल से लगाना।
अपनी दया की छांव में बाबा, मुझको सदा बिठा लेना,
तेरी शरण में आया मैं बाबा मेरी लाज रखना।

अंतरा 3:

सुख-दुख जीवन के पहिये हैं, इनसे मैं घबराऊँ क्यों?
जब सिर पर तेरा हाथ है बाबा, फिर मैं डर जाऊँ क्यों?
जीवन की इस नैया को अब, तू ही पार लगा देना,
तेरी शरण में आया मैं बाबा मेरी लाज रखना।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक और परमात्मा के बीच के अनन्य संबंध को स्पष्ट करता है। 'तेरी शरण में आया मैं बाबा मेरी लाज रखना' पंक्ति में भक्त का अपनी दुर्बलताओं को स्वीकार करते हुए सर्वशक्तिमान ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण झलकता है। भक्त कहता है कि हे प्रभु! मैंने संसार के सारे सहारे छोड़कर केवल आपकी शरण ली है, अब मेरे मान-सम्मान और रक्षा का भार आपके हाथों में है।

अंतरा में यह भाव व्यक्त किया गया है कि ईश्वर कभी अपने भक्तों की उपेक्षा नहीं करते। संसार जिसे ठुकरा देता है, करुणामय प्रभु उसे अपनी बाहों में समेट लेते हैं। माया और मोह के इस संसार में मनुष्य का मन बार-बार विचलित होता है, ऐसे में केवल गुरु या इष्ट के चरण-कमल ही उसे स्थिर रख सकते हैं। साधक भगवान से प्रार्थना करता है कि जीवन रूपी भंवर में चाहे सुख आए या दुःख, वह अपने आराध्य का दामन कभी नहीं छोड़ेगा, क्योंकि उसे पूर्ण विश्वास है कि उसकी नाव को पार लगाने वाला केवल वही है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

भक्ति संगीत की यह रचना सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों जैसे 'शरणागति' (पूर्ण समर्पण) और 'विश्वास' पर आधारित है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने भी अर्जुन को यही उपदेश दिया है कि समस्त धर्मों का त्याग करके केवल मेरी शरण में आ जाओ, मैं तुम्हें सभी पापों और संकटों से मुक्त कर दूंगा। यह भजन उसी श्लोक का व्यावहारिक और काव्यात्मक रूप है। इसे किसी भी संकट के समय, दैनिक पूजा में या सामूहिक संकीर्तन के दौरान गाने से मन को असीम शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पवित्र भजन को गाने या सुनने के लिए किसी विशेष नियम की अनिवार्यता नहीं होती, क्योंकि सच्ची भक्ति भाव की भूखी होती है। फिर भी, प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में या संध्या बेला में दीपक प्रज्वलित करने के पश्चात इसका स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

  • दैनिक पूजा: सुबह या शाम की आरती के बाद एकांत में बैठकर इसका मानसिक या मौखिक जप करें।
  • सत्संग और जागरण: पारिवारिक आयोजनों, सुंदर कांड पाठ या मासिक कीर्तन में इसे सामूहिक रूप से गाया जा सकता है।
  • मानसिक अशांति के समय: जब भी जीवन में तनाव या असफलता महसूस हो, इसे गुनगुनाने से आत्मबल में वृद्धि होती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन किसी एक विशिष्ट रूप तक सीमित न होकर भगवान श्री कृष्ण, खाटू श्याम बाबा, भोलेनाथ (शिवजी) या हनुमान जी जैसे आराध्य देवों के प्रति समर्पित किया जाता है। 'बाबा' शब्द का प्रयोग सनातन संस्कृति में उन समस्त लोक-देवताओं और गुरुओं के लिए किया जाता है जो अपने भक्तों के संकटों का निवारण करने के लिए तत्पर रहते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

लोकप्रिय भक्ति परंपराओं में इस प्रकार के भजन पीढ़ियों से मौखिक और लिखित रूप में प्रवाहित होते रहे हैं। संतों और लोक कवियों ने आम जनमानस की भाषा में ईश्वर तक अपनी पुकार पहुँचाने के लिए ऐसे भजनों की रचना की है ताकि साधारण से साधारण व्यक्ति भी संगीत के माध्यम से प्रभु से जुड़ सके।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहित हिंदी (खड़ी बोली एवं ब्रज-अवधि के प्रभावयुक्त) है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे 'चरण कमल' और 'जीवन की नैया'। सरल शब्दावली होने के कारण इसे बच्चे, वृद्ध और युवा सभी आसानी से समझ और गा सकते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि मनुष्य को अपने पुरुषार्थ के साथ-साथ ईश्वरीय कृपा पर अटूट विश्वास रखना चाहिए। अहंकार का त्याग ही मोक्ष और शांति का द्वार है। जब हम अपनी समस्याओं का भार स्वयं उठाने के बजाय प्रभु को सौंप देते हैं, तो जीवन का मार्ग स्वतः सरल हो जाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
शरण आश्रय या संरक्षण प्रभु के चरणों में पूर्ण समर्पण
लाज रखना सम्मान की रक्षा करना भक्त के विश्वास और प्रतिष्ठा को बचाना
माया मोह-जाल, भ्रम संसार की असत्य और आकर्षित करने वाली शक्ति
चरण कमल कमल रूपी चरण भगवान के पवित्र और कोमल चरण

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"तेरी शरण में आया मैं बाबा मेरी लाज रखना..." - इस प्रारंभिक पंक्ति में साधक अपनी लघुता और भगवान की महानता को स्वीकार करते हुए उनकी छत्रछाया मांगता है।

"दुनिया के ठुकराए हुओं को..." - समाज और परिस्थितियों से हारे हुए मनुष्यों के लिए ईश्वर ही एकमात्र अंतिम आशा और सत्य ठिकाना हैं।

"माया के इस अंधकार में..." - अज्ञानता और मोह के अंधेरे में भटकती हुई बुद्धि को केवल सद्गुरु या भगवान का प्रकाश ही सही राह दिखा सकता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भाव को पुष्ट करने वाला अत्यंत प्रसिद्ध श्लोक:

"अनन्याశ్चिन्तयन्तो मां यो जनाः पर्युपासते।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥"

(अर्थात्: जो भक्त अन्य किसी का चिंतन न करते हुए निरंतर मेरा स्मरण करते हैं, उनके योग और क्षेम (प्राप्त की रक्षा और अभाव की पूर्ति) का उत्तरदायित्व मैं स्वयं उठाता हूँ।)

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तेरी शरण में आया मैं बाबा मेरी लाज रखना
आराध्य देव श्री कृष्ण / खाटू श्याम बाबा / इष्ट देव
श्रेणी भक्ति भजन / संकीर्तन / शरणागति पद
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-प्रभावित लोक भाषा
मुख्य भाव समर्पण, विनय, करुणा और विश्वास
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, सत्संग, एकादशी, संकट निवारण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण, खाटू श्याम बाबा और अपने इष्टदेव के प्रति अनन्य भक्ति और समर्पण भाव व्यक्त करने के लिए गाया जाता है।

इस भजन का मुख्य संदेश 'शरणागति' है यानी जीवन के हर सुख-दुःख में पूर्ण विश्वास के साथ परमात्मा की शरण में रहना और उन पर अटूट भरोसा रखना।

हाँ, इसे आप घर पर पूजा के समय, एकांत में या अपने परिवार के साथ किसी भी समय श्रद्धापूर्वक गा सकते हैं।

भगवान के गुणों और नामों का संकीर्तन करने से मस्तिष्क में सकारात्मक हार्मोन्स का संचार होता है और चिंता, भय व तनाव दूर होते हैं।

इसके लिए कोई कठोर नियम नहीं है, बस मन में पवित्रता, स्वच्छता और प्रभु के प्रति सच्चा प्रेम होना आवश्यक है।

शरण जाने का अर्थ अहंकार का समर्पण करना है। जब मनुष्य अहंकार छोड़कर प्रभु की शरण लेता है, तो उसकी रक्षा का दायित्व स्वयं ईश्वर संभालते हैं।

अवश्य! बच्चों में संस्कार और भगवान के प्रति आस्था विकसित करने के लिए यह भजन अत्यंत सरल और उपयुक्त है।

भजन सुनने या गाने से अंतःकरण शुद्ध होता है, नैतिक मूल्य मजबूत होते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने की शक्ति मिलती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भक्तालोक (Bhaktilok.in) के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन ग्रंथों, पारंपरिक संकीर्तन परंपराओं और दार्शनिक दृष्टिकोण के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध, प्रामाणिक और प्रेरणादायी भक्ति सामग्री प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता - गीताप्रेस गोरखपुर
  • सनातन भक्ति साहित्य एवं लोक संकीर्तन संग्रह
  • पारंपरिक संत वाणी और शरणागति सिद्धांत

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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