Shyam Bhajan

ना गोर का ना काले का घनश्याम मुरली वाले का मैं लाडला खाटू वाले का लिरिक्स || Na gor ka na kaale ghanshayam murli bale ka main laadala khaatoo vaale ka lyrics in hindi || Bhaktilok

216 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम भजन | Khatu Shyam Bhajan

ना गोर का ना काले का घनश्याम मुरली वाले का मैं लाडला खाटू वाले का लिरिक्स

अपडेटेड: जनवरी 2025 | श्रेणी: श्याम भजन, खाटू श्याम जी के गीत | पढ़ने का समय: 10 मिनट


खाटू श्याम बाबा के दरबार में जब भक्त अपनी हाजिरी लगाते हैं, तो उनकी वाणी से निकलने वाला प्रत्येक शब्द केवल एक भजन नहीं बल्कि अटूट विश्वास और समर्पण का जीवंत प्रतीक बन जाता है। ऐसा ही एक अत्यंत लोकप्रिय, कर्णप्रिय और भाव विभोर कर देने वाला भजन है — "ना गोर का ना काले का घनश्याम मुरली वाले का मैं लाडला खाटू वाले का"। यह भजन बाबा श्याम और उनके भक्तों के बीच के उस आत्मीय, अनूठे और वात्सल्यपूर्ण रिश्ते को परिभाषित करता है जहाँ रंग-रूप, जाति-पाति या दुनियादारी का कोई भेद नहीं रह जाता, बल्कि केवल भक्त की पुकार और खाटू नरेश की कृपालु दृष्टि ही सर्वोपरि होती है।

राजस्थानी लोक धुनों के आंचल से निकला यह संकीर्तन पद आज देश-विदेश के हर श्याम दरबार, फाल्गुनी मेले, एकादशी जागरण और घर-घर में होने वाले सत्संगों की शान बन चुका है। इसे गाते समय भक्तों के नेत्रों में आनंद के अश्रु और मुख पर मंद मुस्कान आ जाती है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम आपके लिए लाए हैं इस पावन भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), उसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि और बाबा श्याम की कृपा से जुड़े अनेक अनमोल प्रसंग। यदि आप बाबा श्याम के अनन्य भक्त हैं, तो हमारे अन्य लोकप्रिय श्याम भजनों का भी अवश्य स्मरण करें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थायी / मुखड़ा
ना गोर का ना काले का,
घनश्याम मुरली वाले का,
मैं लाडला खाटू वाले का!

प्रथम अंतरा
भारत में राजस्थान है, अरे जयपुर जिसकी शान है,
जयपुर के पास ही रींगस है, रींगस से उठता निशान है,
भगतो के पालनहारे का,
घनश्याम मुरली वाले का,
मैं लाडला खाटू वाले का!

द्वितीय अंतरा
दुनिया में निराली शान है, कहलाता बाबा श्याम है,
कोई फूल चढ़ा ले जाता है, कोई छप्पन भोग लगाता है,
सब को खुश रखने वाले का,
घनश्याम मुरली वाले का,
मैं लाडला खाटू वाले का!

तृतीय अंतरा
जो मैंने कभी न सोचा था, यहाँ कोशिश से न पहुँचा था,
मेरे श्याम ने मुझको बचा लिया, मुझे मंजिल तक पहुँचा दिया,
कन्हैया मुरली वाले का,
घनश्याम मुरली वाले का,
मैं लाडला खाटू वाले का!

॥ बोलो श्री खाटू श्याम बाबा की जय ॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक भक्त के उस सर्वोच्च आत्म-विश्वास का उद्घोष है जो उसने अपने आराध्य श्री खाटू श्याम (कहा जाए तो द्वापर युग के बाबरीक और कलयुग के हारे के सहारे बाबा श्याम) की छत्रछाया में प्राप्त किया है। आइए इस भजन की पंक्तियों के मर्म को विस्तार से समझें:

मुखड़े का भाव:

"ना गोर का ना काले का, घनश्याम मुरली वाले का, मैं लाडला खाटू वाले का।" — इस प्रारंभिक पंक्ति में भगवान और भक्त के बीच के निश्चल प्रेम को दर्शाया गया है। सांसारिक लोग रंग-रूप, गोरेपन या कालेपन, जाति और कुल के आधार पर भेदभाव करते हैं, परंतु परमात्मा इन सबसे परे हैं। वे केवल प्रेम और समर्पण के भूखे हैं। भक्त गर्व से कहता है कि मैं किसी रूप-रंग के अहंकार में नहीं बंधा, बल्कि मैं तो उस सांवले मुरली वाले, खाटू नरेश का सबसे प्यारा (लाडला) पुत्र या भक्त हूँ।

प्रथम अंतरे का भाव:

"भारत में राजस्थान है... रींगस से उठता निशान है..." — यह पंक्ति खाटू श्याम के धाम की भौगोलिक और आध्यात्मिक यात्रा का वर्णन करती है। भारत के पावन राज्य राजस्थान में स्थित जयपुर के समीप रींगस वह पवित्र भूमि है जहाँ से भक्त निशान (झंडा) उठाकर पैदल खाटू धाम की ओर प्रस्थान करते हैं। यह निशान उस विजय और निष्ठा का प्रतीक है जो भक्त बाबा श्याम के चरणों में समर्पित करता है।

द्वितीय अंतरे का भाव:

"दुनिया में निराली शान है कहलाता बाबा श्याम है..." — दुनिया में राजा-महाराजाओं और धनवानों की शान होती है, लेकिन खाटू वाले की शान सबसे निराली है। कोई भक्त उन्हें प्रेम से फूल अर्पित करता है तो कोई छप्पन प्रकार के भोग लगाता है, किंतु बाबा अपने हर एक भक्त की छोटी-सी भावना से प्रसन्न होकर सब पर अपनी कृपा बरसाते हैं और सभी को संतुष्ट रखते हैं।

तृतीय अंतरे का भाव:

"जो मैंने कभी न सोचा था... मुझे मंजिल तक पहुँचा दिया..." — यह पंक्ति हर उस भक्त के जीवन की सच्चाई है जिसने संकट के समय श्याम बाबा को पुकारा है। जब इंसान अपनी सारी कोशिशों के बाद हार जाता है और जो उसने कभी कल्पना भी नहीं की होती, वैसी सफलता या संकट से मुक्ति बाबा की कृपा से मिल जाती है, तब भक्त श्रद्धा से विभोर होकर कहता है कि मेरे कन्हैया ने मुझे गिरने नहीं दिया बल्कि सही मंजिल तक पहुँचा दिया। इसके साथ ही आप खाटू श्याम जी के अन्य लोकप्रिय संकीर्तन व आरती पढ़कर अपनी साधना को और मजबूत कर सकते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

भक्ति का अनूठा रस

यह भजन 'वात्सल्य' और 'सख्य' भाव का अद्भुत मिश्रण है। इसमें भक्त भगवान को अपना सर्वस्व और अभिभावক दोनों रूप में देखता है।

खाटू धाम की महिमा

रींगस से खाटू तक की पदयात्रा, निशान और बाबा श्याम के दरबार की भव्यता को यह भजन अत्यंत सरल और जीवंत शब्दों में पिरोता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस आनंदित करने वाले भजन को आप निम्नलिखित अवसरों पर गा या सुन सकते हैं:

  • खाटू श्याम जागरण एवं संध्या कीर्तन में: फाल्गुन मास के मेलों और एकादशी-द्वादशी के विशेष आयोजनों पर।
  • दैनिक पूजा के समय: घर के मंदिर में सुबह या संध्या आरती के पश्चात।
  • यात्रा के दौरान: जब आप रींगस से खाटू धाम की पदयात्रा कर रहे हों।

इसे हारमोनियम, ढोलक और मंजीरे की थाप के साथ समवेत स्वर में गाने से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और ऊर्जावान हो जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं पृष्ठभूमि | Deity & Background

श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक): महाभारत काल के महान योद्धा घटोत्कच के पुत्र और वीर बर्बरीक को भगवान श्रीकृष्ण ने कलयुग में अपने ही नाम 'श्याम' से पूजे जाने का वरदान दिया था। जो व्यक्ति हार जाता है और दुनिया से निराश हो जाता है, उसे 'हारे का सहारा' बनकर बाबा श्याम थामते हैं।

यह भजन लोक परंपरा और समकालीन श्याम भक्तों की रचनाधर्मिता का परिणाम है, जिसे अनगिनत लोक कलाकारों और गायकों ने अपनी मधुर आवाज़ से सींचा है। यह हर उस व्यक्ति की जुबान पर रहता है जिसे बाबा श्याम पर अटूट भरोसा है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक / सांस्कृतिक संदर्भ
लाडला बहुत प्यारा, दुलारा भक्त और भगवान के बीच वात्सल्यपूर्ण प्रेम संबंध
रींगस राजस्थान का एक कस्बा खाटू धाम जाने वाले यात्रियों का प्रमुख रेलवे/पदयात्रा बिंदु
न निशान ध्वज, झंडा खाटू श्याम को अर्पित किया जाने वाला पवित्र त्रिशूल-सुदर्शन चिन्हित निशान
छप्पन भोग 56 प्रकार के पकवान भगवान को अर्पित किए जाने वाले विशेष व्यंजनों की थाली

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम ना गोर का ना काले का घनश्याम मुरली वाले का
आराध्य देव श्री खाटू श्याम जी (बाबा श्याम / बर्बरीक)
भाषा सरल हिंदी / राजस्थानी लोक शैली
विषय / थीम भक्ति, शरणागति, वात्सल्य और श्याम कृपा
मुख्य भाव समर्पण और अटूट विश्वास
उपयुक्त अवसर खाटू श्याम जागरण, एकादशी सत्संग, फाल्गुन मेला

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन के मुख्य आराध्य कलयुग के अवतारी हारे के सहारे श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक) हैं।

रींगस राजस्थान का वह स्थान है जहाँ से भक्त निशान (झंडा) लेकर खाटू धाम के लिए पैदल पदयात्रा शुरू करते हैं। इसीलिए श्याम भक्त भजन में रींगस का विशेष रूप से स्मरण करते हैं।

हाँ, इस भजन को सुबह या संध्या के समय घर की पूजा में या किसी भी सत्संग के दौरान पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

पौराणिक कथाओं और भक्तों के अनुभवों के अनुसार, जो व्यक्ति दुनिया से हार जाता है और हर तरफ से निराश हो जाता है, बाबा श्याम उसकी पुकार सबसे पहले सुनते हैं और उसे संभालते हैं।

फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को बाबा श्याम का जन्मोत्सव मनाया जाता है, जिस कारण इस पावन मास में खाटू धाम में दुनिया भर से लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख पारंपरिक श्याम भजन संस्कृति, लोक साहित्य और भक्तों के अनुभवों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इस पृष्ठ पर दी गई समस्त जानकारी और भजन के बोल शुद्धता के साथ प्रस्तुत किए गए हैं ताकि पाठकों को पूर्ण भक्ति रस की प्राप्ति हो सके।


स्रोत एवं संदर्भ:

  • श्री खाटू श्याम जी लोक कथाएं एवं संकीर्तन संग्रह
  • राजस्थानी लोकगीत एवं श्याम भजन परंपरा

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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