🙏 मेरी बाँह पकड़ लो श्यामा – मुझे अपना बना लो श्यामा
(Meri Baah Pakad Lo Shyama – Mujhe Apna Bana Lo Shyama) – राधा-कृष्ण भजन
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
मेरी बाँह पकड़ लो श्यामा,
मुझे अपना बना लो श्यामा,
हाँ ऊंचो तेरो बरसाना,
मेरे बस में नहीं है आना,
मेरी बांह पकड लो श्यामा,
मुझे अपना बना लो श्यामा
जो तीन लोक के स्वामी,
वो तो करते तेरी गुलामी,
हमें उनसे भी मिलवाना,
हमें उनसे भी मिलवाना,
मेरी बांह पकड लो श्यामा,
मुझे अपना बना लो श्यामा
करुणामई नाम तुम्हारा,
हमको तो तेरा सहारा,
करुणा बरसा दो श्यामा,
करुणा बरसा दो श्यामा,
मेरी बांह पकड लो श्यामा,
मुझे अपना बना लो श्यामा
मैं तो जन्म जन्म से भटकी,
मेरी नाव भवर में अटकी,
अब दर दर ना भटकाना,
अब दर दर ना भटकाना,
मेरी बांह पकड लो श्यामा,
मुझे अपना बना लो श्यामा
मेरी डगमग डोले नैया,
राधे बन जाओ मेरी खिवैया,
मेरी नैया पार लगाना,
मेरी नैया पार लगाना,
मेरी बांह पकड लो श्यामा,
मुझे अपना बना लो श्यामा
मेरी बाँह पकड़ लो श्यामा,
मुझे अपना बना लो श्यामा,
हाँ ऊंचो तेरो बरसाना,
मेरे बस में नहीं है आना,
मेरी बांह पकड लो श्यामा,
मुझे अपना बना लो श्यामा
🎤 गायक : अभिषेक तिवारी
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह मार्मिक भजन श्यामा (राधा) को संबोधित है, जहाँ भक्त उनकी शरण में आकर बाँह पकड़ने और अपना बनाने की प्रार्थना करता है। “मेरी बाँह पकड़ लो श्यामा, मुझे अपना बना लो श्यामा” – भक्त राधा से हाथ पकड़ने की विनती करता है। वह कहता है कि बरसाना (राधा की जन्मभूमि) ऊँचा है, मेरे बस में वहाँ आना नहीं है – अर्थात राधा के दर्शन और उनकी कृपा पाना कठिन है, इसलिए वे स्वयं आगे बढ़कर बाँह पकड़ें।
पहले अंतरे में – जो तीनों लोकों के स्वामी (ब्रह्मा, विष्णु, शिव या अन्य देवता) हैं, वे भी राधा की गुलामी करते हैं। भक्त कहता है – हमें उन देवताओं से भी मिलवा दो (अर्थात उनके समान तुम्हारी कृपा प्राप्त कराओ)।
दूसरे अंतरे में – राधा का नाम “करुणामई” (करुणा से भरपूर) है। भक्त का एकमात्र सहारा राधा है। वह करुणा बरसाने की प्रार्थना करता है।
तीसरे अंतरे में – भक्त कहता है कि वह जन्म-जन्म से भटक रहा है, उसकी नाव भँवर में अटकी है। अब उसे दर-दर मत भटकाओ।
चौथे अंतरे में – नैया (नाव) डगमगा रही है। वह राधा से प्रार्थना करता है – हे राधे, तुम मेरी खिवैया (नाव चलाने वाली) बन जाओ और मेरी नैया पार लगा दो।
यह भजन राधा शरणागति का अद्भुत उदाहरण है – भक्त राधा को ही अपना एकमात्र सहारा मानता है और उनसे जीवन-रूपी नाव पार लगाने की प्रार्थना करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
श्यामा संबोधन: “श्यामा” राधा का एक नाम है, जो उनके श्याम (गहरे) रंग का द्योतक है। यह भजन राधा को केन्द्र में रखकर रचा गया है, जो राधा-कृष्ण भक्ति में उनके महत्व को दर्शाता है।
बरसाना का उल्लेख: बरसाना राधा की जन्मभूमि है। “ऊंचो तेरो बरसाना” का अर्थ है कि राधा का धाम दुर्लभ और दिव्य है।
नैया पार लगाने की प्रार्थना: यह संकटमोचन और उद्धार का भाव है – राधा से नाव पार लगाने की विनती।
💖 राधा शरणागति का अद्भुत भाव
🎯 संदेश
राधा ही सच्ची शरण हैं। उनकी करुणा से ही जीवन की नाव पार होती है। जो उनकी बाँह पकड़ लेता है, वह भवसागर से तर जाता है।
✨ आस्था का प्रतीक
अभिषेक तिवारी के स्वर में यह भजन भक्तों के हृदय में राधा के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव जगाता है। “मेरी बाँह पकड़ लो श्यामा” की पंक्ति बार-बार दोहराई जाती है, जो भक्त की व्याकुलता को दर्शाती है।
🙏 राधे-राधे ।। जय श्री राधा रानी ।। मेरी बाँह पकड़ लो श्यामा ।।