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Krishna Bhajan

मेरी बाँह पकड़ लो श्यामा (अभिषेक तिवारी) भजन लिरिक्स | Meri Baah Pakad Lo Shyama Abhishek Tiwari Bhajan Lyrics

2,967 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 मेरी बाँह पकड़ लो श्यामा – मुझे अपना बना लो श्यामा

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Meri Baah Pakad Lo Shyama – Mujhe Apna Bana Lo Shyama) – राधा-कृष्ण भजन

🎤 गायक: अभिषेक तिवारी | श्यामा (राधा) से बाँह पकड़ने और अपनाने की प्रार्थना

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: अभिषेक तिवारी
🏷️ श्रेणी: राधा-कृष्ण भजन / प्रार्थना
🎶 भाव: शरणागति, करुणा, समर्पण
📀 विशेषता: श्यामा (राधा) को संबोधित यह भजन भक्त की व्याकुलता और राधा के चरणों में शरण लेने की प्रार्थना है

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

मेरी बाँह पकड़ लो श्यामा,
मुझे अपना बना लो श्यामा,
हाँ ऊंचो तेरो बरसाना,
मेरे बस में नहीं है आना,
मेरी बांह पकड लो श्यामा,
मुझे अपना बना लो श्यामा

जो तीन लोक के स्वामी,
वो तो करते तेरी गुलामी,
हमें उनसे भी मिलवाना,
हमें उनसे भी मिलवाना,
मेरी बांह पकड लो श्यामा,
मुझे अपना बना लो श्यामा

करुणामई नाम तुम्हारा,
हमको तो तेरा सहारा,
करुणा बरसा दो श्यामा,
करुणा बरसा दो श्यामा,
मेरी बांह पकड लो श्यामा,
मुझे अपना बना लो श्यामा

मैं तो जन्म जन्म से भटकी,
मेरी नाव भवर में अटकी,
अब दर दर ना भटकाना,
अब दर दर ना भटकाना,
मेरी बांह पकड लो श्यामा,
मुझे अपना बना लो श्यामा

मेरी डगमग डोले नैया,
राधे बन जाओ मेरी खिवैया,
मेरी नैया पार लगाना,
मेरी नैया पार लगाना,
मेरी बांह पकड लो श्यामा,
मुझे अपना बना लो श्यामा

मेरी बाँह पकड़ लो श्यामा,
मुझे अपना बना लो श्यामा,
हाँ ऊंचो तेरो बरसाना,
मेरे बस में नहीं है आना,
मेरी बांह पकड लो श्यामा,
मुझे अपना बना लो श्यामा

🎤 गायक : अभिषेक तिवारी

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह मार्मिक भजन श्यामा (राधा) को संबोधित है, जहाँ भक्त उनकी शरण में आकर बाँह पकड़ने और अपना बनाने की प्रार्थना करता है। “मेरी बाँह पकड़ लो श्यामा, मुझे अपना बना लो श्यामा” – भक्त राधा से हाथ पकड़ने की विनती करता है। वह कहता है कि बरसाना (राधा की जन्मभूमि) ऊँचा है, मेरे बस में वहाँ आना नहीं है – अर्थात राधा के दर्शन और उनकी कृपा पाना कठिन है, इसलिए वे स्वयं आगे बढ़कर बाँह पकड़ें।

पहले अंतरे में – जो तीनों लोकों के स्वामी (ब्रह्मा, विष्णु, शिव या अन्य देवता) हैं, वे भी राधा की गुलामी करते हैं। भक्त कहता है – हमें उन देवताओं से भी मिलवा दो (अर्थात उनके समान तुम्हारी कृपा प्राप्त कराओ)।

दूसरे अंतरे में – राधा का नाम “करुणामई” (करुणा से भरपूर) है। भक्त का एकमात्र सहारा राधा है। वह करुणा बरसाने की प्रार्थना करता है।

तीसरे अंतरे में – भक्त कहता है कि वह जन्म-जन्म से भटक रहा है, उसकी नाव भँवर में अटकी है। अब उसे दर-दर मत भटकाओ।

चौथे अंतरे में – नैया (नाव) डगमगा रही है। वह राधा से प्रार्थना करता है – हे राधे, तुम मेरी खिवैया (नाव चलाने वाली) बन जाओ और मेरी नैया पार लगा दो।

यह भजन राधा शरणागति का अद्भुत उदाहरण है – भक्त राधा को ही अपना एकमात्र सहारा मानता है और उनसे जीवन-रूपी नाव पार लगाने की प्रार्थना करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

श्यामा संबोधन: “श्यामा” राधा का एक नाम है, जो उनके श्याम (गहरे) रंग का द्योतक है। यह भजन राधा को केन्द्र में रखकर रचा गया है, जो राधा-कृष्ण भक्ति में उनके महत्व को दर्शाता है।

बरसाना का उल्लेख: बरसाना राधा की जन्मभूमि है। “ऊंचो तेरो बरसाना” का अर्थ है कि राधा का धाम दुर्लभ और दिव्य है।

नैया पार लगाने की प्रार्थना: यह संकटमोचन और उद्धार का भाव है – राधा से नाव पार लगाने की विनती।

💖 राधा शरणागति का अद्भुत भाव

🎯 संदेश

राधा ही सच्ची शरण हैं। उनकी करुणा से ही जीवन की नाव पार होती है। जो उनकी बाँह पकड़ लेता है, वह भवसागर से तर जाता है।

✨ आस्था का प्रतीक

अभिषेक तिवारी के स्वर में यह भजन भक्तों के हृदय में राधा के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव जगाता है। “मेरी बाँह पकड़ लो श्यामा” की पंक्ति बार-बार दोहराई जाती है, जो भक्त की व्याकुलता को दर्शाती है।

🙏 राधे-राधे ।। जय श्री राधा रानी ।। मेरी बाँह पकड़ लो श्यामा ।।

॥ इति अभिषेक तिवारी कृत भजनम् ॥
॥ मेरी बाँह पकड़ लो श्यामा – मुझे अपना बना लो श्यामा – मेरी नैया पार लगाना ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "मेरी बाँह पकड़ लो श्यामा (अभिषेक तिवारी) भजन लिरिक्स | Meri Baah Pakad Lo Shyama Abhishek Tiwari Bhajan Lyrics" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

श्रेणियां: Krishna Bhajan khatu shayam bhajan

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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