भक्तिलोक के इस पावन मंच पर आपका हार्दिक स्वागत है। सनातन धर्म की महान परंपरा में जब भी संकट, भय, संकटमोचन और अनन्य भक्तियोग की बात आती है, तो सबसे पहले हनुमान जी का स्मरण होता है। "दुनिया में देव हजारों हैं, बजरंग बली का क्या कहना" यह अत्यंत लोकप्रिय, कर्णप्रिय और आत्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत भजन है जो भगवान हनुमान की असीम कृपा, वीरता, करुणा और शरणागति का गुणगान करता है। इस लेख में हम इस अमर भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, गायन की महिमा और बजरंग बली से जुड़ी भक्ति परंपराओं का गहन अध्ययन करेंगे। कलयुग के जीवंत देवता, महावीर हनुमान के चरणों में समर्पित यह संकीर्तन साधक के मन से सारे भय और विकारों को दूर कर देता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मुखाड़ा (Refrain)
दुनिया में देव हजारों हैं, बजरंग बली का क्या कहना!
संकटमोचन नाम तुम्हारा, जग में डंका बज रहा!
अंतररा 1
राम नाम के तुम हो प्यारे, सीता मैया के दुलारे,
अंजनि पुत्र पवनसुत कहलाए, संकट सारे पल में टारे।
बाल समय जब रवि को भक्खा, तीन लोक में अंधेरा छाया,
देव सभी घबराए ऐसे, तुमने रूप विकराल दिखाया!
तेरी महिमा का क्या कहना, बजरंग बली का क्या कहना!
अंतररा 2
लंका को पल में जरावै, सीत-सुधि प्रभु को लावै,
लक्ष्मण जी के प्राण बचाए, संजीवनी बूटी ले आवै।
अक्षय कुमार का मान गिराया, रावण का अभिमान मिटाया,
रामदूत बनकर तुमने तो, जग में यश अपार पाया!
तेरी शक्ति का क्या कहना, बजरंग बली का क्या कहना!
अंतररा 3
भूत पिशाच निकट नहीं आवै, महावीर जब नाम सुनावै,
नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा!
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, जानकी माता ने वर दीन्हा,
जो भी तेरे शरण में आया, तुमने उसको अपना कीन्हा!
तेरे चरणों का क्या कहना, बजरंग बली का क्या कहना!
अंतिम पंक्ति (Refrain)
दुनिया में देव हजारों हैं, बजरंग बली का क्या कहना!
संकटमोचन नाम तुम्हारा, जग में डंका बज रहा!
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन सनातन धर्म की उस महान मान्यता को समर्पित है जहाँ भगवान हनुमान को 'संकटमोचन' और 'अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता' के रूप में पूजा जाता है। भजन का मुख्य भाव यह है कि इस संसार में अनेकों देवी-देवता पूजे जाते हैं, परंतु भगवान हनुमान की कृपा का स्वरूप अद्वितीय और अत्यंत सुलभ है। 'दुनिया में देव हजारों हैं, बजरंग बली का क्या कहना' पंक्ति के माध्यम से रचयिता यह स्पष्ट करते हैं कि यद्यपि सभी देवता अपनी-अपनी शक्तियों से पूजनीय हैं, किंतु हनुमान जी की त्वरित कृपा और भक्तों के प्रति उनका वात्सल्य अतुलनीय है।
भजन के अंतरा में उनके बाल्यकाल के सूर्य निगलने की लीला, लंका दहन, संजीवनी बूटी लाने और लक्ष्मण जी के प्राण बचाने जैसी महागाथाओं का स्मरण किया गया है। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि जब भक्त पर कोई संकट आता है, तो महावीर हनुमान बिना किसी संकोच के उसकी रक्षा के लिए दौड़े चले आते हैं। हनुमान चालीसा के प्रसिद्ध मंत्र "भूत पिशाच निकट नहीं आवै, महावीर जब नाम सुनावै" का भाव भी इस भजन में पूरी गहराई से समाहित है। यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि साधक के लिए भयमुक्ति और आत्मविश्वास का एक अचूक मंत्र है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता, लयबद्धता और जन-जन के मन में बस जाने वाली शैली है। हनुमान भक्ति परंपरा में संकीर्तन का विशेष स्थान रहा है। जब भक्त इस भजन को गाते हैं, तो उनके भीतर एक अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हनुमान जी को कलयुग के जागृत देवता माना गया है, जो आज भी अपने भक्तों की पुकार सुनकर उनकी सहायता के लिए उपस्थित होते हैं। इस भजन का नियमित श्रवण और गायन मन की चंचलता को शांत करता है और जीवन के हर क्षेत्र में विजयश्री का आशीर्वाद प्रदान करता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
भजन गायन के लिए कोई कठोर नियम नहीं होते, परंतु यदि इसे विधि-विधान और शुद्ध भाव के साथ किया जाए तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है:
- समय: प्रातः काल स्नान के पश्चात अथवा संध्या बेला में हनुमान जी के समक्ष दीपक प्रज्वलित करके इस भजन का गान करना अत्यंत फलदायी होता है।
- विशेष अवसर: मंगलवार और शनिवार के दिन, हनुमान जयंती, दीपावली, या किसी भी बड़े धार्मिक अनुष्ठान व सुंदरकांड पाठ के दौरान इस भजन को विशेष रूप से गाया जाता है।
- विधि: लाल आसन पर बैठकर, सामने बजरंग बली का चित्र या विग्रह रखकर, मन में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ इस संकीर्तन में भाग लें।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के केंद्र में सर्वशक्तिमान भगवान श्री हनुमान (बजरंग बली) हैं, जिन्हें पवनसुत, अंजनिपुत्र, संकटमोचन, मारुति नंदन और रुद्र अवतार भी कहा जाता है। हनुमान जी भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त और सेवक हैं। इस भजन में माता सीता, भगवान श्रीराम और माता अंजनि का भी पवित्र स्मरण किया गया है। संत परंपरा में तुलसीदास जी से लेकर आधुनिक लोक कवियों तक, सभी ने हनुमान जी की महिमा का गान किया है। हनुमान जी की आराधना से भगवान श्रीराम की कृपा स्वतः ही प्राप्त हो जाती है, जैसा कि तुलसीदास जी के श्री हनुमान चालीसा में वर्णित है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
लोक संस्कृति और पारंपरिक भक्ति संगीत की धारा से उपजा यह भजन भारत के गाँवों से लेकर महानगरों के बड़े मंदिरों और सत्संगों तक गूंजता रहता है। इसकी रचना लोक-कवियों द्वारा उस भाव से की गई है जहाँ आम जनमानस अपनी भाषा में अपने इष्ट देव के प्रति प्रेम व्यक्त कर सके। इसमें शास्त्रीय नियमों की जटिलता के बजाय शुद्ध भक्ति रस और समर्पण की प्रधानता है, जो सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन सरल हिंदी, ब्रज और अवधी मिश्रित लोक भाषा में रचित है, जिसे भारत का हर सामान्य नागरिक आसानी से समझ और गा सकता है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जैसे "संकटमोचन नाम तुम्हारा, जग में डंका बज रहा!"। इसकी लय तीव्र और उत्साहवर्धक है, जो श्रोताओं को झूमने और ताली बजाकर संकीर्तन करने के लिए प्रेरित करती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें जीवन के कठिन से कठिन समय में भी धैर्य, साहस और ईश्वर पर अटूट विश्वास रखने की सीख देता है। जिस प्रकार हनुमान जी ने समुद्र लांघकर असंभव कार्य को संभव कर दिखाया, उसी प्रकार मनुष्य यदि अपने आत्मविश्वास और प्रभु स्मरण को मजबूत रखे, तो वह जीवन की हर बाधा को पार कर सकता है। यह भजन हमें अहंकार त्यागकर शरणागति का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है।
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| संकटमोचन | संकटों को दूर करने वाला | भक्तों के सभी प्रकार के भौतिक और आध्यात्मिक दुखों का निवारण करने वाले हनुमान जी |
| पवनसुत | वायु देवता के पुत्र | हनुमान जी का आध्यात्मिक और दिव्य जन्म जो पवन देव के आशीर्वाद से हुआ |
| अष्ट सिद्धि नौ निधि | आठ प्रकार की सिद्धियां और नौ प्रकार की निधियां | माता सीता द्वारा हनुमान जी को दिए गए समस्त अलौकिक शक्तियों के वरदान |
| डंका बज रहा | यश और प्रभाव चारों ओर फैलना | संसार भर में हनुमान जी की महिमा और शक्ति की सर्वव्यापकता |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"दुनिया में देव हजारों हैं, बजरंग बली का क्या कहना!" - इस पंक्ति का भाव यह है कि यद्यपि संसार में विभिन्न शक्तियों के प्रतीक अनेक देवी-देवता हैं, किंतु बजरंग बली की कृपा की तीव्रता और सरलता का कोई मुकाबला नहीं है।
"संकटमोचन नाम तुम्हारा, जग में डंका बज रहा!" - हनुमान जी का एक नाम संकटमोचन है क्योंकि वे अपने भक्तों के हर संकट को पलभर में हर लेते हैं। उनकी इस ख्याति का डंका पूरे ब्रह्मांड में बज रहा है।
"राम नाम के तुम हो प्यारे, सीता मैया के दुलारे..." - हनुमान जी का पूरा जीवन भगवान श्रीराम और माता सीता की सेवा में समर्पित है। वे राम भक्त के रूप में सर्वोच्च आदर्श हैं।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के पाठ के साथ-साथ निम्नलिखित पावन श्लोक का स्मरण करने से अनंत लाभ प्राप्त होता है:
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | दुनिया मे देव हजारो हैं, बजरंग बली का क्या कहना |
|---|---|
| इष्ट देव | भगवान श्री हनुमान (संकटमोचन) |
| रचना शैली | पारंपरिक लोक भजन / संकीर्तन |
| भाषा | सरल हिंदी / लोक भाषा |
| मुख्य भाव | वीरता, भक्ति, शरणागति और संकट निवारण |
| उपयुक्त अवसर | मंगलवार, शनिवार, सुंदरकांड पाठ, हनुमान जयंती |
| संबंधित रचनाएं | श्री हनुमान चालीसा, सुंदरकांड |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री भक्तिलोक के विद्वान आचार्यों और संपादकीय टीम द्वारा सनातन ग्रंथों, लोक परंपराओं और हनुमान भक्ति साहित्य के गहन अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध, प्रामाणिक और प्रेरणादायी भक्ति सामग्री प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत इस लेख को निरंतर अपडेट किया जाता है ताकि पाठकों को सर्वश्रेष्ठ आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हो सके।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्री हनुमान चालीसा एवं संकीर्तन परंपरा
- वाल्मीकि रामायण - सुंदरकांड एवं किष्किंधा कांड
- पारंपरिक लोक भजन संग्रह एवं सनातन कथाएं
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें