Parvati Stotram

अरदास सोम सोम दे भरे भंडारे तेरे लिरिक्स || Aradaas som som de bhare bhandaare tere lyrics in hindi || Bhaktilok

632 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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अरदास सोम सोम दे भरे भंडारे तेरे लिरिक्स - परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व

माता भगवती के चरणों में समर्पित यह पावन भजन "अरदास सोम सोम दे भरे भंडारे तेरे" माँ दुर्गा, माँ वैष्णो देवी और विभिन्न शक्ति रूपों की महिमा का गुणगान करने वाला अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण भजन है। इस भजन में साधक अपनी समस्त मनोकामनाओं को लेकर माता के दरबार में हाजिरी लगाता है और माता रानी से अपनी झोली भरने की प्रार्थना करता है। हिन्दू सनातन परंपरा में माँ शक्ति को सृष्टि की आदि जननी, सर्वसुख प्रदायिनी और संकटमोचिनी माना गया है। सप्ताह के सातों दिनों और माँ के विभिन्न स्वरूपों—जैसे सोम (सोमवार) को सरस्वती, मंगलवार को मनसा देवी, बुधवार को पिंडरानी व शक्ति, गुरुवार को वैष्णो देवी व नैना देवी, शुक्रवार को भवानी, और शनिवार को दुर्गे रूप—का स्मरण करते हुए यह भजन साधक के मन में अगाध श्रद्धा और विश्वास का संचार करता है। जब भक्त पूरे प्रेम, समर्पण और विनय भाव के साथ इस भजन का गान या श्रवण करते हैं, तो उनके जीवन के सभी कष्ट और बाधाएं दूर हो जाती हैं। यह भजन न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि साधक को भक्ति मार्ग पर दृढ़ता से आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन - शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:

सोम सोम दे भरे भण्डार तेरे, मंगल मेहर दा बक्षो दान माता
बुध बुद्धि दे विच प्रकाश होवे, वीर वीरता दा बक्षो दान माता
शक्र शुकर कराँ तेरा हर वेले, शनि शांति दे हों सामान माता
एतवार विश्वास यकीन होवे, पूरण कर दो सारे काज माता
हे माता मातेश्वरी सर्व सुखों की खान, माँ देवन वाली एक है मांगत कुल जहान
अज्ज वी तेरा आसरा कल वी तेरी आस, घड़ी घड़ी माँ आसरा ज्येष्ठ बारह मास
मेरी दाती के दरबार में सभी खड़े हत्थ जोड़, माँ देवन वाली एक है मांगत लाख करोड़
ऐ सच्चियाँ जोतां वाली माता तुहाडी सदा ही जय

एत अम्बिका जी हिंगलाज, ज्वाला माँ, तेरा पर्वतां दे विच दरबार माता
सोम सरस्वती, कालका, भद्रकाली, तैनू सिमरदा ए कुल संसार माता
मगल मनसा देवी तू है पिंडरानी, समय समय ते लवें अवतार माता
बुध वीरता दी वरी महान शक्ति, बग्घे शेर ते होवे सवार माता
वीर वैष्णो देवी नैना देवी, लक्खां भक्त दित्ते ने तार माता
शुक्र शक्ति भवानी कृपालु है तू, कई जालिमां नूँ दित्ता है मार माता
शनि शांति रूप महान दुर्गे, तैनू भक्त सिमरन सत्ते वार माता
रूप एक ते नाम अनेक तेरे, तेरे चरणां तो जावाँ बलिहार माता
मेहर करो मातेश्वरी, आये तेरे द्वार, रक्ख लाज दाती आनके...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस दिव्य भजन के माध्यम से भक्त माँ जगदम्बा के चरणों में अपनी निष्काम और सकाम दोनों प्रकार की अर्जियां प्रस्तुत करता है। भजन की प्रारंभिक पंक्तियों में सप्ताह के प्रत्येक वार (दिन) के अनुसार माँ से अलग-अलग वरदान और कृपा की याचना की गई है। साधक कहता है कि हे माता! सोमवार के दिन आप हमारे भंडारे भर दीजिए, मंगलवार को अपनी विशेष कृपा का दान दीजिए, बुधवार को हमारी बुद्धि में ज्ञान का प्रकाश कीजिए, और गुरुवार को हमें वीरता व पराक्रम प्रदान कीजिए। इसी प्रकार शुक्रवार को हर पल आपका शुक्राना (कृपा के प्रति आभार) अदा करने की शक्ति दीजिए, शनिवार को जीवन में शांति और संतुलन स्थापित कीजिए, तथा रविवार के दिन हमारे मन में आपके प्रति अटूट विश्वास और दृढ़ यकीन बनाए रखिए, जिससे हमारे सभी कार्य निर्विघ्न पूर्ण हो सकें।

भजन के दूसरे चरण में माँ के विभिन्न शक्तिपीठों और स्वरूपों का वंदना की गई है। हिंगलाज माता, ज्वाला माता, माँ सरस्वती, कालका, भद्रकाली, मनसा देवी, पिंडरानी, वैष्णो देवी, नैना देवी और दुर्गे—इन सभी रूपों में एक ही महाशक्ति विराजमान हैं जो बग्घे शेर पर सवार होकर अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। कवि या भक्त यह स्पष्ट करता है कि माँ के रूप भले ही अनेक हैं और उनके नाम भी अलग-अलग हैं, परंतु मूल रूप से वे एक ही परम चेतना हैं जो संसार के समस्त जीवों का कल्याण करती हैं। जब भक्त माँ के दरबार में हाथ जोड़कर खड़े होते हैं, तो माँ बिना किसी भेदभाव के अपने हर मांगने वाले की झोली खुशियों से भर देती हैं। यह भावार्थ हमें सिखाता है कि जीवन की हर परिस्थिति में ईश्वर और माँ शक्ति पर भरोसा रखना चाहिए।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन अपनी विशिष्ट रचना शैली और सात्विक ऊर्जा के कारण देवभूमि और उत्तर भारत के धार्मिक अनुष्ठानों में अत्यंत लोकप्रिय है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • वारात्मक स्तुति: सप्ताह के सातों दिनों (सोमवार से रविवार) को माता के अलग-अलग गुणों और आशीर्वाद के साथ जोड़कर बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
  • शक्तिपीठों का स्मरण: हिंगलाज, ज्वालाजी, नैना देवी, वैष्णो देवी जैसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों का इसमें सजीव वर्णन मिलता है।
  • समर्पण भाव: यह भजन साधक के भीतर माता के प्रति पूर्ण समर्पण और अगाध विश्वास जगाता है।
  • मानसिक शांति: इसके नियमित श्रवण या गान से मन का भटकना बंद होता है और एकाग्रता बढ़ती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

माता के इस पावन भजन को गाने और सुनने के लिए निम्नलिखित नियमों और समय का ध्यान रखना लाभकारी होता है:

  • उत्तम समय: प्रातःकाल ब्रह्म बेला में या संध्याकालीन बेला (संध्या वंदन के समय) में इस भजन का पाठ करना सबसे उत्तम माना जाता है।
  • विशेष दिन: नवरात्रि के नौ दिनों में, मंगलवार, शुक्रवार तथा प्रत्येक माह की अष्टमी या चतुर्दशी को इसका विशेष पाठ करना चाहिए।
  • पूजा विधि: माता की ज्योति प्रज्वलित करें, लाल फूल, धूप, दीप अर्पित करें और हाथ जोड़कर इस भजन का सस्वर गान करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से आदिशक्ति माँ दुर्गा, माँ भगवती, माँ वैष्णो देवी और उनके विभिन्न नौ स्वरूपों को समर्पित है। सनातन धर्म में शक्ति उपासना का विशेष महत्व है। आदि शंकराचार्य से लेकर आधुनिक संतों तक सभी ने माँ दुर्गा को चराचर जगत की माता माना है। माँ का यह स्वरूप करुणा, ममता, शक्ति और संहार—तीनों गुणों का समन्वित रूप है, जो भक्तों की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहता है.

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की रचना पारंपरिक लोक शैली और पंजाबी-हिंदी मिश्रित भक्ति काव्य परंपरा के अंतर्गत हुई है। लोक गायकों और माता के जागरणों में इस प्रकार की रचनाओं का विशेष स्थान रहा है। रचनाकार ने अत्यंत सरल शब्दों में आम जनमानस की भावनाओं को पिरोया है, ताकि हर छोटा-बड़ा भक्त इसे आसानी से समझ सके और गा सके। लोक संस्कृति में माता के प्रति जो लाड़ और पुकार होती है, उसकी झलक इस पूरी रचना में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सहज, मधुर और प्रभावशालिनी है। इसमें हिंदी और पंजाबी लोकभाषा के शब्दों का सुंदर मिश्रण है जो सीधा हृदय को स्पर्श करता है। काव्य शैली के अंतर्गत अनुप्रास और पुनरावृत्ति अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है, जिससे इसकी लयबद्धता (Rhythm) और भी बढ़ जाती है। 'सोम सोम', 'घड़ी घड़ी', 'लाख करोड़' जैसे शब्दों का प्रयोग गान की गति को और अधिक आनंददायक बनाता है.

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि यह जीवन के कई गहरे आध्यात्मिक सत्य सिखाता है:

  • अटूट विश्वास: जीवन में कैसी भी कठिनाई आए, माँ पर भरोसा कभी नहीं टूटना चाहिए।
  • नियमित साधना: सप्ताह के सातों दिन ईश्वर का स्मरण करने की आदत डालनी चाहिए।
  • विनम्रता: हाथ जोड़कर दरबार में खड़े होने का अर्थ है कि अहंकार का त्याग करके ही परमात्मा की कृपा प्राप्त होती है।
  • कृतज्ञता: हर परिस्थिति के लिए ईश्वर का शुक्राना करना ही सच्ची भक्ति है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / भाव
भंडारे खजाने / भंडार सुख-समृद्धि और अन्न-धन के भंडार
मेहर दा दान कृपा का वरदान माता की अहेतुक कृपा
मातेश्वरी माताओं की भी माता समस्त ब्रह्मांड की जननी
दाती देने वाली सबकी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली माँ
बल्हार न्योछावर होना माता के चरणों में सर्वस्व समर्पण

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

सोम सोम दे भरे भण्डार तेरे... - इस पंक्ति में भक्त प्रार्थना करता है कि हे माता! आपके यहाँ सुख-संपत्ति के कभी न समाप्त होने वाले भंडार भरे हैं, हमें अपनी कृपा का दान दीजिए।
अज्ज वी तेरा आसरा कल वी तेरी आस... - भक्त अपनी पूर्ण अनन्यता व्यक्त करते हुए कहता है कि आज भी मेरा एकमात्र सहारा आप ही हैं और कल के भविष्य की भी पूरी आशा आपसे ही जुड़ी है।
ऐ सच्चियाँ जोतां वाली माता तुहाडी सदा ही जय... - यह जयकारा माँ के सत्य स्वरूप और उनकी ज्योति के प्रति अनंत विजय और सम्मान का प्रतीक है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:

"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे"

यह नवार्ण मंत्र माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की समस्त ऊर्जा का केंद्र माना जाता है, जिसके जाप से साधक के सभी कष्ट स्वतः नष्ट हो जाते हैं.

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य
भजन का नाम अरदास सोम सोम दे भरे भंडारे तेरे (Aradaas Som Som De Bhare Bhandaare Tere)
समर्पित देवता माँ दुर्गा, माँ वैष्णो देवी एवं शक्ति स्वरूप
भाषा हिंदी एवं पंजाबी मिश्रित लोक भाषा
भक्ति भाव समर्पण, विनय, प्रार्थना और विश्वास
उपयुक्त अवसर माता का जागरण, चौकी, नवरात्रि, मंगलवार/शुक्रवार पूजा
श्रेणी देवी भजन एवं माता की भेंट

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

"अरदास सोम सोम दे भरे भंडारे तेरे" भजन किस देवी को समर्पित है?

यह भजन आदिशक्ति जगत जननी माँ दुर्गा, माँ वैष्णो देवी और उनके विभिन्न शक्तिपीठ रूपों को समर्पित है।

इस भजन को कब गाना चाहिए?

इस भजन को नवरात्रि, मंगलवार, शुक्रवार, माता की चौकी, जागरण अथवा प्रतिदिन प्रातःकाल व संध्या वंदन के समय गाया जा सकता है।

इस भजन को गाने से क्या लाभ मिलता है?

इसके गान और श्रवण से मन को शांति मिलती है, मानसिक तनाव दूर होता है और माता रानी की विशेष कृपा व आशीर्वाद प्राप्त होता है।

क्या इस भजन को घर पर अकेले गाया जा सकता है?

हाँ, इस भजन को व्यक्तिगत रूप से पूजा के समय या सामूहिक रूप से सत्संग व जागरण में भी बहुत प्रेम से गाया जा सकता है।

भजन में सप्ताह के वारों का क्या महत्व है?

सप्ताह के सातों दिनों के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि साधक हर पल और जीवन के हर दिन माता के स्मरण में अपना जीवन व्यतीत करना चाहता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष नियम है?

इसके लिए कोई कठिन नियम नहीं है, बस इसे पूर्ण पवित्रता, स्वच्छता और सच्चे भक्ति भाव के साथ गाना चाहिए।

माता के दरबार में हाथ जोड़ने का क्या आध्यात्मिक अर्थ है?

हाथ जोड़ना साधक की विनम्रता, शरणागति और अहंकार के पूर्ण त्याग का प्रतीक है।

इस भजन के बोल किस भाषा में हैं?

यह भजन हिंदी और पंजाबी लोकभाषा के बहुत ही सुंदर और सरल शब्दों में रचा गया है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख Bhaktilok.in के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन धर्म की परंपराओं, लोकगीतों और देवी उपासना के ग्रंथों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य भक्तों को शुद्ध लिरिक्स और उनका आध्यात्मिक अर्थ उपलब्ध कराना है। यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत प्रमाणित है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन देवी भागवत पुराण एवं दुर्गा सप्तशती संदर्भ
  • पारंपरिक उत्तर भारतीय भजन एवं लोक जागरण संकलन
  • वैदिक एवं शक्ति परंपरा की लोक कथाएं

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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