Shyam Bhajan

तालियां बजाकर सोने श्याम नू मनाइए (taaliya baja ke sohne sham nu manaiye punjabi bhajan in Hindi)

116 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

"तालियां बजाकर सोने श्याम नू मनाइए" एक अत्यंत भावपूर्ण और आनंदमयी पंजाबी भजन है, जो भगवान श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम, समर्पण और नाम-संकीर्तन की महिमा को दर्शाता है। यह भजन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए है जो कीर्तन, नृत्य और तालियों की गूँज के माध्यम से अपने आराध्य को रिझाना चाहते हैं। कलयुग में नाम-संकीर्तन को ही मोक्ष का सरलतम मार्ग बताया गया है, और यह भजन उसी भक्ति रस की धारा को प्रवाहित करता है। इसमें श्री कृष्ण की मुरली की मधुर धुन, उनके तीखे नैनों का आकर्षण और यमुना तट पर रास लीला का सुंदर चित्रण किया गया है। यह भजन न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्त को संसार की मोह-माया से ऊपर उठाकर प्रभु के चरणों में लीन होने की प्रेरणा भी देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

तालियां बजाकर सोने श्याम नू मनाइए,
तालियां बजाई शाम नू मनाइए।
वृंदावन विच डेरा लाया,
इसने सब नू आप बुलाया,
रज रज दर्शन पाइए...
तालियां बजाकर सोने श्याम नू मनाइए।

लूट लिया दिल साडा मुरली बजा के,
तीखे तीखे नैना वाले तीर चला के,
किवें भूल जाइए...
तालियां बजाकर सोने श्याम नू मनाइए।

नाम वाले मोती आप लुटान्दा है,
जमुना दे कंडे उत्ते रास रचांदा है,
रासा पाइये...
तालियां बजाकर सोने श्याम नू मनाइए।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य भाव 'संकीर्तन' और 'आनंद' है। भक्त कहता है कि हे प्रभु, मैं तालियां बजाकर आपको प्रसन्न करना चाहता हूँ। वृंदावन में डेरा डालने वाले मेरे श्याम सुंदर ने स्वयं ही सबको प्रेम का निमंत्रण दिया है। उनकी मुरली की धुन ने हमारे हृदय को चुरा लिया है। उनके नैनों के बाणों ने हमें घायल कर दिया है, अब हम उन्हें कैसे भूल सकते हैं? वे यमुना के तट पर रास रचाते हैं और नाम रूपी मोतियों को लुटाते हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति में संकोच नहीं, बल्कि खुलकर आनंद लेना चाहिए।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन 'कीर्तन भक्ति' का प्रतीक है। इसमें श्री कृष्ण के वृंदावन स्वरूप का वर्णन है। तालियां बजाना केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि हृदय की प्रसन्नता को व्यक्त करने का माध्यम है। यह भजन मानसिक तनाव को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में अत्यंत प्रभावी है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, लेकिन संध्या काल में जब मन शांत हो, तब इसे गाना विशेष फलदायी होता है। इसे समूह में तालियां बजाते हुए गाने से भक्ति का वातावरण निर्मित होता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन पंजाबी और हिंदी के मिश्रित पुट (सधुक्कड़ी शैली) में लिखा गया है। इसमें 'सोने श्याम' (सुंदर श्याम) और 'रास रचांदा' जैसे शब्दों का प्रयोग इसे अत्यंत मधुर और कर्णप्रिय बनाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

भजन का संदेश है कि ईश्वर को पाने के लिए जटिल कर्मकांडों की आवश्यकता नहीं है, केवल एक सच्चा और आनंदित हृदय चाहिए। जब भक्त तालियां बजाकर प्रभु का नाम लेता है, तो वह संसार के दुखों को भूलकर प्रभु के प्रेम में डूब जाता है।

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
सोने श्याम सुंदर कृष्ण प्रभु का रूप
मुरली बांसुरी कृष्ण का वाद्य
रास लीला/नृत्य यमुना तट

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तालियां बजाकर सोने श्याम नू मनाइए
आराध्य श्री कृष्ण
भाषा पंजाबी-हिंदी
भाव प्रेम और आनंद

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • प्रश्न: क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?
    उत्तर: हाँ, इसे घर पर कीर्तन के दौरान पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।
  • प्रश्न: इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    उत्तर: प्रभु के प्रति प्रेम व्यक्त करना और मन को भक्ति में लीन करना।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री पारंपरिक वैष्णव भजन परंपरा और लोक-भक्ति गीतों के संकलन पर आधारित है।

संबंधित भजन एवं लेख

श्रेणियां: Shyam Bhajan

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!