Shyam Bhajan

खाटू श्याम तेरा नाम मैं पुकारूं सुबहो शाम (khatu shyam tera naam main pukarun subha sham Lyrics in Hindi)

159 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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खाटू श्याम जी का यह अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी भजन 'खाटू श्याम तेरा नाम मैं पुकारूं सुबहो शाम' (Khatu Shyam Tera Naam Main Pukarun Subha Sham Lyrics in Hindi) कलयुग के धनी, हारे के सहारे और तीन बाण धारी बाबा श्याम की महिमा का गुणगान करता है। जब मनुष्य जीवन के संघर्षों से थक जाता है, चारों तरफ से निराश हो जाता है और जब कोई भी रास्ता नजर नहीं आता, तब केवल खाटू नरेश का नाम ही भक्त के जीवन में नई उम्मीद और प्रकाश लेकर आता है। इस भजन का मुख्य भाव शरणागति, आत्मसमर्पण और अगाध विश्वास का है। सुबह और शाम, यानी जीवन के हर प्रहर में बाबा श्याम का स्मरण करने से भक्त के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, शब्दार्थ, पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व का संपूर्ण अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन — शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:

( हार गया हूँ, टूट गया हूँ,
मुझे लेना, तुम संभाल बाबा ।
तेरे बिना, इस जग में बोलो,
कौन सुने, मेरा हाल बाबा ॥ )

खाटू श्याम, तेरा नाम,
मैं पुकारूं, सुबहो शाम ॥
मैं, दर तेरे आया, लेकर, झोली खाली,
ओ दुनियाँ के वाली, कर नजर मेहर वाली ।
ओ दुनियाँ के वाली, कर नजर मेहर वाली...
मेरी मुश्किल, का कर इंतजाम,
बन जाए काम, खाटू श्याम...
खाटू श्याम, तेरा नाम,
मैं पुकारूं, सुबहो शाम ॥

सुना है तूँ, हारे का, सहारा श्याम जी,
कितनी, जिंदगीयों को, संवारा श्याम जी ।
आखिरी, उमीद मेरी, तूँ खाटू नरेश,
मैं भी तो हूँ, किस्मत का, मारा श्याम जी ।
मैं भी तो हूँ, किस्मत का, मारा श्याम जी...
तूँ मंजिल है, तूँ ही अंजाम,
बन जाए काम, खाटू श्याम...
खाटू श्याम, तेरा नाम,
मैं पुकारूं, सुबहो शाम ॥

शीश के, दानी तूँ सबका, दाता है प्रभु,
कलियुग का, राजा, कहा, जाता है प्रभु ।
तीन बाण, धारी मुझे, रस्ता दिखा,
पल पल, मन, घबराता है प्रभु ।
पल पल, मन, घबराता है प्रभु...
मेरे, दिल का, तूँ बन आराम,
बन जाए काम, खाटू श्याम...
खाटू श्याम, तेरा नाम,
मैं पुकारूं, सुबहो शाम ॥

दिल से, फरियाद, निकली है सरकार,
डूबती, नईया को तूँ, लगा दे उस पार ।
तेरी, चौखट पे झुका है सिर मेरा, हे बाबा श्याम...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन एक भक्त और उसके आराध्य देव खाटू श्याम (भगवान श्री कृष्ण के कलयुगी अवतार बर्बरीक) के बीच के अनन्य संवाद को प्रस्तुत करता है। जब सांसारिक प्रपंचों और दुखों से मनुष्य का मन विचलित हो जाता है, तब वह अपनी संपूर्ण विवशता बाबा के चरणों में अर्पित कर देता है। भजन की शुरुआती पंक्तियाँ "हार गया हूँ, टूट गया हूँ, मुझे लेना, तुम संभाल बाबा" एक पराजित और थके हुए मानव की पुकार हैं, जो यह स्वीकार करता है कि अब संसार में उसकी सहायता करने वाला कोई अन्य नहीं है।

इसके पश्चात, भक्त अपनी खाली झोली लेकर बाबा के दरबार में पहुंचता है और उनसे करुणा भरी दृष्टि डालने की प्रार्थना करता है। खाटू नरेश को 'हारे का सहारा' और 'कलियुग का राजा' कहा गया है। महाभारत काल के महान योद्धा बर्बरीक ने अपनी माता को हारे हुए पक्ष की तरफ से युद्ध लड़ने का वचन दिया था, और वही वचन आज भी उनके खाटू धाम में आने वाले हर लाचार और हारे हुए भक्त पर चरितार्थ होता है। भक्त कहता है कि वह अपनी किस्मत का मारा हुआ है और श्याम बाबा ही उसकी अंतिम उम्मीद, उसकी मंजिल और उसके जीवन का एकमात्र अंजाम हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

खाटू श्याम भजन भारतीय devotional संगीत और खाटू धाम की संस्कृति का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। इस भजन की विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • समर्पण भाव: यह भजन अहंकार को त्यागकर पूर्ण रूप से भगवान पर निर्भर होने की प्रेरणा देता है।
  • कलयुग के अवतार का स्मरण: इसमें भगवान बर्बरीक के तीन बाण, शीश के दान और उनकी महान उदारता का सीधा उल्लेख है।
  • नित्य स्मरण (सुबहो शाम): भजन का शीर्षक ही यह संदेश देता है कि ईश्वर का स्मरण केवल संकट के समय नहीं, बल्कि निरंतर सुबह और शाम दोनों प्रहर में होना चाहिए।
  • मानसिक शांति: इस भजन के नियमित श्रवण या गायन से मन का संताप, अवसाद (depression) और घबराहट दूर होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन श्याम भजन को गाने और सुनने के लिए कोई कठोर नियम नहीं हैं, फिर भी धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से कुछ विशेष अवसरों पर इसका पाठ अति फलदायी माना जाता है:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं प्रातःकाल पूजा: सुबह उठकर स्नान के पश्चात बाबा श्याम के चित्र या ज्योति के समक्ष धूप-दीप प्रज्वलित करके इस भजन का गान करने से पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है।
  • संध्याकालीन आरती के समय: संध्या बेला में जब घर में दीपक जलाया जाता है, तब इस भजन का संकीर्तन घर की नकारात्मकता को दूर करता है।
  • श्याम कीर्तन एवं जागरण: खाटू श्याम के साप्ताहिक सत्संग, एकादशी और द्वादशी के जागरणों में यह भजन भक्तों को झूमने पर विवश कर देता है।
  • फाल्गुन मास मेला: खाटू श्याम के प्रसिद्ध वार्षिक फाल्गुन मेले के दौरान देश-विदेश से आने वाले पदयात्री इस भजन को गाते हुए मार्ग तय करते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में खाटू श्याम बाबा हैं, जिन्हें कलियुग में भगवान श्री कृष्ण का ही रूप माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत के युद्ध से पूर्व घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने अपनी माता मोरवी को वचन दिया था कि वे युद्ध में हारे, कमजोर और असहाय पक्ष का साथ देंगे। श्री कृष्ण ने उनकी इस महान परीक्षा को लेते हुए उनका शीश दान में मांग लिया था। बर्बरीक के इस अद्वितीय त्याग से प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे उनके नाम 'श्याम' से पूजे जाएंगे और उनके दर्शन मात्र से भक्तों के सभी संकट दूर हो जाएंगे। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू धाम इनका मुख्य पवित्र तीर्थ स्थल है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल, सुबोध और लोक-सुलभ हिंदी/ब्रज मिश्रित भाषा में रचित है। इसकी काव्य शैली गेय (musical) और लयबद्ध है, जो सामान्य से सामान्य व्यक्ति को भी तुरंत याद हो जाती है। इसमें प्रयुक्त शब्द जैसे 'झोली खाली', 'दुनियाँ के वाली', 'किस्मत का मारा', और 'डूबती नईया' सीधे आम जनमानस के हृदय को स्पर्श करते हैं। तुकबंदी (rhyming scheme) इस प्रकार की गई है कि इसे हारमोनियम, ढोलक और मंजीरे की थाप पर आसानी से गाया जा सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक आध्यात्मिक दर्शन है:

  1. अहंकार का त्याग: जब मनुष्य यह स्वीकार कर लेता है कि "मैं हार गया हूँ", तभी से वास्तविक आध्यात्मिक यात्रा और ईश्वर की कृपा शुरू होती है।
  2. आशा की किरण: दुनिया में कितनी भी बड़ी बाधाएं क्यों न आएं, ईश्वर रूपी खाटू नरेश की शरण में जाने पर हर समस्या का समाधान मिल जाता है।
  3. निरंतर पुकार: 'सुबहो शाम' नाम जपने का अर्थ है कि मन को हर पल प्रभु की स्मृति में रखना, जिससे सांसारिक मोह-माया से detachment बना रहता है।
  4. परमेश्वर पर अटूट विश्वास: 'आखिरी उम्मीद मेरी तूँ खाटू नरेश' यह सिखाती है कि भौतिक संसाधनों के समाप्त होने पर भी भगवान का आशीर्वाद कभी समाप्त नहीं होता।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
दुनियाँ के वाली संसार के स्वामी या संरक्षक भगवान श्री कृष्ण / खाटू श्याम जी के लिए संबोधन
शीश के दानी अपना सिर दान करने वाले महाभारत के वीर बर्बरीक जिन्होंने श्री कृष्ण को अपना शीश दान दिया था
कलियुग का राजा वर्तमान युग के मुख्य आराध्य देव वरदान प्राप्त खाटू श्याम जी की महिमा
तीन बाण धारी तीनों लोकों को जीतने में सक्षम तीन अचूक बाणों वाले बाबा बर्बरीक का दिव्य अस्त्र
चौखट प्रवेश द्वार या देहरी बाबा श्याम का पावन दरबार

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: हार गया हूँ, टूट गया हूँ, मुझे लेना, तुम संभाल बाबा...
भावार्थ: भक्त अपनी सांसारिक असफलताओं और मानसिक थकावट को बाबा के सामने रखकर पूर्ण आत्मसमर्पण कर रहा है। वह कहता है कि अब मुझमें और संघर्ष करने की शक्ति नहीं बची है, अतः आप ही मेरे पालक बनकर मुझे थाम लीजिए।

पंक्ति: मैं दर तेरे आया, लेकर झोली खाली, ओ दुनियाँ के वाली, कर नजर मेहर वाली...
भावार्थ: भक्त अपनी समस्त इच्छाओं और रिक्तता को लेकर बाबा के दरबार में पहुंचा है। वह ब्रह्मांड के स्वामी से यह विनती करता है कि वे अपनी कृपालु दृष्टि उसके जीवन पर डाल दें, जिससे उसकी दरिद्रता और दुख दूर हो सकें।

पंक्ति: सुना है तूँ हारे का सहारा श्याम जी, कितनी जिंदगियों को संवारा श्याम जी...
भावार्थ: यह पंक्ति लोक-विश्वास और इतिहास पर आधारित है। भक्त कहता है कि मैंने सुना और अनुभव किया है कि आप हमेशा पराजित और निराश लोगों का संबल बनते हैं और अनेकों बिगड़े हुए भाग्य को संवार चुके हैं।

पंक्ति: शीश के दानी तूँ सबका दाता है प्रभु, कलियुग का राजा, कहा जाता है प्रभु...
भावार्थ: बर्बरीक जी के महानतम बलिदान (शीश दान) को याद करते हुए भक्त उन्हें संपूर्ण ब्रह्मांड का दाता और वर्तमान कलियुग का सबसे प्रभावी और दयालु राजा स्वीकार करता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

खाटू श्याम जी के स्मरण के समय निम्नलिखित प्रसिद्ध मंत्र और श्लोक का उच्चारण अत्यंत लाभकारी माना जाता है:

ॐ श्री श्याम देवाय नमः ॥

हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा ॥

शीश के दानी की जय, तीन बाण धारी की जय ॥

इन मंत्रों का प्रतिदिन 108 बार जाप करने से मानसिक शांति और बाबा श्याम की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आप अधिक जानकारी के लिए हमारे अन्य पावन लेख जैसे श्री हनुमान चालीसा का भी पाठ कर सकते हैं जो संकट मोचन के रूप में जाने जाते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम खाटू श्याम तेरा नाम मैं पुकारूं सुबहो शाम (Khatu Shyam Tera Naam Main Pukarun)
आराध्य देव खाटू श्याम जी (बर्बरीक / श्री कृष्ण अवतार)
भाषा सरल हिंदी / ब्रज भाव
मुख्य विषय शरणागति, हारे का सहारा, और कृपा की प्रार्थना
मुख्य भाव विनय, समर्पण, और अगाध भक्ति (Bhava)
श्रवण अवसर सुबह-शाम की पूजा, एकादशी, जागरण और सत्संग
संबंधित पावन स्थल खाटू धाम, सीकर, राजस्थान

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन कलियुग के अवतार खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक) को समर्पित है, जो अपने भक्तों के सभी दुखों को हरने और उन्हें जीवन में संबल प्रदान करने के लिए जाने जाते हैं।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को जीवन की कठिन परिस्थितियों या हार से घबराने के बजाय पूर्ण विश्वास के साथ भगवान श्याम की शरण में जाना चाहिए।

हाँ, इस भजन को सुबह की पूजा के समय या संध्या आरती के वक्त घर पर गाना या सुनना अत्यंत शुभ और मानसिक शांति प्रदान करने वाला माना जाता है।

पौराणिक कथा के अनुसार बर्बरीक ने अपनी माता को वचन दिया था कि वे महाभारत युद्ध में हमेशा हारे हुए और कमजोर पक्ष का समर्थन करेंगे, इसलिए उन्हें 'हारे का सहारा' कहा जाता है।

खाटू श्याम जी का मुख्य और प्रसिद्ध मंदिर राजस्थान राज्य के सीकर जिले के खाटू नामक कस्बे में स्थित है।

जैसा कि भजन के बोल में 'सुबहो शाम' का उल्लेख है, इसे प्रातःकाल स्नान के बाद और संध्याकालीन समय में गाना सबसे फलदायी माना गया है।

निसंदेह, भगवान श्याम के नाम का संकीर्तन और यह भजन सुनने से मन का भारीपन समाप्त होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

बर्बरीक के पास तीन अमोघ बाण थे, जिनमें से एक बाण लक्ष्य भेदने वाले को चिह्नित करता था, दूसरा बाण न बचाने वाले को नष्ट करता था, और तीसरा बाण स्वतः वापस आ जाता था।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तों की आध्यात्मिक जिज्ञासा और प्रामाणिक धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसमें खाटू श्याम जी के इतिहास, लोक-भजनों की परंपरा और उनके दार्शनिक महत्व का सटीक संकलन किया गया है ताकि पाठकों को पूर्ण भक्ति रस और प्रामाणिक जानकारी प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक श्याम भजन संकलन एवं लोक-साहित्य परंपरा
  • श्री खाटू श्याम जी मंदिर समिति के ऐतिहासिक एवं पौराणिक संस्मरण
  • भारतीय भक्ति आंदोलन और लोक-संस्कृति के अध्ययन ग्रंथ
  • पंचांग एवं धार्मिक मासिक पत्रिकाओं में प्रकाशित श्याम कथाएं

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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