Shyam Bhajan

किसको कहूं मैं अपना (Kisko Kahu Mai Apna Lyrics in Hindi) - by Simran Kaur Khatu Shyam Bhajan - Bhaktilok

215 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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किसको कहूं मैं अपना (Kisko Kahu Mai Apna Lyrics in Hindi) - परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व

भक्ति और समर्पण की अनूठी मिसाल प्रस्तुत करता भजन "किसको कहूं मैं अपना" (Kisko Kahu Mai Apna Lyrics in Hindi) गायिका सिमरन कौर द्वारा खाटू श्याम बाबा के चरणों में अर्पित एक अत्यंत भावपूर्ण और आत्मिक संकीर्तन है। कलयुग के धनी हारे के सहारे बाबा श्याम की महिमा का गुणगान करते हुए यह भजन जीवात्मा की उस व्याकुलता को व्यक्त करता है जब वह संसार के तमाम प्रपंचों से निराश होकर केवल और केवल अपने आराध्य श्री कृष्ण-श्याम को ही सर्वस्व मान लेती है। सनातन धर्म में संकीर्तन को भवसागर से तरने का सबसे सुगम और सरल मार्ग बताया गया है। जब कोई साधक या भक्त अपने अंतर्मन की गहराइयों से इस भजन को गाता है या श्रवण करता है, तो उसके भीतर का अंहकार और मोह धीरे-धीरे गलने लगता है। सिमरन कौर की मधुर वाणी में पिरोया यह भजन न केवल खाटू श्याम भक्तों के बीच लोकप्रिय है, बल्कि हर उस व्यक्ति को संबल प्रदान करता है जो जीवन की भागदौड़ और अकेलापन महसूस कर रहा है। इस लेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, शब्दार्थ, भावार्थ और इसके आध्यात्मिक संदेश का विस्तार से अध्ययन करेंगे, जिससे पाठकगण खाटू श्याम की भक्ति रस में पूरी तरह सराबोर हो सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा:

किसको कहूं मैं अपना, यहाँ कौन है पराया,
मैंने तो सांवरे तुझको ही, अपना बना के पाया।
किसको कहूं मैं अपना...

अंतरा 1:

दुनिया के रिश्ते-नाते, सब मतलब के मेले हैं,
जब भीड़ पड़ी जीवन में, सब साथ यहाँ अकेले हैं।
तूने ही थामी बांहें, जब कोई काम ना आया,
मैंने तो सांवरे तुझको ही, अपना बना के पाया।

अंतरा 2:

दर-दर भटका मैं लेकिन, सुख कहीं ना पाया,
खाटू तेरे दरबार में, मैंने चैन है पाया।
तेरी कृपा का जादू, मुझ पर ऐसा छाया,
मैंने तो सांवरे तुझको ही, अपना बना के पाया।

अंतरा 3:

अब और ना कुछ चाहूँ, बस तेरा प्यार मिले,
तेरे चरणों की धूल में, मेरा संसार मिले।
सिमरन गाए महिमा, तूने दिल को है लुभाया,
मैंने तो सांवरे तुझको ही, अपना बना के पाया।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक और परमात्मा के बीच के अनन्य और पवित्र संबंध की एक सुंदर अभिव्यक्ति है। भजन की पहली पंक्ति "किसको कहूं मैं अपना, यहाँ कौन है पराया" मनुष्य के उस दार्शनिक प्रश्न को उठाती है जो जीवन के हर मोड़ पर उसे अकेला कर देता है। संसार में जितने भी नाते-रिते हैं, वे अक्सर स्वार्थ और मोह पर टिके होते हैं। जब तक सुख और अनुकूल परिस्थितियां होती हैं, तब तक अपने कहे जाने वाले लोग साथ खड़े दिखते हैं, परंतु जैसे ही जीवन में संकट के बादल मंडराते हैं, सारे अपने पराए से प्रतीत होने लगते हैं।

ऐसी स्थिति में जब जीव पूरी तरह थक जाता है और चारों ओर निराशा छा जाती है, तब उसे खाटू श्याम बाबा का दरबार ही एकमात्र शरणस्थली नजर आता है। भजनकार सिमरन कौर बहुत ही सहज और भावुक शब्दों में यह स्वीकार करती है कि उसने दुनिया के झूठे रिश्तों की अपेक्षा कलयुग के देवता खाटू श्याम को अपना सर्वस्व मान लिया है। बाबा श्याम ने न केवल उसकी पुकार सुनी, बल्कि उसकी बांहें थामकर उसे भवसागर की लहरों से सुरक्षित बाहर निकाला। अंतरा में इस बात का सुंदर वर्णन है कि जब साधक को चरणों की धूल मिल जाती है, तो उसे संसार की किसी अन्य वस्तु की लालसा नहीं रह जाती। यही पूर्ण शरणागति या आत्मसमर्पण ही सच्ची भक्ति का मूल सार है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

खाटू श्याम बाबा जिन्हें शीश के दानी और हारे का सहारा कहा जाता है, उनकी आराधना का कलयुग में विशेष महत्व है। महाभारत काल में बर्हिबरीक के रूप में अपनी महान परीक्षा देने वाले और भगवान श्री कृष्ण से वरदान प्राप्त करने वाले खाटू श्याम आज करोड़ों श्रद्धालुओं के आस्था के केंद्र हैं। यह भजन इस बात का प्रतीक है कि खाटू श्याम केवल पत्थरों में नहीं, बल्कि अपने हर एक सच्चे भक्त के हृदय में वास करते हैं। इस भजन को गाने या सुनने से मन को असीम शांति मिलती है और मानसिक तनाव, अवसाद तथा अकेलेपन से जूझ रहे व्यक्ति को आध्यात्मिक संबल प्राप्त होता है। एकांत में बैठकर या सामूहिक संकीर्तन के दौरान इस भजन का गान करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भगवान के प्रति अटूट विश्वास मजबूत होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत के लिए किसी निश्चित समय की पाबंदी नहीं होती, फिर भी कुछ विशेष अवसरों पर इस भजन का गान या श्रवण विशेष फलदायी माना जाता है:

  • प्रातःकाल एवं संध्या वंदना: घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करने के पश्चात शांत मन से इस भजन को सुनने या गुनगुनाने से पूरा दिन सकारात्मक और ऊर्जावान रहता है।
  • खाटू श्याम संकीर्तन और जागरण: मासिक एकादशी, द्वादशी या फाल्गुनी मेलों के दौरान होने वाले सत्संग और जागरण में इस भजन का सामूहिक गान माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना देता है।
  • व्यक्तिगत साधना के समय: जब भी साधक का मन विचलित हो या जीवन में कठिनाइयां आ रही हों, तब इस भजन को एकाग्रचित्त होकर सुनने से आत्मबल बढ़ता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में खाटू श्याम बाबा हैं, जिन्हें भगवान श्री कृष्ण का ही कलयुग का रूप माना जाता है। इसके साथ ही, इस भजन को अपनी सुरीली और भावपूर्ण आवाज से सजाने वाली लोकप्रिय भजन गायिका सिमरन कौर हैं, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से अनगिनत भक्तों को खाटू श्याम के चरणों से जोड़ा है। संतों और भक्तों की परंपरा में ऐसे भजनों का विशेष स्थान रहा है जो सीधे साधारण मनुष्य के हृदय को स्पर्श करते हैं और उसे भगवान की ओर उन्मुख करते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदರ್ಭ एवं भाव
सांवरे श्याम वर्ण वाले श्री कृष्ण / खाटू श्याम भक्त का अपने प्रिय आराध्य के प्रति प्रेमसिक्त संबोधन
मतलब के मेले स्वार्थी रिश्ते और दुनियादारी संसार की नश्वरता और स्वार्थपरता का प्रतीक
चरणों की धूल इश्वर के चरणों की रज परम पवित्रता और मोक्ष प्राप्ति का साधन
शरणागति पूर्ण समर्पण अपनी रक्षा का भार पूरी तरह भगवान पर छोड़ देना

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की प्रत्येक पंक्ति साधक के जीवन के उतार-चढ़ाव और उसकी आध्यात्मिक यात्रा को दर्शाती है:

  • "किसको कहूं मैं अपना, यहाँ कौन है पराया" - यह मोह माया के संसार में अकेलेपन का बोध कराता है जहाँ हर रिश्ता स्वार्थ पर आधारित है।
  • "मैंने तो सांवरे तुझको ही, अपना बना के पाया" - जब संसार धोखा देता है, तब साधक भगवान को अपना सबसे करीबी और सच्चा साथी पाता है।
  • "तूने ही थामी बांहें, जब कोई काम ना आया" - कठिन समय में केवल भगवान ही हाथ पकड़कर नैया पार लगाते हैं, जैसा कि श्री हनुमान चालीसा के पाठ से भी हमें संकट मोचन का बल मिलता है।
  • "अब और ना कुछ चाहूँ, बस तेरा प्यार मिले" - भक्त को भौतिक सुखों की लालसा समाप्त हो जाती है और वह केवल प्रभु प्रेम की भीख मांगता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह अत्यंत लोकप्रिय भजन प्रसिद्ध भजन गायिका सिमरन कौर द्वारा गाया गया है, जो अपनी मधुर आवाज और भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए जानी जाती हैं।

यह भजन कलियुग के अवतार भगवान खाटू श्याम (श्री कृष्ण के रूप बर्हिबरीक) को समर्पित है।

आप इसे सुबह की पूजा के समय, शाम के वक्त, एकादशी के पावन अवसर पर या जब भी आपका मन अशांत हो, सुन सकते हैं।

इस भजन का मुख्य संदेश संसार के झूठे रिश्तों से ऊपर उठकर भगवान खाटू श्याम के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति रखना है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री प्रामाणिक भक्ति परंपरा, खाटू श्याम महिमा और श्रोताओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इसमें भजन के सटीक बोल, सरल हिंदी अर्थ और आध्यात्मिक गहराई को समाहित किया गया है। यह संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है जो पाठकों को उच्च कोटि का devotional content प्रदान करती है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • खाटू श्याम जी की पौराणिक कथाएं एवं पारंपरिक लोक गाथाएं
  • भक्ति साहित्य एवं संकीर्तन संग्रह
  • सिमरन कौर द्वारा प्रस्तुत मूल भजन ऑडियो एवं वीडियो एल्बम

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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