Ram Bhajan

हे राम तू ही बिगाड़े तू ही सवारे (Hey Ram Tu Hi Bigade Tu Hi Saware Lyrics in Hindi) - Shri Ram Bhajan - Bhaktilok

743 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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हे राम तू ही बिगाड़े तू ही सवारे (Hey Ram Tu Hi Bigade Tu Hi Saware Lyrics in Hindi) - Shri Ram Bhajan

प्रकाशित तिथि: 2023/12/20 | अपडेटेड: 2026/03/30 | श्रेणी: राम भजन | लेखक: भक्तिकुल संकलन टीम

भगवान श्री रामचंद्र जी की महिमा अपरंपार है और उनका पावन नाम जपते ही मनुष्य के जीवन के सभी कष्ट और बाधाएं स्वतः दूर होने लगती हैं। "हे राम तू ही बिगाड़े तू ही सवारे" एक ऐसा अत्यंत लोकप्रिय और कर्णप्रिय श्री राम भजन है, जो भक्तों के हृदय में भगवान के प्रति अगाध श्रद्धा, समर्पण और विश्वास की भावना को जागृत करता है। सनातन संस्कृति और रामभक्ति की परंपरा में तुलसीदासजी, सूरदासजी और कबीरदासजी जैसे संतों ने राम नाम को सर्वोपरी बताया है। यह भजन विशेष रूप से इस सत्य को रेखांकित करता है कि इस चराचर जगत में भगवान श्री राम ही हमारे माता-पिता, हमारे पालक और हमारे भाग्य विधाता हैं। जब मनुष्य चारों तरफ से निराश हो जाता है और उसे कोई मार्ग नहीं सूझता, तब केवल रघुकुल नंदन का स्मरण ही उसे भवसागर से पार लगाता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण बोल, हिंदी अर्थ, आध्यात्मिक संदर्भ, गाने की विधि और जीवनोपयोगी संदेशों पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि साधक इसका पूरा आध्यात्मिक लाभ उठा सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

|| मखुड़ा (स्थाई) ||

हे राम हे राम, जग में साचो तेरो नाम,

हे राम, हे राम, हे राम हे राम।

हे राम तू ही बिगाड़े तू ही सवारे, इस जग के सारे काम, हे राम हे राम।

|| प्रथम अंतरा ||

तू ही माता, तू ही पिता है,

तू ही माता, तू ही पिता है,

तू ही तो है, राधा का श्याम, हे राम हे राम।

|| द्वितीय अंतरा ||

तू अंतर्यामी, सबका स्वामी,

तू अंतर्यामी, सबका स्वामी,

तेरे चरणों में, चारो धाम, हे राम हे राम।

|| तृतीय अंतरा ||

तू ही बिगड़े, तू ही सवारे,

तू ही बिगड़े, तू ही सवारे,

इस जग के, सारे काम, हे राम हे राम।

|| चतुर्थ अंतरा ||

तू ही जगदाता, विश्वविधता,

तू ही जगदाता, विश्वविधता,

तू ही सुबह, तू ही शाम, हे राम हे राम।

|| समापन ||

हे राम हे राम, जग में साचो तेरो नाम,

हे राम, हे राम, हे राम हे राम।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भगवान श्री राम की सर्वव्यापकता और उनकी असीम कृपा का सुंदर वर्णन करता है। भजन की प्रत्येक पंक्ति भक्त और भगवान के उस अद्वैत संबंध को दर्शाती है जहाँ भक्त अपने आराध्य को ही अपना सब कुछ मानता है।

"हे राम हे राम, जग में साचो तेरो नाम:" इस संसार में मनुष्य जो कुछ भी अर्जित करता है - धन, वैभव, यश और संबंध - वह सब नश्वर और नाशवान है। इस असार संसार में यदि कोई शाश्वत सत्य है, तो वह केवल प्रभु श्री राम का पावन नाम है।

"तू ही माता, तू ही पिता है, तू ही तो है राधा का श्याम:" भारतीय सनातन दर्शन में ईश्वर ही माता और पिता दोनों रूपों में जीव का पालन-पोषण करता है। यहाँ अद्वैत भाव को दर्शाते हुए राम और कृष्ण को एक ही ब्रह्म का अलग-अलग स्वरूप माना गया है, जो भक्तों को यह संदेश देता है कि नाम रूप अनेक हैं परंतु परम तत्व एक ही है।

"तू अंतर्यामी, सबका स्वामी, तेरे चरणों में चारों धाम:" भगवान घट-घट की बात जानने वाले अंतर्यामी हैं। तीर्थों की यात्रा के लिए लोग कहाँ-कั่น भटकते हैं, परंतु सच्चा सुख और मोक्ष तो प्रभु श्री राम के चरणों की शरण में जाने से ही प्राप्त होता है।

"तू ही बिगड़े, तू ही सवारे, इस जग के सारे काम:" जीवन में आने वाली विपत्तियां, असफलताएं और बिगड़े हुए हालात केवल भगवान की कृपा से ही ठीक हो सकते हैं। जब मनुष्य अपना अहंकार छोड़कर सब कुछ भगवान पर छोड़ देता है, तो प्रभु उसके सारे कार्य स्वतः संवार देते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • परम शांति और मानसिक संबल: इस भजन का निरंतर गायन या श्रवण करने से मन की उथल-पुथल शांत होती है और व्यक्ति में कठिन परिस्थितियों से लड़ने की मानसिक शक्ति उत्पन्न होती है।
  • अहंकार का शमन: यह भजन साधक को यह सिखाता है कि वह अपने पुरुषार्थ पर नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा पर भरोसा रखे।
  • भक्ति मार्ग का सुगमीकरण: जटिल दार्शनिक सिद्धांतों को सरल शब्दों में पिरोकर सामान्य जनमानस तक रामभक्ति पहुँचाना इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता है।
  • समान रूप से उपयोगी: इसे सुबह की प्रार्थना, संध्या आरती, भजन संध्या, या किसी भी शुभ अवसर पर आसानी से गाया जा सकता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए उचित विधि और समय का ध्यान रखना आवश्यक है:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं प्रातःकाल: सूर्योदय से पूर्व या सुबह स्नान के पश्चात पूजा घर में दीप प्रज्वलित कर इस भजन का गान करने से पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है।
  • संध्या वंदन: शाम के समय गोधुली बेला में जब घर में दीपक जलाया जाता है, तब परिवार के साथ मिलकर इस भजन का संकीर्तन करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
  • सामूहिक सत्संग: राम नवमी, दीपावली, या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के दौरान सामूहिक रूप से ताली बजाकर इस भजन को गाने से सामूहिक चेतना जागृत होती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के मुख्य आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम हैं, जिन्हें त्रेतायुग में धर्म की स्थापना और आदर्श जीवन जीने के लिए जाना जाता है। साथ ही, भजन में भगवान कृष्ण का भी उल्लेख मिलता है जो यह दर्शाता है कि राम और कृष्ण में कोई भेद नहीं है। तुलसीदास, सूरदास और कबीर जैसे महान संतों की परंपरा ने ही भारत में इस प्रकार के सरल और भावपूर्ण भजनों की नींव रखी है, जो आज भी घर-घर में गाए जाते हैं। आप हमारे राम भजन संग्रह में ऐसे ही अन्य मधुर भजनों का आनंद ले सकते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल हिंदी और अवधी-ब्रज मिश्रित लोक भाषा शैली में रचा गया है। इसमें अनुप्रास और यमक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जो इसकी लय और ताल को और अधिक आकर्षक बनाता है। भजन की तुकबंदी इतनी मधुर है कि छोटे बच्चे से लेकर वृद्धजन तक इसे बहुत आसानी से याद कर सकते हैं और संगीत की धुनों के साथ गा सकते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें निम्नलिखित जीवन मूल्य प्राप्त होते हैं:

  1. अटूट विश्वास: कठिन समय में भी ईश्वर पर भरोसा न खोना।
  2. शरणागति भाव: अपने जीवन की डोर भगवान के हाथों में सौंप देना।
  3. समभाव: सभी देवी-देवताओं और रूपों में एक ही परमात्मा के दर्शन करना।
  4. निसंकोच प्रार्थना: अपनी समस्याओं को संकोच छोड़कर अपने आराध्य के सामने रखना।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
साचो तेरो नाम सच्चा केवल तुम्हारा नाम है संसार की नश्वरता और भगवान के नाम की शाश्वत सत्यता
अंतर्यामी मन की बात जानने वाला ईश्वर की सर्वज्ञता का प्रतीक
जगदाता संसार को पालन करने वाला प्रभु का पालक स्वरूप
विश्वविधता संपूर्ण ब्रह्मांड के रचयिता सृष्टि के नियंत्रणकर्ता के रूप में राम

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"हे राम हे राम, जग में साचो तेरो नाम..." - इस पंक्ति में कवि यह उद्घोष कर रहा है कि इस भौतिक जगत में रिश्ते-नाते और धन-दौलत सब छलावा हैं, केवल राम का नाम ही अंतिम सत्य है जो मृत्यु के उपरांत भी साथ रहता है।

"तू ही माता, तू ही पिता है..." - जीव जब इस संसार में अकेला महसूस करता है, तो भगवान ही उसे माता के समान वात्सल्य और पिता के समान सुरक्षा प्रदान करते हैं।

"तू अंतर्यामी, सबका स्वामी..." - परमात्मा किसी बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि हमारे हृदय के भीतर के भावों से प्रसन्न होते हैं क्योंकि वे सब कुछ जानने वाले हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

"आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्। लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नमाम्यहम्।।"
"श्री राम राम रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्रनाम तत्तुल्यं राम नाम वरानने।।"

इन पावन श्लोकों का स्मरण इस भजन के साथ करने से राम नाम की महिमा और अधिक बढ़ जाती है। भगवान राम के पावन चरित्र के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया पर श्री राम लेख पढ़ सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम हे राम तू ही बिगाड़े तू ही सवारे (Hey Ram Tu Hi Bigade Tu Hi Saware)
आराध्य देवता मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम
श्रेणी / शैली पारंपरिक श्री राम भजन / लोक संकीर्तन
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-अवधी मिश्रित
मुख्य भाव शरणागति, समर्पण, विश्वास और विनय
उपयुक्त अवसर प्रातःकालीन वंदन, संध्या आरती, सत्संग, रामनवमी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम को समर्पित है, जिसमें उनके पालक और संकटमोचक स्वरूप का गुणगान किया गया है।

इस भजन को प्रातःकाल पूजा के समय, संध्या वंदन के दौरान या किसी भी सामूहिक सत्संग में अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

हाँ, इसे व्यक्तिगत साधना, ध्यान या घर पर पूजा करते समय अकेले भी बहुत शांति और भाव के साथ गाया जा सकता है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को अपने जीवन की हर परिस्थिति में भगवान राम पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए क्योंकि वही हमारे जीवन को संवारने वाले हैं।

सनातन ग्रंथों और संतों के वचनों के अनुसार, सच्चे मन और अटूट श्रद्धा के साथ राम नाम का स्मरण करने से बड़े से बड़ा संकट भी टल जाता है।

यह पंक्ति भारतीय अद्वैत दर्शन को दर्शाती है जहाँ सभी देवी-देवता और उनके नाम एक ही परम ब्रह्म परमात्मा के भिन्न-भिन्न स्वरूप माने गए हैं।

अवश्य! बच्चों में संस्कार और संगीत के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए यह अत्यंत सरल और प्रेरणादायक भजन है।

आप हमारी वेबसाइट Bhaktilok के राम भजन अनुभाग में ऐसे ही अनगिनत लोकप्रिय और पारंपरिक भजन पा सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ और आध्यात्मिक व्याख्या पारंपरिक स्रोतों, लोक परंपराओं और संतों के वचनों पर आधारित हैं ताकि पाठकों को शुद्ध और प्रामाणिक सामग्री मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ

  • श्री रामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास जी
  • पारंपरिक लोक भजन संकलन एवं मौखिक रामभक्ति परंपरा
  • सनातन धर्म ग्रंथ एवं स्तोत्र संग्रह

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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