Krishna Bhajan

आये श्याम धणी सरकार लीले पे असवार री | Aaye Shyam Dhani Sarkar Lyrics in Hindi - Bhaktilok

67 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:
कृष्ण भजन • खाटू श्याम भजन

आये श्याम धणी सरकार लीले पे असवार री | Aaye Shyam Dhani Sarkar Lyrics in Hindi

अपडेटेड: मार्च 2026  |  संकलित एवं प्रस्तुत: भक्तलोक टीम  |  पाठ अवधि: 6-8 मिनट

खाटू श्याम बाबा के दरबार में जब भी फाल्गुन महोत्सव या किसी पावन संकीर्तन का आयोजन होता है, तो पूरा वातावरण श्याम बाबा के जयकारों और मधुर भजनों से गूंज उठता है। खाटू नरेश बर्बरीक जी, जिन्हें कलयुग के अवतारी 'हारे का सहारा' बाबा श्याम के रूप में पूजा जाता है, उनके भक्तों की निष्ठा और प्रेम का प्रतीक है यह लोकप्रिय भजन "आये श्याम धणी सरकार लीले पे असवार री"। मनु शुक्ला द्वारा रचित और स्वरबद्ध यह भजन खाटू श्याम जी की महिमा, उनके नीले घोड़े (लीले), उनके सुंदर श्रृंगार और भक्तों के साथ उनके अगाध प्रेम का अत्यंत मनमोहक वर्णन करता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, सरल हिंदी अर्थ, भजन से जुड़े आध्यात्मिक संदेश और गायन की परंपरा का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ आये श्याम धणी सरकार लीले पे असवार री ॥

आये श्याम धणी सरकार लीले पे असवार री,
झूमो नाचो मंगल गाओ जय बोलो घनश्याम की!
बाजे बाजे ढोल मंजीरा और मुरली की तान री,
झूमो नाचो मंगल गाओ जय बोलो घनश्याम की!

आया है जन्मदिन बाबा मेरे श्याम का,
हारे का सहारा है वो माँ का प्यारा लाडला!
धरती अम्बर चाँद सितारे मिलके रंग बरसाओ री,
झूमो नाचो मंगल गाओ जय बोलो घनश्याम की!

सज धज बैठ्यो बाबा अलग है शान री,
आओ भक्तों आओ मिलके नज़र उतारो री!
इनके घूंघर वाले बाल मूंछो पर ये ताव री,
कजरारे इनके नैना पे बलिहारी जाऊं री!

मीठे मीठे भजना से बाबा को रिझाऊंगी,
खिचड़ा का भोग बनाके हाथों से खिलाऊंगी!
मन्नू आस ये लेके आई बाबा विपदा तारो जी,
झूमो नाचो मंगल गाओ जय बोलो घनश्याम की!

गीत एवं स्वर (Singer & Writer): मनु शुक्ला (Manu Shukla)

संगीत (Music): कृष्णा पवार (Krishna Pawar)

मिश्रण (Mixing & Mastering): हिमांशु जैन (Himanshu Jain)

आशीर्वाद (Blessings): प्रमोद शुक्ला एवं किरण शुक्ला

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भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन खाटू श्याम जी के प्रति अनन्य प्रेम, उनके जन्मोत्सव के उल्लास और एक भक्त की अपने आराध्य के प्रति समर्पण की भावना को अत्यंत सुंदर शब्दों में व्यक्त करता है। भजन के प्रत्येक चरण में श्याम बाबा की अद्भुत छवि और उनके दरबार के उत्सव का सजीव चित्रण मिलता है:

प्रथम चरण: श्याम सरकार का आगमन और उत्सव

भजन की शुरुआत इस पावन घोषणा के साथ होती है कि स्वयं श्याम धणी सरकार अपने प्रसिद्ध नीले घोड़े (लीला घोड़ा) पर सवार होकर भक्तों के बीच पधार रहे हैं। इस अलौकिक आगमन पर सभी भक्तों से आह्वान किया जाता है कि वे आनंदित होकर नाचें, मंगल गीत गाएं और घनश्याम की जय-जयकार करें। ढोल, मंजीरों और मुरली की मधुर तानों के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।

द्वितीय चरण: बाबा का जन्मोत्सव और हारे का सहारा

रचनाकार आगे बताते हैं कि यह अवसर बाबा श्याम के जन्मोत्सव का है। खाटू नरेश को 'हारे का सहारा' और अपनी माता (मूर्वी/बरिक) के प्यारे लाडले के रूप में संबोधित किया गया है। इस उत्सव में केवल धरती के मनुष्य ही नहीं, बल्कि अंबर, चांद और सितारे भी मिलकर खुशियों के रंग बरसा रहे हैं, क्योंकि कलयुग के देवता का प्रकटोत्सव भक्तों के लिए सबसे बड़ा पर्व है।

तृतीय चरण: मनमोहक श्रृंगार और रूप का वर्णन

श्याम बाबा के दरबार में सज-धज कर बैठने की शैली और उनकी निराली शान का वर्णन करते हुए भक्त कहते हैं कि उनके घंघर वाले बाल, मूंछों पर दिया जाने वाला ताव और कजरारे नैन इतने आकर्षक हैं कि उन पर बार-बार बलिहारी जाने का मन करता है। भक्त आपस में मिलकर उनकी नजर उतारने की बात कहते हैं, जो भारतीय संस्कृति में अगाध स्नेह का प्रतीक है।

चतुर्थ चरण: समर्पित भाव और भोग की कामना

अंतिम चरणों में गायिका/भक्त मनु आस लेकर कहती है कि वह मीठे-मीठे भजनों से बाबा को रिझाएगी और अपने हाथों से बनाया हुआ 'खिचड़ा' (श्याम बाबा का प्रिय भोग) उन्हें प्रेम से खिलाएगी। मन में अटूट विश्वास है कि बाबा श्याम उनकी सभी विपदाओं और संकटों को अवश्य दूर करेंगे।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

कलयुग के अवतारी

यह भजन बर्बरीक यानी खाटू श्याम जी की उस महिमा को उजागर करता है जो हारे हुए इंसानों को जीवन में नई उम्मीद और संबल प्रदान करते हैं।

उत्सव का आनंद

फाल्गुन मास के मेलों और बाबा के जन्मोत्सव के दौरान इस भजन को गाने से सत्संग और संकीर्तन का माहौल अत्यंत ऊर्जावान हो जाता है।

वात्सल्य और प्रेम

भक्त और भगवान के बीच स्वामी-सेवक का रिश्ता न होकर यहाँ एक आत्मीय, वात्सल्य और सखा भाव झलकता है, जहाँ भोग और सेवा का विशेष महत्व है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पंक्ति सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
श्याम धणी श्याम के स्वामी / खाटू नरेश भगवान श्री कृष्ण के कलयुग में पूजित रूप बर्बरीक जी के लिए
लीले पे असवार नीले घोड़े पर सवार बाबा श्याम की सवारी 'लील घोड़ा' जिस पर वे विराजमान होकर चलते हैं
हारे का सहारा जो निराश या हारे हुए लोगों को बल दें खाटू श्याम जी की सबसे प्रसिद्ध उपाधि
खिचड़ा का भोग बाजरे और दाल से बना पारंपरिक पावन प्रसाद खाटू श्याम जी को अर्पित किए जाने वाला प्रिय भोग
नज़र उतारो बुरी नजर से बचाने की लोक परंपरा बाबा के अति सुंदर रूप के प्रति अगाध प्रेम प्रकटीकरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय भजन की रचना और गायन दोनों मनु शुक्ला (Manu Shukla) द्वारा किए गए हैं। इसके संगीत निर्देशक कृष्णा पवार हैं।

खाटू श्याम जी के नीले रंग के घोड़े को प्रेम से 'लीला घोड़ा' या 'लीलण' कहा जाता है, इसीलिए बाबा को 'लीले पे असवार' कहा जाता है।

खाटू श्याम बाबा को चूरमा, खीर, और बाजरे के खिचड़े का भोग अति प्रिय है, जिसका उल्लेख इस भजन में भी किया गया है।

यह भजन खाटू श्याम जी के वार्षिक फाल्गुन मेले, एकादशी के जागरण, बाबा के जन्मोत्सव और घर पर होने वाले किसी भी श्याम संकीर्तन में बड़े उत्साह के साथ गाया जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख पारंपरिक भक्ति साहित्य, खाटू श्याम संकीर्तन संस्कृति और उपलब्ध ऑडियो-विजुअल स्रोतों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य भक्तों को प्रामाणिक भजन लिरिक्स और उसका सहज आध्यात्मिक भावार्थ प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ: खाटू श्याम मंदिर परंपरा, लोक भजन संकलन, और संगीतकार मनु शुक्ला द्वारा प्रस्तुत मूल ऑडियो ट्रैक।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Sep 2026

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