Ram Bhajan

नजरे रघुवर की (Ek Baar Jo Raghuvar Ki Nazron Ka Ishara Ho Jaaye Lyrics in Hindi) - by Rohit Tiwari Baba Shri Ram Bhajan - Bhaktilok

236 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"नजरे रघुवर की" (Ek Baar Jo Raghuvar Ki Nazron Ka Ishara Ho Jaaye) मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी की असीम अनुकंपा, करुणा और अनन्य शरणागति के भाव को समर्पित एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी भजन है। इस भजन को सुप्रसिद्ध भजन गायक रोहित तिवारी 'बाबा' ने अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज में गाकर जन-जन के हृदय में स्थापित कर दिया है। यह भजन मूलतः समर्पण, विनय और करुणा के भाव (विनय और शरणागति भाव) से ओतप्रोत है, जिसमें एक भक्त अपने आराध्य प्रभु श्री राम से केवल एक बार अपनी कृपादृष्टि डालने की प्रार्थना करता है। सनातन धर्म में भगवान की कृपादृष्टि या 'नज़र' का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है; माना जाता है कि यदि प्रभु की एक तिरछी नज़र भी भक्त पर पड़ जाए, तो उसका जीवन धन्य हो जाता है और वह भवसागर से पार उतर जाता है। इस भजन का गायन विशेष रूप से रामनवमी, सुंदरकांड पाठ, हनुमान जन्मोत्सव, दैनिक संध्या आरती और सत्संग के अवसरों पर किया जाता है। यह भजन न केवल मन को असीम शांति प्रदान करता है, बल्कि साधक को सांसारिक मोह-माया से दूर कर प्रभु के चरणों में लीन होने की प्रेरणा देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

एक बार जो रघुवर की नजरों का इशारा हो जाये।
तेरी लगन में खो जाऊं दुनिया से किनारा हो जाये।।


सरकार तुम्हारी महफ़िल में तक़दीर बनाई जाती हैं।
मेरी भी बिगड़ी बन जाये एहसान तुम्हारा हो जाये।।

एक बार जो रघुवर की नजरों का इशारा हो जाये।
तेरी लगन में खो जाऊं दुनिया से किनारा हो जाये।।


ये श्री राम का मंदिर हैं भागीरथी गंगा बहती हैं।
सब लोग यहाँ पर तरते हैं भव पार सभी का हो जाये।।

एक बार जो रघुवर की नजरों का इशारा हो जाये।
तेरी लगन में खो जाऊं दुनिया से किनारा हो जाये।।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य संदेश पूर्ण आत्मसमर्पण और प्रभु की असीम कृपा पर अटूट विश्वास है। भक्त अपने आराध्य श्री राम से प्रार्थना करता है कि हे रघुवर! यदि आपकी कृपादृष्टि का एक छोटा सा इशारा भी मुझे मिल जाए, तो मेरा यह नश्वर जीवन सफल हो जाएगा। "तेरी लगन में खो जाऊं दुनिया से किनारा हो जाये" पंक्ति के माध्यम से भक्त सांसारिक बंधनों, मोह-माया और भौतिक सुखों से विरक्ति की कामना करता है। वह चाहता है कि उसका मन पूरी तरह से प्रभु के चरणों में लीन हो जाए और उसे इस संसार के प्रपंचों से मुक्ति मिल जाए।

भजन के दूसरे अंतरे में भक्त कहता है कि "सरकार तुम्हारी महफ़िल में तक़दीर बनाई जाती हैं"। यहाँ 'सरकार' शब्द प्रभु श्री राम के लिए प्रयुक्त हुआ है, जो संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी हैं। उनकी महफ़िल यानी उनके दरबार या सत्संग में दीन-दुखियों की बिगड़ी हुई तकदीर संवर जाती है। भक्त अत्यंत विनम्रतापूर्वक याचना करता है कि हे प्रभु! मुझ अकिंचन पर भी अपनी दया करें, ताकि मेरी भी बिगड़ी हुई तकदीर बन जाए और मुझ पर आपका यह महान एहसान हो।

अंतिम अंतरे में प्रभु के मंदिर और उनके धाम की महिमा का वर्णन है। भक्त कहता है कि यह श्री राम का पावन मंदिर है, जहाँ ज्ञान और भक्ति की भागीरथी गंगा निरंतर बहती रहती है। जिस प्रकार गंगा में स्नान करने से पापी भी पवित्र हो जाते हैं, उसी प्रकार प्रभु के इस पावन दरबार में आने वाले सभी भक्तों का उद्धार हो जाता है। भक्त कामना करता है कि इस पावन स्थल पर आने वाले सभी जीवों का कल्याण हो और वे इस संसार रूपी भवसागर से पार उतर जाएं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन भारतीय भक्ति परंपरा के 'विनय' और 'प्रपत्ति' (शरणागति) मार्ग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • शरणागति का भाव: भजन की प्रत्येक पंक्ति भक्त के अहंकार को शून्य कर प्रभु के चरणों में पूर्ण समर्पण को दर्शाती है।
  • कृपा की महिमा: इसमें कर्मकांडों से अधिक प्रभु की कृपादृष्टि (नज़र के इशारे) को महत्व दिया गया है, जो पुष्टि मार्ग और रामभक्ति शाखा की मुख्य विशेषता है।
  • सांसारिक विरक्ति: "दुनिया से किनारा हो जाये" के माध्यम से यह भजन साधक को वैराग्य और ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम की ओर अग्रसर करता है।
  • सामूहिक संकीर्तन के लिए उपयुक्त: इसकी सरल लय और सुगम शब्दावली के कारण इसे सामूहिक रूप से गाना अत्यंत सरल और आनंदमयी होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए कोई भी समय अनुचित नहीं है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण का विशेष लाभ निम्नलिखित परिस्थितियों में मिलता है:

  • प्रातःकाल और संध्याकाल की पूजा: दैनिक पूजा के समय इस भजन को गाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन शांत रहता है।
  • सत्संग और सुंदरकांड पाठ: सुंदरकांड या श्री राम रक्षा स्तोत्र के पाठ के उपरांत इस भजन का सामूहिक संकीर्तन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • रामनवमी और विशेष पर्व: चैत्र
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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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