Radha Kriya Kataksh Stotram

श्री भगवती स्तोत्रम (Shri Bhagwati Stotram Lyrics in Hindi) - जय भगवति देवि नमो वरदे Bhagwati stotram - Bhaktilok

235 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री भगवती स्तोत्रम देवी दुर्गा के उन दिव्य रूपों का आह्वान है, जो सृष्टि के कल्याण, पापों के विनाश और भक्तों को अभय प्रदान करने के लिए सदैव तत्पर रहती हैं। 'जय भगवति देवि नमो वरदे' के उद्घोष के साथ प्रारंभ होने वाला यह स्तोत्र शक्ति उपासना का एक अत्यंत प्रभावशाली माध्यम है। भगवती, जो स्वयं पराशक्ति हैं, वे महिषासुर जैसी आसुरी प्रवृत्तियों का मर्दन करने वाली और भक्तों के हृदय में ज्ञान का प्रकाश भरने वाली हैं। इस स्तोत्र का पाठ करने से साधक के जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है, मानसिक शांति प्राप्त होती है और समस्त प्रकार के भय एवं दरिद्रता का नाश होता है। यह स्तोत्र न केवल देवी की स्तुति है, बल्कि उनके प्रति पूर्ण समर्पण का एक भावपूर्ण निवेदन भी है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

जय भगवति देवि नमो वरदे,
जय पापविनाशिनि बहुफलदे ।
जय शुम्भनिशुम्भकपालधरे,
प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे ॥१॥

जय चन्द्रदिवाकरनेत्रधरे,
जय पावकभूषितवक्त्रवरे ।
जय भैरवदेहनिलीनपरे,
जय अन्धकदैत्यविशोषकरे ॥२॥

जय महिषविमर्दिनि शुलकरे,
जय लोकसमस्तकपापहरे ।
जय देवि पितामहविष्णुनते,
जय भास्करशक्रशिरोऽवनते ॥३॥

जय षण्मुखसायुध ईशनुते,
जय सागरगामिनि शम्भुनुते ।
जय दुःखदरिद्रविनाशकरे,
जय पुत्रकलत्रविवृद्धिकरे ॥४॥

जय देवि समस्तशरीरधरे,
जय नाकविदर्शिनि दुःखहरे ।
जय व्याधिविनाशिनि मोक्षकरे,
जय वाञ्छितदायिनि सिद्धिवरे ॥५॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस स्तोत्र में देवी के विराट स्वरूप का वर्णन है। प्रथम श्लोक में भक्त देवी को वरदान देने वाली और पापों का नाश करने वाली कहकर संबोधित करता है। देवी शुम्भ और निशुम्भ जैसे राक्षसों का संहार करने वाली हैं, जो हमारे भीतर के अहंकार और अज्ञान के प्रतीक हैं।

द्वितीय श्लोक में देवी के नेत्रों को सूर्य और चंद्रमा के समान तेजस्वी बताया गया है। वे अग्नि के समान मुख वाली हैं, जो अज्ञान के अंधकार को जला देती हैं। तृतीय श्लोक में महिषासुर मर्दिनी के रूप में उनकी वीरता का गान है। वे ब्रह्मा और विष्णु द्वारा भी पूजित हैं।

चतुर्थ और पंचम श्लोक में भक्त अपनी सांसारिक और आध्यात्मिक कामनाओं की पूर्ति हेतु देवी से प्रार्थना करता है। देवी दुःख, दरिद्रता और व्याधियों का नाश करने वाली हैं। वे मोक्ष प्रदान करने वाली और भक्तों की सभी इच्छाओं को सिद्ध करने वाली परम शक्ति हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • शक्ति उपासना: यह स्तोत्र देवी दुर्गा के उग्र और सौम्य दोनों रूपों का समन्वय है।
  • पाप विनाश: स्तोत्र का नियमित पाठ करने से मन के विकार और संचित पापों का क्षय होता है।
  • अभय प्राप्ति: यह स्तोत्र साधक को निर्भय बनाता है और जीवन की बाधाओं को दूर करता है।
  • सांस्कृतिक महत्व: नवरात्रि और देवी पूजन के समय इसका पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस स्तोत्र का पाठ ब्रह्ममुहूर्त में या संध्याकाल में करना अत्यंत शुभ होता है।

  • शुद्ध होकर लाल आसन पर बैठें।
  • देवी की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • पूरे भक्ति भाव से स्तोत्र का पाठ करें।
  • पाठ के अंत में देवी की आरती करें और क्षमा प्रार्थना करें।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण जानकारी
स्तोत्र का नामश्री भगवती स्तोत्रम
आराध्यमाँ भगवती (दुर्गा)
मुख्य भावशरणागति एवं स्तुति
भाषासंस्कृत
उपयुक्त अवसरनवरात्रि, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इसका पाठ प्रतिदिन सुबह या संध्याकाल में किया जा सकता है। नवरात्रि के दौरान इसका पाठ विशेष रूप से फलदायी है।

हाँ, पूर्ण श्रद्धा और पवित्रता के साथ कोई भी भक्त इसका पाठ कर सकता है।

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संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ: पौराणिक ग्रंथ एवं देवी स्तुति संग्रह।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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