Parvati Stotram

किर्तन करते करते मैं तुझमे खो जाऊं (kirtan karte karte Mai Tujhame Kho Jaau Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan - Bhaktilok

169 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रस्तावना एवं परिचय

विनियोग, न्यास एवं ध्यान श्लोक

इस भजन के माध्यम से शिव की दिव्यता में खो जाने की प्रार्थना की गई है, जो भक्ति का परम स्रोत है।

किर्तन करते करते मैं तुझमें खो जाऊं, सब भूल जाऊं, तेरा नाम लूँ। बिन तेरे जीना, पर मुझे है ना कोई जाँ। तेरा जो ध्यान लगाए वो हर दर्द मिटाए। आँखें मेरी हैं स्याह, तू जो संग मेरे आए। भक्ति का यह सागर, तू जो संग मेरे आए। जीवन की हर कश्ती तेरा नाम लगाए। मैं तुझमें खो जाऊं, हर पल तेरा ध्यान लगाऊं। दीननाथ, हरि नाथ, मैं तुझमें खो जाऊं। तेरा ध्यान लगाए, मैं जियूं तेरा जो नाम लूँ। ढूँढ़ लूँ मैं तुझको हर मन की हर चीज़ को। मैं तुझमें खो जाऊं, सब छोड़ दूं। तेरा जो ध्यान लगाए वो हर दर्द मिटाए। तुझ पर विश्वास करें, तू भूतनाथ, मैं तुझमें खो जाऊं। तेरा नाम लूँ।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय शिव के प्रति पूर्ण समर्पण और उनकी भक्ति में खो जाने की भावना है। 'किर्तन करते करते मैं तुझमें खो जाऊं' इस पंक्ति में भक्त का गहन भाव व्यक्त हो रहा है कि वह शिव की भक्ति करते-करते उनकी दिव्य स्थिति में लीन हो जाता है। इस गीत में भगवान शिव से प्रार्थना की जाती है कि भक्ति के द्वारा भक्ति का यही मार्ग उसके जीवन को सकारात्मक दिशा दे, जिससे वह जीवन के दुखों को भुला सके। 'भक्ति का यह सागर,' एक प्रतीक है उस गहरे प्रेम का, जो भक्त को शिव के साथ जोड़ता है। इसके साथ ही, भक्ति के इस सागर में डूबने के लिए भक्त की मानसिकता और एकाग्रता की भी आवश्यकता होती है।

भजन के भावार्थ में गहराई से शिव के प्रति असीम प्रेम और आस्था का अनुभव होता है। 'तू जो संग मेरे आए' इस पंक्ति में श्रद्धालु की आकांक्षा है कि शिव सदा उसके साथ रहें और उसके भक्ति-मार्ग को संतोषित करें। इसका अर्थ यह है कि जब भक्त शिव का नाम स्मरण करता है या उनका ध्यान करता है, तो वह न केवल अपने दुखों को भुला देता है, बल्कि वे शिव के प्रेम में भी खो जाता है। यह भक्ति का एक ऐसा मार्ग प्रशस्त करता है, जहां किसी भी प्रकार की चिंता या दुःख का निधन हो जाता है। इस भाव में व्यक्ति ने अपने जीवन के अस्तित्व को भगवान शिव के त्याग और प्रेम के समर्पित किया है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का एक अद्भुत चित्रण किया गया है। भक्त की यह भावना है कि अपने भीतर शिव की उपस्थिति को अनुभव करना सबसे बड़ा सुख है। 'तेरा जो ध्यान लगाए, वो हर दर्द मिटाए' का संदेश है कि जब भी भक्त शिव का ध्यान करते हैं, वे सभी दुःख और पीड़ा से मुक्त हो जाते हैं। यह भक्ति का मार्ग केवल तार्किक या भौतिक नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक विकास का एक अनुसरण है। शिव की उपासना करते समय 'आँखें मेरी हैं स्याह, तू जो संग मेरे आए' अभिव्यक्ति करती है कि शिव के समर्पण में ही वास्तविकता और भक्ति का अनुभव किया जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय संस्कृति में विशेष है, खासकर शिव भक्ति के संदर्भ में। शिव को 'महादेव' कहा जाता है, जो सभी जीवों के लिए कृपा और करुणा के प्रतीक हैं। पुराणों में शिव का ध्यान करने से अद्भुत फल प्राप्त होने की बात कही गई है। शिव का ध्यान करने से भक्त की सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और वे मानसिक शांति की अनुभूति कर पाते हैं। इस भजन में भक्त की शिव के प्रति गहरी स्नेहपूर्ण भावना दर्शाई गई है, जो उसे हर स्थिति में साहस और शक्ति प्रदान करने में सहायक होती है। इसके साथ ही, इस मंत्र की शक्ति से प्रभावित होकर भक्त अपने जीवन में संतुलन और सामर्थ्य प्राप्त कर सकता है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का नियमित जाप करने से मानसिक शांति, चिंता का निराकरण, और आध्यात्मिक विकास संभव होता है। शिव की कृपा से जीवन की कठिनाइयों का सामना करने के लिए ऊर्जा और दृढ़ता मिलती है। विशेष रूप से, जो लोग कठिन समय से गुजर रहे हैं, वे इस भजन का पाठ करके अंतर्मुखी सुख की अनुभूति कर सकते हैं। यह भक्ति से जुड़कर आत्मा को उच्चतम स्तर पर पहुंचाने में मदद करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह के समय, तुलसी के पौधे के पास या मंदिर में ध्यानपूर्वक किया जा सकता है। भक्त को दीप जलाना और पुष्प अर्पित करना चाहिए। भक्त को शांति और प्रेम के भाव से भजन को गुनगुनाते हुए ध्यान लगाना चाहिए। सही मानसिकता से शिव का नाम लेते हुए इस भजन का ध्यान करना चाहिए, जिससे अनुभव भक्ति का अनूठा रूप बन सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन 'किर्तन करते करते मैं तुझमें खो जाऊं' का अर्थ क्या है?

इस भजन का अर्थ है कि भक्ति के क्षणों में, भक्त शिव में पूरी तरह खो जाने की प्रार्थना करता है। इस क्रम में वे अपने सभी दुख-दर्द भूल जाते हैं और केवल शिव का ध्यान करते हैं।

भजन के पाठ से क्या लाभ होता है?

इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, संतुलन और सामर्थ्य का अनुभव होता है। शिव की कृपा से भक्त अपने जीवन की कठिनाइयों का सामना करने के लिए सक्षम होते हैं।

किस समय भजन का पाठ करना चाहिए?

इस भजन को सुबह या शाम के समय ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए। इस दौरान दीप जलाना और प्रेमपूर्वक शिव को अर्पित करना मददगार होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!