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खाटूवाले कृपा कर दे(Khatu Wale Kripa Kar De Lyrics in Hindi) | Sanjay Nakra Sanju - Bhaktilok

69 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तुत भजन "खाटूवाले कृपा कर दे" (Khatu Wale Kripa Kar De) कलयुग के अवतारी, भक्तों के संकटमोचक और हारे के सहारे भगवान श्री खाटू श्याम जी की आराधना में गाया जाने वाला एक अत्यंत भावपूर्ण और लोकप्रिय भजन है। इस भजन के रचयिता सुप्रसिद्ध गीतकार नंद किशोर शर्मा 'नंदू जी' हैं और इसे अपनी सुमधुर आवाज से सजाया है गायक संजय नकरा संजू ने। यह भजन पूर्णतः 'शरणागति भाव' और 'दैन्य भाव' पर आधारित है, जिसमें एक भक्त अपने आराध्य के सम्मुख अपनी असमर्थता प्रकट करते हुए उनके प्रति पूर्ण समर्पण व्यक्त करता है। खाटू श्याम जी को कलयुग में साक्षात कृष्ण का वरदान प्राप्त है, और इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी जीवन-नैया को पार लगाने के लिए प्रभु से करुणा की पुकार करता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़े शास्त्रीय प्रसंगों का गहराई से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

खिवैया नैया के कान्हा तो नैया पार होती है।
भंवर क्या ज़ोर दिखलाये कृपा पतवार होती है॥
श्याम खाटूवाले कृपा कर दे,
कृपा कर दे, कृपा कर दे।
मोहन मुरली वाले कृपा कर दे,
श्याम खाटू वाले कृपा कर दे॥


तू ही सरकार मेरा तू ही सरताज मेरा,
तू ही अंजाम मेरा तू ही आगाज़ मेरा।
भक्तों के प्यारे कृपा करदे,
श्याम खाटूवाले कृपा कर दे,
श्याम खाटू वाले कृपा कर दे॥

तू ही श्रृंगार मेरा तू ही रखवार मेरा,
तू ही आधार मेरा तू ही पतवार मेरा।
भक्तों के सहारे कृपा कर दे,
श्याम खाटूवाले कृपा कर दे,
श्याम खाटू वाले कृपा कर दे॥

मैं तो नाचीज़ मोहन तू ही हमारा जीवन,
हर पल बढ़ता ही जाए मेरी निष्ठा का बंधन।
नंदू के प्यारे कृपा कर दे,
श्याम खाटूवाले कृपा कर दे,
श्याम खाटू वाले कृपा कर दे॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मूल संदेश भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण और अटूट विश्वास है। भजन की शुरुआत में ही भक्त स्वीकार करता है कि जब जीवन रूपी नैया के खेवनहार स्वयं कन्हैया (श्रीकृष्ण/श्याम) बन जाते हैं, तो उस नैया का पार होना निश्चित हो जाता है। संसार रूपी समुद्र में चाहे कितने ही विकट भंवर (कठिनाइयां और संकट) क्यों न आएं, वे भक्त का कुछ नहीं बिगाड़ सकते, क्योंकि भगवान की कृपा ही उस नैया की पतवार बन जाती है।

भजन के अंतराओं में भक्त भगवान श्याम को अपना सब कुछ मान लेता है। वह कहता है कि हे प्रभु! आप ही मेरे राजा (सरकार) हैं और आप ही मेरे मस्तक के मुकुट (सरताज) हैं। मेरे जीवन का आरंभ (आगाज़) भी आपसे है और अंत (अंजाम) भी आप ही हैं। भक्त अपने अस्तित्व को शून्य ('नाचीज़') मानते हुए कहता है कि मेरा अपना कोई वजूद नहीं है, मेरा संपूर्ण जीवन केवल आप ही हैं। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, प्रभु के प्रति भक्त की निष्ठा और प्रेम का बंधन और अधिक सुदृढ़ होता जा रहा है। यह भजन हमें सिखाता है कि जब हम अपने अहंकार को त्यागकर भगवान के चरणों में समर्पित हो जाते हैं, तब उनकी असीम कृपा स्वतः ही हमारे जीवन को धन्य कर देती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन खाटू श्याम संकीर्तन और दैनिक पूजा में विशेष स्थान रखता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • शरणागति की पराकाष्ठा: भजन में प्रयुक्त शब्द जैसे 'नाचीज़', 'आधार', और 'रखवार' भक्त के पूर्ण समर्पण को दर्शाते हैं। यह श्रीमद्भगवद्गीता के 'सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज' के सिद्धांत को चरितार्थ करता है।
  • भक्ति रस का प्रवाह: शांत और दास्य-माधुर्य भाव से ओतप्रोत यह भजन साधक के मन में शांति और ईश्वर के प्रति अगाध प्रेम जाग्रत करता है।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: जब कोई दुखी या निराश व्यक्ति इस भजन का श्रवण या कीर्तन करता है, तो उसे यह विश्वास होता है कि संसार के भंवर से निकालने के लिए खाटू श्याम की कृपा पतवार बनकर सदैव उपस्थित है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर और विधियां अत्यधिक फलदायी मानी गई हैं:

  • एकादशी और द्वादशी तिथि: खाटू श्याम जी की पूजा में एकादशी (विशेषकर शुक्ल पक्ष की आमलकी या देवउठनी एकादशी) का अत्यधिक महत्व है। इस दिन श्याम बाबा के दरबार या घर के मंदिर में ज्योत जलाकर इस भजन का कीर्तन करना चाहिए।
  • संध्या आरती के समय: शाम के समय घर में कपूर या घी का दीपक जलाकर शांत चित्त से इस भजन को गाने से मानसिक तनाव दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
  • सामूहिक संकीर्तन: श्याम जगत में होने वाले श्री श्याम प्रभु के कीर्तन या 'जगावे' में इस भजन को सामूहिक रूप से गाने पर सामूहिक सकारात्मक तरंगों का निर्माण होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन महाभारत कालीन महान योद्धा बर्बरीक, जिन्हें आज हम श्री खाटू श्याम जी के नाम से पूजते हैं, को समर्पित है। बर्बरीक भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। उन्होंने अपनी माता को वचन दिया था कि वे युद्ध में सदैव 'हारे हुए पक्ष' का साथ देंगे। उनकी इस प्रतिज्ञा और असीम शक्ति को देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने दान में उनका शीश मांग लिया। बर्बरीक ने सहर्ष अपना शीश दान कर दिया। श्रीकृष्ण ने उनकी इस महान आहुति से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में वे उनके स्वयं के नाम 'श्याम' से पूजे जाएंगे और जो भी भक्त सच्चे मन से उनके दरबार में आएगा, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की रचना सुप्रसिद्ध श्याम भक्त और परम आदरणीय गीतकार श्री नंद किशोर शर्मा 'नंदू जी' द्वारा की गई है। नंदू जी के लिखे भजनों में एक विशेष प्रकार की तड़प, समर्पण और सरलता होती है जो सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करती है। इस भजन को संगीतबद्ध आकाश भारती ने किया है और रितिका स्टूडियो में संजय डैनियल द्वारा इसे रिकॉर्ड किया गया है। गायक संजय नकरा संजू की भावपूर्ण प्रस्तुति ने इस भजन को देश-विदेश के श्याम भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बना दिया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी है, जिसमें उर्दू के कुछ सुंदर शब्दों (जैसे आगाज़, अंजाम, नाचीज़, सरताज) का बहुत ही खूबसूरती से समावेश किया गया है। यह भाषा शैली 'गंगा-जमुनी तहज़ीब' और भारतीय काव्य परंपरा की समृद्धि को दर्शाती है। काव्य शैली में रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है, जहां जीवन को 'नैया', संसार को 'भंवर' और भगवान की कृपा को 'पतवार' के रूप में चित्रित किया गया है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि जीवन जीने की एक महान कला और आध्यात्मिक मार्गदर्शिका है:

  1. अहंकार का विसर्जन: जब भक्त स्वयं को 'नाचीज़' (तुच्छ) स्वीकार करता है, तो उसके भीतर का सूक्ष्म अहंकार नष्ट हो जाता है। अध्यात्म में प्रगति के लिए निरहंकारिता पहली सीढ़ी है।
  2. ईश्वर पर पूर्ण विश्वास: जीवन में उतार-चढ़ाव (भंवर) आना स्वाभाविक है। यदि हमारा विश्वास दृढ़ है कि ईश्वर हमारी पतवार संभाल रहे हैं, तो हम किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होंगे।
  3. समर्पण में ही सुरक्षा है: जैसे एक छोटा बच्चा माता-पिता की गोद में सुरक्षित महसूस करता है, वैसे ही भगवान श्याम की शरण में जाने के बाद भक्त समस्त चिंताओं से मुक्त हो जाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ भक्ति मार्ग में संदर्भ
खिवैया नाव चलाने वाला (नाविक) संसार रूपी सागर से पार उतारने वाले भगवान श्रीकृष्ण।
भंवर पानी का गोल चक्कर (संकट) जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियां और सांसारिक माया।
पतवार नाव को दिशा देने वाला साधन भगवान की कृपा जो हमें सही मार्ग दिखाती है।
सरताज मस्तक का मुकुट / सर्वोपरि ईश्वर को अपने जीवन का सर्वोच्च स्वामी मानना।
आगाज़ व अंजाम शुरुआत और अंत सृष्टि के आदि और अंत स्वयं परमेश्वर ही हैं।
नाचीज़ तुच्छ / जिसका कोई अस्तित्व न हो ईश्वर की अनंत सत्ता के सामने भक्त की विनम्रता।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"खिवैया नैया के कान्हा तो नैया पार होती है..."
यदि हमारे जीवन रूपी रथ के सारथी या नाव के नाविक स्वयं कान्हा बन जाएं, तो जीवन का कल्याण होना निश्चित है। सांसारिक बाधाएं हमारा मार्ग नहीं रोक सकतीं।

"तू ही सरकार मेरा तू ही सरताज मेरा..."
हे श्याम! आप ही मेरे राजा हैं, मेरे रक्षक हैं। मेरे जीवन की हर योजना, हर कर्म की शुरुआत और उसका परिणाम केवल आप पर ही निर्भर है।

"तू ही श्रृंगार मेरा तू ही रखवार मेरा..."
मेरा गौरव, मेरा सौंदर्य और मेरा अस्तित्व आपसे ही है। आप ही मेरे जीवन के आधार हैं और संकट के समय मेरी रक्षा करने वाले हैं।

"मैं तो नाचीज़ मोहन तू ही हमारा जीवन..."
हे मोहन! आपके बिना मेरा कोई मूल्य नहीं है। आपके प्रति मेरा प्रेम और निष्ठा का यह पवित्र बंधन हर क्षण बढ़ता ही जा रहा है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

खाटू श्याम जी की आराधना करते समय इस परम कल्याणकारी मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है:

॥ ॐ श्री श्याम देवाय नमः ॥

"हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा।"

महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक के शीश दान से प्रसन्न होकर कहा था:

"यस्य कलयुगे प्राप्ते पूजयिष्यन्ति मानवाः। तस्य सर्वप्रदास्यामि मनोवांछितमुत्तमम्॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम खाटूवाले कृपा कर दे (Khatu Wale Kripa Kar De)
समर्पित आराध्य श्री खाटू श्याम जी (भगवान श्रीकृष्ण के कलयुगी अवतार)
गायक (Singer) संजय नकरा संजू (Sanjay Nakra Sanju)
गीतकार (Lyricist) नंद किशोर शर्मा 'नंदू जी' (Nand Kishore Sharma)
संगीतकार (Music) आकाश भारती (Akash Bharti)
भाषा (Language) सरल हिंदी (काव्यात्मक शैली)
मुख्य भाव (Bhava) शरणागति, दैन्य भाव, अटूट विश्वास
उपयुक्त अवसर श्याम संकीर्तन, एकादशी व्रत, दैनिक संध्या वंदना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन के मूल रचयिता सुप्रसिद्ध श्याम भक्त और गीतकार श्री नंद किशोर शर्मा 'नंदू जी' हैं, जो अपने भावपूर्ण भजनों के लिए जाने जाते हैं।

इस भजन को सुप्रसिद्ध भजन गायक संजय नकरा संजू (Sanjay Nakra Sanju) ने अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज में गाया है।

महाभारत काल में बर्बरीक (श्याम जी) ने अपनी माता को वचन दिया था कि वे युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ देंगे। इसी प्रतिज्ञा के कारण उन्हें 'हारे का सहारा' कहा जाता है। आज भी जो भक्त जीवन से निराश होकर उनकी शरण में जाता है, बाबा श्याम उसकी झोली भर देते हैं।

इस भजन का मुख्य संदेश 'पूर्ण शरणागति' है। जब मनुष्य अपने अहंकार को छोड़कर ईश्वर को अपने जीवन का आधार, रक्षक और पतवार मान लेता है, तो ईश्वर स्वयं उसके जीवन की नैया को पार लगाते हैं।

यूं तो प्रतिदिन भजन करना उत्तम है, परंतु हिंदू धर्म में एकादशी तिथि (विशेषकर शुक्ल पक्ष की एकादशी) बाबा श्याम की पूजा और भजन संकीर्तन के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।

हां, इस भजन के शब्द और संगीत अत्यंत शांत और भक्तिमय हैं। इसका नियमित श्रवण करने से मन के नकारात्मक विचार दूर होते हैं और आंतरिक शांति का अनुभव होता है।

श्री खाटू श्याम जी का मुख्य और ऐतिहासिक मंदिर भारत के राजस्थान राज्य के सीकर जिले के 'खाटू' नामक कस्बे में स्थित है। यह देश के सबसे पवित्र और जागृत तीर्थ स्थलों में से एक है।

'नाचीज़' का अर्थ है अत्यंत छोटा, तुच्छ या जिसका कोई विशेष अस्तित्व न हो। यहाँ भक्त अपनी विनम्रता प्रदर्शित करने के लिए स्वयं को भगवान के सामने नाचीज़ कहता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए इसके मूल पाठ को पारंपरिक श्याम संकीर्तन पद्धतियों और आधिकारिक संगीत रिलीज से मिलान किया गया है। इस भजन का दार्शनिक विश्लेषण श्रीमद्भगवद्गीता के भक्ति योग और वैष्णव भक्ति परंपरा के सिद्धांतों के अनुरूप किया गया है, ताकि पाठकों को न केवल भजन के बोल मिलें, बल्कि वे इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ को भी समझ सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • स्कंद पुराण: कौमारिका खंड (बर्बरीक की कथा और श्रीकृष्ण द्वारा वरदान का प्रसंग)।
  • महाभारत: उद्योग पर्व (बर्बरीक के महान बलिदान का विवरण)।
  • श्री श्याम चालीसा एवं संकीर्तन संग्रह: पारंपरिक भजन संकलन।
  • युकी म्यूजिक (Yuki Music): आधिकारिक ऑडियो/वीडियो रिलीज संदर्भ।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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