तेरे नाम के पागल हैं (Tere Naam Ke Pagal Hain lyrics in Hindi) | Shyam Bhajan by Anjali Dwivedi
श्रेणी: श्याम भजन | गायिका: अंजलि द्विवेदी | संगीत: आशीष बी. | गीतकार: आलोक गुप्ता "मोहतरम" / "मोहित" | लेबल: युकी (Yuki)
कलयुग के धनी, हारे के सहारे और खाटू नरेश बाबा श्याम (श्री खाटूश्यामजी) की महिमा का गुणगान करने वाले भजनों में अनंजलि द्विवेदी की मधुर वाणी में गाया गया लोकप्रिय श्याम भजन "तेरे नाम के पागल हैं (Tere Naam Ke Pagal Hain)" अनन्य भक्त और भगवान के बीच के अगाध प्रेम, समर्पण और दीवानगी का एक अत्यंत जीवंत और भावपूर्ण दस्तावेज है। यह भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि उस पराकाष्ठा का अनुभव है जहाँ भक्त अपनी सुधबुध खोकर केवल अपने इष्ट श्याम सखा के प्रेम में मग्न रहता है। युकी (Yuki) म्यूजिक द्वारा प्रस्तुत और आलोक गुप्ता "मोहित" द्वारा रचित इस भजन ने देश-विदेश के श्याम प्रेमियों के हृदयों में एक विशेष स्थान बनाया है। जब कोई साधक या भक्त अपने जीवन की समस्त चिंताओं और सांसारिक मोह-माया को त्यागकर बाबा श्याम के चरणों में अपनी निष्ठा समर्पित करता है, तब उसके मुँह से स्वतः ही यही भाव प्रकट होते हैं—"तेरे नाम के पागल हैं हमें दुनिया की परवाह नहीं।" इस विस्तृत और शास्त्रीय रूप से विश्लेषित लेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, शब्दार्थ, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन — शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:
तेरे नाम के पागल हैं, हमें दुनिया की परवाह नहीं!
तुमको पाके इस जीवन की अब तो कोई चाह नहीं॥
श्याम का प्रेमी होना प्यारे छोटी बात नहीं है,
श्याम प्रेम से बढ़के दूजी कोई सौगात नहीं है!
श्याम प्रेम से बढ़के जग में कोई सौगात नहीं है,
तुमको पाके इस जीवन की अब तो कोई चाह नहीं!
तेरा साथ मिला हमको किसी और के साथ की चाह नहीं,
तुमको पाके इस जीवन की अब तो कोई चाह नहीं॥
तेरे नाम के पागल हैं...
हर दिन हर पल तेरे प्रेम की मस्ती चढ़ जाए,
तेरे कीर्तन भजन बिना हमें और ना कुछ भी भाये!
तुमको पाके इस जीवन की अब तो कोई चाह नहीं,
तेरा रंग चढ़ा हम पे किसी और रंग की चाह नहीं,
तुमको पाके इस जीवन की अब तो कोई चाह नहीं॥
तेरे नाम के पागल हैं...
खाटू वाले श्याम हमारी लाज बचाए रखना,
अपने चरणों से हमको सदा लिपटाए रखना!
तुमको पाके इस जीवन की अब तो कोई चाह नहीं,
तेरे दर के सिवा हमको किसी और की चाह नहीं,
तुमको पाके इस जीवन की अब तो कोई चाह नहीं॥
नोट: इस भजन को संध्याकालीन आरती या घर पर होने वाले श्याम संकीर्तन के दौरान पूर्ण तन्मयता के साथ गाया जा सकता है। अन्य लोकप्रिय भजनों के लिए आप हमारे श्याम भजन संग्रह और भैजन एवं स्तोत्र खंड का अवलोकन कर सकते हैं।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन भक्त और भगवान के बीच के उस अद्वितीय संबंध को परिभाषित करता है जहाँ सांसारिक दुनिया के मान-अपमान, आलोचना या प्रशंसा का कोई मूल्य नहीं रह जाता। भजन की पहली पंक्ति "तेरे नाम के पागल हैं, हमें दुनिया की परवाह नहीं" यह स्पष्ट करती है कि जब किसी जीव को बांके बिहारी या खाटू श्याम का अलौकिक प्रेम प्राप्त हो जाता है, तो वह समाज की रूढ़िवादी मान्यताओं या संसारी लोगों की बातों से विचलित नहीं होता। उसके लिए श्याम का नाम ही सर्वस्व बन जाता है।
आगे गीतकार आलोक गुप्ता "मोहित" लिखते हैं—"श्याम का प्रेमी होना प्यारे छोटी बात नहीं है, श्याम प्रेम से बढ़के दूजी कोई सौगात नहीं है।" इसका गहरा दार्शनिक अर्थ यह है कि कलयुग में भगवान श्याम का सच्चा प्रेमी बनना साधारण मनुष्य का काम नहीं है; इसके लिए पूर्वजन्मों के संस्कार और अहेतुकी कृपा की आवश्यकता होती है। संसार में धन, पद और प्रतिष्ठा जैसी अनगिनत सौगातें (उपहार) हो सकती हैं, किंतु श्याम प्रेम से बढ़कर इस ब्रह्मांड में कोई दूसरा अमूल्य उपहार नहीं है।
अंतिम चरणों में भक्त कहता है कि जब उसे श्याम बाबा का साथ मिल गया है, तब उसे किसी अन्य सहारे या भौतिक सुख की अभिलाषा नहीं रह जाती। जैसे रंग में रंगा वस्त्र फिर किसी दूसरे रंग में नहीं रंगा जा सकता, वैसे ही श्याम के प्रेम रंग में डूबा हुआ भक्त अन्यत्र कहीं नहीं भटकता। यह पूर्ण शरणागति (आत्म-समर्पण) की पराकाष्ठा है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- इष्ट देव: यह भजन खाटू नरेश, हारे के सहारे श्री खाटूश्याम जी (श्री बर्बरीक जी) को समर्पित है, जिनकी आराधना कलयुग में समस्त संकटों का निवारण करने वाली मानी जाती है।
- भक्ति का भाव: भजन में मुख्य रूप से माधुरी भक्ति, दास्य भाव और अनन्य शरणागति का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है।
- सांसारिक मोह से मुक्ति: यह रचना साधक को भौतिक संसार की नश्वरता से ऊपर उठाकर आध्यात्मिक चेतना की ओर ले जाती है।
- लोकप्रियता: गायिका अंजलि द्विवेदी की सधी हुई और भावपूर्ण आवाज़ ने इस भजन को श्याम प्रेमियों के बीच घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
भक्ति संगीत का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए उचित समय और पवित्र वातावरण का होना आवश्यक है। इस भजन को निम्नलिखित अवसरों पर गाया और सुना जा सकता है:
- दैनिक पूजा के समय: प्रातःकाल या संध्याकाल में धूप-दीप प्रज्वलित करने के पश्चात इसे गाकर बाबा श्याम का आह्वान किया जा सकता है।
- श्याम संकीर्तन या चौकी में: मासिक एकादशी, द्वादशी या किसी विशेष उत्सव पर आयोजित होने वाले खाटू श्याम संकीर्तन में यह एक मुख्य भजन के रूप में गाया जाता है।
- एकादशी व्रत के दौरान: शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन व्रत का पालन करते समय इस भजन का स्मरण करने से मन को असीम शांति मिलती है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के केंद्र बिंदु भगवान श्री खाटूश्यामजी हैं, जिन्हें महाभारत काल के वीर योद्धा बर्बरीक का अवतार माना जाता है। भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक के अगाध त्याग, दानशीलता और वचनबद्धता से प्रसन्न होकर उन्हें कलयुग में अपने ही नाम ('श्याम') से पूजे जाने का वरदान दिया था। जो भक्त बाबा श्याम की शरण में जाते हैं, उनके जीवन के सारे अभाव समाप्त हो जाते हैं। श्याम संप्रदाय और खाटूधाम की महिमा के बारे में अधिक जानने के लिए आप हमारे अन्य धार्मिक लेख पढ़ सकते हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
"तेरे नाम के पागल हैं" भजन के गीतकार आलोक गुप्ता "मोहित" हैं, जिन्होंने बड़े ही सरल, सहज और हृदयस्पर्शी शब्दों में एक सच्चे प्रेमी की मनोदशा को पिरोया है। संगीतकार आशीष बी. ने इसे बहुत ही मधुर और कर्णप्रिय धुनों से सजाया है, जो सुनते ही श्रोता को झूमने पर विवश कर देती है। युकी कैसेट्स (Yuki) के बैनर तले रिलीज़ हुए इस वीडियो को अनिल कुमार (ए.पी. फिल्म्स) के संपादन और सरवन कुमार के निर्देशन में तैयार किया गया है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा बहुत ही सुगम और बोलचाल की हिंदी/ब्रज मिश्रित शैली है, जिसे सामान्य से सामान्य भक्त भी आसानी से समझ सकता है। इसमें रूपक अलंकार और अनुप्रास का सुंदर प्रयोग किया गया है। "पागल" शब्द यहाँ मानसिक असंतुलन का प्रतीक नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रेम में अपनी सुधबुध खो बैठने वाली दिव्य उन्माद अवस्था (मस्ती) को दर्शाता है, जिसे सूफी परंपरा में 'मस्त' या 'दीवाना' कहा जाता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
- लोक-लाज का भय त्यागना: जब इंसान ईश्वर की भक्ति में लीन होता है, तो उसे समाज की आलोचना की परवाह नहीं करनी चाहिए।
- संतोष और तृप्ति: भगवान की प्राप्ति के बाद जीवन में अन्य किसी भौतिक वस्तु की लालसा शेष नहीं रहती।
- निरंतर स्मरण: हर पल भगवान के कीर्तन और भजन में मन को लगाए रखना ही असली साधना है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| पागल | दीवाना, प्रेमोन्मत्त | ईश्वर के प्रेम में अपनी सुधबुध खो देने वाला भक्त |
| सौगात | उपहार, भेंट | श्याम का प्रेम जीवन का सबसे बड़ा वरदान है |
| मस्ती | आनंद, उल्लास | भक्ति रस में डूबने से मिलने वाली आत्मिक प्रसन्नता |
| रणग चढ़ा | रंग जाना, प्रभावित होना | भक्ति के रंग में पूरी तरह सराबोर हो जाना |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"तेरे नाम के पागल हैं, हमें दुनिया की परवाह नहीं..."
इस पंक्ति का आशय है कि जो व्यक्ति अपने आराध्य श्याम के नाम का स्मरण करता है, उसे सांसारिक लोग पागल कह सकते हैं, किंतु भक्त के लिए वह पागलपन ही उसका सबसे बड़ा सौभाग्य है। उसे इस बात की कोई चिंता नहीं कि दुनिया उसके बारे में क्या सोचती है।
"हर दिन हर पल तेरे प्रेम की मस्ती चढ़ जाए..."
भक्त प्रार्थना करता है कि उसका प्रत्येक दिन और हर एक पल केवल श्याम बाबा के प्रेम में बीते। उसे सांसारिक प्रपंचों में कोई रुचि न हो, बल्कि उसे केवल बाबा के भजन और कीर्तन ही अच्छे लगें।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
श्याम बाबा के स्मरण के साथ निम्नलिखित महामंत्र का जाप करने से भजन का फल कई गुना बढ़ जाता है:
ॐ श्री श्यामय नमः
इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण की शरण लेने हेतु श्रीमद्भगवद्गीता के इस श्लोक का स्मरण किया जा सकता है—
"सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥"
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | तेरे नाम के पागल हैं (Tere Naam Ke Pagal Hain) |
|---|---|
| इष्ट देव | श्री खाटूश्याम जी (बाबा श्याम) |
| गायिका | अंजलि द्विवेदी (Anjali Dwivedi) |
| गीतकार | आलोक गुप्ता "मोहतरम" / "मोहित" |
| संगीतकार | आशीष बी. (Aashish B.) |
| संगीत लेबल | युकी (Yuki) |
| भाषा | हिंदी / ब्रज भाव |
| विषय एवं भाव | अनन्य भक्ति, समर्पण, और प्रेम दीवानगी |
| उपयुक्त अवसर | श्याम संकीर्तन, एकादशी व्रत, दैनिक पूजा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: "तेरे नाम के पागल हैं" भजन की गायिका कौन हैं?
उत्तर: इस लोकप्रिय श्याम भजन की गायिका प्रसिद्ध devotional singer अंजलि द्विवेदी हैं।
प्रश्न 2: इस भजन के गीतकार (Lyricist) कौन हैं?
उत्तर: इस भजन के रचयिता आलोक गुप्ता "मोहतरम" (मोहित) जी हैं।
प्रश्न 3: यह भजन किस देवी-देवता को समर्पित है?
उत्तर: यह भजन कलयुग के अवतारी हारे के सहारे श्री खाटूश्यामजी को समर्पित है।
प्रश्न 4: इस भजन को किस संगीत लेबल ने रिलीज़ किया है?
उत्तर: इसे प्रमुख भक्ति संगीत लेबल युकी (Yuki) द्वारा रिलीज़ किया गया है।
प्रश्न 5: इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?
उत्तर: इस भजन का मुख्य संदेश भगवान के प्रति अनन्य प्रेम, सांसारिक मोह-माया से विरक्ति और पूर्ण शरणागति है।
प्रश्न 6: क्या इस भजन को घर पर एकादशी के दिन गा सकते हैं?
उत्तर: हाँ, एकादशी के पावन अवसर पर या किसी भी समय घर में श्याम संकीर्तन के दौरान इस भजन को अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।
प्रश्न 7: इस भजन के संगीतकार कौन हैं?
उत्तर: इस भजन का संगीत आशीष बी. (Aashish B.) द्वारा तैयार किया गया है।
प्रश्न 8: श्याम प्रेमियों के लिए यह भजन क्यों विशेष है?
उत्तर: यह भजन श्याम प्रेमियों की उस दीवानगी को दर्शाता है जहाँ वे दुनिया की परवाह किए बिना केवल अपने बाबा के नाम में मग्न रहते हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
Bhaktilok.in पर प्रकाशित यह लेख पारंपरिक स्रोतों, गीत के आधिकारिक ऑडियो-वीडियो प्रकाशन और उपलब्ध भक्ति साहित्यों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। हमारा उद्देश्य पाठकों को शत-प्रतिशत शुद्ध भजन लिरिक्स, प्रामाणिक जानकारी और गहरा आध्यात्मिक दृष्टिकोण प्रदान करना है। यदि आप इस भजन या अन्य रचनाओं के बारे में कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो संपर्क कर सकते हैं।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- युकी म्यूजिक (Yuki Music) ऑफिशियल रिलीज़ आर्काइव।
- पारंपरिक श्री खाटूश्याम जी संकीर्तन एवं भजन संग्रह।
- श्री बर्बरीक कथा एवं कलयुग अवतार मान्यताएं।
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