Shyam Bhajan

सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया ( Sawali surat pe mohan dil deewana ho gaya Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan - Bhaktilok

112 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रस्तावना एवं परिचय

मोहन की सांवली सूरत: भक्ति का अद्वितीय अनुभव

मोहन की सांवली सूरत पर भक्ति से भरा यह भजन मन के हर भाव को छूने वाला है। इसे गाने का आनंद लें।

सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया ।दिल दीवाना हो गया दिल दीवाना हो गया ॥एक तो तेरे नैन तिरछे दूसरा काजल लगा ।तीसरा नज़रें मिलाना दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया....एक तो तेरे होंठ पतले दूसरा लाली लगी ।तीसरा तेरा मुस्कुराना दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया....एक तो तेरे हाथ कोमल दूसरा मेहँदी लगी ।तीसरा मुरली बजाना दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया....एक तो तेरे पाँव नाज़ुक दूसरा पायल बंधी ।तीसरा घुंगरू बजाना दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया....एक तो तेरे भोग छप्पन दूसरा माखन धरा ।तीसरा खिचडे का खाना दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया....एक तो तेरे साथ राधा दूसरा रुक्मण खड़ी ।तीसरा मीरा का आना दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया....एक तो तुम देवता हो दूसरा प्रियतम मेरे ।तीसरा सपनों में आना दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया....सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया ।दिल दीवाना हो गया दिल दीवाना हो गया ॥*** Singer : Sanju Sharma ***
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में सांवली सूरत वाले मोहन की अलौकिक सुंदरता का बखान किया गया है। पहले अंतरे में, 'एक तो तेरे नैन तिरछे' में मोहन के नैनों की बात की गई है, जो प्रेम में धुनके हुए दिल को और भी दीवाना कर देते हैं। आगे की पंक्तियों में, मोहन के होंठों की महीनता और मुस्कुराहट का वर्णन किया गया है, जिससे भक्त के दिल में प्रेम का संचार होता है। यह भजन भक्तों के मन में मोहन की उपस्थिति को स्थायी बनाने, उनके प्रति आकर्षण को व्यक्त करने का एक माध्यम है। 'दिल दीवाना हो गया' की पुनरावृत्ति यह दर्शाती है कि उनकी सुंदरता और मुस्कान का प्रभाव भक्त के दिल पर ऐसा गहरा है कि वे खुद को प्रेम में खो गया मानते हैं।

भजन का भावार्थ गहन प्रेम और समर्पण को दर्शाता है। जैसे-जैसे भक्ति के स्तर को व्यक्त किया जाता है, भक्त के मन में भक्ति का जोश और प्रगाढ़ होता है। 'तेरे हाथ कोमल', 'तेरे पाँव नाज़ुक', 'तेरे होंठ पतले' जैसे वाक्यांश न केवल मोहन की शारीरिक विशेषताएँ बताते हैं, बल्कि भक्त की भक्ति और प्रेम की गहराई को भी उजागर करते हैं। यह सभी विशेषताएँ मोहन की दिव्यता को दर्शाती हैं और भक्त के हृदय को भावनाओं से भर देती हैं। इस प्रकार, यह भजन मन को शांति और आनंद से भर देता है, जो भक्ति और प्रेम की उच्चतम अवस्था को दर्शाता है।

भक्ति मार्ग के सिद्धांतों का पालन करते हुए, यह भजन एक गहन संदेश देता है कि भक्त हमेशा अपने प्रियतम के प्रति नतमस्तक रहे। भक्ति के इस पथ पर चलना मनुष्य को संस्कृति और परंपरा से जोड़ता है। इसमें न केवल मोहन के प्रति प्रेम और भक्ति का महत्त्व है, बल्कि यह श्रद्धाभाव में भी एक गहरा अंश है। 'तुम देवता हो, दूसरा प्रियतम मेरे' जैसे वाक्य संकेत करते हैं कि मोहन केवल एक ईश्वर नहीं, बल्कि भक्त के जीवन में उनके प्रियतम की भूमिका निभाते हैं। यह भजन सच्चे प्रेम, समर्पण और भक्ति का प्रतीक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन हिन्दू धर्म की गहरी आध्यात्मिकता और भक्ति परंपरा का प्रतीक है। इसे माधव के प्रति भक्तों के प्यार को व्यक्त करने के लिए गाया जाता है, जो कि भगवान श्री कृष्ण का एक महत्वपूर्ण चरित्र है। भारतीय पुराणों में श्री कृष्ण को राधा के प्रेम में चित्रित किया गया है, और यह भजन उसी प्रेम और समर्पण का प्रसंग प्रस्तुत करता है। महाभारत और भागवत पुराण में श्री कृष्ण के विभिन्न लीलाओं का उल्लेख है, जो इस भक्ति गीत को सार्थक बनाती है। राधा-कृष्ण की लीलाएँ इस भजन की आत्मा हैं, और यह दर्शाता है कि भक्ति का मार्ग कैसे मोक्ष की ओर ले जाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। यह भजन गाने से मानसिक तनाव को कम करने, दिल को शांति प्रदान करने तथा आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से मन में सुरभि, प्रेम और सकारात्मकता का संचार होता है। यह न केवल भक्ति को बढ़ाता है बल्कि एक गहन आध्यात्मिक अनुभव की ओर भी ले जाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन की साधना सबसे बेहतर सुबह और शाम के समय करना चाहिए। इसे गाते समय ध्यान रखें कि मन एकाग्र व शुद्ध हो। एक दीया जलाकर उसके सामने बैठें और फल या अन्य भोग अर्पित करें। सही मुद्रा में बैठकर मन से प्रार्थना करें कि आपकी भावनाएँ सच्ची हों।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का अर्थ क्या है?

यह भजन मोहन की सांवली सूरत और उनके प्रति भक्त के अनन्य प्रेम का वर्णन करता है, जिससे भक्त का दिल दीवाना हो जाता है।

क्या इस भजन को किसी विशेष अवसर पर गाना चाहिए?

हाँ, इस भजन को उत्सवों, विवाह या दिन-प्रतिदिन की भक्ति में गाया जा सकता है, खासकर जब प्रेम और भक्ति का माहौल हो।

भजन गाने से क्या लाभ होता है?

इस भजन का नियमित जाप मानसिक स्थिरता, आत्मिक शांति और प्रभु की कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है।

श्रेणियां: Shyam Bhajan

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 21 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!