Shri Shani Dev Arati

राम को देख कर के जनक नंदिनी लिरिक्स (Ram ko dekh ke janak nandini Lyrics in Hindi) - Ram Bhajan - Bhaktilok

193 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

राम को देख कर के जनक नंदिनी बाग़ में वो खड़ी की खड़ी रह गयी ॥ राम देखे सिया को सिया राम को चारो अँखिआ लड़ी की लड़ी रह गयी ॥ यज्ञ रक्षा में जा कर के मुनिवर के संग ले धनुष दानवो को लगे काटने । एक ही बाण में ताड़का राक्षसी गिर जमी पर पड़ी की पड़ी रह गयी ॥ राम को मन के मंदिर में अस्थान देकर लगी सोचने मन में यह जानकी । तोड़ पाएंगे कैसे यह धनुष कुंवर मन में चिंता बड़ी की बड़ी रह गयी ॥ विश्व के सारे राजा जनकपुर में जब शिव धनुष तोड़ पाने में असफल हुए । तब श्री राम ने तोडा को दंड को सब की आँखे बड़ी की बड़ी रह गयी ॥ तीन दिन तक तपस्या की रघुवीर ने सिंधु जाने का रास्ता न उनको दिया । ले धनुष राम जी ने की जब गर्जना उसकी लहरे रुकी की रह गयी ॥
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन राम और सीता के मध्य प्रेम और भक्ति का सुंदर चित्रण प्रस्तुत करता है। 'राम को देख कर के जनक नंदिनी' पंक्ति सीता के मन में राम के प्रति उत्पन्न होने वाली भावनाओं को दर्शाती है। जनकपुर के वाटिका में राम को देखते ही सीता अवाक रह जाती हैं और उनकी सभी इंद्रियाँ राम के प्रति समर्पित हो जाती हैं। भजन में यज्ञ रक्षा के प्रसंग का उल्लेख है जहाँ राम मुनिवर के साथ दानवों का संहार करते हैं। ताड़का राक्षसी का एक बाण से वध राम की अप्रतिम शक्ति को प्रदर्शित करता है। सीता का मन राम के पराक्रम से अभिभूत हो जाता है। शिव धनुष को तोड़ने का प्रसंग भी वर्णित है जिसमें विश्व के सभी राजा असफल होते हैं किंतु श्री राम सहजता से इसे तोड़ देते हैं। यह घटना सीता के लिए राम की दिव्यता का प्रमाण बन जाती है।

इस भजन का भावार्थ प्रेम और भक्ति के परस्पर संबंध को उजागर करता है। सीता का राम को देखना केवल दृश्य नहीं वरन् आत्मा का परमात्मा से मिलन है। 'चारो अँखिआ लड़ी की लड़ी रह गयी' इस पंक्ति में सीता की चेतना पूरी तरह राम में लीन हो जाती है। उनके मन में राम एकमात्र विचार बन जाते हैं। धनुष तोड़ने की चिंता सीता के हृदय में इसलिए उत्पन्न होती है क्योंकि वह राम के साथ अपना जीवन बिताना चाहती हैं। राम का धनुष तोड़ना केवल शारीरिक शक्ति नहीं वरन् दिव्य शक्ति का प्रदर्शन है। इस भजन में भक्ति का वह रूप दिखता है जहाँ भक्त पूरी तरह अपने इष्ट के समर्पित हो जाता है। सीता की यह भक्ति आदर्श भक्ति का प्रतीक है।

इस भजन का दार्शनिक सार भक्ति मार्ग के मूल तत्व को प्रकट करता है। राम का व्यक्तित्व दिव्य शक्ति और मानवीय गुणों का समन्वय है। सीता की राम के प्रति भक्ति शुद्ध और निरपेक्ष है। भक्ति मार्ग में भक्त अपनी पूर्ण समर्पण भावना से परमात्मा को समर्पित होता है। इस भजन में राम को अनंत शक्ति का अधिष्ठाता दिखाया गया है जो समस्त विश्व को नियंत्रित करता है। सिंधु को राम की आज्ञा से रास्ता देना उनकी सर्वोच्च सत्ता का प्रमाण है। भक्ति के इस मार्ग में साधक को दिव्य शक्ति पर पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखना चाहिए। यह भजन यह संदेश देता है कि भक्ति ही सभी कष्टों का निवारण है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर आधारित है। सीता स्वयंवर का प्रसंग मूल रामायण में वर्णित है जहाँ शिव धनुष को तोड़ना अनिवार्य था। पूरे विश्व के राजाओं के विफल प्रयास के बाद राम ने इस धनुष को तोड़ा। यज्ञ रक्षा का प्रसंग त्रेता युग में राम के परिव्रजन काल से संबंधित है जब वह मुनिवर विश्वामित्र के साथ दानवों से यज्ञ की रक्षा करते हैं। ताड़का राक्षसी का वध राम की अप्रतिम शक्ति का परिचय देता है। सिंधु को रोकने की घटना लंकापति रावण के विरुद्ध राम के अभियान से संबंधित है। वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास के रामचरितमानस में इन प्रसंगों का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह भजन रामायण की दार्शनिक और भक्ति आयामों को सुंदरता से प्रस्तुत करता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का गायन और श्रवण मन को शांति प्रदान करता है। राम के नाम का जप और इस भजन का नियमित पाठ मानसिक एकाग्रता बढ़ाता है। भक्ति भावना को जागृत करके यह भजन आत्मिक उन्नति में सहायक है। सीता-राम के प्रेम को ध्यान में रखते हुए सुनने से हृदय में प्रेम और समर्पण की भावना जागृत होती है। नियमित गायन से मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास की वृद्धि होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

प्रातःकाल सूर्योदय के समय या संध्या काल में इस भजन का गायन सर्वोत्तम है। पूजन स्थान को स्वच्छ कर घंटी बजाएँ और दीप प्रज्वलित करें। राम की प्रतिमा के सामने बैठकर पदम् आसन या सुखासन में विराजमान हों। मन को पूरी तरह भजन में लगाएँ और राम-सीता के प्रेम को ध्यान में रखें। फूल, अगरबत्ती और प्रसाद का प्रयोग करें। निष्काम भाव से भजन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन में 'जनक नंदिनी' किसे कहा गया है और यह शब्द क्यों महत्वपूर्ण है?

जनक नंदिनी का अर्थ है राजा जनक की पुत्री यानी सीता। जनक नंदिनी शब्द सीता की राजकीय पहचान और पवित्रता को दर्शाता है। यह शब्द सीता के उच्च कुल और गरिमा को प्रतिष्ठित करता है। भजन में यह संबोधन सीता के प्रति राम के प्रेम और सम्मान को प्रकट करता है।

शिव धनुष को तोड़ने की घटना रामायण में क्यों इतनी महत्वपूर्ण मानी जाती है?

शिव धनुष को तोड़ना राम की अलौकिक शक्ति और दिव्य प्रकृति का प्रमाण है। सभी राजाओं के असफल प्रयास के बाद राम का सफल होना राम को संसार के सर्वश्रेष्ठ योद्धा के रूप में प्रतिष्ठित करता है। यह घटना सीता के लिए राम की योग्यता और दिव्यता का साक्षात् प्रमाण बन जाती है।

सिंधु का राम की आज्ञा से रास्ता देना किस बात का प्रतीक है?

सिंधु का रास्ता देना राम की सर्वोच्च सत्ता और प्रकृति पर उनके नियंत्रण को दर्शाता है। यह प्रतीक है कि परमात्मा की शक्ति के सामने प्रकृति की सभी शक्तियाँ नतमस्तक हो जाती हैं। राम की आज्ञा ब्रह्मांड का नियंत्रण करने वाली परम शक्ति को दर्शाती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!