Parvati Stotram

ओ चिमटे वाले बाबा लिरिक्स (Oh chimte wale baba Lyrics in Hindi) - Baba Balak Nath Bhajan - Bhaktilok

329 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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ओ चिमटे वाले बाबा लिरिक्स (Oh chimte wale baba Lyrics in Hindi) - Baba Balak Nath Bhajan

सनातन धर्म और उत्तर भारत की समृद्ध लोक-भक्ति परंपरा में सिद्ध बाबा बालक नाथ जी की महिमा अपरंपार है। हिमाचल प्रदेश के दियोटसिद्ध (शाहतलाई) स्थित उनके पावन दरबार में नतमस्तक होने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। बाबा बालक नाथ जी को 'चिमटे वाले बाबा', 'धुने वाले बाबा', 'जटा वाले बाबा' और 'दूध-रोट वाले बाबा' के नाम से अनन्य भाव से याद किया जाता है। यह पावन भजन "ओ चिमटे वाले बाबा वे अपनी गऊआं नू मोड़..." बाबा बालक नाथ जी और भक्त रत्नो के बीच के एक अत्यंत मार्मिक, भक्तिमय और लयात्मक संवाद को प्रस्तुत करता है। इस भजन में जहाँ एक ओर लोक-संस्कृति की सोंधी खुशबू है, वहीं दूसरी ओर गुरु-भक्त के बीच का अनूठा प्रेम, मनुहार और शरणागति का भाव स्पष्ट झलकता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस प्रसिद्ध भजन के संपूर्ण लिरिक्स, उसका गहरा हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि, बाबा बालक नाथ जी की महिमा और उनके जीवन से जुड़े आध्यात्मिक संदेशों पर विस्तार से चर्चा करेंगे, ताकि साधक भक्ति रस में सराबोर हो सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मंगलाचरण एवं मुखड़ा:

ओ चिमटे वाले बाबा वे अपनी गऊआं नू मोड़
जटा वाले बाबा वे अपनी गऊआं नू मोड़
धुनें वाले बाबा वे अपनी गऊआं नू मोड़
अपनी गऊआं नू मोड़, अपनी गऊआं नू मोड़
ओ चिमटे वाले बाबा वे...

प्रथम अंतरा:

आया गऊआं नू चारण आके धुंना लगाया
तेरिया गऊआं ने खादे साडे सारे वे खेत
ओ चिमटे वाले बाबा वे अपनी गऊआं नू मोड़...

द्वितीय अंतरा:

आये पिंडा दे लोक जांदे रत्नो दे कोल
बोल मंदड़े जे बोल रत्नो हो गयी आ तो
ओ चिमटे वाले बाबा वे अपनी गऊआं नू मोड़...

तृतीय अंतरा:

दुखी रत्नो बेचारी ओ भी ममता दी मारी
गऊआं खेती उजाड़ी तेरी कैसी गुआड़ी
ओ चिमटे वाले बाबा वे अपनी गऊआं नू मोड़...

अंतिम अंतरा एवं समापन:

बोले रत्नो बेचारी ओ ता कर्मा दी मारी
कह्जो खाईया तू बारह साल लस्सियाँ ते रोट
ओ चिमटे वाले बाबा वे अपनी गऊआं नू मोड़...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह एक ग्रामीण परिवेश में रची-बसी उस कथा का जीवंत रूप है जहाँ भक्त और भगवान के बीच निश्छल संवाद होता है। इस भजन की मुख्य पात्र 'रत्नो' है, जो बाबा बालक नाथ जी की अनन्य भक्त है। लोक कथाओं के अनुसार, रत्नो बाबा की सेवा करती थी और बाबा अक्सर उसकी गायों को चराने के बहाने उसके खेतों या आसपास के क्षेत्रों में लीला करते थे।

भजन के मुखड़े में रत्नो बड़े ही प्रेम और आत्मीयता से बाबा को पुकारती है—हे चिमटे वाले, जटा वाले और धुने वाले बाबा! आप अपनी इन गायों को वापस मोड़ लीजिए। यहाँ गायें जीव-आत्माओं या सांसारिक प्रलोभनों की प्रतीक भी मानी जा सकती हैं जिन्हें बाबा अपने नियंत्रण में रखते हैं। प्रथम अंतरे में रत्नो शिकायत करती है कि बाबा ने आकर यहाँ धुना लगा लिया है और उनकी गायों ने हमारे सारे खेत खा लिए हैं। यह भगवान के साथ एक मीठा सा उलाहना या शिकायत है, जो वास्तविक द्वेष नहीं बल्कि अनन्य प्रेम की पराकाष्ठा है।

आगे के चरणों में गाँव के लोग रत्नो के पास आकर ताने मारते हैं और मंदे (कड़वे) बोलते हैं क्योंकि बाबा की गायों ने फसल उजाड़ दी है। दुखी रत्नो, जो स्वयं ममता और दुखों की मारी है, बाबा से कहती है कि तुम्हारी यह कैसी रखवाली (गुआड़ी) है कि तुम्हारी गायों ने हमारी पूरी खेती उजाड़ दी है। अंत में रत्नो अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए बाबा से पूछती है कि हे बाबा! तूने बारह साल तक केवल लस्सी और रोट (रोटी) खाकर जो तपस्या की है, उसका क्या लाभ जब भक्तों को इस प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़े। यह भजन सिखाता है कि भगवान के साथ भक्त का संबंध कितना निकट और सजीव हो सकता है जहाँ वह अपने इष्ट से अधिकार पूर्वक उलाहना भी दे सकता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

बाबा बालक नाथ जी का यह भजन उत्तर भारत विशेषकर हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और जम्मू में अत्यंत लोकप्रिय है। इस भजन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

    लोक-साहित्य और भक्ति का संगम: यह भजन ठेठ पंजाबी और पहाड़ी लोक संस्कृति की शब्दावली में रचा गया है, जो सीधे मन को छूता है।

    सरल और लयात्मक संरचना: इसकी धुन इतनी सरल है कि इसे किसी भी सत्संग, जागरण या घर की पूजा में आसानी से गाया जा सकता है।

    शरणागति और प्रेम का भाव: यह भजन सिखाता है कि भगवान से प्रेम में औपचारिकता से अधिक आत्मीयता का महत्व होता है।

    पढ़ें अन्य पावन स्तोत्र और भजन जैसे श्री हनुमान चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र, जो साधक को मानसिक शांति प्रदान करते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन का गायन या श्रवण विशेष अवसरों पर अत्यधिक फलदायी माना जाता है:

    चौदस और रविवार के दिन: बाबा बालक नाथ जी की आराधना के लिए रविवार का दिन और शुक्ल पक्ष की चौदस तिथि अति उत्तम मानी जाती है।

    जागरण एवं भंडारे: बाबा बालक नाथ जी के चौकी, जागरण और दियोटसिद्ध यात्रा के दौरान यह भजन अनिवार्य रूप से गाया जाता है।

    संध्या वंदन: घर में संध्या के समय धूप-दीप प्रज्वलित करने के पश्चात इस भजन का स्मरण करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में सिद्ध बाबा बालक नाथ जी हैं, जिन्हें भगवान कार्तिकेय (स्कंद भगवान) का अवतार माना जाता है। सतयुग में शिव भक्त के रूप में उनका प्रादुर्भाव हुआ और द्वापर तथा कलयुग में उनकी सिद्धियों के कारण उन्हें 'बालक नाथ' कहा गया। उनके दरबार में चिमटा, धुना, कमंडल और जटा उनकी योग साधना के प्रतीक हैं। भक्त रत्नो का चरित्र इस बात का प्रमाण है कि बाबा ने हमेशा अपने सच्चे और सीधे-सादे भक्तों को दर्शन दिए हैं और उनकी पुकार सुनी है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक-गायन की मौखिक परंपरा से आया है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोक गायकों और संतों ने इसे बाबा बालक नाथ जी की महिमा का गुणगान करने के लिए गाया है। इसमें शाहतलाई के उस ऐतिहासिक प्रसंग का स्मरण किया जाता है जहाँ बाबा ने राजा मटाहू की गायों को चराने का कार्य किया था और अपनी योग शक्ति से अद्भुत लीलाएं दिखाई थीं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा पंजाबी और हिंदी (पहाड़ी-लोक मिश्रित) है। इसमें 'गऊआं नू मोड़', 'धुना लगाया', 'मंदड़े जे बोल', और 'लस्सियाँ ते रोट' जैसे लोक शब्दों का प्रयोग किया गया है जो इसकी माटी से जुड़ी खुशबू को और प्रगाढ़ करते हैं। इसकी काव्य शैली प्रश्नोत्तर और उलाहना शैली पर आधारित है जो श्रोता को बांधे रखती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन सीख देता है:

    भगवान के साथ अपनापन: ईश्वर कोई दूर बैठा सत्ता नहीं है, बल्कि वह हमारे परिवार के सदस्य की तरह है जिसके साथ हम अपनी पीड़ा और प्रेम दोनों साझा कर सकते हैं।

    धीरज और निष्ठा: रत्नो के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि कठिन परिस्थितियों में भी भगवान का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।

    निसंकोच पुकार: जब भक्त सच्चे हृदय से पुकारता है, तो बाबा उसकी हर समस्या का समाधान करने स्वयं आते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / मुहावरा सरल हिंदी अर्थ सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ
चिमटे वाले बाबा हाथ में चिमटा धारण करने वाले योगी नाथ पंथ और योगियों की परंपरा का प्रतीक
धुना लगाया धूनी रमाई (अग्नि जलाई) साधु-संतों द्वारा तपस्या करने का स्थान
रत्नो बाबा की परम भक्त महिला बाबा बालक नाथ की कथा की मुख्य पात्र
लस्सियाँ ते रोट छाछ और मोटी रोटी बाबा बालक नाथ जी का प्रिय भोग और उनका सादा जीवन
गुआड़ी र रखवाली या चरवाहा गायों या क्षेत्र की देखभाल करने का कार्य

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"ओ चिमटे वाले बाबा वे अपनी गऊआं नू मोड़..."

इस पंक्ति में भक्त रत्नो बाबा से आग्रह करती है कि हे योगीराज! आप अपनी इन गायों को हमारे खेतों से वापस ले जाइए। यह भगवान से विनय करने का सुंदर तरीका है।

"आया गऊआं नू चारण आके धुंना लगाया..."

यहाँ रत्नो बताती है कि बाबा ने यहाँ आकर अपना आसन जमा लिया है और उनकी गायें हमारी फसल को नुकसान पहुँचा रही हैं, जिससे गृहस्थ जीवन में छोटी-मोटी कठिनाइयाँ आ रही हैं।

"कह्जो खाईया तू बारह साल लस्सियाँ ते रोट..."

यह पंक्ति बाबा की कठोर तपस्या की याद दिलाती है। बारह वर्षों तक केवल छाछ और रोटी खाकर तप करने वाले बाबा से रत्नो का यह सवाल उनके साथ उसके आत्मीय और निकट के संबंध को दर्शाता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

बाबा बालक नाथ जी की आराधना के समय निम्नलिखित मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

"ॐ श्री बाबा बालक नाथाय नमः"

इसके अतिरिक्त, उनके दरबार में 'जय बाबा बालक नाथ' और 'अजय बाबा जी की जय' का जयकारा लगाने से मन को असीम शांति और ऊर्जा मिलती है। अधिक जानकारी के लिए आप हमारे अन्य धार्मिक लेख जैसे श्री हनुमान चालीसा भी पढ़ सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य
भजन का नाम ओ चिमटे वाले बाबा (Oh Chimte Wale Baba Lyrics)
संबंधित देवता सिद्ध बाबा बालक नाथ जी (दियोटसिद्ध वाले)
रचना परंपरा लोक-भक्ति एवं पारंपरिक पंजाबी/पहाड़ी भजन
भाषा पंजाबी, हिंदी एवं लोक बोली
मुख्य भाव भक्त और भगवान का प्रेममय उलाहना एवं शरणागति
उपयुक्त अवसर रविवार, चौदस, जागरण, भंडारा और सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

ओ चिमटे वाले बाबा भजन किस देवता को समर्पित है?

यह भजन उत्तर भारत के प्रसिद्ध सिद्ध देवता बाबा बालक नाथ जी को समर्पित है, जिन्हें दियोटसिद्ध में पूजा जाता है।

इस भजन में 'रत्नो' कौन है?

लोक कथाओं के अनुसार रत्नो बाबा बालक नाथ जी की एक परम भक्त थी, जिसके साथ बाबा की कई कथाएं जुड़ी हुई हैं।

बाबा बालक नाथ जी को क्या भोग लगाया जाता है?

बाबा बालक नाथ जी को मुख्य रूप से रोट (चूरमा), दूध, और लस्सी का भोग लगाया जाता है।

बाबा बालक नाथ जी के दर्शन का मुख्य केंद्र कहाँ है?

इनका मुख्य दरबार हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में दियोटसिद्ध (शाहतलाई) के पास स्थित है।

इस भजन को कब गाना चाहिए?

इस भजन को रविवार के दिन, जागरण के समय, चौकी पर या किसी भी धार्मिक सत्संग में श्रद्धापूर्वक गाया जा सकता है।

क्या इस भजन को घर पर अकेले गाया जा सकता है?

हाँ, इस भजन को घर पर पूजा के दौरान या मन ही मन स्मरण करने से मानसिक शांति और सकारात्मकता मिलती है।

बाबा बालक नाथ जी का संबंध किस अवतार से माना जाता है?

परंपरागत मान्यताओं के अनुसार इन्हें भगवान कार्तिकेय का बाल रूप माना जाता है।

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

यह भजन ईश्वर के साथ अनन्य प्रेम, सरलता और आत्मीय संबंध का संदेश देता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भजनों के पारंपरिक संकलन, लोक-साहित्य और भक्तों के अनुभवों के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को बाबा बालक नाथ जी की महिमा और इस लोकप्रिय भजन के अर्थ से अवगत कराना है। प्रस्तुत सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

    उत्तर भारत की लोक-भक्ति परंपरा और मौखिक साहित्य संकलन

    बाबा बालक नाथ दियोटसिद्ध इतिहास एवं महिमा ग्रंथ

    पारंपरिक लोक भजन संग्रह एवं क्षेत्रीय संकीर्तन पुस्तिकाएं

संबंधित भजन एवं लेख

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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