Krishna Bhajan

घुटवान घुटवान डोले श्याम Ghutwan (Ghutwan Dole Shyam Lyrics in Hindi) | Prasoon Sangharshi - Bhaktilok

64 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कृष्ण भजन (Krishna Bhajan)

घुटवान घुटवान डोले श्याम Ghutwan (Ghutwan Dole Shyam Lyrics in Hindi) | Prasoon Sangharshi

रचनाकार: कप्तान सिंह संघर्षी | गायक: प्रसून संघर्षी | संगीत: मणि कान्त | लेबल: यूकी (Yuki)

भक्ति लोक के इस पावन मंच पर आपका स्वागत है। भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की मधुरिमा और उनकी बाल्यावस्था की नटखट लीलाओं का स्मरण मात्र से हृदय प्रेम और वात्सल्य से भर जाता है। 'घुटवान घुटवान डोले श्याम' एक अत्यंत मनमोहक और भावपूर्ण कृष्ण भजन है, जिसे युवा गायक प्रसून संघर्षी ने अपनी सुमधुर आवाज से सजाया है। कप्तानी सिंह संघर्षी द्वारा रचित यह भजन ब्रज के नंदलाल की घुटनों के बल चलने (घुटवान) की लीला का सजीव चित्रण करता है। जब सांवले सलोने कन्हैया मैया यशोदा के आंगन में घुटनों के बल चलते हैं, तो उनकी पायल की छम-छम ध्वनि, कानों में हिलते मकराकृत कुण्डल और नटखट मुसकान पूरे गोकुल को आनंदित कर देती है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

घुटवान घुटवान डोले,
श्याम की पायल छम छम बोले।
बेनी गुहि भाल नजरोटा,
बाबा नन्द को प्यारो ढोटा।
हंसती यशोदा मंद मंद,
मन पट घूँघट के खोले,
श्याम की पायल छम छम बोले,
घुटवान घुटवान डोले,
श्याम की पायल छम छम बोले।

तन पर धुल रजत सी चमके,
कटकर धनी नूपुर भी खनके।
कुण्डल मकराकृत कानो में,
हिलते हौले हौले,
श्याम की पायल छम छम बोले,
घुटवान घुटवान डोले,
श्याम की पायल छम छम बोले।

श्याम केश घुंघराले प्यारे,
नैनन में कजरारेारे।
रैना के तारे छुप जाए,
जब बदन पे उजियारा डोले,
श्याम की पायल छम छम बोले,
घुटवान घुटवान डोले,
श्याम की पायल छम छम बोले।

संघर्षी सुत गुण गावे,
नन्द भवन मंगल छावे।
दर्शन पाके भाग्य खुले सब,
भक्तों की टोली बोले,
श्याम की पायल छम छम बोले,
घुटवान घुटवान डोले,
श्याम की पायल छम छम बोले।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भगवान श्री कृष्ण के बाल्यकाल (बालरूप) के उस स्वर्णिम क्षण का वर्णन करता है जब वे नन्हे कन्हैया के रूप में यशोदा मैया के आंगन में घुटनों के बल विचर रहे हैं। ब्रज संस्कृति और वात्सल्य रस से ओत-प्रोत इस रचना का गहराई से अध्ययन करने पर हमें भगवान के इस रूप की दिव्यता का अनुभव होता है।

प्रथम अंतरा और मुखड़ा का भाव: जब सांवले कन्हैया ब्रज की धूल में घुटनों के बल (घुटवान) चलते हैं, तो उनके पैरों में बंधी नूपुर या पायल से 'छम-छम' की मधुर आवाज गूंजती है। उनके बालों की बेनी गुथी हुई है और माथे पर नजर से बचाने के लिए काला टीका (नजरोटा) लगाया गया है। बाबा नंद के इस प्यारे दुलारे (ढोटा) को देखकर माता यशोदा अपने मन के सारे संशय और पर्दों को खोलकर मंद-मंद मुस्कुरा रही हैं। यह दृश्य वात्सल्य रस की पराकाष्ठा है।

द्वितीय अंतरा का भाव: बाल कृष्ण के कोमल शरीर पर आंगन की धूल चांदी (रजत) के समान चमक रही है। उनकी कमर में ब बंधी करधनी और पैरों के घुंघरू खनक रहे हैं। उनके कानों में मकर (मछली) के आकार के सुंदर कुण्डल धीरे-धीरे हिल रहे हैं, जो उनके सौंदर्य में चार चांद लगा रहे हैं।

अंतिम भाव: गीतकार कप्तान सिंह संघर्षी कहते हैं कि इन बाल लीलाओं के दर्शन मात्र से भक्तों के सारे भाग्य खुल जाते हैं। नंद भवन में उत्सव का माहौल है और सभी भक्त उनके इस रूप पर मुग्ध होकर जयकारे लगा रहे हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • वात्सल्य रस की प्रधानता: यह भजन भगवान कृष्ण के प्रति माता यशोदा के अगाध प्रेम और वात्सल्य को समर्पित है।
  • ब्रज संस्कृति का चित्रण: इसमें ब्रज की भाषा, शब्दावली (जैसे ढोटा, नजरोटा, बेनी) और सांस्कृतिक परिवेश का सुंदर सजीव चित्रण किया गया है।
  • भक्ति और आनंद का संगम: इसे सुनने से मन को असीम शांति मिलती है और साधक का चित्त भगवान के बाल रूप में रम जाता है।
  • लोकप्रिय संगीत रचना: प्रसून संघर्षी की सुरीली गायकी और मणि कान्त के संगीत संयोजन ने इस भजन को सभी आयु वर्ग के भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बना दिया है।
  • संबंधित पावन भजन और स्तोत्र पढ़ने के लिए आप हमारे राधा कृष्ण भजन संग्रह का अवलोकन कर सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप के इस भजन का गायन या श्रवण विशेषतः निम्नलिखित अवसरों पर अत्यंत फलदायी माना गया है:

  • जन्माष्टमी उत्सव: श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर रात्रि के समय या जन्मोत्सव के उल्लास में इस भजन को विशेष रूप से गाया जाता है।
  • दैनिक पूजा और सत्संग: सुबह की पूजा के समय या घर में होने वाले साप्ताहिक सत्संग, संकीर्तन और भजन संध्या में इसे गाकर वातावरण को भक्तिमय बनाया जा सकता है।
  • मानसिक शांति के लिए: जब भी मन अशांत हो, इस मधुर भजन को सुनने से चित्त में सकारात्मक ऊर्जा और आनंद का संचार होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
घुटवान घुटनों के बल चलना बालक कृष्ण की शुरुआती चलने की अवस्था
ढोटा पुत्र या लाडला ब्रज भाषा में दुलारे पुत्र के लिए प्रयुक्त शब्द
नजरोटा नजर से बचाने का काला टीका बुरी नजर से रक्षा के लिए लगाया जाने वाला टीका
मकराकृत मछली के आकार के कुण्डल कानों में पहने जाने वाले विशेष आभूषण
रजत चांदी आंगन की धूल की चमक की तुलना चांदी से

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम घुटवान घुटवान डोले श्याम (Ghutwan Dole Shyam)
आराध्य देव भगवान श्री कृष्ण (बाल रूप)
गीतकार एवं रचयिता कप्तान सिंह संघर्षी
गायक प्रसून संघर्षी
संगीतकार मणि कान्त
संगीत लेबल्स यूकी (Yuki Music)
भाषा हिंदी / ब्रज भाषा मिश्रित
श्रेणी कृष्ण भजन / बाल लीला गीत

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध भजन के गायक युवा और प्रतिभाशाली कलाकार प्रसून संघर्षी हैं, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज से इसमें प्राण फूंके हैं।

इस भजन के गीतकार एवं संगीत रचयिता कप्तान सिंह संघर्षी हैं।

यह भजन भगवान श्री कृष्ण के बाल्यकाल में घुटनों के बल चलने (घुटवान लीला) और माता यशोदा के उनके प्रति अपार वात्सल्य भाव पर आधारित है।

यह भजन प्रसिद्ध भक्ति संगीत लेबल Yuki (यूकी) के माध्यम से रिलीज किया गया है।

इस भजन को आप सुबह की पूजा के समय, जन्माष्टमी के पावन अवसर पर या किसी भी समय मानसिक शांति और आनंद प्राप्ति के लिए सुन सकते हैं।

'नजरोटा' का अर्थ छोटे बालकों को बुरी नजर से बचाने के लिए माथे या गाल पर लगाया जाने वाला काला टीका है।

हां, इसकी मधुर धुन और बाल स्वरूप के वर्णन के कारण यह बच्चों और बड़ों दोनों को समान रूप से प्रिय है।

यह भजन हमें भगवान के बाल स्वरूप के प्रति प्रेम विकसित करने और निष्काम भक्ति भाव से जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री: भक्तलोक पर प्रकाशित यह आलेख पारंपरिक स्रोतों, संगीत रिलीज विवरण और प्रामाणिक भक्ति साहित्यों के आधार पर संकलित किया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों को त्रुटिहीन और उच्च गुणवत्तापूर्ण devotional content प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ

  • श्रीकृष्ण पावन बाल लीला वर्णन एवं ब्रज साहित्य परंपरा।
  • यूकी म्यूजिक (Yuki Music) आधिकारिक रिलीज और एल्बम विवरण।
  • लोक संगीत एवं संकीर्तन परंपरा के मौखिक व लिखित संग्रह।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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