"दुनिया रचने वाले को भगवान कहते हैं और संकट हरने वाले को हनुमान कहते हैं" - यह भजन सनातन धर्म के सबसे लोकप्रिय, हृदयस्पर्शी और ऊर्जावान भजनों में से एक है। यह पावन भजन श्री हनुमान जी की असीम महिमा, उनके संकटमोचन स्वरूप और उनके प्रति अनन्य भक्ति भाव को समर्पित है। इस भजन का मुख्य भाव 'पूर्ण शरणागति' और 'अटूट विश्वास' है, जो भक्तों को यह सिखाता है कि जब संसार के सभी मार्ग बंद हो जाते हैं, तब पवनपुत्र हनुमान जी की शरण ही एकमात्र सहारा बनती है। इस भजन को प्रसिद्ध भजन गायक श्री लखबीर सिंह लख्खा जी ने अपनी ओजस्वी और भावपूर्ण आवाज में गाकर जन-जन के कंठ का हार बना दिया है। हनुमान जन्मोत्सव, मंगलवार, शनिवार और सुंदरकांड के पाठ के अवसरों पर इस भजन का गायन विशेष रूप से किया जाता है। यह भजन न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है बल्कि साधक के भीतर भय का नाश कर अदम्य साहस का संचार करता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
दुनियाँ रचने वाले को भगवान कहते हैं,
और संकट हरने वाले को हनुमान कहते हैं।
हो जाते है जिसके अपने पराये,
हनुमान उसको कंठ लगाये।
जब रूठ जाये संसार सारा,
बजरंगबली तब देते सहारा।
अपने भक्तो का बजरंगी मान करते है,
संकट हरने वाले को हनुमान कहते हैं।
दुनियाँ रचने वाले को भगवान कहते हैं...॥
दुनिया में काम कोई ऐसा नहीं है,
हनुमान के जो बस में नहीं है।
जो चीज मांगो पल में मिलेगी,
झोली ये खाली खुशियों से भरेगी।
सच्चे मन से जो भी इनका ध्यान करते हैं,
संकट हरने वाले को हनुमान कहते हैं।
दुनियाँ रचने वाले को भगवान कहते हैं...॥
कट जाये संकट इनकी शरण में,
बैठ के देखो बजरंग के चरण में।
‘लख्खा’ की बातों को झूठ मत मानो,
फिर ना फंसोगे जीवन मरण में।
इनके सीने में हरदम सिया राम रहते है,
संकट हरने वाले को हनुमान कहते हैं।
दुनियाँ रचने वाले को भगवान कहते हैं...॥
और देवता चित्त ना धरही,
हनुमंत से सर्व सुख करही।
संकट कटे मिटे सब पीरा,
जो सुमिरै हनुमत बल बीरा।
दुनिया रचने वाले को भगवान कहते हैं,
संकट हरने वाले को हनुमान कहते हैं।
दुनियाँ रचने वाले को भगवान कहते हैं...॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का मूल संदेश भगवान और उनके अनन्य भक्त (जो स्वयं भगवान के अवतार स्वरूप हैं) के बीच के दिव्य संबंध को उजागर करना है। भजन की शुरुआत में ही यह स्पष्ट किया गया है कि इस चराचर जगत का निर्माण करने वाली परम सत्ता को हम 'भगवान' कहते हैं, लेकिन उस सृष्टि में रहने वाले जीवों के दुखों, कष्टों और संकटों का निवारण करने वाले देव को 'हनुमान' कहा जाता है।
भजन का प्रथम अंतरा मानवीय संबंधों की नश्वरता को दर्शाता है। जब व्यक्ति का बुरा समय आता है, तो उसके अपने भी पराए हो जाते हैं। ऐसी विकट परिस्थिति में, जब पूरा संसार मुख मोड़ लेता है, तब बजरंगबली उस असहाय भक्त को गले लगाते हैं और उसे संबल प्रदान करते हैं। हनुमान जी अपने भक्तों के मान-सम्मान की रक्षा करते हैं।
द्वितीय अंतरा हनुमान जी की सर्वशक्तिमानता को प्रदर्शित करता है। इस ब्रह्मांड में ऐसा कोई कार्य नहीं है जो हनुमान जी के लिए असंभव हो। वे अष्टसिद्धि और नवनिधि के दाता हैं। जो भक्त सच्चे मन से उनका ध्यान करता है, उसकी खाली झोली खुशियों से भर जाती है। अंतिम पंक्तियों में जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति और हनुमान जी के हृदय में माता सीता और प्रभु श्री राम के शाश्वत निवास का वर्णन किया गया है, जो उनकी परम भक्ति का प्रमाण है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- शरणागति का संदेश: यह भजन भक्त को सिखाता है कि जब सांसारिक सहारे टूट जाते हैं, तब हनुमान जी का दिव्य सहारा ही जीवन की नैया को पार लगाता है।
- तुलसीदास जी की चौपाइयों का समावेश: भजन के अंत में हनुमान चालीसा की प्रसिद्ध चौपाइयों "और देवता चित्त ना धरही..." और "संकट कटै मिटै सब पीरा..." को जोड़ा गया है, जो इस भजन की प्रामाणिकता और आध्यात्मिक शक्ति को कई गुना बढ़ा देती हैं।
- भयमुक्ति और आत्मविश्वास: इस भजन के नियमित श्रवण और गायन से साधक के भीतर से नकारात्मक ऊर्जा और भय का नाश होता है, तथा सकारात्मकता का संचार होता है।
- राम-भक्ति का आदर्श: भजन यह स्पष्ट करता है कि हनुमान जी की शक्ति का स्रोत उनकी निष्काम राम-भक्ति है। उनके हृदय में सदैव 'सिया-राम' विराजमान रहते हैं।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि हनुमान जी की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, लेकिन इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि अत्यंत फलदायी मानी गई है:
- शुभ दिन: मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए विशेष माना गया है। इन दिनों सुबह या संध्याकाल में इस भजन का पाठ करना चाहिए।
- विशेष अवसर: हनुमान जन्मोत्सव, सुंदरकांड पाठ, श्री हनुमान चालीसा पाठ के समापन पर, अथवा किसी भी पारिवारिक सत्संग में इस भजन को सामूहिक रूप से गाया जा सकता है।
- गायन विधि: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक या चमेली के तेल का दीपक जलाएं। लाल आसन पर बैठकर पूर्ण श्रद्धा और ताली बजाते हुए इस भजन का संकीर्तन करें।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्रावतार श्री हनुमान जी को समर्पित है। हनुमान जी को कलयुग का जाग्रत देव माना जाता है, जो अपने भक्तों की पुकार पर तुरंत दौड़े चले आते हैं। इसके साथ ही, यह भजन मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम और माता सीता की महिमा को भी रेखांकित करता है, क्योंकि हनुमान जी की भक्ति राम नाम के बिना अधूरी है। इस भजन के अंत में गोस्वामी तुलसीदास जी की अमर रचना 'हनुमान चालीसा' की चौपाइयों को समाहित किया गया है, जो संत तुलसीदास जी के प्रति भी श्रद्धा व्यक्त करता है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
इस भजन को आधुनिक युग के महान रामभक्त और भजन सम्राट श्री लखबीर सिंह लख्खा जी ने अपनी विशिष्ट शैली में गाया है। लख्खा जी के भजनों की यह विशेषता रही है कि वे शास्त्रीय मर्यादाओं के साथ-साथ जनसाधारण की भाषा और भावनाओं को बहुत खूबसूरती से जोड़ते हैं। इस भजन की पृष्ठभूमि पारंपरिक लोक-भक्ति पर आधारित है, जहां भक्त अपने आराध्य को एक रक्षक, मित्र और मार्गदर्शक के रूप में देखता है। कलयुग के कष्टों से त्रस्त मानव जाति के लिए यह भजन एक संजीवनी बूटी के समान कार्य करता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी है। इसमें जटिल दार्शनिक शब्दों के स्थान पर ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिन्हें एक साधारण बालक से लेकर वृद्ध तक आसानी से समझ और गा सकते हैं।
- काव्य शैली: यह एक 'पद' या 'गीत' शैली में रचित है, जिसमें लय और ताल का सुंदर समन्वय है।
- अलंकार और रूपक: भजन में "कंठ लगाना", "झोली भरना", "सीने में सिया राम रहना" जैसे सुंदर मुहावरों और रूपकों का प्रयोग किया गया है, जो भक्ति रस को और अधिक सघन बनाते हैं।
- छंद परिवर्तन: भजन के मुख्य भाग के बाद अवधी भाषा में रचित चौपाइयों का आना इसकी काव्य गरिमा को शिखर पर ले जाता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि इसमें जीवन के गहरे सत्य और व्यावहारिक सीख छिपी हुई हैं:
- संसार की नश्वरता: भजन हमें याद दिलाता है कि सांसारिक रिश्ते और परिस्थितियां परिवर्तनशील हैं। जब सब साथ छोड़ देते हैं, तब केवल ईश्वर का साथ ही स्थायी होता है।
- निस्वार्थ सेवा और समर्पण: हनुमान जी का जीवन निष्काम सेवा का सर्वोत्तम उदाहरण है। हमें भी अपने कर्तव्यों का पालन बिना किसी अहंकार के करना चाहिए।
- सच्ची प्रार्थना की शक्ति: "सच्चे मन से जो भी इनका ध्यान करते हैं..." - यह पंक्ति दर्शाती है कि ईश्वर को पाने के लिए किसी आडंबर की आवश्यकता नहीं है, केवल एक सच्चा और निर्मल मन ही काफी है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| संकट हरने वाले | कष्टों और दुखों को दूर करने वाले | हनुमान जी का 'संकटमोचन' स्वरूप जो विघ्नों का नाश करता है। |
| कंठ लगाये | गले से लगाना, अपनाना | ईश्वर द्वारा भक्त को बिना किसी भेदभाव के स्वीकार करना। |
| बजरंगबली | वज्र के समान शक्तिशाली अंगों वाले | हनुमान जी का एक नाम जो उनकी असीम शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति को दर्शाता है। |
| झोली भरना | इच्छाओं की पूर्ति करना | भक्त की झोली को सुख, समृद्धि और भक्ति से सराबोर करना। |
| चित्त ना धरही | किसी अन्य देव का ध्यान न करना | हनुमान जी की अनन्य भक्ति से ही सभी सुखों की प्राप्ति हो जाती है। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"दुनियाँ रचने वाले को भगवान कहते हैं, और संकट हरने वाले को हनुमान कहते हैं।"
भावार्थ: इस संपूर्ण सृष्टि का निर्माण करने वाले परमेश्वर को हम भगवान के रूप में पूजते हैं, परंतु उस सृष्टि के जीवों पर आने वाले हर संकट और विपत्ति को दूर करने वाले देव पवनपुत्र हनुमान हैं।
"हो जाते है जिसके अपने पराये, हनुमान उसको कंठ लगाये।"
भावार्थ: जब विपत्ति के समय व्यक्ति के सगे-संबंधी और मित्र भी उसका साथ छोड़ देते हैं, तब हनुमान जी उस असहाय और अकेले पड़े भक्त को अपनी शरण में लेकर उसे सांत्वना और सुरक्षा प्रदान करते हैं।
"जब रूठ जाये संसार सारा, बजरंगबली तब देते सहारा।"
भावार्थ: यदि संपूर्ण संसार भी किसी व्यक्ति के विरुद्ध हो जाए, तब भी बजरंगबली अपने भक्त का हाथ कभी नहीं छोड़ते। वे सदैव उसके रक्षक बनकर खड़े रहते हैं।
"दुनिया में काम कोई ऐसा नहीं है, हनुमान के जो बस में नहीं है।"
भावार्थ: हनुमान जी अतुलित बल के धाम हैं। इस ब्रह्मांड में ऐसा कोई भी कठिन से कठिन कार्य नहीं है जिसे हनुमान जी सिद्ध न कर सकें। वे असंभव को भी संभव करने वाले हैं।
"इनके सीने में हरदम सिया राम रहते है..."
भावार्थ: हनुमान जी की भक्ति की पराकाष्ठा यह है कि उनके हृदय में सदैव माता सीता और भगवान श्री राम का वास रहता है। वे राम-नाम के रस में ही सदैव मग्न रहते हैं।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के प्रभाव को और अधिक बढ़ाने के लिए भजन के पूर्व या पश्चात निम्नलिखित सिद्ध मंत्रों का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
अर्थ: जिनकी मन के समान गति और वायु के समान वेग है, जो परम जितेन्द्रिय और बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, उन पवनपुत्र, वानरयूथपति श्रीरामदूत हनुमान की मैं शरण लेता हूँ।
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | दुनियाँ रचने वाले को भगवान कहते हैं (Duniya Rachne Wale Ko Bhagwan Kehte Hain) |
| मुख्य आराध्य देव | श्री हनुमान जी, प्रभु श्री राम |
| प्रसिद्ध गायक | लखबीर सिंह लख्खा (Lakhbir Singh Lakkha) |
| भाषा | हिंदी (खड़ी बोली) एवं अवधी (चौपाइयां) |
| भक्ति का स्वरूप | दास्य भाव, शरणागति, संकटमोचन भाव |
| उपयुक्त अवसर | मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती, सुंदरकांड पाठ, सत्संग |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख सनातन धर्म की समृद्ध भजन परंपरा और हनुमान भक्ति के महत्व को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। भजन के मूल पाठ की शुद्धता और उसके दार्शनिक पहलुओं का गहन विश्लेषण किया गया है ताकि पाठकों को न केवल लिरिक्स प्राप्त हों, बल्कि वे इसके गहरे आध्यात्मिक संदेश को भी आत्मसात कर सकें। यह संपादकीय रूप से तैयार सामग्री पाठकों की श्रद्धा और ज्ञानवर्धन के लिए प्रस्तुत की गई है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्री रामचरितमानस: गोस्वामी तुलसीदास कृत (सुंदरकांड एवं लंकाकांड)।
- श्री हनुमान चालीसा: पारंपरिक पाठ एवं चौपाइयां।
- भक्ति संगीत परंपरा: श्री लखबीर सिंह लख्खा जी के आधिकारिक संकीर्तन संग्रह।
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