Parvati Stotram

अरदास सोम सोम दे भरे भंडारे तेरे लिरिक्स (Ardas Som Som De Bhare Bhandare Lyrics in Hindi) - Ganesh Bhajan - Bhaktilok

253 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण फलश्रुति, धार्मिक लाभ एवं प्रभाव

गणेश जी की कृपा से सभी बाधाएँ दूर होती हैं, इस भजन का पाठ करें और जीवन में सुख शांति की प्राप्ति करें।

सोम सोम दे भरे भण्डार तेरे, मंगल मेहर दा बक्षो दान माताबुध बुद्धि दे विच प्रकाश होवे, वीर वीरता दा बक्षो दान माताशक्र शुकर कराँ तेरा हर वेले, शनि शांति दे हों सामान माताएतवार विश्वास यकीन होवे, पूरन कर दो सारे काज माताहे माता मातेश्वरी सर्व सुखों की खान, माँ देवन वाली एक है मांगत कुल जहानअज्ज वी तेरा आसरा कल वी तेरी आस, घड़ी घड़ी माँ आसरा ज्येष्ठ बारह मासमेरी दाती के दरबार में सभी खड़े हत्थ जोड़, माँ देवन वाली एक है मांगत लाख करोड़ऐ सच्चियाँ जोतां वाली माता तुहाडी सदा ही जयएत अम्बिका जी हिंगलाज, ज्वाला माँ, तेरा पर्वतां दे विच दरबार मातासोम सरस्वती, कालका, भद्रकाली, तैनू सिमरदा ए कुल संसार मातामगल मनसा देवी तू है पिंडरानी, समय समय ते लवें अवतार माताबुध वीरता दी वरी महान शक्ति, बग्घे शेर ते होवे सवार मातावीर वैष्णो देवी नैना देवी, लक्खां भक्त दित्ते ने तार माताशुक्र शक्ति भवानी कृपालु है तू, कई जालिमां नूँ दित्ता है मार माताशनि शांति रूप महान दुर्गे, तैनू भक्त सिमरन सत्ते वार माता रूप एक ते नाम अनेक तेरे, तेरे चरणां तो जावाँ बलिहार मातामेहर करो मातेश्वरी, आये तेरे द्वार, रक्ख लाज दाती आनके तुझे करते हैं नमस्कार नमस्कार नमस्कार ||
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में गणेश जी के प्रति प्रकट की गई भक्ति और समर्पण का अभिव्यक्ति है। 'सोम सोम दे भरे भण्डार तेरे' की पंक्ति में भगवान गणेश से आशीर्वाद मांगा जा रहा है कि वे अपने भंडार से सभी भक्तों को मंगलमय उपहार दें। यह संकेत करता है कि जो भी श्रद्धापूर्वक उनका स्मरण करेगा, उसे उनके भंडार से भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि मिलेगी। 'माताबुध बुद्धि दे विच प्रकाश होवे' में बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जा रही है। भक्त गणेश जी से प्रार्थना करते हैं कि वे उनके अंदर ज्ञान और समझ का प्रकाश फैलाएं, ताकि वे अपने कार्यों में सफल हों। भजन में यह भी कहा गया है कि माता शक्ति विभिन्न रूपों में दर्शन देती हैं, जो जीवन में सुख-शांति प्रदान करती हैं।

इस भजन के भावार्थ को हम गहराई से समझ सकते हैं। 'वीर वीरता दा बक्षो दान' में गणेश जी से वीरता एवं साहस की कृपा की याचना की जा रही है, जिसका महत्वपूर्ण अर्थ है कि मुश्किल समय में हिम्मत बनाए रखना। भक्त आशा करते हैं कि आश्रय में माता की कृपा उन पर सदा बनी रहेगी। 'घड़ी घड़ी माँ आसरा ज्येष्ठ बारह मास' से पता चलता है कि यह भक्ति हर समय की आवश्यकता है, चाहे वह संकट का समय हो या सुख का। हम सभी को इस भक्ति में लीन होना चाहिए और माता की शरण में जाना चाहिए, जिससे जीवन में हर कठिनाई दूर हो सके।

इस भजन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह भक्तिपथ को उजागर करता है, जहां भक्त स्वाभाविक रूप से अपनी समस्याओं को ज्ञानी शक्ति से परामर्श करने की याचना करते हैं। यह विभिन्न नामों के माध्यम से मां के अवतारों का गुणगान करता है, जैसे 'मंगल मनसा देवी', 'नैना देवी', जो दर्शाते हैं कि माताओं के अनेक रूप हैं और सभी भक्तों की रक्षा करती हैं। यह भजन भक्ति मार्ग का पालन करने की प्रेरणा देता है, जहां भक्त अपनी चिंताओं को भगवान के चरणों में रखते हैं और उनकी कृपा की प्रतीक्षा करते हैं, जो अंततः हमें सच्ची शांति और समृद्धि की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का पौराणिक महत्व अत्यधिक है। गणेश जी को विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है और उन्हें सभी कार्यों की शुरुआत में स्मरण किया जाता है। यह भी उल्लेखनीय है कि माताओं के विभिन्न रूपों का सम्मान करते हुए भजन में शक्ति, वीरता और ज्ञान की चर्चा की गई है। भारतीय पुराणों में गणेश जी का सम्मान हर उत्सव और पूजा में अनिवार्य रहा है। यह उनके प्रति भक्ति प्रकट करने का एक माध्यम है, जो हमें जीवन की कठिनाइयों से उबरने में मदद करता है। गणेश पुराण में बताया गया है कि माता आदिशक्ति और उनके अवतार हमेशा भक्तों की रक्षा करते हैं और उनके असीम करुणा के प्रतीक हैं।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। इस भजन का उच्चारण करने से मानसिक शांति, आंतरिक संतुलन और भक्ति में वृद्धि होती है। यह उन भक्तों के लिए विशेष लाभकारी है जो मुश्किल क्षणों में आंतरिक साहस और शक्ति की खोज करते हैं। साथ ही, यह भजन भक्तों में सकारात्मक उर्जा और मानसिक स्पष्टता लाने में सहायक है। जब इसे श्रद्धा से गाया जाता है, तो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और सुख-शांति का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय किया जा सकता है जब मन शांत हो। पूजा करने के लिए एक दीया जलाएं और गणेश जी की मूर्ति के समक्ष पुष्प अर्पित करें। ध्यान दें कि ह्रदय में श्रद्धा और भक्ति हो और ध्यान लगाएं कि गणेश जी उन सभी चुनौतियों को दूर करें जो आपके जीवन में विघ्न डालती हैं। सही मुद्रा में बैठकर भजन का पाठ करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का पाठ करने का सही समय क्या है?

इस भजन का पाठ सुबह और शाम, दोनों ही समय उपयुक्त है। शव्दों के प्रति ध्यान लगाते हुए पाठ करें।

क्या इस भजन का विशेष कोई त्यौहार है?

इस भजन का विशेष महत्व गणेश चतुर्थी के दौरान होता है, जब भक्त गणेश जी की आराधना करते हैं।

क्या कोई विशेष सामग्री इस भजन के पाठ में समर्पित करनी चाहिए?

भजन का पाठ करते समय दक्षिणा, फल और मिठाई प्रस्तुत कर सकते हैं, जो भगवान को प्रसन्न करती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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