Shyam Bhajan

श्याम का नाम जपता जा तू बस गुणगान करता जा (Shyam Ka Naam Japta Ja Lyrics in Hindi) - Khatu Shyam Bhajan Nisha Dwivedi - BhaktiLok

84 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम का नाम जपता जा तू बस गुणगान करता जा भजन (Shyam Ka Naam Japta Ja Lyrics in Hindi) खट्टू श्याम जी की महिमा को समर्पित एक अत्यंत ही पावन, ऊर्जावान और भावपूर्ण संकीर्तन रचना है। प्रसिद्ध भजन गायिका निशा द्विवेदी द्वारा स्वरबद्ध यह भजन कलयुग के प्रत्यक्ष देवता हारे के सहारे बाबा श्याम की अहैतुकी कृपा प्राप्त करने का सहज मार्ग प्रशस्त करता है। सनातन भक्ति परंपरा में 'नाम स्मरण' को भवसागर से पार उतरने का सबसे सरल और अचूक साधन माना गया है। इस भजन का प्रत्येक शब्द साधक के अंतर्मन में बसी सांसारिक चिंताओं को दूर कर अनन्य प्रेम, पूर्ण शरणागति (आत्मसमर्पण) और अगाध विश्वास का संचार करता है। खट्टू श्याम मंदिर में आयोजित होने वाले मासिक उत्सवों, फाल्गुन लक्खी मेले, एकादशी जागरण और घरों में होने वाले सत्संग व संकीर्तन के समय इस भजन का गान अनगिनत भक्तों द्वारा अत्यंत श्रद्धा के साथ किया जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा (Refrain):

श्याम का नाम जपता जा तू बस गुणगान करता जा,
मिलेगा प्यार बाबा का तू दिल से ध्यान करता जा।
श्याम का नाम जपता जा तू बस गुणगान करता जा...

अंतरा 1:

दुनिया के इन मेलों में क्यों तू उलझा रहता है,
झूठे रिश्तों के बंधन में क्यों मन को गहता है?
तेरा साथी है खाटू वाला, उस पर मान करता जा,
मिलेगा प्यार बाबा का तू दिल से ध्यान करता जा।
श्याम का नाम जपता जा तू बस गुणगान करता जा...

अंतरा 2:

हारे के जो सहारे हैं, वो लखदातार कहलाते हैं,
जो भी दर पे आते हैं, झोली भर के जाते हैं।
चरणों में इसके शीश झुकाकर, तू कल्याण करता जा,
मिलेगा प्यार बाबा का तू दिल से ध्यान करता जा।
श्याम का नाम जपता जा तू बस गुणगान करता जा...

अंतरा 3:

संकट की जब रात घिरे तो, श्याम को मन में लाना तू,
निशि द्विवेदी कहे बाबा को, अपना ही अपनाना तू।
नैया पार लगेगी तेरी, विश्वास दान करता जा,
मिलेगा प्यार बाबा का तू दिल से ध्यान करता जा।
श्याम का नाम जपता जा तू बस गुणगान करता जा...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

"श्याम का नाम जपता जा तू बस गुणगान करता जा" भजन का शाब्दिक और आध्यात्मिक अर्थ मनुष्य जीवन को एक नई दिशा प्रदान करता है। भजन का मुखड़ा स्पष्ट रूप से यह संदेश देता है कि मानव जीवन की भागदौड़ और दुखों के बीच यदि कोई शाश्वत सत्य है, तो वह श्री खाटू श्याम जी का नाम स्मरण है। कलयुग में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं खाटू श्याम (बर्बरीक) को अपने नाम से पूजित होने का वरदान दिया था। यही कारण है कि जो भक्त निरंतर 'श्याम' नाम का जाप करते हैं, उन्हें अलौकिक शांति और प्रभु का सानिध्य प्राप्त होता है।

पहले अंतरे में भजनकार ने सांसारिक मोह-माया और झूठे रिश्तों की नश्वरता पर प्रकाश डाला है। मनुष्य अपना संपूर्ण जीवन स्वार्थी संबंधों और भौतिक सुखों के पीछे भागने में व्यतीत कर देता है, जिससे उसे अंततः मानसिक अशांति ही मिलती है। भजन याद दिलाता है कि हमारा सबसे सच्चा साथी और रक्षक केवल खाटू वाला श्याम बाबा है, इसलिए अपना संपूर्ण अभिमान और भरोसा उसी पर रखना चाहिए।

दूसरे अंतरे में बाबा श्याम की सर्वविदित पदवी 'हारे का सहारा' और 'लखदातार' का गुणगान किया गया है। जो व्यक्ति जीवन से निराश हो चुका हो, जिसके सभी मार्ग बंद हो चुके हों, वह यदि खाटू श्याम के दरबार में सच्ची निष्ठा से उपस्थित होता है, तो उसकी सूनी झोली अवश्य भर जाती है। चरणों में शीश झुकाने का अर्थ पूर्ण विनम्रता और अहंकार का त्याग करना है।

अंतिम अंतरे में गायिका निशि द्विवेदी ने संकट के समय धैर्य और अडिग विश्वास रखने की प्रेरणा दी है। जीवन में आने वाली बाधाएं क्षणिक हैं, किंतु यदि साधक श्याम बाबा को अपना सर्वस्व मानकर उनकी शरण में रहता है, तो भवसागर रूपी भंवर से उसकी नैया अवश्य ही पार लग जाती है। यह भजन केवल एक संगीत रचना नहीं, बल्कि खट्टू श्याम के प्रति अनन्य प्रेम का आध्यात्मिक दस्तावेज है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस लोकप्रिय श्याम भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे हर भक्त के हृदय के करीब रखती हैं:

  • नाम स्मरण की महिमा: सनातन धर्म में कलयुग के संतापों से मुक्ति पाने का एकमात्र अचूक साधन 'हरिनाम संकीर्तन' बताया गया है, जिसे इस भजन में प्रमुखता से उभारा गया है।
  • निशा द्विवेदी की मधुर वाणी: प्रसिद्ध भजन गायिका निशा द्विवेदी के ओजस्वी और मधुर स्वर ने इस रचना में ऐसा प्राण फूंका है कि श्रोता झूम उठते हैं।
  • मानसिक संतापों से मुक्ति: तनावभरी जीवनशैली में इस भजन को सुनने और गुनगुनाने से मन को असीम शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
  • सरल एवं बोधगम्य भाषा: आम बोलचाल की सहज हिंदी और ब्रज-अवधि संस्कृति से जुड़े शब्दों का प्रयोग इसे हर आयु वर्ग के लोगों के लिए सुलभ बनाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत को विधि-विधान और शुद्ध भाव के साथ अपनाने से उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं प्रातः काल: सुबह उठकर स्नान के पश्चात पूजा घर में धूप-दीप प्रज्वलित करके इस भजन का श्रवण करने से पूरा दिन सकारात्मकता से बीतता है।
  • संध्याकालीन आरती: संध्या के समय जब घर के मंदिर में दीपक जलाया जाता है, तब श्याम बाबा के इस भजन को गाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • खाटू श्याम सत्संग एवं जागरण: मासिक एकादशी, द्वादशी या फाल्गुन मेले के अवसरों पर होने वाले सामूहिक संकीर्तन में इस भजन को कोरस में गाया जाता है।
  • यात्रा के दौरान: सफर करते समय या मानसिक तनाव के क्षणों में इयरफोन लगाकर इस भजन को सुनने से चित्त शांत होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से कलियुग के अवतार श्री खाटू श्याम बाबा (महाभारत के वीर योद्धा बर्बरीक) को समर्पित है। भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक के महान त्याग और दानशीलता से प्रसन्न होकर उन्हें अपने नाम 'श्याम' से पूजे जाने का वरदान दिया था। इसके साथ ही, इस भजन को स्वरबद्ध करने वाली प्रख्यात भजन गायिका निशा द्विवेदी ने अपनी सुमधुर वाणी से इसे जन-जन तक पहुंचाया है। श्याम भक्तों की परंपरा में संकीर्तन को ही सबसे बड़ा यज्ञ माना गया है, जिसमें संतों और भक्तों की यह वाणी संजीवनी का काम करती है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

खाटू श्याम संस्कृति में भजनों की रचना मुख्य रूप से भक्तों के आंतरिक अनुभवों और बाबा के चमत्कारों पर आधारित होती है। "श्याम का नाम जपता जा" भजन इस परंपरा की एक आधुनिक किंतु अत्यंत सशक्त कड़ी है। खट्टू धाम (राजस्थान) आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के मन में चलने वाले अंतर्द्वंद्व और बाबा के प्रति अटूट विश्वास को ध्यान में रखकर इस रचना को गढ़ा गया है। आधुनिक वाद्ययंत्रों और पारंपरिक लोक धुनों का सुंदर मिश्रण इस भजन को विशेष बनाता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, प्रवाहमयी और आम जनमानस की समझ में आने वाली हिंदी है जिसमें ब्रज और राजस्थानी लोकभाषा की मिठास भी झलकती है। काव्य शैली के अंतर्गत अनुप्रास और पुनरुक्ति प्रकाश अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे— 'जपता जा तू बस गुणगान करता जा'। यह लयात्मकता श्रोता को स्वतः ही थिरकने और झूमने पर विवश कर देती है। शब्दों का चयन इतना भावुक है कि वह सीधे हृदय को स्पर्श करता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल गाने की प्रेरणा नहीं देता, बल्कि जीवन जीने के कई गूढ़ पाठ पढ़ाता है:

  • अडिग विश्वास: कैसी भी विपरीत परिस्थिति हो, ईश्वर पर भरोसा कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
  • अहंकार का त्याग: अपने बल और धन का घमंड छोड़कर भगवान के चरणों में झुकना ही सच्ची बुद्धिमत्ता है।
  • वर्तमान में सकारात्मकता: सांसारिक दुखों से घबराने के बजाय निरंतर प्रभु का स्मरण करते रहना चाहिए।
  • दूसरों की सहायता: जैसे बाबा श्याम 'हारे का सहारा' बनते हैं, वैसे ही हमें भी जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
जपता जा निरंतर नाम दोहराना अखंड स्मरण और अजपा जाप की स्थिति
गुणगान यश गाना या स्तुति करना भगवान की महिमा का प्रसार करना
लखदातार लाखों को देने वाला अछुण्ण कृपा बरसाने वाले बाबा श्याम
हारे का सहारा निराश व्यक्तियों की ताकत कमजोरों और विपत्तिग्रस्तों के रक्षक
विश्वास दान भरोसे की भेंट ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा का होना

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"श्याम का नाम जपता जा तू बस गुणगान करता जा"
अर्थात हे मानव! इस नश्वर संसार में रहते हुए अपने मुख से निरंतर खाटू श्याम का नाम जपते रहो और उनकी महिमा का बखान करते रहो।

"दुनिया के इन मेलों में क्यों तू उलझा रहता है"
अर्थात यह संसार क्षणिक मेलों की भांति है, जिसमें अनावश्यक रूप से मोहग्रस्त होकर अपना अमूल्य समय व्यर्थ मत करो।

"तेरा साथी है खाटू वाला, उस पर मान करता जा"
अर्थात तुम्हारे वास्तविक मार्गदर्शक और रक्षक खाटू श्याम हैं, इसलिए गर्व से कहो कि तुम उनके आश्रित हो।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

ॐ श्री श्याम देवाय नमः |
हारे के सहारे की जय, तीन बाण धारी की जय |

खाटू श्याम के स्मरण के समय इस मूल मंत्र और जयकारे का उच्चारण करने से मानसिक बल प्राप्त होता है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम श्याम का नाम जपता जा तू बस गुणगान करता जा
समर्पित देवता श्री खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक)
गायक / कलाकार निशा द्विवेदी (Nisha Dwivedi)
भाषा हिंदी / लोक भाषा
संगीत शैली भक्ति रस / संकीर्तन / श्याम भजन
मुख्य भाव शरणागति, प्रेम, विश्वास और नाम स्मरण
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, एकादशी जागरण, फाल्गुन मेला, सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय भजन को प्रसिद्ध भजन गायिका निशा द्विवेदी (Nisha Dwivedi) ने अपने ओजस्वी और मधुर स्वरों में गाया है।

यह भजन कलियुग के अवतार हारे के सहारे श्री खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक) को समर्पित है।

इस भजन को प्रातः काल पूजा के समय, संध्या आरती में, या खाटू श्याम के सत्संग व जागरण के दौरान पूरी श्रद्धा और ताल के साथ गाया जा सकता है।

महाभारत काल में खाटू श्याम बाबा का नाम बर्बरीक था, जो घटोत्कच और मौरवी के पुत्र थे। भगवान कृष्ण के वरदान से वे कलियुग में श्याम नाम से पूजे जाते हैं।

श्याम नाम के निरंतर जाप से मानसिक अशांति दूर होती है, जीवन के संकटों से लड़ने की शक्ति मिलती है और साधक को बाबा श्याम की अहैतुकी कृपा प्राप्त होती है।

हाँ, इसे घर पर अकेले या परिवार के साथ पूजा के दौरान पूरी भक्ति भाव से गाया जा सकता है। भक्ति में भाव मुख्य होता है।

श्री खाटू श्याम जी का मुख्य और ऐतिहासिक मंदिर राजस्थान राज्य के सीकर जिले के खाटू नामक कस्बे में स्थित है।

बाबा श्याम अपने भक्तों की झोली बिना किसी भेदभाव के खुलकर भरते हैं और उन्हें कभी निराश नहीं करते, इसलिए उन्हें 'लखदातार' कहा जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन धर्म की भजन परंपरा और श्री खाटू श्याम जी की महिमा को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसमें पाठकों की सुविधा के लिए शुद्ध हिंदी लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, कठिन शब्दों के अर्थ और प्रामाणिक जानकारियों को सम्मिलित किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता - नाम संकीर्तन योग संदर्भ
  • पारंपरिक खाटू श्याम संकीर्तन साहित्य एवं लोक भजन संग्रह
  • भजन गायिका निशा द्विवेदी की प्रस्तुतियां एवं ऑडियो-विजुअल रिकॉर्डिंग
  • श्री खाटू श्याम मंदिर समिति, सीकर (राजस्थान) के ऐतिहासिक एवं धार्मिक विवरण
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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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