"करो भजन उस राम भक्त लिरिक्स (Karo Bhajan Us Ram Bhakt Lyrics in Hindi)" भजन सम्राट अनूप जलोटा जी की मधुर और दिव्य आवाज में गाया गया एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी हनुमान भजन है। यह भजन भगवान श्री रामचंद्र जी के अनन्य भक्त, संकटमोचन, पवनपुत्र श्री हनुमान जी की महिमा, उनके अतुलित बल, बुद्धि और निश्छल भक्ति को समर्पित है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सुंदरकांड के प्रसंगों से प्रेरित यह भजन श्रोताओं के मन में समर्पण, सेवा भाव और अटूट विश्वास का संचार करता है। इस भजन का मुख्य स्वर 'दास्य भाव' की भक्ति पर आधारित है, जहाँ हनुमान जी ने अपना सर्वस्व प्रभु श्री राम के चरणों में अर्पित कर दिया। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, कठिन शब्दों के अर्थ और इससे मिलने वाली जीवन सीख पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
करो भजन उस राम भक्त के बोलो जय बजरंग बलि
करो भजन उस राम भक्त के बोलो जय बजरंग बलि।।
लंका पति की माया जिसके बल के आगे नहीं चली
करो भजन उस राम भक्त के बोलो जय बजरंग बलि।।
वो अंजनी के पुत्र जिसे हनुमान नाम से सब जाने
जो भजते अंजनी सुत को वो उसकी महिमा पहचाने
जिसकी बल बुद्धि पर असुरो की शक्ति भी नहीं चली
करो भजन उस राम भक्त के बोलो जय बजरंग बलि।।
हुआ हरण जब सीता जी का श्री राम से हुआ मिलन
उसने प्रभु चरणों में अपना सौंप दिया सारा जीवन
रघुराई की चरण शरण में जिसकी भगति शक्ति पली
करो भजन उस राम भक्त के बोलो जय बजरंग बलि।।
अद्भुत बल शक्ति धारे ही जब हनुमत पहुंचे लंका
पता लगाया माँ सीता का पीट दिया अपना डंका
बलशाली रावण की सोने की लंका ही सोने की मगर जली
करो भजन उस राम भक्त के बोलो जय बजरंग बलि।।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन हनुमान जी की अतुलनीय शक्ति और उनकी अनन्य राम भक्ति का सुंदर चित्रण करता है। भजन की शुरुआत में ही भक्त को यह संदेश दिया गया है कि हमें उस परम राम भक्त हनुमान जी की आराधना करनी चाहिए, जिनके बल के सामने लंकापति रावण की कोई भी मायावी शक्ति काम नहीं कर सकी। रावण अपनी माया और आसुरी शक्तियों के लिए जाना जाता था, परंतु जब उसका सामना हनुमान जी से हुआ, तो उसकी सारी विद्याएं और अहंकार धरे के धरे रह गए।
भजन के अगले भाग में माता अंजनी के लाल हनुमान जी के नाम और उनके स्वरूप की महिमा गाई गई है। हनुमान जी को जो भी सच्चे मन से भजता है, वह उनकी असीम कृपा और महिमा का अनुभव करता है। हनुमान जी केवल शारीरिक बल के ही स्वामी नहीं हैं, बल्कि वे 'बुद्धिमतां वरिष्ठम्' यानी बुद्धिमानों में भी श्रेष्ठ हैं। उनकी इसी बल और बुद्धि के आगे असुरों की कोई भी चाल सफल नहीं हो सकी।
जब माता सीता का हरण हुआ और प्रभु श्री राम का मिलन हनुमान जी से ऋष्यमूक पर्वत पर हुआ, तब हनुमान जी ने बिना किसी संकोच के अपना संपूर्ण जीवन प्रभु के चरणों में समर्पित कर दिया। उनकी भक्ति और शक्ति प्रभु श्री राम की शरण में ही विकसित हुई। अंत में, भजनकार हनुमान जी द्वारा लंका में किए गए अद्भुत कार्यों का वर्णन करता है, जहाँ उन्होंने अपनी पूंछ से रावण की सोने की लंका को भस्म कर दिया और माता सीता की खोज कर प्रभु श्री राम का कार्य सिद्ध किया।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे अन्य भजनों से अलग और अत्यंत प्रभावशाली बनाती हैं:
- दास्य भक्ति का चरमोत्कर्ष: यह भजन हनुमान जी की दास्य भक्ति को रेखांकित करता है। हनुमान जी ने कभी भी स्वयं को भगवान नहीं माना, बल्कि हमेशा स्वयं को श्री राम का दास ही कहा। यही समर्पण उन्हें पूजनीय बनाता है।
- बल और बुद्धि का समन्वय: भजन में हनुमान जी के केवल शारीरिक बल की ही नहीं, बल्कि उनकी तीक्ष्ण बुद्धि की भी प्रशंसा की गई है। जीवन में सफलता के लिए बल और बुद्धि दोनों का होना आवश्यक है।
- भय का नाश: "जय बजरंग बलि" का उद्घोष भक्तों के भीतर से हर प्रकार के भय, नकारात्मकता और असुरक्षा की भावना को समाप्त कर देता है।
- अनूप जलोटा जी का सुरीला गायन: अनूप जलोटा जी की शास्त्रीय और सुगम संगीत शैली ने इस भजन को अत्यंत कर्णप्रिय और ध्यानमग्न करने वाला बना दिया है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि ईश्वर की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर और विधियां अत्यंत फलदायी मानी गई हैं:
- मंगलवार और शनिवार: ये दोनों दिन हनुमान जी की पूजा के लिए विशेष रूप से समर्पित हैं। इन दिनों सुबह या शाम के समय इस भजन को सुनने से मानसिक शांति मिलती है।
- हनुमान जयंती: हनुमान जयंती के पावन अवसर पर मंदिरों और घरों में सामूहिक संकीर्तन के समय इस भजन का गायन अत्यंत शुभ माना जाता है।
- सुंदरकांड पाठ के पूर्व या पश्चात: जब भी आप अपने घर में सुंदरकांड पाठ का आयोजन करें, तो इस भजन को गाकर हनुमान जी का आह्वान कर सकते हैं।
- गायन की विधि: शांत चित्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं और पूर्ण श्रद्धा भाव से इस भजन का श्रवण या गायन करें।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री हनुमान और उनके आराध्य प्रभु श्री रामचंद्र जी को समर्पित है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, हनुमान जी को अष्टसिद्धि और नवनिधि के दाता के रूप में पूजा जाता है। वे शिवजी के रुद्र अवतार हैं और उनकी भक्ति का आधार केवल और केवल राम नाम है। इस भजन के माध्यम से भक्त और भगवान के बीच के उस अटूट संबंध को दर्शाया गया है जो त्रेतायुग से आज तक संपूर्ण विश्व के लिए प्रेरणा का स्रोत है। संत तुलसीदास जी ने भी अपनी रचनाओं में हनुमान जी की इसी महिमा का गान किया है, जिसे इस आधुनिक भजन में बहुत ही सरल शब्दों में पिरोया गया है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
इस भजन की पृष्ठभूमि रामायण और रामचरितमानस के किष्किंधा कांड और सुंदरकांड के प्रसंगों पर आधारित है। जब सुग्रीव की सेना माता सीता की खोज में चारों दिशाओं में भटक रही थी, तब हनुमान जी ने समुद्र लांघकर लंका जाने का कठिन कार्य अपने हाथ में लिया। यह भजन उसी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक घटनाक्रम को याद दिलाता है। इस भजन को आधुनिक युग में प्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलोटा जी ने अपने विशिष्ट अंदाज में गाकर जन-जन तक पहुँचाया है। इसकी सरल भाषा और मधुर धुन के कारण यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की जुबान पर रहता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें अवधी और संस्कृत के तत्सम शब्दों का सुंदर समावेश है। इसकी काव्य शैली गेय (गाए जाने योग्य) है। भजन में प्रयुक्त रूपक और उपमाएं अत्यंत सजीव हैं, जैसे "सोने की लंका ही सोने की मगर जली"। यह पंक्ति रावण के अहंकार और उसकी भौतिक संपदा के विनाश को बहुत ही प्रतीकात्मक ढंग से दर्शाती है। भजन का छंद और लय ऐसा है जो सुनते ही मन को झूमने पर मजबूर कर देता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन जीने के कई महत्वपूर्ण संदेश देता है:
- अहंकार का पतन निश्चित है: रावण की सोने की लंका और उसकी मायावी शक्ति भी उसे नष्ट होने से नहीं बचा सकी क्योंकि वह अहंकारी था। हनुमान जी ने अपने बल का उपयोग कभी अहंकार के लिए नहीं, बल्कि सेवा के लिए किया।
- पूर्ण समर्पण की शक्ति: जब हम स्वयं को ईश्वर के चरणों में समर्पित कर देते हैं, तो हमारी रक्षा की जिम्मेदारी स्वयं भगवान उठा लेते हैं। हनुमान जी ने अपना सारा जीवन रघुराई को सौंप दिया था।
- कर्तव्य के प्रति निष्ठा: हनुमान जी ने लंका जाकर माता सीता का पता लगाया और प्रभु का कार्य सिद्ध किया। यह हमें सिखाता है कि हमें अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा और बिना किसी भय के करना चाहिए।
- बुद्धि और विवेक का महत्व: केवल शारीरिक बल ही पर्याप्त नहीं है, कठिन परिस्थितियों में बुद्धि और विवेक का उपयोग करना ही सच्ची बुद्धिमानी है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| बजरंग बलि | वज्र के समान अंगों वाले बलवान | हनुमान जी का एक अत्यंत शक्तिशाली स्वरूप |
| लंका पति | लंका का राजा रावण | अहंकार और भौतिकता का प्रतीक |
| अंजनी सुत | माता अंजनी के पुत्र | हनुमान जी का जन्म और उनकी मातृभक्ति |
| रघुराई | रघुकुल के राजा श्री राम | परमेश्वर, मर्यादा पुरुषोत्तम |
| माया | भ्रम या जादुई शक्तियां | संसार की नश्वर और असत्य शक्तियां |
| डंका पीटना | विजय की घोषणा करना | सत्य की असत्य पर जीत का उद्घोष |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"करो भजन उस राम भक्त के बोलो जय बजरंग बलि। लंका पति की माया जिसके बल के आगे नहीं चली..."
अर्थ: हे मानव! तुम उस परम राम भक्त हनुमान जी का भजन करो और पूरे उत्साह से 'जय बजरंग बलि' का जयकारा लगाओ। उस हनुमान जी की आराधना करो जिनके असीम बल के सामने लंका के राजा रावण की कोई भी मायावी और आसुरी शक्ति टिक नहीं सकी।
"वो अंजनी के पुत्र जिसे हनुमान नाम से सब जाने। जो भजते अंजनी सुत को वो उसकी महिमा पहचाने..."
अर्थ: वे माता अंजनी के अत्यंत प्रिय पुत्र हैं जिन्हें सारा संसार 'हनुमान' के नाम से पूजता है। जो भी भक्त सच्चे हृदय से अंजनीपुत्र हनुमान जी का ध्यान करता है, वही उनकी वास्तविक महिमा और दयालुता को समझ पाता है।
"जिसकी बल बुद्धि पर असुरो की शक्ति भी नहीं चली..."
अर्थ: हनुमान जी के पास शारीरिक बल के साथ-साथ तीक्ष्ण बुद्धि भी है। उनकी इसी अद्भुत बल-बुद्धि के कारण लंका के बड़े से बड़े राक्षसों और असुरों की कोई भी चाल या शक्ति उनके सामने निष्प्रभावी हो गई।
"हुआ हरण जब सीता जी का श्री राम से हुआ मिलन। उसने प्रभु चरणों में अपना सौंप दिया सारा जीवन..."
अर्थ: जब दुष्ट रावण ने माता सीता का हरण कर लिया और उसके बाद हनुमान जी का मिलन प्रभु श्री राम से हुआ, तब हनुमान जी ने बिना किसी संकोच के अपना संपूर्ण जीवन, अपनी सारी शक्तियां प्रभु के चरणों में समर्पित कर दीं।
"रघुराई की चरण शरण में जिसकी भगति शक्ति पली..."
अर्थ: हनुमान जी की जो भक्ति और अलौकिक शक्ति है, वह प्रभु श्री राम की चरण शरण में रहने के कारण ही और अधिक फलीभूत और विकसित हुई है। उनका अस्तित्व ही राम नाम से है।
"अद्भुत बल शक्ति धारे ही जब हनुमत पहुंचे लंका। पता लगाया माँ सीता का पीट दिया अपना डंका..."
अर्थ: अपनी अद्भुत शक्तियों और विशाल रूप को धारण करके जब हनुमान जी समुद्र लांघकर लंका पहुँचे, तो उन्होंने न केवल माता सीता की खोज की, बल्कि वहां अपनी वीरता का ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरी लंका में उनके नाम का डंका बजने लगा।
"बलशाली रावण की सोने की लंका ही सोने की मगर जली..."
अर्थ: अत्यंत शक्तिशाली और अभिमानी रावण की वह लंका जो पूरी तरह से सोने की बनी हुई थी, हनुमान जी की पूंछ की अग्नि से जलकर राख हो गई। यह दर्शाता है कि ईश्वर के भक्तों के सामने भौतिक संपदा का अहंकार कभी टिक नहीं सकता।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के साथ-साथ यदि आप हनुमान जी के इन सिद्ध मंत्रों का भी जाप करते हैं, तो आपकी पूजा पूर्ण मानी जाती है:
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
अर्थ: मन के समान गति वाले, पवन के समान वेग वाले, इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, पवनपुत्र, वानर सेना के नायक श्रीरामदूत हनुमान जी की मैं शरण लेता हूँ।
इसके अतिरिक्त, आप हनुमान जी के इस महामंत्र का भी जाप कर सकते हैं:
"ॐ हं हनुमते नमः"
यह हनुमान मंत्र जीवन के सभी कष्टों और बाधाओं को दूर करने में अत्यंत प्रभावी माना गया है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | करो भजन उस राम भक्त के बोलो जय बजरंग बलि |
|---|---|
| मुख्य गायक | अनूप जलोटा (Anup Jalota) |
| समर्पित देवता | भगवान श्री हनुमान एवं प्रभु श्री राम |
| भक्ति का भाव | दास्य भाव, समर्पण, वीर रस |
| भाषा | सरल हिंदी (खड़ी बोली) |
| उपयुक्त अवसर | मंगलवार पूजा, हनुमान जयंती, सुंदरकांड पाठ, शनिवार सत्संग |
| मुख्य संदेश | अहंकार का त्याग, निश्छल भक्ति और सेवा भाव |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "करो भजन उस राम भक्त लिरिक्स (Karo Bhajan Us Ram Bhakt Lyrics in Hindi)" के प्रामाणिक स्रोतों, रामचरितमानस के सुंदरकांड के प्रसंगों और पारंपरिक हिंदू भक्ति पद्धतियों के गहन अध्ययन के बाद तैयार किया गया है। हमारी संपादकीय टीम ने यह सुनिश्चित किया है कि भजन के लिरिक्स और उसके भावार्थ पूरी तरह से शुद्ध और त्रुटिहीन हों। यह सामग्री "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" की श्रेणी में आती है, जिसका उद्देश्य पाठकों को सही और उच्च गुणवत्ता वाली आध्यात्मिक जानकारी प्रदान करना है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण - सुंदरकांड प्रसंग
- श्रीरामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास
- अनूप जलोटा जी के आधिकारिक भक्ति एल्बम और प्रस्तुतियां
- पारंपरिक हनुमान भजन संग्रह एवं संकीर्तन पद्धतियां
संबंधित भजन एवं लेख
यदि आपको यह भजन और इसकी व्याख्या पसंद आई हो, तो आप हमारी वेबसाइट पर निम्नलिखित संबंधित लेख और भजन भी पढ़ सकते हैं:
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें