जो खेल गए प्राणो पे श्री राम के लिए लिरिक्स (Jo Khel Gaye Prano pe Shree Ram Ke liye Lyrics in Hindi) - Akansha Mittal Hanuman Bhajan
भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त, संकटमोचन पवनसुत हनुमान जी की महिमा का गुणगान करने वाले भजनों में 'जो खेल गए प्राणो पे श्री राम के लिए' (Jo Khel Gaye Prano pe Shree Ram Ke liye) एक अत्यंत लोकप्रिय और ऊर्जावान भजन है। सुप्रसिद्ध गायिका आकांक्षा मित्तल (Akansha Mittal) की मधुर एवं ओजस्वी आवाज में गाया गया यह हनुमान भजन श्रोताओं के हृदय में भक्ति, वीरता और समर्पण का अद्भुत भाव जगा देता है। इस भजन की पंक्तियाँ हनुमान जी के उस अद्वितीय पराक्रम और अगाध प्रेम का स्मरण कराती हैं, जो उन्होंने अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के चरणों में समर्पित कर दिया था। लंका दहन से लेकर संजीवनी बूटी लाने और विभीषण के समक्ष सीना चीरकर राम-सीता के दर्शन कराने तक, इस भजन में हनुमान जी के जीवन के हर उस प्रसंग को छुआ गया है जो सनातन संस्कृति में अटूट निष्ठा का प्रतीक है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, हिंदी अर्थ, गायन की विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व का गहन विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।
भजन स्मरण का आध्यात्मिक महत्व
नियमित रूप से संकटमोचन हनुमान जी के भजनों का स्मरण और श्रवण करने से मन के भय, नकारात्मकता और बाधाओं का नाश होता है। यह भजन विशेषकर मंगलवार, शनिवार और हनुमान जयंति के अवसरों पर भक्तों द्वारा अत्यंत प्रेम और श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
[ मुखड़ा / स्थाय ]
जो खेल गए प्राणों पे श्री राम के लिए,
इक बार तो हाथ उठा दो मेरे हनुमान के लिए।
जो खेल गए प्राणों पे, जो खेल गए प्राणों पे श्री राम के लिए,
इक बार तो हाथ उठा दो मेरे हनुमान के लिए।
[ अंतरा 1 ]
सागर को लांघ के इसने सीता का पता लगाया,
प्रभु राम नाम का डंका जा कर लंका में बजाया।
माता अंजनी की ऐसी... माता अंजनी की ऐसी संतान के लिए,
इक बार तो हाथ उठा दो मेरे हनुमान के लिए।
[ अंतरा 2 ]
लक्ष्मण को बचाने की जब सारी आशाएं टूटी,
ये पवन वेग से जाकर लाए संजीवनी बूटी।
पर्वत को उठाने वाले... पर्वत को उठाने वाले बलवान के लिए,
इक बार तो हाथ उठा दो मेरे हनुमान के लिए।
[ अंतरा 3 ]
विभीषण ने भक्ति पर जब आज है प्रशन उठाया,
तो चीर के सीना अपना श्री राम का दर्श कराया।
इस परम भक्त हनुमान... इस परम भक्त हनुमान के सम्मान के लिए,
इक बार तो हाथ उठा दो मेरे हनुमान के लिए।
[ समापन ]
जो खेल गए प्राणों पे... जो खेल गए प्राणों पे श्री राम के लिए,
इक बार तो हाथ उठा दो मेरे हनुमान के लिए।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन साधारण शब्दों में रचित होने के बावजूद हनुमान जी के जीवन के सबसे महान और वीरतापूर्ण प्रसंगों को समेटे हुए है। आइए इसके प्रत्येक पद के गहरे आध्यात्मिक और भक्तिपरक अर्थ को समझें:
मुखड़े का भाव:
भजन की शुरुआत एक ललकार और समर्पण के साथ होती है कि जो महाबली अपने प्राणों की परवाह किए बिना केवल और केवल श्री रामजी की सेवा और उनके कार्यों के लिए समर्पित रहे, ऐसे संकटमोचन के सम्मान में हर भक्त को अपने दोनों हाथ उठाकर उनकी जयकार करनी चाहिए। यह भाव भक्त के भीतर उत्साह और ऊर्जा भर देता है।
प्रथम अंतरे का भाव:
माता सीता की खोज में जब विशाल समुद्र को लांघने की चुनौती आई, तब हनुमान जी ने अपनी बुद्धि, बल और अगाध भक्ति के बल पर समुद्र पार किया और अशोक वाटिका में माता सीता का पता लगाया। उन्होंने रावण की स्वर्ण लंका में प्रभु राम के नाम का डंका बजाकर अधर्मियों को चेतावनी दी। ऐसी माता अंजनी की परम तेजस्वी संतान के लिए हाथ उठाने का आह्वान किया गया है।
द्वितीय अंतरे का भाव:
जब मेघनाद की शक्ति बाण से लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए और लंका में हर तरफ निराशा छा गई, तब पवनसुत हनुमान ने क्षणभर में पवन के वेग से उड़कर द्रोणगिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाए। उस संपूर्ण पर्वत को ही हथेली पर उठाकर लाने वाले अतुलित बलधाम के लिए यह पंक्तियाँ समर्पित हैं।
तृतीय अंतरे का भाव:
एक प्रसंग में जब विभीषण या अन्य दरबारियों के मन में यह विचार आया कि हनुमान जी के हृदय में कौन बसता है, तब हनुमान जी ने अपने दोनों हाथों से अपना वक्षस्थल (सीना) चीरकर सबको अपने हृदय में विराजित सिया-राम के दर्शन करा दिए। इस परम निष्ठा और अमर भक्त हनुमान के गौरव व सम्मान में सभी को अपनी हथेलियां उठाकर उनकी महिमा का गान करना चाहिए।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
ओज एवं ऊर्जा का संचार
यह भजन साधारण शांत रस का न होकर वीर रस और भक्ति रस का अद्भुत संगम है। इसे सुनते ही शरीर में एक नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होने लगता है।
आदर्श सेवक का स्वरूप
हनुमान जी के माध्यम से यह भजन सिखाता है कि अपने आराध्य और गुरु के प्रति समर्पण किस प्रकार का होना चाहिए। प्राणों की बाजी लगाकर भी कर्तव्य का पालन ही सच्ची भक्ति है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन का गायन और श्रवण विशेष अवसरों पर अत्यंत फलदायी माना जाता है:
- मंगलवार और शनिवार: इन दोनों वारों पर हनुमान जी की विशेष पूजा के दौरान इस भजन को बजाने या गाने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- हनुमान जयंति और रामनवमी: पावन पर्वों पर होने वाले जागरण, चौकी और सत्संग में यह भजन श्रोताओं को झूमने पर विवश कर देता है।
- दैनिक साधना: सुबह के समय स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर इस भजन को सुनने से पूरे दिन मन में ऊर्जा और आत्मबल बना रहता है।
सत्संग या घर पर भजन करते समय ताली बजाकर (जैसा कि भजन की पंक्तियों में कहा गया है - "इक बार तो हाथ उठा दो") गाने से शारीरिक और मानसिक चक्र जागृत होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| प्राणों पे खेलना | अपने जीवन की परवाह न करना | प्रभु सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने को तत्पर रहना |
| सागर लांघना | समुद्र पार करना | असंभव प्रतीत होने वाले कठिन कार्यों को इच्छाशक्ति से पूरा करना |
| पवन वेग | हवा की गति से तीव्र | संकट के समय बिना किसी विलंब के सहायता के लिए तत्पर होना |
| संजीवनी बूटी | मृत्युतुल्य कष्ट को दूर करने वाली जड़ी-बूटी | भक्तों के जीवन के सबसे बड़े संकट का निवारण |
| सीना चीरना | वक्षस्थल को खोलकर दिखाना | हृदय की पवित्रता और प्रभु के प्रति अनन्य प्रेम का प्रमाण |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | जो खेल गए प्राणो पे श्री राम के लिए (Jo Khel Gaye Prano pe Shree Ram Ke liye) |
|---|---|
| ارध्य / देवता | संकटमोचन श्री हनुमान जी एवं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम |
| गायिका | आकांक्षा मित्तल (Akansha Mittal) |
| भाषा | सरल हिंदी / ब्रज-अवधि मिश्रित बोल |
| संगीत शैली | भक्ति / वीर रस प्रधान भजन |
| मुख्य विषय | हनुमान जी का पराक्रम, राम भक्ति और समर्पण |
| उपयुक्त अवसर | मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंति, जागरण एवं सत्संग |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
भक्तलोकिन् (Bhaktilok.in) पर प्रस्तुत यह सामग्री सनातन संस्कृति, हनुमान भक्ति परंपरा और उपलब्ध लोक-साहित्य के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध लिरिक्स, सटीक भावार्थ और आध्यात्मिक प्रेरणा प्रदान करना है।
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