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राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट लिरिक्स (Ram naam ki loot hai loot sake to loot Lyrics in Hindi) - Ram Naam Sukhdai Subhash Goyal - Bhaktilok

136 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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  • SEO Title: राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट लिरिक्स - Ram Naam Sukhdai | Bhaktilok
  • Meta Description: पढ़िए प्रसिद्ध राम भजन 'राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट लिरिक्स' (Ram naam ki loot hai loot sake to loot Lyrics in Hindi)। जानिए इस भजन का संपूर्ण अर्थ, भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व।

राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट लिरिक्स (Ram naam ki loot hai loot sake to loot Lyrics in Hindi) - परिचय एवं महत्व

भारतीय संत परंपरा और सनातन संगीत में भगवान श्री राम के पावन नाम स्मरण को भवसागर से तरने का एकमात्र सुलभ साधन माना गया है। संत श्री सुभाष गोयल एवं विभिन्न लोक गायकों द्वारा अत्यंत भावपूर्ण स्वर में गाया जाने वाला यह भजन "राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट लिरिक्स (Ram naam ki loot hai loot sake to loot Lyrics in Hindi)" केवल एक संगीतबद्ध रचना नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन की नश्वरता और भगवान के नाम की शाश्वत महत्ता का एक अद्भुत दार्शनिक संदेश है। इस भजन का मुख्य भाव यह है कि यह मनुष्य योनि और श्वासों का खजाना सीमित है, इसलिए अंतकाल में पछताने से बचने के लिए वर्तमान में ही राम नाम रूपी धन को प्रचुर मात्रा में संचित कर लेना चाहिए। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण लिरिक्स, पद-दर-पद भावार्थ, आध्यात्मिक गहराई और इसके गायन से मिलने वाले जीवन के शाश्वत सत्यों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

तुलसीदास जी ने भी रामचरितमानस में कहा है—"कलिजुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा।" कलियुग के इस व्यस्त और मोह-माया से ग्रसित युग में जहाँ बड़े-बड़े यज्ञ, तप और अनुष्ठान करना कठिन हो गया है, वहाँ केवल जिह्वा से राम नाम का निरंतर स्मरण करना ही सबसे बड़ा तप और पुण्य माना गया है। यह भजन साधक को उसके वास्तविक लक्ष्य की याद दिलाता है और क्षणभंगुर संसार से मन हटाकर परमात्मा के चरणों में प्रीति जोड़ने की प्रेरणा देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट!
अंतकाल पछताएगा, जब प्राण जाएंगे छूट...||


(ध्रुव पद / टेक)
राम नाम सुखदाई, भजन करो भाई, ये जीवन दो दिन का...||


ये तन है जंगल की लकड़ी, आग लगे जल जाई,
भजन करो भाई, ये जीवन दो दिन का...||

ये तन है कागज की पुड़िया, हवा चले उड़ जाई,
भजन करो भाई, ये जीवन दो दिन का...||

ये तन है माटी का ढेला, बूँद पड़े गल जाई,
भजन करो भाई, ये जीवन दो दिन का...||

ये तन है फूलों का बगीचा, धूप पड़े मुरझाई,
भजन करो भाई, ये जीवन दो दिन का...||

ये तन है कच्ची सी हवेली, पल में टूट जाई,
भजन करो भाई, ये जीवन दो दिन का...||

ये तन है सपनों की माया, आँख खुले कुछ नाहीं,
भजन करो भाई, ये जीवन दो दिन का...||

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन की पंक्तियाँ बहुत ही सरल लोकभाषा में रची गई हैं, किंतु इनके भीतर उपनिषदों और वेदांत दर्शन का अत्यंत गहरा सार छिपा हुआ है। भजन के मखड़े में कहा गया है कि "राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट"। यहाँ 'लूट' शब्द का तात्पर्य नकारात्मक अर्थ में न होकर सकारात्मक अर्थ में है—अर्थात भगवान का नाम ऐसा खुला खजाना है जिसपर किसी का पहरा नहीं है, कोई भी प्राणी इसे स्वेच्छा से जितना चाहे ग्रहण कर सकता है। यदि इस दुर्लभ मनुष्य जीवन में रहते हुए राम नाम रूपी धन को नहीं बटोरा गया, तो अंत समय में जब प्राण शरीर को छोड़कर जाएंगे, तब केवल पछतावे के अलावा कुछ हाथ नहीं आएगा।

संत कवि आगे मनुष्य शरीर की नश्वरता को समझाने के लिए अत्यंत सुंदर और सटीक रूपकों (Metaphors) का प्रयोग करते हैं:

  • जंगल की लकड़ी: जैसे जंगल की सूखी लकड़ी अंततः आग में जलकर राख हो जाती है, वैसे ही यह शरीर भी वृद्धावस्था और रोगों की अग्नि में जलकर नष्ट हो जाता है।
  • कागज की पुड़िया: यह शरीर कागज की उस नाज़ुक पुड़िया की तरह है जिसपर हवा का एक हल्का झोंका (मृत्यु का एक श्वास) भी भारी पड़ सकता है और यह पलभर में बिखर जाती है।
  • माटी का ढेला: यह काया मिट्टी का पिण्ड है जिसपर काल की एक बूँद या प्रलय का पानी पड़ते ही यह मिट्टी में मिल जाती है (मिट्टी का शरीर मिट्टी में विलीन हो जाता है)।
  • फूलों का बगीचा: यौवन और सुंदरता फूलों के बगीचे के समान हैं जिनपर वृद्धावस्था और धूप पड़ते ही चमक मुरझा जाती है।
  • कच्ची हवेली: यह शरीर किसी कच्ची दीवार या हवेली की भाँति है जिस पर समय का थोड़ा सा आघात भी भारी पड़ता है और यह ढह जाती है।
  • सपनों की माया: संपूर्ण संसार और इस शरीर का मोह एक स्वप्न की भाँति है। नींद खुलने (ज्ञानोदय या मृत्यु) के बाद इस संसार में कुछ भी अपना नहीं रहता।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन सनातन धर्म के वैराग्य मार्ग का एक प्रमुख स्तंभ है। जब भी मनुष्य अपने दैनिक जीवन में अत्यधिक अहंकार, भौतिकता और संसारी प्रपंचों में उलझ जाता है, तब ऐसे भजन उसे उसकी मूल वास्तविकता का बोध कराते हैं।

वैराग्य एवं चेतना

शरीर की नश्वरता का बोध कराकर मोह-माया के बंधनों को ढीला करने और सच्चे आंतरिक आनंद की ओर प्रेरित करता है।

नामस्मरण की महिमा

कलियुग में बिना किसी कठिन हठयोग के केवल जिह्वा से राम नाम के जप मात्र से तारण की गारंटी देता है।

काल की अनिवार्यता

मृत्यु अटल सत्य है, इस बात का स्मरण कराकर वर्तमान क्षण को भजन और सत्कर्म में सदुपयोग करने की सीख देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस प्रकार के संतों द्वारा रचित वैराग्य प्रधान भजनों को गाने और सुनने के लिए कोई विशेष नियम की अनिवार्यता नहीं होती, फिर भी निम्नलिखित अवसरों पर इसका विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है:

  • 🌅 ब्रह्ममुहूर्त एवं प्रातःकालीन वंदना: दिन की शुरुआत भगवान के नाम और इस विचार के साथ करने से पूरा दिन सकारात्मकता और धर्म में व्यतीत होता है।
  • 📿 सत्संग एवं संकीर्तन सभाएं: साप्ताहिक सत्संग, रामायण पाठ के विश्राम के समय या धार्मिक सम्मेलनों में सामूहिक गान के लिए यह भजन अत्यंत लोकप्रिय है।
  • 🕯️ संध्या कालीन बेला: दिन ढलने के समय जब संसार की भागदौड़ शांत होती है, तब मन को अंतर्मुखी बनाने के लिए इसका श्रवण अत्यंत शांति देता है।
  • 🌿 एकादशी एवं विशेष पर्व: व्रत और उपवास के दिनों में आत्ममंथन करते हुए इस भजन का स्मरण करने से चित्त शुद्ध होता है।

भजन की रचना, पृष्ठभूमि एवं संत परंपरा | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक-संत वाणी (Sant Vani) से प्रेरित है जिसे विभिन्न लोक कलाकारों और प्रतिष्ठित गायकों जैसे श्री सुभाष गोयल ने अपने मधुर एवं मर्मस्पर्शी स्वरों से जन-जन तक पहुँचाया है। संत परंपरा में इस प्रकार के पद अक्सर उन संतों द्वारा रचे गए जिन्होंने संसार की असारता को अपनी आँखों से देखा और अनुभव किया। गोस्वामी तुलसीदास, कबीर दास, सूरदास और मीराबाई जैसी महान विभूतियों ने भी अपने पदों में बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि यह मानव जीवन क्षणभंगुर है और इसे केवल सांसारिक भोग-विलास में गँवा देना सबसे बड़ी मूर्खता है।

श्री राम का नाम केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि यह वह तारक मंत्र है जिसे भगवान शिव स्वयं काशी में मरणोपरांत जीवों के कानों में जपते हैं। इस भजन के रचयिता ने बहुत ही सहजता से ग्रामीण एवं आम बोलचाल के उदाहरण देकर यह सिद्ध कर दिया है कि दर्शनशास्त्र की बड़ी-बड़ी बातें जो समझ में न आएँ, वे एक छोटी सी कविता या भजन से हृदय में उतर जाती हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल हिंदी, अवधी और राजस्थानी-हरियाणवी लोक बोलियों का एक सुंदर मिश्रण है। इसमें प्रयुक्त शब्द जैसे 'ढेला', 'पुड़िया', 'हवेली' और 'लकड़ी' आम आदमी के दैनिक जीवन से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि यह भजन अनपढ़ से लेकर उच्च शिक्षित व्यक्ति तक के हृदय को तुरंत स्पर्श कर लेता है। काव्य शैली की दृष्टि से इसमें 'रूपक अलंकार' (Metaphor) और 'मानवीकरण' का अद्भुत प्रयोग हुआ है, जहाँ शरीर की तुलना अलग-अलग नश्वर वस्तुओं से की गई है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
राम नाम की लूट बिना रोक-टोक राम नाम का प्रचुर संचय भक्ति का ऐसा खजाना जो सभी के लिए निःशुल्क उपलब्ध है
अंतकाल मृत्यु का अंतिम समय जब जीव इस शरीर को छोड़कर परलोकगामी होता है
सुखदाई सुख देने वाला, शांति प्रदान करने वाला परमात्मा का नाम स्मरण ही सच्चा सुख देता है
कागज की पुड़िया कागज से बनी छोटी थैली जो तुरंत नष्ट हो जाए अति नाज़ुक और क्षणभंगुर मानव शरीर
सपनों की माया नींद में दिखने वाला झूठा संसार मोह-माया और असत्य संसार की नश्वरता

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट, अंतकाल पछताएगा जब प्राण जाएंगे छूट...
भावार्थ: कवि चेतावनी देता है कि हे मानव! ईश्वर का नाम रूपी धन इस समय दोनों हाथों से लूटने (बटोरने) के लिए उपलब्ध है। यदि तुमने जवानी और जीवन के अहंकार में इसे नहीं अपनाया, तो जब मृत्यु के समय प्राण इस शरीर को छोड़कर भागेंगे, तब तुम्हारे हाथ केवल पश्चाताप के सिवाय कुछ नहीं लगेगा।

2. राम नाम सुखदाई, भजन करो भाई, ये जीवन दो दिन का...
भावार्थ: इस संसार में केवल राम का नाम ही आंतरिक सुख और शांति देने वाला है। इसलिए हे भाई! इस अत्यंत अल्पकालिक (दो दिन के) जीवन में अन्य सब प्रपंच छोड़कर भगवान का भजन करो।

3. ये तन है जंगल की लकड़ी... कागज की पुड़िया... माटी का ढेला...
भावार्थ: शरीर की नश्वरता के इन सभी रूपों का अर्थ है कि यह काया किसी भी क्षण समाप्त हो सकती है। लकड़ी जल जाती है, कागज भीगकर या उड़कर नष्ट हो जाता है और मिट्टी का ढेला पानी में गल जाता है। अतः इस नश्वर शरीर पर अहंकार करना व्यर्थ है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

"हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥"

--- कलियुग उद्धार महामंत्र ---

इसके साथ ही श्री हनुमान चालीसा और श्री राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से साधक को राम नाम की सच्ची निष्ठा और बल की प्राप्ति होती है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट (Ram Naam Ki Loot Hai)
समर्पित देवता मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम
प्रमुख गायक श्री सुभाष गोयल एवं अन्य लोक कलाकार
भाषा हिंदी, अवधी एवं लोक बोली
मुख्य विषय / थीम वैराग्य, नामस्मरण, जीवन की नश्वरता
मुख्य भाव (Bhava) चेतावनी, विनय, भक्ति एवं आत्मबोध
उपयुक्त अवसर सत्संग, प्रातःकालीन वंदना, एकादशी, धार्मिक अनुष्ठान

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन संत परंपरा का एक अत्यंत लोकप्रिय लोक भजन है जिसे प्रसिद्ध गायक श्री सुभाष गोयल सहित कई अन्य प्रतिष्ठित भजन गायकों ने अपने अनूठे और भावपूर्ण स्वरों में गाया है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि मानव शरीर और जीवन अत्यंत क्षणभंगुर (नश्वर) हैं। मृत्यु अटल है, इसलिए मनुष्य को मोह-माया त्यागकर जीवन रहते हुए भगवान श्री राम के नाम का अधिक से अधिक स्मरण कर लेना चाहिए।

भजन में शरीर की तुलना जंगल की लकड़ी, कागज की पुड़िया, माटी के ढेले, फूलों के बगीचे, कच्ची हवेली और सपनों की माया से की गई है।

यहाँ 'लूट' शब्द सकारात्मक अर्थ में प्रयुक्त हुआ है जिसका अर्थ है कि ईश्वर का नाम एक ऐसा खजाना है जिस पर कोई प्रतिबंध नहीं है। कोई भी प्राणी स्वेच्छा से इसे जितना चाहे प्राप्त कर सकता है।

इस भजन को प्रातःकालीन पूजा, सत्संग, संकीर्तन सभाओं या व्यक्तिगत रूप से ध्यान और एकांत चिंतन के समय भावपूर्ण स्वर में गाया जा सकता है।

हाँ, यह भजन युवाओं को समय के सदुपयोग और जीवन के वास्तविक मूल्यों को समझने की प्रेरणा देता है ताकि वे केवल भौतिकता में न उलझकर आत्मिक विकास भी करें।

राम नाम के निरंतर स्मरण से मन का भटकना बंद होता है, मानसिक शांति मिलती है, पापों का शमन होता है और अंतकाल में मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

मुख्य रूप से यह भजन देवनागरी हिंदी में उपलब्ध है, किंतु राम भक्तों द्वारा इसे अंग्रेजी और अन्य क्षेत्रीय भारतीय लिपियों में भी लिपिबद्ध किया गया है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख सनातन भक्ति परंपरा, संत साहित्य और लोक भजनों के संकलन पर आधारित है। सभी लिरिक्स और भावार्थ को प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है ताकि पाठकों को शुद्ध और उच्च गुणवत्ता वाला आध्यात्मिक साहित्य मिल सके।


स्रोत एवं संदर्भ (Sources & References):

  • 1. रामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास जी
  • 2. भारतीय संत वाणी एवं लोक भजन संग्रह
  • 3. श्रीमद्भागवत गीता (नश्वरता और आत्मा का सार)

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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