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ॐ जय लक्ष्मी रमना स्वामी जय लक्ष्मी रमणा (Om jai lakshmi ramna Lyrics in Hindi) - Anuradha Paudwal shree satyanarayan aarti - Bhaktilok

191 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

श्री सत्यनारायण का आराध्य भजन

इस भजन के द्वारा साधक सुख, समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति कर सकते हैं।

ॐ जय लक्ष्मी रमना स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ॐ जय लक्ष्मी रमना स्वामी जय लक्ष्मी रमणा सत्य नारायण स्वामी जन पातक हरणा ॐ जय लक्ष्मी रमना... रतन जड़ित सिंहासन अद्भुत छवि राजा नारद करत निरंतर घंटा ध्वनि बाजे ॐ जय लक्ष्मी रमना... प्रगट भए कलि कारण द्विज को दरश दियो बूढो ब्राह्मण बनकर कंचन महल कियो ॐ जय लक्ष्मी रमना... दुर्बल भील कराल जिन पर कृपा करी चंद्रचूड़ एक राजा जिनकी विपति हरी ॐ जय लक्ष्मी रमना... वैश्य मनोरथ पायो श्रद्धा तज दिनी सो फल भोग्यो प्रभुजी फिर किन्ही ॐ जय लक्ष्मी रमना... भाव भक्ति के कारण छिन-छिन रूप धरयो श्रद्धा धारण किन्ही तिनको काज सरयो ॐ जय लक्ष्मी रमना... ग्वाल बाल संग राजा वन में भक्ति करी मन वांछित फल दीन्हो दीन दयाल हरी ॐ जय लक्ष्मी रमना... चढ़त प्रसाद सवायो कदली फल मेवाधूप दीप तुलसी से राजी सत्यदेव ॐ जय लक्ष्मी रमना... श्री सत्यनारायण जी की आरती जो कोई नर गावेतन मन सुख सम्पति मन वांक्षित फल पावे ॐ जय लक्ष्मी रमना...
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

गीत की पहली पंक्ति 'ॐ जय लक्ष्मी रमना स्वामी जय लक्ष्मी रमणा' में भगवान श्री सत्यनारायण के प्रति श्रद्धा और भक्ति का व्यक्त किया गया है। यह गीत लक्ष्मी माता और उनके भक्तों के बीच की दिव्य संबंध को दर्शाता है। इस भजन में यह बताया गया है कि सत्यनारायण स्वामी जनों के पापों को हरते हैं और भक्तों को असीम आभार प्रदान करते हैं। 'रतन जड़ित सिंहासन अद्भुत छवि राजे' की पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि भगवान की दिव्यता और उनकी अद्भुत छवि भक्तों के हृदय को छू लेती है। नारद जी और उनके द्वारा की गई भक्ति का उल्लेख इस बात का प्रमाण है कि भक्तों की भक्ति और विश्वास शक्ति की महिमा का कारण बनते हैं।

इस भजन के भावार्थ में गहराई से जाकर देखा जाए, तो यह केवल आराधना का गान नहीं, अपितु असंख्य भक्तों की प्रेरणा भी है। 'भाव भक्ति के कारण छिन-छिन रूप धरयो' से संकेत मिलता है कि भक्त की श्रद्धा और भक्ति भगवान के दिव्य रूप को धारण कराती है। इस भजन के माध्यम से हम यह समझते हैं कि जिनका मन और ह्रदय भक्ति में लीन होता है, भगवान उनके कष्टों को दूर करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। विभिन्न पात्रों जैसे कि दुर्बल भील, वैश्य और ग्वाल बालों का उल्लेख इस बात को दर्शाता है कि भगवान सभी वर्गों के भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं।

इस भजन में भक्ति मार्ग का स्पष्ट संकेत मिलता है, जिसमें श्रद्धा और संपूर्ण समर्पण की आवश्यकता होती है। भक्ति का साधन केवल भजन गाना या पूजा करना नहीं, बल्कि लगातार अपने मन को भगवान की ओर लगाना है। भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए परम आदर्श आचारण और जीवन में सत्य का पालन अत्यंत आवश्यक है। 'जो कोई नर गावेतन मन सुख सम्पति मन वांक्षित फल पावे' इस पंक्ति के माध्यम से बताया गया है कि सच में भक्त की प्रियता और भक्ति ही उसे सच्ची समृद्धि और सुख का अनुभव कराती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन 'सत्यनारायण व्रत' से संबंधित है, जो भारतीय संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्राचीन ग्रंथों और पुराणों में सत्यनारायण की पूजा का वर्णन मिलता है, जहां भक्तों द्वारा उनके प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति व्यक्त की जाती है। यह पूजा विशेष रूप से पूर्णिमा के दिन की जाती है, और इसे पुण्य एवं भाग्य का संवर्धन करने वाला माना जाता है। भागवत पुराण में सत्यनारायण की महिमा का उल्लेख मिलता है, जिसमें भक्त के कल्याण के लिए उनकी सहायता की जाती है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का अनुभव होता है। भक्तों के लिए यह एक साधना का माध्यम है, जो उन्हें अभीष्ट फल, सुख और समृद्धि की प्राप्ति में सहायक होता है। यह भजन नियमित रूप से पाठ करने से जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मक्ता का संचार करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह और शाम के समय करना सबसे उचित होता है। पूजा करते समय एक स्वच्छ स्थान चुनें, दीया जलाएं और नैवेद्य के रूप में कुछ फल रखें। श्रद्धा और समर्पण के साथ बैठें और ध्यानपूर्वक इस भजन का गान करें। इस समय मन एकाग्र होना चाहिए और भगवान की दिव्यता में लीन करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य भक्ति के माध्यम से भगवान सत्यनारायण का आभार और उनकी कृपा प्राप्त करना है। भक्त की आस्था और भक्ति का यह प्रतीक है।

इस भजन का पाठ करने से कौन-से लाभ होते हैं?

इस भजन का नियमित पाठ मानसिक और आध्यात्मिक शांति लाने के साथ-साथ भक्ति में दृढ़ता भी प्रदान करता है। भक्तों को मानसिक समस्याओं से मुक्ति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

क्या इस भजन को गाने का विशेष समय है?

इस भजन को सुबह या शाम के समय गाना अत्यंत लाभकारी होता है। इसके साथ पूजा करें, दीप जलाएं और फलों का अर्पण करें।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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