Shyam Bhajan

मेरा दिल तो दीवाना हो गया मुरली बाले तेरा (mere dil to diwana ho geya murli vale tera Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan - Bhaktilok

70 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मेरा दिल तो दीवाना हो गया मुरली बाले तेरा - श्याम भजन परिचय एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि

भक्ति और समर्पण की अगाध त्रिवेणी में गोता लगाते हुए श्री बांके बिहारी, खाटू श्याम और भगवान श्री कृष्ण के चरणों में समर्पित यह पावन भजन "मेरा दिल तो दीवाना हो गया मुरली बाले तेरा" अलौकिक प्रेम और योग का अनूठा संगम है। ब्रज संस्कृति और संकीर्तन परंपरा में मुरलीवाले की तान पर सुध-बुध खो देना भक्तों की सहज विशेषता रही है। जब एक साधक या अनन्य भक्त बांके बिहारी की तिरछी नजरों और बंसी की मधुर स्वर-लहरियों के प्रभाव में आता है, तो उसका यह भौतिक संसार और सांसारिक मोह-माया से नाता टूट जाता है और वह पूर्णतः मुरलीवाले का दीवाना बन जाता है। इस भजन में बांके बिहारी की अलौकिक सुंदरता, उनकी तिरछी चितवन और भक्त की परमानंद की स्थिति का अत्यंत मार्मिक एवं सजीव चित्रण किया गया है। इसे विशेष रूप से श्री कृष्ण जन्माष्टमी, एकादशी जागरण, खाटू श्याम सत्संग, फाल्गुन महोत्सव और दैनिक संध्या वंदन के समय अत्यंत भाव-विभोर होकर गाया जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

भक्ति भाव, एकाग्रता और शुद्ध उच्चारण के साथ श्री श्याम बाबा और मुरलीवाले का स्मरण करते हुए इस पावन भजन का पाठ करें:


मखड़ा (Refrain):

मेरा दिल तो दीवाना हो गया मुरली बाले तेरा,
मुरली बाले तेरा, बंशी बाले तेरा!
नजरो का निशाना हो गया मुरली बाले तेरा॥
मेरा दिल तो दीवाना हो गया मुरली बाले तेरा॥

अंतरा 1:

दीवानगी ने क्या-क्या दिखाया,
दुनिया छुड़ाकर तुमसे मिलाया।
दुश्मन जमाना हो गया मुरली बाले तेरा॥
मेरा दिल तो दीवाना हो गया मुरली बाले तेरा॥

अंतरा 2:

जब से नजर से नजर मिल गयी है,
उजड़े चमन की कली खिल गयी है।
क्या नजरे मिलाना हो गया मुरली बाले तेरा॥
मेरा दिल तो दीवाना हो गया मुरली बाले तेरा॥

अंतरा 3:

यह दुनिया पागलखाना है, जहा पागल आते जाते है,
मेरा-मेरा कहने वाले सब पागल बनकर जाते है।
कोई पागल है धन-दौलत का, कोई पागल नर-नारी का,
पर सच्चा तो पागल वही है, जो पागल है बांके बिहारी का!
तू मेरा प्यारा-प्यारा, मैं तेरा पागल,
ओ तिरछी नजर से है दिल मेरा घायल।
मेरा दिल तो दीवाना हो गया मुरली बाले तेरा॥

अंतरा 4:

प्राणों के प्यारे कहा तुम गए हो,
मेरी आँखों के तारे कहा छुप गए हो।
मैं तो प्यार में पागल हो गया मुरली बाले तेरा॥
मेरा दिल तो दीवाना हो गया मुरली बाले तेरा॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि यह एक प्रेमी भक्त और उसके आराध्य भगवान श्री कृष्ण (मुरलीवाले) के बीच के गूढ़ आध्यात्मिक संबंध का जीवंत दस्तावेज है। भजन की शुरुआत इस सत्य से होती है कि जब किसी मनुष्य की दृष्टि उस त्रिभंगाधारी मुरलीवाले की अलौकिक छवि पर पड़ती है, तो उसका चित्त सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर केवल और केवल कन्हैया के चरणों में रम जाता है।

भजनकार आगे कहता है कि इस पावन दीवानगी ने भक्त के जीवन का कायाकल्प कर दिया है। जहाँ एक ओर संपूर्ण संसार स्वार्थ और भौतिकता के पीछे भाग रहा है, वहीं भक्त ने दुनिया की परवाह छोड़े बिना उस करुणा निधान को पा लिया है। यहाँ तक कि यह संसार जो क्षण-भर में अपना और पराया देखता है, वह इस अनन्य प्रेम को देखकर विरोधी या अजनबी (दुश्मन जमाना) जैसा प्रतीत होने लगता है, क्योंकि भक्त की दृष्टि में अब केवल और केवल श्याम सुंदर ही बसे हैं।

विशेष रूप से 'पागलखाना' वाले प्रसंग में दार्शनिक गहराई छिपी है। संसार के लोग धन, वैभव, स्त्री, पुरुष और भौतिक वस्तुओं के पीछे पागल हैं—कोई संपत्ति के लिए अपनी नींद गंवा रहा है तो कोई अन्य सांसारिक प्रलोभनों में उलझा है। परंतु संत और ज्ञानीजन उसी को सच्चा और धन्य मानते हैं जो ब्रज के प्राण, बांके बिहारी का पागल (प्रेमी) बन चुका है। प्रभु की तिरछी नजरों का बाण जब भक्त के हृदय पर लगता है, तो उसका संपूर्ण अहंकार समाप्त हो जाता है और वह अपने प्राणनाथ की खोज में विरह और आनंद के समंदर में डूब जाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महिमा अत्यंत व्यापक है:

  • श्याम और कृष्ण भक्ति का समन्वय: यह भजन खाटू श्याम बाबा और भगवान श्री कृष्ण दोनों के भक्तों के बीच समान रूप से लोकप्रिय है।
  • विरह और मिलन का भाव: इसमें भक्त की व्याकुलता और भगवान के प्रति अनन्य प्रेम का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।
  • मानस शांति और सकारात्मक ऊर्जा: इसके नियमित गायन या श्रवण से मन की चंचलता शांत होती है और भगवान के प्रति अटूट विश्वास जागृत होता है।
  • सामूहिक संकीर्तन के लिए उपयुक्त: इसकी लय और ताल इतनी सरल व ऊर्जावान है कि किसी भी सत्संग या जागरण में भक्त झूम उठते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को गाने और सुनने के लिए किसी विशेष नियम की आवश्यकता नहीं होती, किंतु यदि इसे पूरी श्रद्धा के साथ निम्नलिखित अवसरों पर गाया जाए तो इसका विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है:

  • संध्याकालीन आरती एवं ध्यान: प्रतिदिन शाम को पूजा के उपरांत दीपक प्रज्वलित करके इसे गाने से मानसिक शांति मिलती है।
  • खाटू श्याम एवं कृष्ण सत्संग: एकादशी, पूर्णिमा या किसी भी धार्मिक उत्सव पर आयोजित संकीर्तन के दौरान।
  • एकांत साधना एवं चिंतन: जब मन अशांत हो, तब एकांत में इस भजन का स्मरण करने से आंतरिक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में भगवान श्री कृष्ण, उनके बाल स्वरूप, तथा उनके कलयुगी अवतार खाटू श्याम बाबा (शीश के दानी) हैं। श्री कृष्ण को 'मुरली वाला' और 'बंशी वाला' कहकर संबोधित किया गया है, जो इस बात का प्रतीक है कि उनकी बंसी की तान सम्पूर्ण ब्रह्मांड को अपनी ओर आकर्षित करती है। इसी दिव्य आकर्षण को मीराबाई, सूरदास और रसखान जैसे महापुरुषों ने अपनी रचनाओं में भी प्रमुखता से स्थान दिया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक और संकीर्तन शैली पर आधारित है जिसे देश के विभिन्न प्रसिद्ध भजन गायकों द्वारा अपने अनूठे अंदाज में गाया गया है। ब्रज भूमि की लोक संस्कृति, नंदगाँव-बरसाना की गलियों और खाटू श्याम के दरबार में गूंजने वाले इस भजन ने लाखों भक्तों के हृदयों को स्पंदित किया है। इसकी रचना का मुख्य उद्देश्य जन-जन को भगवान के प्रति निष्काम प्रेम और समर्पण भाव से जोड़ना है.

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और लोक-व्यवहार की हिंदी/ब्रजभाषा मिश्रित है। इसमें रूपक अलंकार और उपमाओं का सुंदर प्रयोग किया गया है। 'नजर से नजर मिलना', 'दिल घायल होना' और 'दुनिया पागलखाना है' जैसे प्रयोग श्रोताओं के हृदय पर सीधा प्रभाव डालते हैं। इसकी लयबद्ध संरचना इसे तुरंत याद हो जाने योग्य बनाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें निम्नलिखित अमूल्य जीवन सीख मिलती हैं:

  • सांसारिक मोह से मुक्ति: भौतिक वस्तुओं के पीछे भागने के बजाय भगवान के चरणों में चित्त लगाना ही सच्ची सफलता है।
  • प्रेम और समर्पण: भक्त और भगवान का रिश्ता तर्क का नहीं, बल्कि केवल प्रेम और समर्पण का होता है।
  • निडरता: जब व्यक्ति ईश्वर के प्रेम में मग्न हो जाता है, तो उसे दुनिया की आलोचना की परवाह नहीं रहती।
  • अधिक जानकारी और प्रेरणा के लिए आप श्री कृष्ण लोकप्रिय भजन संग्रह और खाटू श्याम स्तुति एवं वंदना के पावन लेखों का भी अध्ययन कर सकते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
मुरली बाले हाथ में मुरली धारण करने वाले श्री कृष्ण आकर्षण और ब्रह्म ज्ञान के प्रतीक
दीवाना प्रेमी, मस्त, सुध-बुध खोने वाला ईश्वर के प्रेम में विभोर साधक
पागलखाना जहाँ पागल रहते हों मोह-माया में डूबी हुई यह भौतिक दुनिया
बांके बिहारी टेढ़े होकर खड़े होने वाले श्री कृष्ण मनमोहक और त्रिभंग रूप वाले आराध्य
तिरछी नजर प्रेमासिक्त एवं कटाक्ष भरी चितवन भक्त के हृदय को मोहने वाली भगवान की कृपा

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मेरा दिल तो दीवाना हो गया मुरली बाले तेरा..."
अर्थात हे मुरलीवाले! मेरा यह चंचल मन अब मेरे वश में नहीं रहा, यह आपकी उस मोहनी मूरत पर पूरी तरह लट्टू हो गया है।

"दीवानगी ने क्या-क्या दिखाया, दुनिया छुड़ाकर तुमसे मिलाया..."
अर्थात जब मुझे आपसे प्रेम का नशा चढ़ा, तो मैंने इस स्वार्थी संसार के सारे बंधन तोड़ दिए और सीधे आपके चरणों तक पहुँच गया।

"यह दुनिया पागलखाना है, जहाँ पागल आते-जाते हैं..."
अर्थात यह संपूर्ण संसार ही एक प्रकार का मानसिक पागलखाना है जहाँ हर कोई अपनी-अपनी मूर्खतापूर्ण इच्छाओं (धन, पद, वासना) के पीछे पागल है, किंतु सच्चा धन्य वही है जो केवल बिहारी का दीवाना बना है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भाव को पुष्ट करने के लिए निम्नलिखित पावन महामंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:

ॐ श्री कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणा क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥

तथा श्री बांके बिहारी लाल की जय! हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा!

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य
भजन का नाम मेरा दिल तो दीवाना हो गया मुरली बाले तेरा
आराध्य देवता भगवान श्री कृष्ण / खाटू श्याम बाबा
प्रमुख भाव अनन्य प्रेम, विरह, भक्ति एवं समर्पण
भाषा सरल हिंदी / ब्रजभाषा मिश्रित
संगीत शैली लोक संकीर्तन एवं श्याम भजन
उपयुक्त अवसर सत्संग, जागरण, एकादशी, जन्माष्टमी
श्रेणी श्याम भजन / कृष्ण भक्ति गीत

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन भगवान श्री कृष्ण (मुरलीवाले) और उनके कलयुगी अवतार खाटू श्याम बाबा को समर्पित है।

इसे खाटू श्याम सत्संग, जागरण, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, एकादशी उत्सव या घर की दैनिक संध्या पूजा के समय अत्यंत भाव के साथ गाया जा सकता है।

यहाँ 'पागलखाना' इस संसार को कहा गया है जहाँ लोग भौतिक सुख-सुविधाओं और धन-दौलत के पीछे अंधे हो रहे हैं, जबकि सच्चा ज्ञानी वह है जो ईश्वर के प्रेम में दीवाना होता है।

हाँ, भगवान श्री कृष्ण के संस्मरण और इस प्रकार के मधुर भजनों के गायन-श्रवण से मन का तनाव दूर होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

बिल्कुल, इसकी लय बहुत सरल और प्रवाहमयी है, जिसे ढोलक और हारमोनियम के साथ कोई भी आसानी से गा सकता है।

इसे मुख्य रूप से 'मेरा दिल तो दीवाना हो गया मुरली वाले तेरा' या 'बंशी वाले तेरा दीवाना भजन' के नाम से भी खोजा जाता है।

हाँ, घर में पारंपरिक और भक्तिमय माहौल होने से बच्चों में सनातन संस्कृति और भगवान के प्रति आदर भाव स्वतः विकसित होता है।

भक्तजन सत्संग के दौरान ताली बजाकर और भाव-विभोर होकर झूमते हुए इस आनंददायक भजन को गाते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तलok.in पर प्रकाशित यह सामग्री पारंपरिक संकीर्तन परंपरा, लोक साहित्यों और भक्तों के अनुभवों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध, प्रामाणिक और भावपूर्ण भजन लिरिक्स तथा उसका विस्तृत आध्यात्मिक अर्थ उपलब्ध कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन भक्ति साहित्य एवं ब्रज लोकगीत परंपरा
  • श्री कृष्ण संकीर्तन एवं खाटू श्याम भजन संग्रह
  • पारंपरिक लोक गाथाएँ एवं वैदिकी प्रवचन संदर्भ

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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