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सांवरे पर मुझे विश्वास है लिरिक्स (Sanwre Par Mujhe Vishwas Hai Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan Sanjay Sharma - BhaktiLok

81 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भक्ति की दुनिया में जब कोई साधक अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव प्रकट करता है, तो उसके शब्द स्वयं में एक अलौकिक शक्ति धारण कर लेते हैं। ऐसा ही एक अत्यंत हृदयस्पर्शी और भक्ति रस से परिपूर्ण भजन है "सांवरे पर मुझे विश्वास है", जिसे प्रसिद्ध भजन गायक संजय शर्मा जी की मधुर वाणी में प्रस्तुत किया गया है। यह भजन भगवान श्री कृष्ण, जिन्हें प्रेम से 'सांवरे' या 'श्याम' कहा जाता है, के प्रति एक भक्त की अटूट आस्था और अगाध प्रेम को व्यक्त करता है। 'सांवरा' शब्द श्री कृष्ण के सांवले रंग और उनके मनमोहक रूप की ओर संकेत करता है, जो भक्तों के मन को मोह लेता है। इस भजन में भक्त अपने जीवन की समस्त चिंताओं, भय और आशंकाओं को त्यागकर केवल अपने श्याम पर विश्वास करने की बात करता है। यह भजन कलयुग में भक्ति और शरणागति का सजीव उदाहरण है, जो श्रोताओं के मन में एक गहरी शांति और आत्मविश्वास का संचार करता है। इस भजन की लोकप्रियता इसके सरल बोल और गहरे भावार्थ में निहित है, जो इसे हर आयु वर्ग के भक्तों के लिए प्रिय बनाती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

सांवरे पर मुझे विश्वास है

सांवरे पर मुझे विश्वास है,
सांवरे पर मुझे विश्वास है।
मेरे श्याम पर मुझे विश्वास है,
सांवरे पर मुझे विश्वास है।।

जब-जब मैंने पुकारा है,
तब-तब उसने सहारा है।
हर दुख से मुझे बचाया है,
सांवरे पर मुझे विश्वास है।।

संसार की माया छोड़ी है,
श्याम नाम की माला जोड़ी है।
हर पल उसका ध्यान है,
सांवरे पर मुझे विश्वास है।।

जो भी आया शरण में उसकी,
कभी नहीं वो निराश हुआ।
मैंने भी उसका दामन थामा,
सांवरे पर मुझे विश्वास है।।

मेरा तो बस एक ही सहारा,
श्याम नाम है प्यारा।
जीवन के हर मोड़ पर,
सांवरे पर मुझे विश्वास है।।

भवसागर से पार लगाएंगे,
मुरली वाले मन को भाएंगे।
उनके चरणों में मेरा ध्यान है,
सांवरे पर मुझे विश्वास है।।

संजय शर्मा के स्वामी हैं,
जो भक्तों के अंतर्यामी हैं।
उनकी कृपा से सब कुछ है,
सांवरे पर मुझे विश्वास है।।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भक्ति और शरणागति के उस परम भाव को प्रकट करता है, जहाँ भक्त अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण कर देता है। भजन का मुख्य भाव यह है कि भक्त को अपने इष्ट देव 'सांवरे' यानी श्री कृष्ण पर अटूट विश्वास है। यह विश्वास केवल एक अंधविश्वास नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक अनुभव से प्राप्त एक दृढ़ निष्ठा है। भक्त कहता है कि जब-जब उसने अपने जीवन में कठिनाइयों के समय श्याम को पुकारा है, तब-तब उन्होंने उसे सहारा दिया है। यह भाव हमें यह सिखाता है कि ईश्वर अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते।

भजन की अगली पंक्तियों में भक्त संसार की माया को त्यागने की बात करता है। 'माया' यहाँ मोह, अहंकार और सांसारिक आसक्ति का प्रतीक है। भक्त कहता है कि उसने श्याम नाम की माला जपी है, जिससे उसका मन निरंतर प्रभु के ध्यान में लीन रहता है। यह भजन हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति वह है जहाँ भक्त अपने जीवन के प्रत्येक क्षण को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है।

भजन का यह भी संदेश है कि जो भी भक्त सच्चे मन से श्याम की शरण में आता है, वह कभी निराश नहीं होता। भक्त ने भी उनका दामन थाम लिया है और उसे पूरा विश्वास है कि उसके सांवरे उसे भवसागर से पार लगाएंगे। यह भजन भक्ति के उस भाव को दर्शाता है जहाँ भक्त अपने जीवन के हर मोड़ पर प्रभु को अपने साथ पाता है। अंत में भक्त कहता है कि संजय शर्मा के स्वामी भक्तों के अंतर्यामी हैं, और उनकी कृपा से ही सब कुछ संभव है। यह भजन हमें यह सिखाता है कि ईश्वर पर विश्वास ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसका सरल और हृदयस्पर्शी भाषा में लिखा जाना है। यह भजन भगवान श्री कृष्ण की भक्ति पर आधारित है, जो 'सांवरे' नाम से संबोधित हैं। 'सांवरा' शब्द श्री कृष्ण के सांवले रंग और उनके बाल स्वरूप की ओर संकेत करता है, जो भक्तों के लिए अत्यंत प्रिय है। यह भजन भक्ति के 'वात्सल्य' और 'माधुर्य' भाव को प्रकट करता है।

इस भजन का आध्यात्मिक महत्व यह है कि यह साधक को यह सिखाता है कि ईश्वर पर विश्वास रखना ही सबसे बड़ा साधन है। जब भक्त अपने जीवन की सभी चिंताओं को प्रभु को सौंप देता है, तो उसे एक अद्भुत शांति का अनुभव होता है। यह भजन उस शांति का संचार करता है। इसके अतिरिक्त, यह भजन भक्ति आंदोलन की उस परंपरा का हिस्सा है जहाँ भक्त अपने इष्ट के साथ एक व्यक्तिगत और भावनात्मक संबंध स्थापित करता है।

इस भजन को सुनने और गाने से मन को एक अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती है। यह भजन हमें यह भी सिखाता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, यदि हमारा विश्वास दृढ़ है, तो हम उन सभी को पार कर सकते हैं। यह भजन भक्तों के लिए एक प्रेरणा स्रोत है, जो उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में साहस और धैर्य के साथ आगे बढ़ने की शक्ति देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी शुभ अवसर पर गाया और सुना जा सकता है। विशेष रूप से, इसे सुबह के समय ब्रह्म मुहूर्त में या शाम की आरती के समय गाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। एकांत में बैठकर, शांत मन से इस भजन को गाने से भक्ति भाव में वृद्धि होती है।

भजन गाने की विधि अत्यंत सरल है। सर्वप्रथम, स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अपने इष्ट देव की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। फिर, हाथ में माला लेकर या बिना माला के, शुद्ध उच्चारण के साथ इस भजन को गाएं। भजन गाते समय मन को पूर्ण रूप से प्रभु के चरणों में लगाएं। यदि संभव हो तो ढोलक, मंजीरा या हारमोनियम जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग करें, जिससे भजन का आनंद द्विगुणित हो जाता है।

इस भजन को श्री कृष्ण जन्माष्टमी, राधाष्टमी, या किसी भी एकादशी के दिन विशेष रूप से गाया जाता है। इसके अतिरिक्त, किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में या संकट के समय इस भजन का श्रवण करने से मन को बल मिलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन पारंपरिक भक्ति गीतों की श्रेणी में आता है। इस भजन को प्रसिद्ध भजन गायक संजय शर्मा जी ने अपनी मधुर आवाज में प्रस्तुत किया है। भजन के बोल पारंपरिक भक्ति भावना से ओत-प्रोत हैं और इन्हें किसी विशेष आधुनिक रचनाकार की बजाय लोक परंपरा का हिस्सा माना जा सकता है।

'सांवरे' शब्द का अर्थ है 'सांवला' या 'श्याम वर्ण वाला'। यह भगवान श्री कृष्ण के लिए प्रयुक्त एक अत्यंत प्रिय और स्नेहपूर्ण संबोधन है। यह उनके सांवले रंग और मनमोहक रूप की ओर संकेत करता है, जो भक्तों के मन को मोह लेता है।

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, लेकिन सुबह के समय ब्रह्म मुहूर्त में या शाम की आरती के समय इसे गाना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। एकांत और शांत वातावरण में इस भजन को गाने से भक्ति भाव में वृद्धि होती है।

हाँ, इस भजन के बोल और इसकी मधुर धुन मन को एक अद्भुत शांति और आनंद प्रदान करती है। यह भजन भक्त को यह अनुभव कराता है कि उसका एक सच्चा सहारा है, जो हमेशा उसके साथ है। इससे मानसिक तनाव कम होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

हाँ, यह भजन श्री कृष्ण की भक्ति और शरणागति का प्रतीक है। यह भक्त को यह सिखाता है कि ईश्वर पर पूर्ण विश्वास रखने से जीवन की सभी कठिनाइयों को पार किया जा सकता है। यह भजन भक्ति आंदोलन की उस परंपरा का हिस्सा है जहाँ भक्त अपने इष्ट के साथ एक व्यक्तिगत संबंध स्थापित करता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे भक्ति परंपरा, श्री कृष्ण भक्ति और भजन के भावार्थ के गहन अध्ययन के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। इस भजन के बोल पारंपरिक भक्ति भावना से प्रेरित हैं और इसका उद्देश्य पाठकों एवं श्रोताओं को श्री कृष्ण की भक्ति और शरणागति के भाव से जोड़ना है। हमने इस भजन के मूल भाव, इसके आध्यात्मिक महत्व और इसे गाने की विधि को विस्तार से समझाने का प्रयास किया है।

इस भजन के माध्यम से हम यह संदेश देना चाहते हैं कि ईश्वर पर विश्वास और समर्पण ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है। यह भजन उन सभी भक्तों के लिए है जो अपने जीवन में शांति, सुख और समृद्धि की कामना करते हैं और अपने आराध्य के चरणों में पूर्ण समर्पण करना चाहते हैं।

इस भजन के बोल, अर्थ और महत्व को समझने के लिए हमने विभिन्न भक्ति ग्रंथों और परंपराओं का संदर्भ लिया है। यह सामग्री केवल भक्ति भावना को बढ़ाने और पाठकों को आध्यात्मिक दिशा देने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Sep 2026

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