भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "राम का गुण गान करिये" भक्ति साहित्य की उस परंपरा का हिस्सा है जिसमें मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र, उनके दिव्य गुणों और उनकी शरणागति की महिमा गाई जाती है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं। भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ राम का गुण गान करिये ॥
राम का गुण गान करिये,
राम का गुण गान करिये।
भव सागर से तर जाओगे,
राम नाम अपनाओगे।
राम का गुण गान करिये।।
जग में सबसे प्यारे राम,
सबके दुख हरने वाले राम।
राम का गुण गान करिये,
राम का गुण गान करिये।।
मर्यादा के पालनहारे,
सत्य धर्म के रखवारे।
राम का गुण गान करिये,
राम का गुण गान करिये।।
दीन दुखियों के रखवाले,
शरणागत के प्रतिपाले।
राम का गुण गान करिये,
राम का गुण गान करिये।।
जनक नंदिनी के स्वामी,
सिया वर राम प्रिय स्वामी।
राम का गुण गान करिये,
राम का गुण गान करिये।।
हनुमत के प्राण अधारे,
भक्त जन के तारन हारे।
राम का गुण गान करिये,
राम का गुण गान करिये।।
अयोध्या के राज दुलारे,
सबके मन के अति प्यारे।
राम का गुण गान करिये,
राम का गुण गान करिये।।
राम नाम रटते रहिये,
प्रभु चरणों में रहिये।
राम का गुण गान करिये,
राम का गुण गान करिये।।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का मूल संदेश अत्यंत गहन और आध्यात्मिक है। "राम का गुण गान करिये" — यह पंक्ति भक्त को बार-बार आह्वान करती है कि वह अपने जीवन का अधिकांश समय प्रभु के नाम स्मरण, गुणगान और चरित्र चिंतन में लगाए। भव सागर अर्थात संसार रूपी समुद्र को पार करने का एकमात्र साधन राम नाम है। जब भक्त राम नाम को अपना लेता है, तो उसके समस्त भय, चिंताएं और कष्ट स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
"जग में सबसे प्यारे राम, सबके दुख हरने वाले राम" — यह पंक्ति भगवान राम की करुणामयी प्रकृति को दर्शाती है। श्री राम केवल अयोध्या के राजा नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के पालनहार हैं। वे दीन-दुखियों की पुकार सुनते हैं और उनके कष्टों का निवारण करते हैं। "मर्यादा के पालनहारे, सत्य धर्म के रखवारे" — राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, जिन्होंने अपने संपूर्ण जीवन में सत्य, धर्म और मर्यादा का पालन किया। वनवास से लेकर रावण वध तक, उन्होंने कभी धर्म का त्याग नहीं किया।
"दीन दुखियों के रखवाले, शरणागत के प्रतिपाले" — यह पंक्ति शरणागति के सिद्धांत को स्पष्ट करती है। जो भी जीव पूर्ण समर्पण भाव से प्रभु की शरण में आता है, प्रभु उसकी रक्षा करते हैं। "जनक नंदिनी के स्वामी, सिया वर राम प्रिय स्वामी" — माता सीता और प्रभु राम के दिव्य प्रेम और आदर्श दांपत्य जीवन का स्मरण कराती है। "हनुमत के प्राण अधारे" — हनुमान जी की अटूट भक्ति और प्रभु राम के प्रति उनके प्राणों से भी बढ़कर प्रेम को दर्शाती है।
अंत में "राम नाम रटते रहिये, प्रभु चरणों में रहिये" — यह पंक्ति साधक को निरंतर नाम जप और प्रभु चरणों में रहने की प्रेरणा देती है। यह भजन भक्ति, शरणागति और नाम महिमा का अद्भुत संगम है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन भगवान श्री राम की स्तुति का सरल और हृदयस्पर्शी माध्यम है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- देवता संदर्भ: यह भजन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित है, जो विष्णु के सातवें अवतार हैं।
- भक्ति भाव: भजन में शरणागति, समर्पण और नाम महिमा का भाव प्रधान है।
- लाभ: नियमित श्रवण और गायन से मन को शांति, भय का नाश, और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
- संगीतात्मकता: भजन की लय सरल और मधुर है, जिसे कोई भी सहजता से गा सकता है।
- आध्यात्मिक महत्व: यह भजन कलयुग में राम नाम जप की महिमा को स्थापित करता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को किसी भी शुभ अवसर पर गाया और सुना जा सकता है। विशेष रूप से:
- प्रातःकाल: स्नान के बाद पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित करके।
- सायंकाल: संध्या आरती के समय।
- राम नवमी: भगवान राम के प्रकटोत्सव पर विशेष रूप से।
- मंगलवार और शनिवार: हनुमान जी और राम जी की उपासना के दिन।
- एकादशी और अन्य व्रत: व्रत के दिन भजन गायन विशेष फलदायी माना जाता है।
गायन की विधि: शुद्ध वस्त्र धारण करें, पूजा स्थल को स्वच्छ करें, घी का दीपक जलाएं, और भक्ति भाव से भजन गाएं। साथ में श्री हनुमान चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे भक्ति परंपरा, रामचरितमानस, वाल्मीकि रामायण और प्रचलित भजन संग्रहों के आधार पर संकलित किया गया है। भजन के बोल पारंपरिक रूप से प्रचलित हैं और इनका उद्देश्य भक्तों को राम नाम की महिमा से जोड़ना है।
संदर्भ: रामचरितमानस (गोस्वामी तुलसीदास), वाल्मीकि रामायण, भक्ति संग्रह एवं लोक परंपरा।
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