Shyam Bhajan

जय बाबा की बोल तेरा लागे नहीं मोल लिरिक्स (Jai Baba Ki Bol Lyrics in Hindi) - Khatu Shyam Ji Bhajan Ashok Sharma - BhaktiLok

356 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

श्याम कृपा की महिमा: भक्ति का अद्भुत भजन

खाटू श्याम जी के इस भजन से भक्ति में लयात्मकता और प्रेम का अद्भुत अनुभव करें।

जय बाबा की बोल तेरा लागे नहीं मोल। जय बाबा की बोल तेरा लागे नहीं मोल। जय कुंवर जी की, जय स्याम जी की। जैसा कोई मोल नहीं, तेरा मोल नहीं। जय बाबा की बोल तेरा लागे नहीं मोल। भज लो श्याम को, भज लो श्याम को। जो भजे श्याम को, वो मुरझाए न। जय बाबा की बोल तेरा लागे नहीं मोल। ध्यान लगाकर जो, श्याम का गान करे। वो सच्चे भागी को, हार जीत से। जय बाबा की बोल तेरा लागे नहीं मोल। जो भजें सच्चे मन से, भगवान की मूरत। लेंगे सब सुख से, इधर ही बात। जय बाबा की बोल तेरा लागे नहीं मोल। श्याम जी ने दिया होता, सबको सुख पाना। किताबों में लिखा है, ये सबको मिला है। जय बाबा की बोल तेरा लागे नहीं मोल।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के मुखिया शब्द 'जय बाबा की बोल तेरा लागे नहीं मोल' जीवन की अनमोलता और सच्चे प्रेम की खोज का प्रतीक है। भजन में यह बखाना गया है कि जब हम सच्चे मन से भगवान का स्मरण करते हैं, तब जीवन में कोई भी मोल बेमिट जाता है। यह हमें बताता है कि भक्ति का असली मोल अनमोल है, जो केवल प्रेम से भरे हृदय से प्रकट होता है। भजन में श्याम जी की स्तुति करते हुए यह कहा गया है कि 'भज लो श्याम को,' जिससे यह आभास होता है कि श्याम जी का भजन करने से भक्ति मार्ग में सच्चाई और तत्वता प्रकट होती है और भक्त को अपने इच्छित सुख की प्राप्ति हो सकती है।

भजन की भावार्थ में श्याम जी का ध्यान लगाना और उनके गुणों का गान करना मुख्य तत्व है। 'जिन्हें भजे श्याम को, वो मुरझाए न,' यह पंक्ति हमें यह सीख देती है कि भक्ति से जीवन में निरंतरता और उल्लास बना रहता है। जब भक्त श्याम का नाम जबान पर लाते हैं, तब उनके मन में बुराई और संताप का स्थान भी खत्म हो जाता है। यह भजन न केवल श्रद्धा का संचार करता है, बल्कि भक्ति में समाधान और संदर्भित अनुभव भी देता है, जिससे भक्ति का आनंद और भी गहरा होता है।

यह भजन भक्ति मार्ग के गहरे पहलुओं को छूता है। इसमें यह बताया गया है कि श्याम जी की भक्ति पवित्रता और आस्था का संचार करती है। ‘जो भजें सच्चे मन से,’ यह विचार हमें इस बात की ओर संकेत करता है कि भक्ति में केवल कर्म करना नहीं, बल्कि हृदय से श्रद्धा और प्रेम से समर्पित होना भी आवश्यक है। श्याम जी की कृपा में गतिशीलता और संतोषता को महसूस करना भक्त के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। भक्ति का मार्ग हमेशा सुख, शांति और ज्ञान की ओर जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का धार्मिक और पुराणिक संदर्भ महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारतीय संस्कृति में भक्ति के अनमोल तत्वों को उजागर करता है। खाटू श्याम जी का नाम 'श्याम' और 'कृष्ण' की भावना को दर्शाता है, जो भक्तों के हृदय में पवित्रता और सच्चाई लाता है। महाभारत और पुराणों में श्री कृष्ण का चरित्र सभी पापों का नाशक माना जाता है, और भजन में यह दर्शाया गया है कि श्याम जी की भक्ति से भक्तों को वास्तविक सुख और सम्पूर्णता की प्राप्ति होती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और भक्ति में गहराई का अनुभव होता है। नियमित रूप से इस भजन का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। यह भक्ति साधक को आध्यात्मिक विकास की ओर अग्रसर करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप प्रातः या संध्या के समय करें। भक्त को आवश्यक है कि वे एक स्वच्छ स्थान पर शान्ति से बैठें तथा अपना मन एकाग्र करें। पूजा स्थान पर दीप जलाएं और श्याम जी की मूर्ति के समक्ष गंध, पुष्प, और नैवेद्य अर्पित करें। यह ध्यान रहे कि भजन गाते समय मन में शुद्ध भक्ति और प्रेम हो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

जय बाबा की बोल लिखने का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य भक्त को श्याम जी के प्रति श्रद्धा और प्रेम से प्रेरित करना है। यह हमें जिज्ञासा के साथ भक्ति के महत्व को समझने में मदद करता है।

इस भजन का संचार किस स्तर पर होता है?

भजन का संचार भक्त के हृदय से होता है, जो की मानसिक शांति, सुख और संतोष की भावना को जागृत करता है। भक्ति का यह मार्ग अति महत्वपूर्ण है।

क्यों हमें इस भजन का पाठ नियमित रूप से करना चाहिए?

इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ होता है। यह उच्चतम एकाग्रता और भक्ति के विकास में सहायक होता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 19 Sep 2026

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