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दुनिया चले न श्री राम के बिना लिरिक्स (Duniya Chale Na Shri Ram Ke Bina Lyrics in Hindi) - Jai Shankar Chaudhary Ram Bhajan - Bhaktilok

116 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कंट्रास्ट:
राम भजन / Bhajans

दुनिया चले न श्री राम के बिना लिरिक्स (Duniya Chale Na Shri Ram Ke Bina Lyrics in Hindi) - जय शंकर चौधरी राम भजन

रचियता: पारंपरिक / लोक परंपरा | गायक: जय शंकर चौधरी | संगीत लेबल: युकी (Yuki) | श्रेणी: श्री राम भक्ति गीत


भगवान श्री रामचंद्र जी की महिमा अपरंपार है और सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि इस चराचर जगत में पत्ता भी उनकी मर्जी के बिना नहीं हिलता। "दुनिया चले न श्री राम के बिना, राम जी चले हनुमान के बिना" यह लोकप्रिय राम भजन भगवान श्रीराम और उनके परम भक्त हनुमान जी के अटूट प्रेम, शरणागति और इस ब्रह्मांडीय व्यवस्था का अत्यंत सुंदर और मर्मस्पर्शी वर्णन करता है। जय शंकर चौधरी द्वारा युकी (Yuki) संगीत लेबल के माध्यम से गाए गए इस भजन ने देश-विदेश के राम भक्तों के हृदयों में एक विशेष स्थान बनाया है। यह भजन न केवल संगीतमय दृष्टि से मधुर है, बल्कि यह वेदांत के इस मूल सत्य को भी सरल शब्दों में समझाता है कि इस सृष्टि का संचालन करने वाली शक्ति साक्षात मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ही हैं। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व कासांगोपांग अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई (Refrain):

दुनिया चले न श्री राम के बिना,
राम जी चले हनुमान के बिना...
दुनिया चले न श्री राम के बिना,
राम जी चले हनुमान के बिना...

प्रथम अंतरा:

लंका को जाना हो या सागर तरना हो,
चुटकियों में काम सब हनुमान को करना हो...
लंका को जाना हो या सागर तरना हो,
चुटकियों में काम सब हनुमान को करना हो,
लक्ष्मण बचे न संजीवनी के बिना,
राम जी चले हनुमान के बिना...
दुनिया चले न श्री राम के बिना,
राम जी चले हनुमान के बिना...

द्वितीय अंतरा:

सीता का हरण हुआ संकट तो आया था,
रावण की सभा में मान भी गमाया था...
सीता का हरण हुआ संकट तो आया था,
रावण की सभा में मान भी गमाया था,
लंका जले न उस आग के बिना,
राम जी चले हनुमान के बिना...
दुनिया चले न श्री राम के बिना,
राम जी चले हनुमान के बिना...

तृतीय अंतरा:

भक्ति का अगर कोई पाठ जो पढ़ाएगा,
अंजनी का लाडला ही सीने को लगाएगा...
भक्ति का अगर कोई पाठ जो पढ़ाएगा,
अंजनी का लाडला ही सीने को लगाएगा,
भक्त तरे न प्रभु ध्यान के बिना,
राम जी चले हनुमान के बिना...
दुनिया चले न श्री राम के बिना,
राम जी चले हनुमान के बिना...

समापन (Outro):

बोलो सियावर रामचंद्र की जय!
पवनसुत हनुमान की जय!
जय श्री राम! जय बजरंगबली!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संयोजन नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति के दो सबसे प्रमुख स्तंभों—भगवान श्री राम और उनके अनन्य भक्त हनुमान जी के परस्पर पूरक संबंध की अद्भुत व्याख्या है। भजन की मुख्य पंक्ति "दुनिया चले न श्री राम के बिना, राम जी चले हनुमान के बिना" यह स्पष्ट करती है कि यद्यपि भगवान श्रीराम इस संपूर्ण ब्रह्मांड के पालनहार और आदि शक्ति हैं, तथापि वे अपने भक्तों के प्रेम और सेवा के अधीन हैं। जिस प्रकार बिना ईश्वर की इच्छा के सृष्टि का एक तिनका भी नहीं हिल सकता, उसी प्रकार भगवान राम भी अपने परम भक्त हनुमान जी के समर्पण, सेवा और शक्ति के बिना अपने लीला विस्तार को पूर्ण नहीं करते।

अन्तरों में लंका लंका दहन, लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर संजीवनी बूटी लाने का प्रसंग और माता सीता की खोज जैसी ऐतिहासिक घटनाओं का काव्यात्मक स्मरण कराया गया है। यह प्रसंग इस बात का द्योतक है कि भगवान ने मनुष्य रूप में अवतार लेकर भी लीलाएं कीं, और उन लीलाओं की सफलता में भक्तों की निष्ठा और सेवाभाव ने मुख्य भूमिका निभाई। हनुमान जी ने अपनी अतुलित शक्ति और भक्ति के बल पर असंभव कार्यों को संभव कर दिखाया। इसलिए कवि यह रेखांकित करता है कि भक्त और भगवान का संबंध द्वैत का नहीं, बल्कि अद्वैत और अनन्य प्रेम का है।

भजन का यह संदेश हर साधक को यह सिखाता है कि जीवन में कितनी भी बड़ी बाधा क्यों न आए, यदि प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद और संकटमोचन हनुमान जी का बल साथ हो, तो हर महासागर को आसानी से पार किया जा सकता है। यह शरणागति का मार्ग है जो अहंकार को मिटाकर विशुद्ध भक्ति की ओर अग्रसर करता है। इस विषय में आप अधिक जानकारी के लिए श्री हनुमान चालीसा के पावन पाठ का भी स्मरण कर सकते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • सर्वोच्च प्रभुसत्ता: यह भजन भगवान श्रीराम को चराचर जगत का नियंता और संचालक घोषित करता है।
  • भक्त-भगवान संबंध: यह इस महान सत्य को उजागर करता है कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम के वशीभूत रहते हैं।
  • संकट मोचन की महिमा: हनुमान जी के बिना राम-कौशल के अपूर्ण रहने का भाव उनकी अद्वितीय महत्ता को दर्शाता है।
  • लोकप्रिय संगीत शैली: लोक धुनों पर आधारित होने के कारण यह भजन हर उम्र के भक्तों की जुबान पर आसानी से चढ़ जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत की साधना के लिए मन की पवित्रता और उचित समय का होना अत्यंत आवश्यक है। इस भजन को गाने या सुनने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन किया जा सकता है:

उत्तम समय

ब्रह्ममुहूर्त (प्रातःकाल 4 से 6 बजे) या संध्या कालीन बेला में इस भजन का श्रवण और गायन मन को असीम शांति प्रदान करता है। मंगलवार और शनिवार के दिन विशेष रूप से इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।

गायकी की विधि

इसे सामूहिक सत्संग, सुंदरकांड पाठ के उपरांत, या मंदिर परिसरों में तालियों की गड़गड़ाहट के साथ पूरी ऊर्जा और भक्ति भाव से गाया जा सकता है। आप साथ में संपूर्ण सुंदरकांड पाठ का भी लाभ ले सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और उनके अनन्य भक्त हनुमान जी हैं। भगवान श्रीराम त्रेतायुग में विष्णु जी के सातवें अवतार के रूप में प्रकट हुए, जिनका मुख्य उद्देश्य धर्म की स्थापना और असामाजिक तत्वों का नाश करना था। वहीं, पवनपुत्र हनुमान जी भगवान शिव के एकादश रुद्र अवतार माने जाते हैं, जिन्होंने राम काज के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।

तुलसीदास जी, वाल्मीकि जी और सदियों से चली आ रही संत परंपरा ने राम-भक्ति के इस रस को जन-जन तक पहुंचाया है। इस भजन के माध्यम से उसी संत परंपरा के उपदेशों को आधुनिक संगीत में पिरोया गया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन भारतीय लोक संगीत और भक्ति परंपरा की समृद्ध धरोहर का हिस्सा है। इसे कई कलाकारों ने अपने अंदाज में गाया है, जिसमें गायक जय शंकर चौधरी द्वारा युकी (Yuki) लेबल के तहत प्रस्तुत संस्करण अत्यधिक लोकप्रिय हुआ है। इसकी रचना लोक बोलियों की सरलता और दार्शनिक गहराई का अनूठा मिश्रण है।

लोक परंपरा में ऐसे भजनों का उद्देश्य कठिन वेदांत को आम जनमानस तक अत्यंत सहजता से पहुंचाना होता है, ताकि कोई भी साधारण व्यक्ति भी भक्ति रस में गोते लगा सके।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल हिंदी और अवधी-ब्रज मिश्रित लोक भाषा है, जिसे भारत का आम नागरिक आसानी से समझ सकता है। इसमें रूपक अलंकार और उपमाओं का बहुत सुंदर प्रयोग किया गया है।

काव्य शैली ज्ञेय (गाने योग्य) है, जिसमें लय और ताल का विशेष ध्यान रखा गया है। प्रत्येक पंक्ति में तुकबंदी श्रोता के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती है और भजन के अंत तक व्यक्ति झूमने को विवश हो जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • निस्वार्थ सेवा: हनुमान जी का चरित्र हमें यह सिखाता है कि बिना किसी फल की इच्छा के अपने गुरु और प्रभु की सेवा कैसे की जाती है।
  • अहंकार का त्याग: जीवन में कितनी भी बड़ी उपलब्धि क्यों न मिल जाए, करता धरता भगवान को ही मानना चाहिए।
  • संकट में धैर्य: कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी राम नाम का सिमरन और बजरंगबली का ध्यान संकट से पार लगाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / भावार्थ
दुनिया चले संसार का संचालन प्रकृति और ब्रह्मांड की संपूर्ण व्यवस्था
संजीवनी जीवनदायिनी बूटी लक्ष्मण जी के प्राण बचाने वाली जड़ी-बूटी
अंजनी का लाडला माता अंजनी के पुत्र श्री हनुमान जी के लिए संबोधन
शरणागति पूर्ण समर्पण ईश्वर के चरणों में स्वयं को समर्पित करना

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"दुनिया चले न श्री राम के बिना..." - इस पंक्ति का भाव यह है कि इस संपूर्ण ब्रह्मांड के रचयिता और संचालक भगवान श्रीराम हैं। उनके अनुशासन के बिना प्रकृति का एक पत्ता भी नहीं हिल सकता।

"राम जी चले हनुमान के बिना..." - इसका गूढ़ अर्थ यह है कि भगवान श्रीराम अपनी लीलाओं के निष्पादन के लिए अपने परम भक्त हनुमान जी के प्रेम, बल और पराक्रम पर निर्भर रहते हैं। भक्त के बिना भगवान की महिमा अधूरी सी प्रतीत होती है।

"लंका को जाना हो या सागर तरना हो..." - यह पंक्ति रामायण के उस प्रसंग को दर्शाती है जहाँ महासागर पार करने और लंका तक पहुँचने का असंभव कार्य हनुमान जी ने अपनी शक्ति और भक्ति के बल पर सहज ही कर दिखाया था।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतम शरणं प्रपद्ये॥

इस श्लोक के स्मरण से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और राम भक्ति के मार्ग की समस्त बाधाएं दूर हो जाती हैं। आप श्री राम स्तुति का पाठ भी अवश्य करें।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम दुनिया चले न श्री राम के बिना (Duniya Chale Na Shri Ram Ke Bina)
प्रमुख आराध्य भगवान श्री राम एवं संकटमोचन हनुमान जी
गायक जय शंकर चौधरी
संगीत लेबल युकी (Yuki)
भाषा हिंदी / लोक भाषा
मुख्य भाव भक्ति, शरणागति, सेवक-स्वामी भाव
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, सत्संग, मंगलवार और हनुमान जयंती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

उत्तर: इस लोकप्रिय राम भजन को प्रसिद्ध गायक जय शंकर चौधरी ने गाया है, जिसे 'युकी' (Yuki) संगीत लेबल द्वारा रिलीज़ किया गया है।

उत्तर: यह भजन यह सिखाता है कि संपूर्ण सृष्टि ईश्वर के अधीन है, और भगवान भी अपने अनन्य भक्तों (जैसे हनुमान जी) के प्रेम और सेवा के भाव से बंधे हुए हैं।

उत्तर: मंगलवार, शनिवार, और श्री राम नवमी या हनुमान जयंती जैसे पावन पर्वों पर इस भजन का श्रवण और गायन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

उत्तर: हाँ, यह एक अत्यंत मधुर और ऊर्जावान भजन है जिसे परिवार के साथ, सत्संग में या सुंदरकांड के पाठ के दौरान आसानी से गाया जा सकता है।

उत्तर: इसका अर्थ यह है कि भगवान श्रीराम अपनी लीलाओं की पूर्ति और भक्तों के कल्याण के लिए हनुमान जी के अटूट समर्पण और सेवा पर निर्भर रहते हैं।

उत्तर: यह भजन हमें निस्वार्थ भाव से कर्म करने, गुरु और ईश्वर के प्रति पूर्ण निष्ठा रखने तथा अहंकार त्यागने की प्रेरणा देता है।

उत्तर: हाँ, यह भजन जय शंकर चौधरी की मधुर आवाज में युकी (Yuki) के आधिकारिक संगीत प्लेटफॉर्म्स और वीडियो चैनल्स पर उपलब्ध है।

उत्तर: राम भक्ति को और अधिक प्रगाढ़ करने के लिए हनुमान चालीसा, सुंदरकांड पाठ, श्री राम रक्षा स्तोत्र और रामचरितमानस का नियमित पाठ करना चाहिए।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तलोक (Bhaktilok.in) पर प्रस्तुत यह सामग्री सनातन धर्म की पारंपरिक मान्यताओं, रामचरितमानस के सिद्धांतों और लोक भक्ति साहित्य के गहन अध्ययन के पश्चात संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। हमारा उद्देश्य भक्तों को सटीक, शुद्ध और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध सामग्री प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • 1. श्री रामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास जी (गीता प्रेस गोरखपुर प्रकाशन)
  • 2. पारंपरिक लोक भजन एवं संगीत संग्रह
  • 3. युकी म्यूजिक (Yuki Music) ऑफिशियल भजन आर्काइव्स
  • 4. सनातन भक्ति एवं संत साहित्य परंपरा

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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