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आया हूँ भोले मैं तेरे द्वार लिरिक्स (Aaya Hoon Bhole Main Tere Dwar Lyrics in Hindi) - Bholenath Bhajan रामकुमार लक्खा - Bhaktilok

116 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"आया हूँ भोले मैं तेरे द्वार" एक अत्यंत भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी शिव भजन है, जिसे प्रसिद्ध भजन गायक रामकुमार लक्खा ने अपनी सुरीली आवाज में पिरोया है। यह भजन भगवान शिव के प्रति एक भक्त के अनन्य समर्पण, विनय और करुणा की पुकार को व्यक्त करता है। शिव, जो 'आशुतोष' हैं और भक्तों की छोटी सी प्रार्थना पर भी शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं, उनके द्वार पर आकर भक्त अपनी व्यथा और अपनी झोली को खाली लेकर खड़ा है। यह भजन न केवल शिव की महिमा का गुणगान करता है, बल्कि यह भी सिखाता है कि अहंकार को त्यागकर जब हम पूर्ण शरणागति के साथ महादेव के चरणों में झुकते हैं, तो वे निश्चित रूप से भवसागर से पार लगाने वाले हैं। यह भजन विशेष रूप से सोमवार, महाशिवरात्रि और सावन के पावन मास में भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

आया हूँ भोले मैं तेरे द्वार,
मुझको भी करदे भव से तू पार।
तू तो बड़ा दानी है मेरे भोले शिवा,
जग का अंतरयामी है मेरे भोले शिवा॥

सुन अर्ज ये मेरी शिव शंकर त्रिपुरारी,
भक्ति भर दे मुझमे झुके चरणों में ये दुनिया सारी।
चरणों की धूल हूँ मैं, तू ही मेरा स्वामी है,
मेरे भोले शिवा, जग का अंतरयामी है मेरे भोले शिवा॥

प्राणों का पपीहा बस शिव जी का नाम पुकारे,
कर न जरा जीवन बाबा चरणों में अर्पण तुम्हारे।
मुझ पर भी कर दे दया, सब की तू माने है,
मेरे भोले शिवा, जग का अंतरयामी है मेरे भोले शिवा॥

खाली झोली लेके भोले मैं तेरे द्वारे पे आया,
बाबा मुझपे कर दे दोनों हाथों से किरपा की छाया।
महिमा तेरी शिव शम्भू जग में बखानी है,
मेरे भोले शिवा, जग का अंतरयामी है मेरे भोले शिवा॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य भाव 'शरणागति' है। भक्त कहता है कि हे भोलेनाथ, मैं अपने समस्त सांसारिक दुखों और अहंकार को पीछे छोड़कर आपके द्वार पर आया हूँ। जिस प्रकार एक पपीहा स्वाति नक्षत्र की बूंद के लिए तरसता है, उसी प्रकार मेरा प्राण आपके नाम के लिए व्याकुल है। भक्त महादेव को 'अंतरयामी' कहकर संबोधित करता है, जिसका अर्थ है कि प्रभु मेरे मन की हर पीड़ा और मेरी खाली झोली को जानते हैं। 'भव से पार' करने की प्रार्थना का अर्थ है कि इस संसार रूपी सागर से मुक्ति दिलाकर मुझे अपने चरणों में स्थान दें। यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर के सामने कुछ भी छिपा नहीं है, बस एक सच्चे और निर्मल हृदय की आवश्यकता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति का स्वरूप: यह भजन 'दास्य भाव' और 'शरणागति' का अद्भुत संगम है।
  • शिव महिमा: इसमें शिव को 'त्रिपुरारी' और 'दानी' के रूप में चित्रित किया गया है, जो भक्तों की झोली भरते हैं।
  • सांस्कृतिक महत्व: रामकुमार लक्खा की गायकी ने इसे एक ऐसा स्वरूप दिया है जो हर शिव भक्त के मन को शांति प्रदान करता है।
  • आध्यात्मिक संदेश: यह भजन अहंकार के विसर्जन और प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पण का मार्ग प्रशस्त करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय सुना जा सकता है, परंतु विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर इसका प्रभाव अधिक होता है:

  • सावन सोमवार: सावन के सोमवार के दिन शिव मंदिर में या घर पर पूजा के समय।
  • महाशिवरात्रि: रात्रि जागरण के दौरान इस भजन का गायन मन को एकाग्र करता है।
  • दैनिक पूजा: प्रातः काल स्नान के पश्चात शिव जी की प्रतिमा के समक्ष बैठकर इसे गाने से मन को शांति मिलती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ
अंतरयामी जो सबके मन की बात जानने वाला हो।
त्रिपुरारी त्रिपुर (तीन असुरों) का नाश करने वाले शिव।
भव से पार संसार रूपी सागर से मुक्ति।
पपीहा एक पक्षी जो स्वाति नक्षत्र की बूंद के लिए तरसता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम आया हूँ भोले मैं तेरे द्वार
गायक रामकुमार लक्खा
आराध्य देव भगवान शिव (भोलेनाथ)
मुख्य भाव शरणागति एवं विनय
भाषा हिंदी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

जी हाँ, सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, इस समय यह भजन गाना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

इस भजन को गाने से मन को शांति मिलती है, मानसिक तनाव कम होता है और महादेव के प्रति भक्ति भाव जागृत होता है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। अधिक जानकारी के लिए हमारे अन्य लेख पढ़ें जैसे शिव तांडव स्तोत्र और महाशिवरात्रि पूजा विधि।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री पारंपरिक शिव भक्ति गीतों और रामकुमार लक्खा द्वारा गाए गए भजनों के संकलन पर आधारित है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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