Krishna Bhajan

तू कर ले व्रत ग्यारस का (Tu Karle Vrat Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan Baba Shyam Bhajan Krishna Bhajan - Bhaktilok

190 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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तू कर ले व्रत ग्यारस का - भजन परिचय एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि

सनातन धर्म में एकादशी व्रत (ग्यारस का व्रत) को व्रतों में राजा यानी सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु और उनके पूर्णावतारी प्रियतम भगवान श्री कृष्ण एवं बाबा श्याम (खाटू श्याम जी) को समर्पित यह पावन भजन "तू कर ले व्रत ग्यारस का" जीवात्मा को भगवत्प्रेम और सात्विक आराधना की ओर प्रेरित करने वाला एक अत्यंत ही मधुर और भावपूर्ण संकीर्तन गीत है। कलयुग में नामस्मरण, एकादशी उपवास और निष्काम भक्ति को भवसागर से पार उतरने का सबसे सुगम मार्ग बताया गया है। इस भजन के माध्यम से रचनाकार ने साधक को चेताया है कि यह दुर्लभ मानव योनि केवल सांसारिक प्रपंचों में उलझने के लिए नहीं है, अपितु बांके बिहारी और खाटू श्याम के चरणों में प्रीति जोड़ने के लिए मिली है। एकादशी के दिन विधि-विधान से व्रत करने, कथा सुनने और श्री कृष्ण के चरणों में ध्यान लगाने से मनुष्य के जन्म-जन्म के पाप क्षीण हो जाते हैं और अंत में परम गति की प्राप्ति होती है। यह भजन मन्दिरों में सत्संग, एकादशी जागरण, फाल्गुनी मेलों और घर-घर होने वाली प्रभु आराधना के समय अत्यंत प्रेम के साथ गाया जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा:
तू कर ले व्रत ग्यारस का, बन जाएगा काम तेरा।
श्यामा श्याम के चरणों में, बीत जाएगा धाम तेरा॥
मिलेगा प्यार सांवरिया का, सहारा खाटू वाले का,
तू जप ले नाम मुरारी का, बन जाएगा काम तेरा॥

अंतरा 1:
संसार के मेले दो दिन के, झूठे सारे नाते हैं।
अंत समय में बांके बिहारी, साथ अकेले आते हैं॥
छोड़ दे दुनिया की माया, पकड़ ले दामन कान्हा का,
तू जप ले नाम मुरारी का, बन जाएगा काम तेरा॥

अंतरा 2:
एकादशी का व्रत है पावन, विष्णु जी को भाता है।
जो सच्चे मन से व्रत रखे, वो भव से तर जाता है॥
श्याम धणी की कृपा बरसे, खुलेगा भाग्य का ताला,
तू जप ले नाम मुरारी का, बन जाएगा काम तेरा॥

अंतरा 3:
खाटू वाले श्याम बाबा की, महिमा बड़ी निराली है।
खाली झोली भरने वाले, दुनिया इन्हें संभालती है॥
दर पे आके झुक जा प्यारे, मीठे बोल तू बोल जरा,
तू जप ले नाम मुरारी का, बन जाएगा काम तेरा॥

समापन:
भक्तों मिल कर अलख जगाओ, ग्यारस का दिन आया है।
राधा कृष्ण की जोड़ी ने, सबको गले लगाया है॥
दास कहे प्रभु चरणन में, होवे पूरा अरमान मेरा,
तू कर ले व्रत ग्यारस का, बन जाएगा काम तेरा॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का प्रत्येक शब्द भक्त के अंतर्मन को झकझोरने और उसे भगवत भक्ति की ओर उन्मुख करने के लिए पर्याप्त है। मुखड़े में कवि बड़े ही सहज और प्रेमपूर्ण शब्दों में समझाता है कि यदि मनुष्य अपने जीवन को सार्थक करना चाहता है, तो उसे एकादशी (ग्यारस) का व्रत अवश्य करना चाहिए। एकादशी का व्रत करने से शरीर और मन दोनों पवित्र होते हैं, जिससे श्यामा-श्याम के चरणों में चित्त स्थिर होने लगता है। सांसारिक भागदौड़ और चिंताओं से घिरे मनुष्य को यह भजन आश्वस्त करता है कि खाटू वाले श्याम बाबा की शरण में जाने से सभी कष्ट स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।

प्रथम अंतरे में जीवन की नश्वरता का सुंदर चित्रण किया गया है। कवि याद दिलाता है कि यह संसार और इसके नाते-रिश्ते केवल दो दिन के झूठे मेले हैं। अंत समय में कोई भी धन-दौलत या सगा-संबंधी साथ नहीं देता, केवल बांके बिहारी का नाम और उनके पावन चरण ही जीव की सच्ची गति बनाते हैं। अतः माया-मोह का त्याग कर भगवान श्री कृष्ण का दामन थाम लेना ही बुद्धिमानी है।

दूसरे और तीसरे अंतरे में एकादशी व्रत के महात्म्य और खाटू श्याम बाबा की कृपा का वर्णन है। शास्त्रों में वर्णित है कि एकादशी व्रत भगवान विष्णु और श्री कृष्ण को अत्यंत प्रिय है। जो भक्त नियमों का पालन करते हुए द्वादशी को पारण करते हैं, वे भवसागर से सहज ही तर जाते हैं। खाटू नरेश की महिमा का गुणगान करते हुए कवि कहता है कि जो भी भक्त सच्चे भाव से बाबा के दरबार में आता है, उसकी खाली झोली कभी खाली नहीं रहती। यह भजन साधक को भक्ति, संयम और पूर्ण शरणागति का संदेश देता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक सामान्य गीत नहीं है, बल्कि एकादशी व्रत की महिमा और खाटू श्याम-श्री कृष्ण भक्ति का सार है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • एकादशी व्रत की प्रेरणा: यह भजन सनातन धर्म के सबसे बड़े व्रतों में से एक 'एकादशी' के महत्व को जन-जन तक पहुँचाता है।
  • खाटू श्याम एवं कृष्ण भक्ति का समन्वय: इसमें भगवान श्री कृष्ण के बाल-माधुरी रूप और कलयुग के अवतारी बाबा श्याम की महिमा का अद्भुत संगम है।
  • वैराग्य और भक्ति का संदेश: सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर ईश्वर के चरणों में ध्यान लगाने की प्रेरणा देता है।
  • सरल एवं संगीतमय भाषा: इसे किसी भी आयु वर्ग के लोग आसानी से गा सकते हैं और संकीर्तन में झूम सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को विशेष अवसरों पर गाने और सुनने से अनंत गुना पुण्य प्राप्त होता है:

  • प्रत्येक एकादशी तिथि: शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की दोनों एकादशियों के दिन ब्रह्म मुहूर्त या संध्याकाल में इस भजन का स्मरण करना अत्यंत फलदायी है।
  • श्याम बाबा के कीर्तन में: खाटू श्याम जी के जागरण, फाल्गुनी मेले या मासिक कीर्तन के दौरान यह भजन मुख्य आकर्षण होता है।
  • दैनिक पूजा के समय: सुबह या संध्या की आरती के पश्चात भगवान श्री कृष्ण के सम्मुख बैठकर इसे गाया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के मुख्य आराध्य भगवान श्री कृष्ण (बांके बिहारी, मुरारी) और उनके ही कलयुगरी अवतार श्री खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक) हैं। सनातन परंपरा में एकादशी तिथि सीधे तौर पर जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु को समर्पित है। भगवान श्री कृष्ण स्वयं विष्णु जी के पूर्ण अवतार हैं, इसलिए एकादशी का व्रत रखने वाले भक्तों पर कृष्ण और श्याम बाबा की अहैतुकी कृपा बरसती है। संतों और आचार्यों ने हमेशा से ही ग्यारस के व्रत को पापों का नाश करने वाला और भक्ति बढ़ाने वाला बताया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन अत्यंत सरल, सहज और मधुर ब्रज-हिंदी मिश्रित लोक शैली में रचित है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे "श्यामा श्याम के चरणों में", "भव से तर जाता है", और "भाग्य का ताला"। शब्दावली इतनी सुगम है कि बच्चे, युवा और वृद्ध सभी इसे आसानी से समझ सकते हैं और गुनगुना सकते हैं। इसकी तुकबंदी (Rhyming Scheme) श्रोताओं को झूमने और थिरकने पर विवश कर देती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन मूल्य सिखाता है:

  • नियमित उपवास और संयम: एकादशी व्रत के माध्यम से शारीरिक शुद्धि के साथ-साथ इंद्रियों पर संयम रखना सीखना चाहिए।
  • ईश्वर पर अटूट विश्वास: कठिन समय में भी भगवान और गुरु पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।
  • अहंकार का त्याग: सांसारिक ऐश्वर्य और माया का घमंड छोड़कर दीनभाव से प्रभु की शरण में जाना चाहिए।
  • नाम स्मरण की महिमा: कलयुग में केवल प्रभु का नाम ही भवसागर से पार लगाने का एकमात्र नौका है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
ग्यारस एकादशी तिथि मास की ग्यारहवी तिथि जो विष्णु और कृष्ण को समर्पित है।
धाम निवास स्थान / वैकुंठ भगवान के चरणों में मिलने वाली परम शांति और मुक्ति।
मुरारी भगवान श्री कृष्ण मुर राक्षस का संहार करने वाले भगवान श्री कृष्ण।
भव संसार सागर जन्म-मृत्यु के चक्र से भरा हुआ यह भौतिक संसार।
अलख जगाना जागरूक करना / भक्ति का प्रसार करना समाज में ईश्वर भक्ति और चेतना का दीप जलाना।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"तू कर ले व्रत ग्यारस का, बन जाएगा काम तेरा..."
अर्थात हे जीव! तू एकादशी का पवित्र व्रत धारण कर ले, इससे तेरे जीवन के सभी अटके हुए कार्य और जन्म-जन्मांतर के बंधन कट जाएंगे।

"संसार के मेले दो दिन के, झूठे सारे नाते हैं..."
अर्थात यह संसार एक मेले की तरह है जो कुछ समय के लिए सजता है और फिर बिखर जाता है। यहाँ के सभी नाते-रिश्ते स्वार्थ के हैं, अंत में केवल प्रभु का नाम ही साथ रहता है।

"एकादशी का व्रत है पावन, विष्णु जी को भाता है..."
अर्थात ग्यारस का उपवास अत्यंत पवित्र है जो जगत के पालनहार श्री हरि को अतिप्रिय है। जो इसे विधिपूर्वक करता है, वह इस भवसागर से आसानी से तर जाता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

एकादशी व्रत और श्री कृष्ण आराधना के समय निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना अत्यंत लाभकारी है:

"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" एवं "श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरาย, हे नाथ नारायण वासुदेवा"

इसके साथ ही पद्म पुराण में एकादशी व्रत के संबंध में कहा गया है:
"न गंगा न गयं काशी न तापी न च पुष्करम्। एकादश्याः समं पुण्यं त्रिशु लोकेषु विद्यते॥"
अर्थात तीनों लोकों में गंगा, गया, काशी या पुष्कर के समान भी वह पुण्य नहीं है, जो एकादशी व्रत के पालन से प्राप्त होता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विशेषता विवरण
भजन का नाम तू कर ले व्रत ग्यारस का (Tu Karle Vrat Lyrics)
आराध्य देवता भगवान श्री कृष्ण, श्री खाटू श्याम बाबा एवं श्री हरि विष्णु
श्रेणी / लेबल Krishna Bhajan, Shyam Bhajan, Radha Krishna Bhajan
भाषा सरल हिंदी / ब्रजभाषा मिश्रित
मुख्य विषय एकादशी व्रत महिमा, नामस्मरण और शरणागति
रस / भाव भक्ति रस, प्रेम और समर्पण भाव
उपयुक्त अवसर एकादशी तिथि, खाटू श्याम कीर्तन, सत्संग एवं जागरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण, खाटू श्याम बाबा और एकादशी व्रत के आराध्य भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है।

एकादशी व्रत रखने से मानसिक शुद्धि, पापों का नाश, इंद्रियों पर नियंत्रण और भगवान श्री कृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इससे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

हाँ, यह भजन खाटू श्याम बाबा और ग्यारस (एकादशी) के विशेष कीर्तन, जागरण और सत्संग में बहुत प्रेम से गाया जाता है।

एक महीने में एकादशी का व्रत दो बार आता है - एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में। इस प्रकार वर्ष में कुल 24 या 25 एकादशियाँ होती हैं।

एकादशी के दिन अन्न (अनाज) का सेवन नहीं किया जाता है (फलाहार या निर्जला व्रत रखा जाता है), ब्रह्मचर्य का पालन होता है, और पूरा दिन भगवान विष्णु व कृष्ण के नाम स्मरण में बिताना चाहिए।

हाँ, इसकी लय और शब्द बहुत सरल हैं, इसलिए कोई भी नया गायक या भक्त इसे आसानी से हारमोनियम या ढोलक की ताल पर गा सकता है।

खाटू श्याम जी भगवान श्री कृष्ण के ही कलयुगी स्वरूप (बर्बरीक) हैं, और एकादशी श्री कृष्ण को अत्यंत प्रिय है, इसलिए श्याम भक्त ग्यारस का व्रत बड़े नियम से रखते हैं।

जब हम भगवत्प्रेम से ओत-प्रोत शब्दों का उच्चारण और श्रवण करते हैं, तो मन के विकार शांत होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है जिससे असीम शांति मिलती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक (Bhaktilok.in) के विद्वान आचार्यों और सांस्कृतिक शोधकर्ताओं द्वारा सनातन धर्म की परंपराओं, एकादशी व्रत विधान और लोकप्रिय संकीर्तन संस्कृति के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक भजन लिरिक्स, सरल भावार्थ और आध्यात्मिक प्रेरणा प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता एवं पद्म पुराण (एकादशी महात्म्य खंड)
  • पारंपरिक श्री कृष्ण एवं खाटू श्याम संकीर्तन संग्रह
  • सनातन व्रत विधान एवं पंचांग मार्गदर्शिका

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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