Chhath Puja Geet

लीले पे सवार हो गया लिरिक्स (Leele Pe Sawar Ho Gaya Lyrics in Hindi) - Shri Shyam Falgun Mahotsav Khatu Shyam Bhajan Puja Nathani - BhaktiLok

68 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

श्री श्याम फाल्गुन महोत्सव के पावन अवसर पर गाया जाने वाला यह भजन "लीले पे सवार हो गया" खाटू श्याम जी के प्रति अनन्य प्रेम, अटूट विश्वास और पूर्ण शरणागति का एक अद्भुत प्रतीक है। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे 'श्याम एकादशी' या 'खाटू श्याम लक्खी मेला' के रूप में मनाया जाता है, उस समय यह भजन भक्तों के हृदय में प्रभु के प्रति प्रेम की पराकाष्ठा को जागृत करता है। 'लीला' (नीला घोड़ा) प्रभु श्री श्याम की सवारी है, जो धर्म और विजय का प्रतीक है। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी समस्त चिंताओं को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है और यह अनुभव करता है कि स्वयं प्रभु उसके जीवन की बागडोर संभाल रहे हैं। यह भजन न केवल एक संगीतमय प्रस्तुति है, बल्कि यह साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसे प्रभु की भक्ति में लीन करने का एक सशक्त माध्यम है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

लीले पे सवार हो गया, मेरा श्याम सरकार हो गया,
देख के रूप निराला इसका, दिल मेरा बेकरार हो गया।

नीले घोड़े की असवारी, श्याम की महिमा है न्यारी,
भक्तों की बिगड़ी बनाने, खुद प्रभु द्वार हो गया,
लीले पे सवार हो गया, मेरा श्याम सरकार हो गया।

फाल्गुन का ये पावन मेला, भक्तों का लगा है रेला,
श्याम के दर्शन पाने को, सारा संसार तैयार हो गया,
लीले पे सवार हो गया, मेरा श्याम सरकार हो गया।

हारे का ये साथी प्यारा, देता है सबको सहारा,
श्याम की शरण में जो आया, उसका बेड़ा पार हो गया,
लीले पे सवार हो गया, मेरा श्याम सरकार हो गया।

खाटू की पावन नगरी में, श्याम की गूँजे जय-जयकार,
भक्तों के मन के मंदिर में, श्याम का दरबार हो गया,
लीले पे सवार हो गया, मेरा श्याम सरकार हो गया।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। भक्त कहता है कि जब उसने अपने आराध्य श्री श्याम को नीले घोड़े (लीला) पर सवार देखा, तो उसका मन प्रभु के प्रति पूर्णतः समर्पित हो गया। 'लीला' पर सवार श्याम का स्वरूप विजय और सामर्थ्य का प्रतीक है। भक्त का मानना है कि जो प्रभु स्वयं सृष्टि के पालनहार हैं, वे जब भक्त की पुकार सुनकर उसके द्वार पर आते हैं, तो भक्त का जीवन धन्य हो जाता है। फाल्गुन महोत्सव का उल्लेख करते हुए भक्त कहता है कि यह समय प्रभु से मिलन का है। 'हारे का सहारा' होना श्याम बाबा की सबसे बड़ी विशेषता है, जो यह संदेश देती है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, यदि विश्वास अटूट है, तो प्रभु अवश्य सहायता करते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति भाव: यह भजन शरणागति और विश्वास का प्रतीक है।
  • सांस्कृतिक महत्व: खाटू श्याम फाल्गुन महोत्सव के दौरान यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।
  • आध्यात्मिक संदेश: प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पण ही संसार सागर से पार उतरने का एकमात्र उपाय है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु फाल्गुन मास की एकादशी, एकादशी तिथि, या श्याम बाबा के कीर्तन के समय इसका गायन विशेष फलदायी होता है। इसे शुद्ध मन से, दीप प्रज्वलित कर और प्रभु के विग्रह के समक्ष बैठकर गाना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ संदर्भ
लीला नीला घोड़ा श्याम बाबा की सवारी
सरकार स्वामी/प्रभु ईश्वर के प्रति सम्मान
हारे का सहारा असहायों की मदद करने वाला श्याम बाबा का उपनाम
बेड़ा पार संसार सागर से मुक्ति मोक्ष या संकट से निवारण

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम लीले पे सवार हो गया
आराध्य श्री खाटू श्याम जी
भाषा हिंदी
मुख्य भाव शरणागति एवं प्रेम
उपयुक्त अवसर फाल्गुन महोत्सव, एकादशी, कीर्तन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

लीले पे सवार हो गया भजन का मुख्य भाव क्या है?

यह भजन प्रभु श्री श्याम के प्रति अटूट विश्वास और उनकी शरण में जाने का भाव व्यक्त करता है।

खाटू श्याम जी की सवारी 'लीला' क्या है?

लीला बाबा श्याम का प्रिय नीला घोड़ा है, जो धर्म की विजय और भक्तों की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री खाटू श्याम जी की पारंपरिक भक्ति कथाओं, लोक भजनों और फाल्गुन महोत्सव की प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है।

संबंधित भजन एवं लेख

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!