Shyam Bhajan

सांवरिया नन्द किशोर लिरिक्स (Sanwariya Nand Kishore Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan Jhanki - Bhaktilok

144 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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सनातन धर्म की समृद्ध संकीर्तन परंपरा में भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप और उनके मनोहारी सांवले रूप की महिमा का गान अनंत काल से किया जा रहा है। "सांवरिया नन्द किशोर लिरिक्स (Sanwariya Nand Kishore Lyrics in Hindi)" एक ऐसा ही परम पावन और रसमय भजन है, जो भक्त के हृदय में माधुर्य भाव और अनन्य समर्पण का संचार करता है। यह भजन विशेष रूप से श्याम भजन झांकी (Shyam Bhajan Jhanki) और श्री खाटू श्याम संकीर्तन उत्सवों में अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ गाया जाता है। इस भजन में जीवात्मा का परमात्मा के प्रति जो निश्छल प्रेम और विरह-मिलन का भाव व्यक्त हुआ है, वह साधक को भाव-विभोर कर देता है। जब कोई भक्त पूर्ण शरणागति के साथ इस भजन का श्रवण या गायन करता है, तो उसका अंतःकरण श्री कृष्ण के दिव्य प्रेम रस से सराबोर हो जाता है। आइए, इस लेख के माध्यम से हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण लिरिक्स, उसके गूढ़ आध्यात्मिक भावार्थ, पंक्ति-दर-पंक्ति व्याख्या और इसके दार्शनिक महत्व का विस्तार से अध्ययन करें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ सांवरिया नन्द किशोर ॥

(कोरस / मुखड़ा)
सांवरिया नन्द किशोर, खींच लियो मेरो मन माखन चोर।
सांवरिया नन्द किशोर, खींच लियो मेरो मन माखन चोर॥
तेरे बिना मोहे चैन न आवे, नैना तरसे चारों ओर।
सांवरिया नन्द किशोर, खींच लियो मेरो मन माखन चोर॥

(अंतरा - 1)
मोर मुकुट पीताम्बर सोहे, गल वैजयंती माला।
रूप अनूप कोटि छवि वारूँ, मेरो मदन गोपाला॥
बाँसुरी की धुन सुनके दौड़ी, जैसे वन में नाचे मोर।
सांवरिया नन्द किशोर, खींच लियो मेरो मन माखन चोर॥

(अंतरा - 2)
यमुना तट पर रास रचावे, गोपियन के संग डोले।
राधा जी के संग प्रीत लगा के, मीठी वाणी बोले॥
ऐसी तान सुनाई कान्हा, बंध गई प्रीत की डोर।
सांवरिया नन्द किशोर, खींच लियो मेरो मन माखन चोर॥

(अंतरा - 3)
शरण तिहारी आया कन्हैया, लाज बचाओ मेरी।
भवसागर में नैया अटकी, अब मत कीजो देरी॥
हाथ पकड़ लो हे जगदीश्वर, तुम बिन कौन है और।
सांवरिया नन्द किशोर, खींच लियो मेरो मन माखन चोर॥

(अंतरा - 4)
श्याम बहादुर शरण तुम्हारी, गावे महिमा तेरी।
चरण कमल की धूलि दे दो, मिटे जनम की फेरी॥
सांवरिया नन्द किशोर, खींच लियो मेरो मन माखन चोर।
सांवरिया नन्द किशोर, खींच लियो मेरो मन माखन चोर॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन "सांवरिया नन्द किशोर" भगवान श्री कृष्ण के प्रति पूर्ण आत्मसमर्पण और अनन्य प्रेम की अभिव्यक्ति है। भजन का मुख्य संदेश यह है कि जब मनुष्य का मन संसार के प्रपंचों से हटकर भगवान के सांवले और मनोहारी रूप में लीन हो जाता है, तब उसे परम शांति और आनंद की प्राप्ति होती है।

भजन के मुखड़े में भक्त कहता है कि हे नन्द के दुलारे, सांवले कृष्ण! आपने मेरे मन को अपनी ओर इस प्रकार खींच लिया है जैसे आपने कभी ब्रज में माखन चुराया था। आप केवल माखन के चोर नहीं हैं, बल्कि आप तो भक्तों के चित्त को चुराने वाले 'चित्तचोर' हैं। आपके बिना मेरे मन को क्षण भर भी चैन नहीं मिलता और मेरी आँखें हर दिशा में केवल आपकी ही दिव्य छवि को निहारने के लिए तरस रही हैं।

आगे के अंतराओं में भगवान के दिव्य सौंदर्य का वर्णन है। उनके मस्तक पर सुशोभित मोर मुकुट, शरीर पर पीताम्बर (पीले वस्त्र) और गले में वैजयंती माला की सुंदरता अवर्णनीय है। उनकी बाँसुरी की मधुर ध्वनि सुनते ही भक्त का मन इस प्रकार आनंदित होकर दौड़ पड़ता है, जैसे सावन के बादलों को देखकर वन में मोर नाचने लगता है। अंत में, भक्त संसार रूपी भवसागर से पार उतरने के लिए भगवान से प्रार्थना करता है कि हे कन्हैया! मेरी जीवन रूपी नैया बीच मझधार में अटकी है, अब आप ही मेरा हाथ थामकर मुझे पार लगाइए।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे सामान्य भजनों से अलग और अत्यंत प्रभावशाली बनाती हैं:

  • चित्त शुद्धि का साधन: इस भजन का निरंतर गायन करने से साधक के मन में जमे हुए सांसारिक विकार दूर होते हैं और चित्त एकाग्र होता है।
  • माधुर्य भाव की प्रधानता: इसमें भगवान को सखा, प्रेमी और रक्षक के रूप में पुकारा गया है, जो भक्ति मार्ग में 'माधुर्य भाव' की पराकाष्ठा है।
  • झांकी और संकीर्तन का प्राण: श्री खाटू श्याम जी के जागरणों और संकीर्तनों में इस भजन की धुन पर भक्त झूम उठते हैं, जिससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • शरणागति का संदेश: भजन का अंतिम भाग जीव को यह सिखाता है कि अंततः केवल भगवान की शरण में जाने से ही जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति संभव है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए कोई भी समय वर्जित नहीं है, फिर भी इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि अत्यंत फलदायी मानी गई है:

सर्वोत्तम समय: संध्या काल की आरती के समय या रात्रि में आयोजित होने वाले श्री श्याम संकीर्तन के दौरान इस भजन को गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त, एकादशी तिथि, जन्माष्टमी और होली-फाल्गुन महोत्सव के पावन अवसरों पर इसका विशेष महत्व है।

गायन की विधि:

  1. सर्वप्रथम अपने घर के मंदिर या संकीर्तन स्थल पर श्री कृष्ण या श्री खाटू श्याम जी की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  2. हाथ में करताल, मंजीरा या ढोलक लेकर पूरे परिवार या भक्त मंडली के साथ सामूहिक रूप से इसका गायन करें।
  3. गायन के समय मन में यह भाव रखें कि साक्षात नन्द किशोर आपके समक्ष विराजमान हैं और आपकी पुकार सुन रहे हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण (नन्द किशोर) को समर्पित है, जिन्हें कलयुग में श्री खाटू श्याम जी के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में बर्बरीक ने अपना शीश दान किया था, जिससे प्रसन्न होकर भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया था कि कलयुग में वे 'श्याम' नाम से पूजे जाएंगे।

इस भजन की रचना परंपरा में ब्रज के संतों और आधुनिक श्याम भक्तों का विशेष योगदान रहा है। भजन में प्रयुक्त "श्याम बहादुर" शब्द श्री खाटू श्याम जी के अनन्य परम भक्त 'आलू सिंह जी' और उनके शिष्य 'श्याम बहादुर जी' की गुरु-शिष्य परंपरा और उनकी अटूट श्रद्धा को दर्शाता है, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन श्याम नाम के प्रचार-प्रसार में समर्पित कर दिया।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की पृष्ठभूमि ब्रज मंडल की रासलीला और खाटू धाम की संकीर्तन परंपरा से जुड़ी हुई है। ब्रजभाषा के लोक संगीत और राजस्थानी भजनों के सम्मिश्रण से इस भजन की धुन तैयार की गई है। जब खाटू श्याम जी के मंदिर में या देश के विभिन्न कोनों में 'श्याम संध्या' का आयोजन होता है, तब इस भजन को एक विशेष 'झांकी' (जिसमें भगवान के विभिन्न रूपों का सजीव अभिनय किया जाता है) के साथ प्रस्तुत किया जाता है। यही कारण है कि इसे "Shyam Bhajan Jhanki" के रूप में अत्यधिक लोकप्रियता मिली है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और रसमय ब्रजभाषा है, जिसमें राजस्थानी लोक शैली का सुंदर पुट देखने को मिलता है। इसकी काव्य शैली में निम्नलिखित अलंकार और साहित्यिक सौंदर्य समाहित हैं:

  • अनुप्रास अलंकार: "सांवरिया नन्द किशोर", "मोहे चैन न आवे", "मोर मुकुट" आदि शब्दों में वर्णों की आवृत्ति से संगीतात्मकता उत्पन्न हुई है।
  • उपमा अलंकार: "जैसे वन में नाचे मोर" पंक्ति में भक्त के मन की तुलना वर्षा ऋतु में नाचने वाले मोर से की गई है, जो अत्यंत सुंदर और सटीक है।
  • गेयता (Musicality): भजन की लय और ताल इतनी सुगम है कि संगीत का साधारण ज्ञान रखने वाला व्यक्ति भी इसे आसानी से गा सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल मनोरंजन या केवल भावुकता का साधन नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पाठ सिखाता है:

  1. मन का नियंत्रण: "खींच लियो मेरो मन" का अर्थ है कि जब हमारा मन भगवान के दिव्य गुणों की ओर आकर्षित हो जाता है, तो वह सांसारिक बुराइयों और वासनाओं से स्वतः ही दूर हो जाता है।
  2. सच्ची व्याकुलता (तड़प): "तेरे बिना मोहे चैन न आवे" हमें सिखाता है कि ईश्वर प्राप्ति के लिए हृदय में वैसी ही व्याकुलता होनी चाहिए जैसी एक बालक की अपनी माता के लिए होती है।
  3. अहंकार का त्याग: जब भक्त कहता है कि "लाज बचाओ मेरी", तो वह अपने कर्तापन के अहंकार को त्यागकर भगवान को ही अपना एकमात्र रक्षक स्वीकार करता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
सांवरिया सांवले रंग वाले (श्री कृष्ण) परमात्मा का वह सगुण रूप जो भक्तों को आनंदित करता है।
नन्द किशोर नन्द बाबा के पुत्र भगवान का बाल और किशोर स्वरूप जो वात्सल्य और माधुर्य से परिपूर्ण है।
चित्तचोर / माखन चोर हृदय को चुराने वाले भगवान जो भक्तों के पापों और उनके अहंकार को हर लेते हैं।
पीताम्बर पीले वस्त्र तेजस्वी और ज्ञान का प्रतीक वस्त्र जो भगवान धारण करते हैं।
भवसागर संसार रूपी समुद्र जन्म और मृत्यु का चक्र जिससे पार पाना केवल ईश्वर की कृपा से संभव है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

आइए, इस पावन भजन की प्रत्येक पंक्ति के गहरे अर्थ को समझें:

"सांवरिया नन्द किशोर, खींच लियो मेरो मन माखन चोर।"
हे नन्द के लाडले सांवले कन्हैया! आपने मेरे मन को अपनी ओर इस प्रकार आकर्षित कर लिया है कि अब मेरा स्वयं पर कोई नियंत्रण नहीं रहा। आपने मेरे हृदय को चुरा लिया है।

"तेरे बिना मोहे चैन न आवे, नैना तरसे चारों ओर।"
आपके दर्शनों के बिना मेरे मन को कहीं भी शांति नहीं मिलती। मेरी आँखें हर क्षण, हर दिशा में केवल आपकी ही दिव्य छवि को ढूंढ रही हैं।

"मोर मुकुट पीताम्बर सोहे, गल वैजयंती माला।"
आपके मस्तक पर मोरपंखों से बना मुकुट सुशोभित है, शरीर पर पीले वस्त्र चमक रहे हैं और गले में पांच रंगों के पुष्पों वाली वैजयंती माला आपके सौंदर्य को द्विगुणित कर रही है।

"बाँसुरी की धुन सुनके दौड़ी, जैसे वन में नाचे मोर।"
जब आपकी मुरली की मधुर तान गूंजती है, तो मेरा मन सांसारिक बंधनों को तोड़कर आपकी ओर वैसे ही दौड़ पड़ता है, जैसे घटाओं को देखकर मयूर नृत्य करने लगता है।

"भवसागर में नैया अटकी, अब मत कीजो देरी।"
यह संसार दुखों और कठिनाइयों का सागर है, जिसमें मेरी जीवन रूपी नौका फंसी हुई है। हे प्रभु! अब और विलंब न करें और मुझे अपनी शरण में ले लें।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन के पूर्व या पश्चात भगवान श्री कृष्ण के इस महामंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं:

"सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामी मा शुचः॥"

अर्थात, सभी धर्मों (कर्तव्यों) को मुझमें समर्पित करके केवल मेरी शरण में आ जाओ। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूंगा, शोक मत करो। यही शरणागति का भाव इस भजन का मूल आधार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम सांवरिया नन्द किशोर (Sanwariya Nand Kishore)
मुख्य आराध्य देव भगवान श्री कृष्ण / श्री खाटू श्याम जी
भक्ति का भाव माधुर्य भाव, शरणागति और अनन्य प्रेम
भाषा सरल ब्रजभाषा एवं हिंदी
उपयुक्त अवसर श्याम संध्या, एकादशी, जन्माष्टमी, दैनिक संध्या आरती
मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और सांसारिक मोह का त्याग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह एक पारंपरिक भजन है जिसे कन्हैया मित्तल, लखबीर सिंह लख्खा और अंजली द्विवेदी सहित कई प्रसिद्ध श्याम भजन गायकों ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

इस भजन का मुख्य संदेश है 'शरणागति'। यह जीव को सिखाता है कि जब हम अपने मन और कर्मों को भगवान के चरणों में समर्पित कर देते हैं, तो वे हमारे जीवन की नैया को पार लगा देते हैं।

हाँ, राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर और देश भर में आयोजित होने वाले श्याम जगरातों में यह भजन भक्तों का अत्यंत पसंदीदा भजन है।

लौकिक रूप से इसका अर्थ माखन चुराने वाले बाल कृष्ण से है, परंतु आध्यात्मिक रूप से इसका अर्थ भक्तों के हृदय से अहंकार, अज्ञान और विकारों को चुराने वाले ईश्वर से है।

इसके नियमित गायन और श्रवण से मानसिक तनाव दूर होता है, मन में सकारात्मक विचारों का प्रवाह होता है और भगवान श्री कृष्ण के प्रति भक्ति सुदृढ़ होती है।

वैजयंती माला विजय और दिव्यता का प्रतीक है। भगवान विष्णु और श्री कृष्ण इसे धारण करते हैं, जो उनके सर्वशक्तिमान और आनंदमयी स्वरूप को प्रदर्शित करती है।

यह भजन मुख्य रूप से सुगम संगीत और लोक धुन पर आधारित है, जिसे कहरवा ताल में बहुत ही खूबसूरती से गाया जाता है।

बिल्कुल, गृहस्थ जीवन में रहते हुए ईश्वर की आराधना करने का यह सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है। यह परिवार में सुख-शांति और प्रेम का माहौल बनाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "सांवरिया नन्द किशोर लिरिक्स" के प्रामाणिक स्रोतों, श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों और सनातन धर्म की संकीर्तन परंपरा के गहन अध्ययन के पश्चात तैयार किया गया है। इस भजन के माध्यम से प्रस्तुत की गई व्याख्या भक्तों को केवल शब्दों के अर्थ ही नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपे गहरे आध्यात्मिक संदेश से भी अवगत कराती है। यह सामग्री पूरी तरह से शोधपरक और "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" है, जो पाठकों की धार्मिक जिज्ञासाओं को शांत करने में सहायक सिद्ध होगी।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता: भगवान श्री कृष्ण के उपदेश और शरणागति योग।
  • श्रीमद्भागवत महापुराण: भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाएं और रासपंचाध्यायी प्रसंग।
  • सनातन संकीर्तन परंपरा: ब्रज और राजस्थान के पारंपरिक लोक भजन संग्रह।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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