Krishna Bhajan

श्याम सवेरे देखु तुझको कितना सुंदर रूप है लिरिक्स (Sham Sawere Dekhu Tujhko Kitna Sundar Roop Hai Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan - Bhaktilok

311 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

श्याम सवेरे देखु तुझको कितना सुंदर रूप है लिरिक्स (Sham Sawere Dekhu Tujhko Kitna Sundar Roop Hai Lyrics in Hindi) - श्याम भजन - Bhaktilok

श्री बांके बिहारी, खाटू श्याम बाबा और गिरधर गोपाल की अनन्य आराधना को समर्पित अत्यंत लोकप्रिय एवं हृदयस्पर्शी भजन "श्याम सवेरे देखु तुझको कितना सुंदर रूप है लिरिक्स (Sham Sawere Dekhu Tujhko Kitna Sundar Roop Hai Lyrics in Hindi)" सनातन भक्तों के अंतर्मन को झंकृत करने वाला एक पावन संकीर्तन है। कलयुग में भगवान श्री कृष्ण के श्याम रूप की महिमा अपरंपार है। प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त से लेकर संध्या बेला तक श्याम सुंदर के दर्शन की लालसा हर सच्चे प्रेमी और साधक के हृदय में प्रज्वलित रहती है। यह भजन जीवात्मा के उस परम अनुराग और समर्पण को अभिव्यक्त करता है, जहां साधक की आंखें केवल और केवल अपने आराध्य के अलौकिक, मोहक और श्यामल रूप का पान करना चाहती हैं। इस भजन के प्रत्येक शब्द में भक्ति का अमृत, प्रेम की पराकाष्ठा और पूर्ण शरणागति का भाव निहित है। जब साधक प्रातः उठकर इस भजन का स्मरण करता है, तो उसका पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा, भक्ति रस और आत्मिक शांति से परिपूर्ण हो जाता है। यह भक्ति रचना न केवल संगीत की दृष्टि से मधुर है, बल्कि आध्यात्मिक साधना का एक अत्यंत सशक्त माध्यम भी है, जो भक्त को संसार के माया-मोह से मुक्त कर सीधे बांके बिहारी के चरणों से जोड़ती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थायी (मखड़ा):
श्याम सवेरे देखूं तुझको, कितना सुंदर रूप है,
तेरे बिना मेरे सांवरे, सूखी मेरी धूप है!
श्याम सवेरे देखूं तुझको, कितना सुंदर रूप है...

अंतरा 1:
मोर मुकुट सिर पर सोहे, कानों में कुंडल चमके,
भृकुटी बांकी नैन रसीले, जैसे बिजली चमके।
देख-देख कर मन ना मोहे, ऐसा तेरा स्वरूप है,
श्याम सवेरे देखूं तुझको, कितना सुंदर रूप है!

अंतरा 2:
अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो, दर पे सुदामा गरीब आ गया है... (पारंपरिक भाव संगामी संकीर्तन)
नहीं, मेरे श्याम की मुरली की धुन पर, सुध-बुध खोई मैंने,
प्रेम सुधा रस पान कराया, जग की पीड़ा धोई मैंने।
चरण कमल में झुका शीश है, मेरा यही तो कूप है,
श्याम सवेरे देखूं तुझको, कितना सुंदर रूप है!

अंतरा 3:
खाटू वाले श्याम धणी तू, हारे का सहारा है,
जो भी तेरी शरण में आया, उसका जग में गुजारा है।
नाम तुम्हारा जपते-जपते, मिट जाता हर कूप है,
श्याम सवेरे देखूं तुझको, कितना सुंदर रूप है!

समापन संकीर्तन:
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा!
राधा कृष्ण जपते चलो, भवसागर तरते चलो!
श्याम सवेरे देखूं तुझको, कितना सुंदर रूप है, तेरे बिना मेरे सांवरे, सूखी मेरी धूप है!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह पावन भजन साधक और भगवान श्री कृष्ण के बीच के अटूट और पवित्र प्रेम संबंध का अत्यंत सुंदर चित्रण प्रस्तुत करता है। भजन की पहली पंक्ति "श्याम सवेरे देखूं तुझको, कितना सुंदर रूप है" यह दर्शाती है कि एक सच्चा भक्त अपने दिन की शुरुआत अपने इष्ट के दर्शन के बिना नहीं कर सकता। उसके लिए सुबह का सूर्योदय तभी सार्थक होता है जब वह अपने सांवरे सरकार के अलौकिक सौंदर्य का स्मरण कर ले। "तेरे बिना मेरे सांवरे, सूखी मेरी धूप है" इस बात का प्रतीक है कि भगवान के चरणों से दूर यह जीवन अत्यंत निष्प्राण, सूखा और संघर्षपूर्ण है। जिस प्रकार धूप के बिना जीवन की कल्पना कठिन है, उसी प्रकार श्याम के आशीर्वाद और दर्शन के बिना भक्त का जीवन नीरस रहता है।

भजन के अंतरा में भगवान के श्रृंगार का वर्णन किया गया है—मोर मुकुट, कानों के कुंडल और नैनों की मादकता। यह रूप साधक के मन को मोह लेता है और उसे सांसारिक चिंताओं से मुक्त कर देता है। खाटू श्याम बाबा और बांके बिहारी के रूप में भक्त यह स्वीकार करता है कि जीवन के हर संकट में केवल श्याम नाम ही एकमात्र सहारा है। यह भजन हमें सिखाता है कि जब मनुष्य अपनी समस्त इच्छाओं को भगवान के चरणों में समर्पित कर देता है, तो उसका जीवन भक्ति रस से सराबोर हो जाता है.

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन का सनातन धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह भगवान श्री कृष्ण के विभिन्न स्वरूपों—विशेषकर बांके बिहारी, खाटू श्याम और राधा-कृष्ण की प्रेम परंपरा से जुड़ा हुआ है। इस भजन को गाने और सुनने से मन को असीम शांति मिलती है।

  • भक्ति रस का संचार: यह भजन साधक के अंतर्मन में प्रेम और समर्पण के भाव को जागृत करता है।
  • तनाव मुक्ति: सुबह के समय इस भजन का श्रवण करने से मानसिक तनाव दूर होता है और दिनभर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
  • शरणागति का संदेश: यह भजन सिखाता है कि समस्त दुखों का निवारण केवल भगवान की शरण में जाने से ही संभव है।
  • सार्वभौमिक अपील: इसे किसी भी उम्र के लोग, बच्चे, युवा और वृद्ध बड़े ही भाव के साथ गा सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भजन की पूर्ण फलप्राप्ति के लिए इसे उचित समय और विधि के साथ गाना या सुनना चाहिए:

  • सर्वोत्तम समय: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:00 बजे से 6:00 बजे के बीच) या संध्याकालीन आरती के समय।
  • स्थान: पूजा घर, मंदिर, सत्संग भवन या शांत वातावरण में एकांत स्थान।
  • विधि: स्नान आदि से निवृत्त होकर शुद्ध वस्त्र पहनें। भगवान श्री कृष्ण या खाटू श्याम की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित करें। पुष्प अर्पित करें और पूरी तन्मयता के साथ इस भजन का गान या श्रवण करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से जगत के पालनहार भगवान श्री कृष्ण, उनके परम भक्त रूप 'खाटू श्याम बाबा' (बरण के सहारे) और वृंदावन के बांके बिहारी को समर्पित है। सनातन परंपरा में संकीर्तन को कलयुग का सबसे सरल और प्रभावी मार्ग बताया गया है। चैतन्य महाप्रभु, मीराबाई, सूरदास और रसखान जैसे महान संतों ने भी भगवान कृष्ण के इसी सुंदर और अलौकिक रूप का अपने पदों में गान किया है। भगवान कृष्ण का सांवला रंग और उनकी त्रिभंग मुद्रा भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भजन की रचना पारंपरिक लोक और भक्ति संगीत की शैली में की गई है। उत्तर भारत, विशेषकर ब्रज क्षेत्र, राजस्थान (खाटू धाम) और हरियाणा में इस प्रकार के भजनों की गहरी परंपरा रही है। लोक कलाकारों और संत कवियों ने समय-समय पर भक्तों की रसानुभूति के लिए ऐसे भजनों को जन-जन तक पहुंचाया है। यह रचना मौखिक परंपरा से होते हुए आज डिजिटल माध्यमों (जैसे Bhaktilok) के माध्यम से लाखों भक्तों तक पहुंच रही है.

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, मधुर और सहज हिंदी (ब्रज-अवधि मिश्रित बोलचाल की लोक भाषा) है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है। शब्दों का चयन इस प्रकार किया गया है कि कोई भी सामान्य व्यक्ति इसे आसानी से समझ सके और गा सके। संगीतात्मकता और लयबद्धता इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता है, जो श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर देती है.

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें निम्नलिखित अमूल्य जीवन सीख मिलती हैं:

  • नियमित स्मरण: ईश्वर का स्मरण केवल संकट के समय नहीं, बल्कि प्रतिदिन प्रातःकाल होना चाहिए।
  • संतोष और धैर्य: भगवान के रूप में ध्यान लगाने से मन में संतोष और शांति की प्राप्ति होती है।
  • अहंकार का त्याग: 'तेरी शरण में आया' का भाव हमारे भीतर के अहंकार को समाप्त करता है।
  • सच्चा प्रेम: सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर परमात्मा से अनन्य प्रेम करना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
श्याम सवेरे सुबह और शाम, हर पल निरंतर ईश्वर का स्मरण करना
सुंदर रूप मोहक और अलौकिक स्वरूप भगवान का दिव्य सौंदर्य जो मन को मोह ले
सूखी मेरी धूप नीरस और संघर्षपूर्ण जीवन ईश्वर के बिना जीवन की व्यर्थता
मोर मुकुट मोर पंख का मुकुट श्री कृष्ण का पारंपरिक आभूषण एवं पहचान
हारे का सहारा संकटग्रस्त व्यक्ति का रक्षक खाटू श्याम बाबा की प्रमुख कृपा

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: श्याम सवेरे देखूं तुझको, कितना सुंदर रूप है...
भावार्थ: भक्त कहता है कि हे मेरे प्रभु श्याम! मैं सुबह-शाम केवल आपके ही दिव्य रूप के दर्शन की अभिलाषा रखता हूँ, आपकी यह सुंदरता अद्वितीय है।

पंक्ति: तेरे बिना मेरे सांवरे, सूखी मेरी धूप है...
भावार्थ: आपके बिना मेरा जीवन ऐसा है जैसे धूप में सूखती हुई भूमि, जिसमें शीतलता और आनंद का कोई नामो-निشان नहीं है।

पंक्ति: मोर मुकुट सिर पर सोहे, कानों में कुंडल चमके...
भावार्थ: आपके मस्तक पर मोर पंख का मुकुट और कानों में झिलमिलाते कुंडल आपके सौंदर्य में चार चांद लगा देते हैं।

पंक्ति: हारे का सहारा है, जो भी तेरी शरण में आया...
भावार्थ: हे खाटू वाले श्याम! आप संसार से हारे हुए हर व्यक्ति के एकमात्र आश्रयदाता हैं, जो आपकी शरण में आ गया, उसका जीवन संवर गया।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन महामंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना गया है:

"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"
"श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा"

भगवान श्री कृष्ण के स्वरूप का वर्णन करने वाला यह श्लोक भी स्मरण करें:

"कस्तूरी तिलकं ललाटपटले, वक्ष्ण कौस्तुभम्।
नासाग्रे वरमौक्तिकम करतले, वेणुं करे करणं।
सर्वाङ्गं हरिकृतं सुन्दरं, तं नौमि गोपालकम्॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम श्याम सवेरे देखु तुझको कितना सुंदर रूप है
समर्पित इष्ट भगवान श्री कृष्ण, खाटू श्याम बाबा, बांके बिहारी
संगीत शैली लोक भजन / संकीर्तन
भाषा सरल हिंदी / ब्रज भाव
मुख्य भाव प्रेम, अनन्य भक्ति और पूर्ण शरणागति
गाने का उपयुक्त समय प्रातःकाल, संध्या आरती या सत्संग
संबंधित पावन पाठ श्री कृष्ण चालीसा एवं खाटू श्याम आरती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन के मुख्य आराध्य भगवान श्री कृष्ण, बांके बिहारी और कलयुग के अवतारी खाटू श्याम बाबा हैं।

इस भजन को प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में पूजा के समय या संध्या बेला में आरती के दौरान गाना सबसे उत्तम माना गया है।

हाँ, इसकी धुन बहुत सरल, लयबद्ध और कर्णप्रिय है, जिसे बच्चे और नए साधक बहुत आसानी से याद करके गा सकते हैं।

इस भजन के निरंतर गायन और श्रवण से मन की चंचलता शांत होती है, एकाग्रता बढ़ती है और भगवान के प्रति प्रेम भाव दृढ़ होता है।

निश्चित रूप से! यह भजन सामूहिक सत्संग, कीर्तन और एकादशी के जागरण में गाने के लिए अत्यधिक लोकप्रिय है।

इसका अर्थ यह है कि ईश्वर की कृपा और दर्शन के बिना भक्त का जीवन निष्प्राण, सूखा और सुख-हीन प्रतीत होता है।

हाँ, भजन के समापन पर 'हरे कृष्ण महामंत्र' या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करने से साधना और अधिक फलदायी होती है।

आप हमारे पोर्टल Bhaktilok पर ऐसे अनेकों प्रामाणिक भजन, चालीसा, आरती और कथाएं पा सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री—यह आलेख सनातन धर्म की भजन परंपरा, लोक साहित्य और श्री कृष्ण भक्ति के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए प्रामाणिक रूप से संकलित किया गया है। इसमें पाठ की शुद्धता, अर्थ की स्पष्टता और SEO मानकों का पूर्ण ध्यान रखा गया है ताकि भक्तों को सर्वोत्तम अनुभव प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक ब्रज संकीर्तन एवं लोक भजन संग्रह
  • श्रीमद्भागवत पुराण एवं श्री कृष्ण लीला प्रसंग
  • सनातन भक्ति साहित्य एवं संत वाणी
  • खाटू श्याम दर्शन एवं महिमा ग्रंथ

संबंधित भजन एवं लेख

यदि आपको यह भजन पसंद आया है, तो नीचे दिए गए अन्य लोकप्रिय पावन लेखों और भजनों को भी अवश्य पढ़ें:

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!