Shyam Bhajan

मंदिर के पट खोल भगत तेरे द्वार खड़े (Mandir Ke Patt Khol Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan Rahul Sharma ( Palam Wale) - BhaktiLok

65 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भक्ति और समर्पण की अनूठी पावन गाथा को समर्पित यह भजन "मंदिर के पट खोल भगत तेरे द्वार खड़े" (Mandir Ke Patt Khol Shyam Bhajan) बाबा श्याम के दरबार में हाजिरी लगाने वाले प्रत्येक भक्त के अंतःकरण की पुकार है। राहुल शर्मा (पालम वाले) की मधुर वाणी और भावपूर्ण प्रस्तुति से सजा यह श्याम भजन कलयुग के धनी खाटू श्याम जी के प्रति अनन्य प्रेम, विरह और अटूट आस्था का जीवंत प्रतीक है। सनातन धर्म में संकीर्तन, नाम स्मरण और शरणागति को भवसागर से तरने का सबसे सुगम मार्ग बताया गया है। इस भजन का एक-एक शब्द जीवात्मा की उस व्याकुलता को व्यक्त करता है जो अपने आराध्य के दर्शन के लिए सब कुछ त्यागकर उनके द्वार पर आकर खड़ी हो जाती है। इस विस्तृत लेख में हम इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन शैली और इसके आध्यात्मिक महत्व का रसास्वादन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थायी (मुखड़ा)

मंदिर के पट खोल भगत तेरे द्वार खड़े,
ओ खाटू वाले श्याम, भगत तेरे द्वार खड़े।
दर्शन की प्यास जगी मन में, अरदास हमारी सुन ले जरा,
तेरे दर का हूँ मैं दीवाना, मुझको भी अपना ले ज़रा।


प्रथम अंतरा

दुनिया ठुकरा दे जिसको भी, उसका तू ही तो सहारा है,
तू ही हारे का है साथी, तू ही तो बेसहारा है।
भटक रहा हूँ दर-दर कब से, अब तो नजर मिला ले श्याम,
तेरे चरणों में झुक जाए, ले ले मेरा प्रणाम श्याम।
मंदिर के पट खोल भगत तेरे द्वार खड़े...


द्वितीय अंतरा

सुना है मैंने हे खाटूश्यामा, तू अपने भक्तों पर रीझता है,
दुखियों के आंसू को अपने, आंचल से तू है सीता है।
आज परीक्षा मेरी भी है, देखूँ कितनी दया तुम्हारी,
दौड़ के आजा बांके बिहारी, नैया पड़ी भंवर में हमारी।
मंदिर के पट खोल भगत तेरे द्वार खड़े...


अंतिमा अंतरा

राहुल शर्मा गुण गाए तेरा, सुध-बुध बिसरा बैठा है,
तेरे भरोसे बैठा सांवरिया, तुझको ही अपना माना है।
आँखों में आंसू और मन में श्रद्धा का दीप जलाए हैं,
दर पे तेरे हम सांवरे, अर्जी लेकर आए हैं।
मंदिर के पट खोल भगत तेरे द्वार खड़े,
ओ खाटू वाले श्याम, भगत तेरे द्वार खड़े।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि एक भक्त और भगवान के बीच के आत्मीय संवाद का दस्तावेज है। "मंदिर के पट खोल भगत तेरे द्वार खड़े" पंक्ति के माध्यम से गायक राहुल शर्मा ने यह दर्शाया है कि जब भक्त सांसारिक दुखों से त्रस्त होकर और समस्त आशाएं छोड़कर केवल भगवान के भरोसे रह जाता है, तब वह अपने आराध्य से मंदिर के कपाट खोलने यानी अपने हृदय के द्वार पर कृपा बरसाने की विनती करता है। 'खाटू वाले श्याम' को पुकारने का अर्थ है कि उस परम शक्ति पर पूर्ण विश्वास रखना जो अपने भक्तों की हर पुकार को अनसुना नहीं करती।

भजन के अंतरा में 'हारे का सहारा' उपाधि का सुंदर प्रयोग हुआ है जो खाटू श्याम जी (श्री बर्बरीक जी) की मूल पहचान है। जब मनुष्य चारों तरफ से निराश हो जाता है, तब श्याम बाबा का दरबार ही एकमात्र ऐसा स्थल बचता है जहाँ उसे सांत्वना मिलती है। गायक ने अपनी और समस्त भक्तों की व्यथा को शब्दों में पिरोकर यह समझाया है कि भगवान और भक्त का संबंध अटूट है, बस जरूरत है तो सच्चे मन से पुकारने की।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

श्री खाटू श्याम जी को समर्पित इस भजन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • भक्ति का सजीव चित्रण: भजन में भक्त की विरह वेदना और दर्शन की लालसा का अत्यंत सजीव चित्रण किया गया है।
  • सरल एवं बोधगम्य भाषा: बोल इतने सरल और हृदयस्पर्शी हैं कि कोई भी सामान्य व्यक्ति इसे आसानी से गा और समझ सकता है।
  • कलयुग के देवता की महिमा: श्याम बाबा को 'हारे का सहारा' के रूप में स्मरण करना भक्तों में नई ऊर्जा और विश्वास का संचार करता है।
  • राहुल शर्मा की मधुर शैली: पालम वाले राहुल शर्मा के गायन में एक विशेष प्रकार का संकीर्तन रस और विनय भाव झलकता है जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन श्याम भजन को गाने और सुनने के लिए कोई कठोर नियम नहीं हैं, तथापि निम्नलिखित अवसरों पर इसका विशेष महत्व है:

  • एकादशी और द्वादशी: खाटू श्याम जी के प्रमुख वार (खाटू श्याम दर्शन दिवस) पर इसका गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • श्याम संकीर्तन संध्या: जागरण, चौकी या साप्ताहिक सत्संग के दौरान इस भजन को मुख्य प्रस्तुति के रूप में गाया जाता है।
  • दैनिक पूजा के पश्चात: संध्याकालीन आरती के बाद जब आप अपने घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करते हैं, तब मानसिक शांति के लिए इसे गुनगुना सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण के अवतार कलयुग के अवतारी श्री खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक जी) को समर्पित है। महाभारत काल में अपनी अद्भुत वीरता और भगवान श्री कृष्ण को अपना शीश दान करने वाले बर्बरीक जी को कलयुग में 'श्याम' के नाम से पूजे जाने का वरदान प्राप्त हुआ था। राहुल शर्मा जैसे समर्पित भजन गायक ऐसे ही लोक-देवताओं की महिमा को जन-जन तक पहुँचाने का पवित्र कार्य करते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भजन की रचना समकालीन भक्ति संगीत परंपरा के अंतर्गत हुई है, जहाँ पारंपरिक तर्जों और आधुनिक संगीत संयोजन (Music Arrangement) का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। राहुल शर्मा (पलाम वाले) ने अपनी अनूठी गायन शैली से इसे खाटू श्याम भक्तों के बीच घर-घर में लोकप्रिय बनाया है। इस रचना के पीछे का मुख्य उद्देश्य श्याम प्रेमियों को बाबा के दरबार से भावनात्मक रूप से जोड़ना है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा लोक-सुलभ हिंदी और ब्रज-राजस्थानी मिश्रित बोलचाल की भाषा है, जो उत्तर भारत के भक्तों के दिलों को आसानी से छू लेती है। इसमें रूपक अलंकार और उपमा का सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे 'नैया भंवर में पड़ना' और 'दर्शन की प्यास जगना'। यह शैली श्रोता के मन में तुरंत भक्ति रस जागृत करने में सक्षम है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन सीख मिलती हैं:

  • पूर्ण शरणागति: जीवन की हर परिस्थिति में ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।
  • अहंकार का त्याग: जब मनुष्य अपनी बुद्धि और बल का अहंकार छोड़कर ईश्वर की शरण में जाता है, तभी उसका उद्धार होता है।
  • धैर्य और प्रार्थना: कठिन समय में धैर्य बनाए रखते हुए निरंतर भगवान का स्मरण करना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल अर्थ संदर्भ / भाव
पट खोलना दरवाजे खोलना या कृपा बरसाना हृदय के द्वार या मंदिर के कपाट खोलने की विनती
हारे का सहारा जो निराश लोगों की मदद करे खाटू श्याम बाबा की प्रमुख उपाधि
अरदास प्रार्थना या निवेदन भक्त द्वारा भगवान के सामने अपनी बात रखना
भंवर जल का चक्रवात या संकट संसार रूपी कठिनाइयों से घिरा जीवन

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मंदिर के पट खोल भगत तेरे द्वार खड़े..." - हे सांवरे सरकार! हम आपके भक्त आपके मंदिर के बाहर श्रद्धा और प्रेम के साथ हाथ जोड़े खड़े हैं, कृपया अपने कृपा रूपी कपाट खोल दीजिए ताकि हम आपके अलौकिक दर्शन कर सकें।

"दुनिया ठुकरा दे जिसको भी, उसका तू ही तो सहारा है..." - इस संसार में जब कोई व्यक्ति चारों तरफ से दुखों से घिर जाता है और उसे कोई आश्रय नहीं मिलता, तब हे श्याम बाबा! केवल आपका ही नाम ऐसा है जो उसे संबल प्रदान करता है।

"राहुल शर्मा गुण गाए तेरा, सुध-बुध बिसरा बैठा है..." - गायक राहुल शर्मा आपके प्रेम में इतने सुध-बुध खो बैठे हैं कि उन्हें अब अपनी भी सुध नहीं रही, वे केवल और केवल आपके गुणों का गान करने में लीन हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

श्याम बाबा के स्मरण के समय निम्नलिखित प्रसिद्ध महामंत्र का जाप करना अति लाभकारी माना जाता है:

ॐ श्री श्याम देवाय नमः

शीर्षक: श्री खाटू श्याम मूल मंत्र

इसके साथ ही श्री हनुमान चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र जैसे पावन स्रोतों का पाठ करने से भी मन की शुद्धि होती है और भक्ति मार्ग प्रशस्त होता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य / जानकारी
भजन का नाम मंदिर के पट खोल भगत तेरे द्वार खड़े (Mandir Ke Patt Khol)
आराध्य देव खाटू श्याम बाबा (श्री बर्बरीक जी)
गायक कलाकार राहुल शर्मा (पालम वाले)
संगीत शैली श्याम भजन / संकीर्तन
भाषा हिंदी / ब्रज स्थानीय
प्रमुख भाव शरणागति, विरह, प्रेम और विनय
उपयुक्त अवसर एकादशी, श्याम जागरण, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध श्याम भजन के गायक राहुल शर्मा (पालम वाले) हैं, जिन्होंने अपनी मधुर वाणी से इसे सजाया है।

यह भजन कलियुग के अवतार खाटू श्याम बाबा (श्री बर्बरीक जी) को समर्पित है।

इस भजन को एकादशी, खाटू श्याम जागरण, मासिक कीर्तन या घर की संध्या आरती के समय गाना और सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है।

खाटू श्याम बाबा को मुख्य रूप से 'हारे का सहारा', 'तीन बाण धारी' और 'शीश के दानवीर बर्बरीक' के रूप में जाना जाता है।

श्याम भजन सुनने से मन को शांति मिलती है, मानसिक तनाव दूर होता है और भगवान के प्रति श्रद्धा व विश्वास और अधिक मजबूत होता है।

हाँ, इस लेख में संपूर्ण भजन के बोल देवनागरी लिपि (हिंदी) में अर्थ सहित उपलब्ध कराए गए हैं।

निश्चित रूप से, आप अपने घर पर परिवार के साथ मिलकर या विशेष उत्सवों पर श्याम संकीर्तन और भजन पाठ कर सकते हैं।

भक्त और भगवान का संबंध अनन्य प्रेम, पूर्ण विश्वास और शरणागति का होता है, जहाँ भक्त बिना किसी स्वार्थ के केवल अपने आराध्य के दर्शन की कामना करता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तिलोक (Bhaktilok.in) पर प्रकाशित यह सामग्री सनातन धर्म की पारंपरिक लोक-भक्ति, संकीर्तन परंपरा और प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है। इस लेख का उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध भजन लिरिक्स और उसका आध्यात्मिक मर्म पहुंचाना है। यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे उच्च गुणवत्ता मानकों को ध्यान में रखकर सुसज्जित किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक श्याम संकीर्तन एवं लोक भजन संग्रह
  • खाटू श्याम मंदिर इतिहास एवं महिमा ग्रंथ
  • श्री बर्बरीक कथा एवं महाभारत पौराणिक संदर्भ
  • भक्त राहुल शर्मा (पालम वाले) प्रस्तुत भजन एल्बम एवं ऑडियो रिकॉर्डिंग

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Sep 2026

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