Krishna Bhajan

पलके ही पलके बिछायेंगे जिस दिन श्याम प्यारे घर आयेंगे भजन ( Palke Hi Palke Bichayenge Lyrics in Hindi ) - Shri Krishna Bhajan - Bhaktilok

115 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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Krishna Bhajan

पलके ही पलके बिछायेंगे जिस दिन श्याम प्यारे घर आयेंगे भजन ( Palke Hi Palke Bichayenge Lyrics in Hindi ) - Shri Krishna Bhajan

प्रकाशित तिथि: 2026 | श्रेणी: भजन एवं संकीर्तन | वाचन समय: 7 मिनट

सनातन धर्म और भक्ति परंपरा में संकीर्तन, प्रभु के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति (Surrender) का अत्यंत ऊंचा स्थान है। "पलके ही पलके बिछायेंगे जिस दिन श्याम प्यारे घर आयेंगे" यह अत्यंत पावन, मधुर और भाव-विभोर कर देने वाला श्री कृष्ण भजन है जो हर भक्त के अंतर्मन को झंकृत कर देता है। भगवान बांकेबिहारी, घनश्याम, या बांके बिहारी लाल के आगमन की प्रतीक्षा में बिछाई जाने वाली पलकें इस बात का प्रतीक हैं कि जीवात्मा अपने प्रियतम परमेश्वर से मिलने के लिए कितनी व्याकुल और उत्सुक है। इस भजन का गान करने से मन को असीम शांति, भक्ति रस की प्राप्ति और सात्विक ऊर्जा का अनुभव होता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

مukhda / स्थायी:

पलकें ही पलकें बिछायेंगे, जिस दिन श्याम प्यारे घर आयेंगे,
अपने हाथों से चरण पखारेंगे, जिस दिन श्याम प्यारे घर आयेंगे।
रूठेंगे तो मना लेंगे, चरण गले से लगा लेंगे,
सुख-दुःख की सारी बातें, हम उनको सुना देंगे...

अंतरा 1:

फूलों से सजायेंगे हम तो, कुंज बिहारी का दरबारा,
छवि देख छबिली मन मोह लेगी, रूप है कितना प्यारा प्यारा।
मुरली की तान जब कानों में गूंजेगी, सुध-बुध बिसर जाएगी,
भक्ति की ऐसी पावन धारा, घर-घर में बह जाएगी।

अंतरा 2:

माखन और मिश्री का भोग लगायेंगे, प्रेम से छककर खायेंगे,
गोकुल के राजा, ब्रज के दुलारे, दर्शन पाकर धन्य हो जायेंगे।
कष्ट हमारे सब मिट जाएंगे, जब वे कृपा बरसायेंगे,
जीवन नैया पार लगेगी, जब मोहन नाव चलायेंगे।

समापन / संकीर्तन:

राधे-राधे बोलेंगे, श्याम-श्याम बोलेंगे,
भवसागर के बंधन, पल में खोलेंगे।
जय श्री कृष्ण, जय श्री बांके बिहारी लाल की जय!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह एक भक्त की अपने आराध्य श्री कृष्ण के प्रति अगाध श्रद्धा, प्रेम और विरह की पराकाष्ठा है। जब भक्त कहता है कि "पलकें ही पलकें बिछायेंगे", तो इसका अर्थ है कि वह अपने प्रभु के स्वागत में अपनी पलकों तक को मार्ग में बिछाने को तैयार है—यानी अपनी संपूर्ण देह, मन और प्राणों को ईश्वर की सेवा में समर्पित कर देना।

भजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि जब भगवान किसी के जीवन में आते हैं (अर्थात जब भक्त के हृदय में दिव्य ज्ञान और प्रेम का प्रकाश होता है), तो जीवन के सारे कष्ट, संताप और विरह स्वतः समाप्त हो जाते हैं। माखन-मिश्री का भोग और चरणों को पखारना (धोना) सेवा भाव को दर्शाता है। यह इस बात का द्योतक है कि भगवान को छप्पन भोग नहीं, बल्कि भक्त का निर्मल प्रेम और समर्पण चाहिए होता है। इस भजन का पाठ या श्रवण करने से साधक का चित्त शुद्ध होता है और उसे ब्रजराज की कृपा का अनुभव होता है। ऐसे ही अन्य पावन भजनों के लिए आप श्री कृष्ण भजन संग्रह और राधा कृष्ण स्टेटस व विचार देख सकते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • अनन्य भक्ति भाव: यह भजन साधक के भीतर समर्पण और प्रेम के भाव को जागृत करता है।
  • मानसिक शांति: भगवान कृष्ण के रूप और उनकी लीलाओं का स्मरण करने से मानसिक तनाव दूर होता है।
  • कलयुग में संकीर्तन का महत्व: श्रीमद्भागवत और सनातन ग्रंथों के अनुसार, कलयुग में भगवान का नाम स्मरण और संकीर्तन ही मोक्ष का सबसे सुगम मार्ग है।
  • उत्सव का आनंद: इसे किसी भी विशेष पर्व जैसे जन्माष्टमी, गोपाष्टमी या घर में होने वाले सत्संग व कीर्तन के दौरान गाया जा सकता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भजन गायन के लिए प्रातः काल (ब्रह्म मुहूर्त) या संध्या बेला (गोधूलि बेला) का समय सर्वोत्तम माना जाता है। इस दौरान शांत चित्त होकर श्री कृष्ण या राधा-कृष्ण के विग्रह (मूर्ति) या चित्र के सामने दीपक प्रज्वलित करें। ताजे पुष्प अर्पित करें और पूरी तल्लीनता के साथ इस भजन का गान करें। कीर्तन मंडली के साथ इसे ताल और मंजीरे के साथ गाने से वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो जाता है। आप इसे नियमित रूप से अपनी दैनिक पूजा के अंत में भी गा सकते हैं। हनुमान जी की स्तुति और शक्ति के लिए आप श्री हनुमान चालीसा का भी पाठ कर सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में भगवान श्री कृष्ण (बांके बिहारी, घनश्याम, कुंज बिहारी) हैं। सनातन परंपरा में भगवान श्री कृष्ण को प्रेम, आनंद, योगेश्वर और परब्रह्म का स्वरूप माना गया है। ब्रज संस्कृति और अष्टछाप के संतों (जैसे सूरदास, मीराबाई, नंददास आदि) ने हमेशा से भगवान के सगुण रूप की उपासना में ऐसे ही मधुर पदों की रचना की है। भगवान कृष्ण के साथ राधा रानी का स्मरण भी इस भक्ति रस को पूर्णता प्रदान करता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल और सुबोध ब्रज-हिंदी मिश्रित लोक शैली में रचित है। इसमें रूपक अलंकार और उपमाओं का सुंदर प्रयोग किया गया है जैसे "पलकें बिछाना" (अतिशयोक्तिपूर्ण अनन्य प्रेम का प्रतीक) और "मुरली की तान"। भाषा इतनी सरल है कि बच्चा-बच्चा इसे आसानी से समझ और गा सकता है, जो इसे जन-जन के बीच लोकप्रिय बनाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • प्रतीक्षा का धैर्य: ईश्वर की प्राप्ति के लिए भक्त को धैर्य और अनन्य प्रतीक्षा का भाव रखना चाहिए।
  • अहंकार का त्याग: प्रभु के स्वागत के लिए मन का अहंकार और द्वेष मिटाना आवश्यक है।
  • प्रेम ही सबसे बड़ी पूजा: भगवान को महंगे उपहारों की नहीं, बल्कि शुद्ध प्रेम और भाव की आवश्यकता होती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / भाव
पलकें बिछाना स्वागत के लिए मार्ग में आँखें बिछाना अतिशय प्रेम, सम्मान और उत्सुकता दिखाना
चरण पखारना चरणों को जल से धोना परम सेवा, सम्मान और शरणागति
कुंज बिहारी कुंजों में विहार करने वाले (कृष्ण) वृंदावन के श्री कृष्ण की लीला
भवसागर जन्म-मृत्यु का संसार रूपी समुद्र सांसारिक मोह-माया और बंधन

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"पलकें ही पलकें बिछायेंगे..." - भक्त कहता है कि हे प्रभु! जब आपके आने का सौभाग्य प्राप्त होगा, तो हम अपने मार्ग को अपनी पलकों से सजाएंगे।
"रूठेंगे तो मना लेंगे..." - भक्त और भगवान का रिश्ता इतना मधुर है कि यदि प्रभु रूठ भी जाएं, तो भक्त उन्हें अपने प्रेम से मना लेगा।
"मुरली की तान जब कानों में गूंजेगी..." - कृष्ण की बंसी की आवाज सुनते ही सारी सुध-बुध खो जाती है और आत्मा परमात्मा में लीन हो जाती है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ निम्नलिखित महामंत्र का स्मरण अत्यंत फलदायी माना जाता है:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय నమో नमः॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम पलके ही पलके बिछायेंगे जिस दिन श्याम प्यारे घर आयेंगे
आराध्य देव भगवान श्री कृष्ण (श्याम सुंदर, बांके बिहारी)
भाषा सरल हिंदी / ब्रजभाषा शैली
विषय एवं भाव भक्ति, प्रेम, मिलन की व्याकुलता, शरणागति
उपयुक्त अवसर जन्माष्टमी, सत्संग, एकादशी, संकीर्तन, संध्या आरती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन जगत के पालनहार भगवान श्री कृष्ण (श्याम सुंदर और बांके बिहारी) को समर्पित है।

इसे आप जन्माष्टमी, एकादशी, राधाष्टमी, या किसी भी पारिवारिक सत्संग, भजन संध्या और दैनिक पूजा के समय गा सकते हैं।

इसका दार्शनिक अर्थ भगवान के स्वागत के लिए अपनी समस्त इच्छाओं, अहंकार और इंद्रियों को उनके चरणों में समर्पित करना है।

हाँ, व्यक्तिगत साधना, मानसिक शांति और ध्यान के समय इसे अकेले गुनगुनाना अत्यंत आनंददायक और शांतिप्रद होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह पृष्ठ सनातन भक्ति परंपरा, श्री कृष्ण संकीर्तन और लोक भजनों के संकलन के अंतर्गत संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और भावपूर्ण भजन लिरिक्स व उसका आध्यात्मिक अर्थ उपलब्ध कराना है। सभी विवरण पारंपरिक स्रोतों और भक्त जनों के अनुभवों पर आधारित हैं।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन संकीर्तन परंपरा एवं ब्रज लोकगीत संग्रह
  • श्रीमद्भागवत महापुराण (भक्ति योग संदर्भ)
  • अष्टछाप के संत साहित्य एवं पद संग्रह

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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