कब ताक बुलाएगी मा (Kab Tak Bulaayegi Maa) - Punjabi Devi Bhajan VIKRAM CHADDA
माँ दुर्गा की अहेतुकी कृपा, करुणामयी दृष्टि और अपने भक्तों के प्रति माता के वात्सल्य को समर्पित यह पावन पंजाबी देवी भजन 'कब ताक बुलाएगी मा (Kab Tak Bulaayegi Maa)' गायक एवं संगीतकार विक्रम चड्डा की मधुर एवं भावपूर्ण आवाज में प्रस्तुत किया गया है। 'इक तेरा सहारा दातीये' (Ik Tera Sahara Daatiye) एलबम का यह सुरीला भजन भगवती जगदम्बा के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए एक व्याकुल भक्त की पुकार को व्यक्त करता है। जब सांसारिक प्रपंचों और दुखों से थककर जीव शेरावाली के चरणों में शरण पाता है, तो उसे अलौकिक शांति की प्राप्ति होती है। T-Series के बैनर तले जारी यह भजन न केवल पंजाबी संगीत शैली की मिठास समेटे हुए है, बल्कि इसमें माता के प्रति अनन्य प्रेम, विरह और समर्पण का अद्भुत भाव भी झलकता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण बोल, भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और गायन की परंपरा का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मखड़ा (स्थाई):
कब ताक बुलाएगी मा, कब ताक बुलाएगी,
दर अपने ओ शेरावाली, कब ताक बुलाएगी...
राहें निहार-निहार के थक गई अखियां मेरी,
सुनी कब ताक सुनाएगी मा, कब ताक बुलाएगी...
पहला अंतरा:
दुनिया के मेलों में भटका हूँ मैं इस तरह,
जैसे कोई राह भूला हो समंदर में बतर्क,
अब तो दरस दिखा दे ओ मेहरां वालिए,
झोली मेरी भर दे ओ वरदातां वालिए।
तेरी ही आस पे दिन-रात बिताऊँ मैं,
अपना बना ले मा, कब ताक बुलाएगी...
दूसरा अंतरा:
सुना है तेरे दर पे जो भी सवाली जाता,
खाली नहीं कोई भी दामन फिरा करता,
फिर क्यों मेरे हिस्से में अंधेरी रात है,
क्या मेरी भक्ति में कोई कमजोरी बात है?
आके गले से लगा ले ओ जगदम्बे भवानी,
अपनी सुनाएगी मा, कब ताक बुलाएगी...
समापन / विश्राम:
विक्रम चड्डा गाए तेरी महिमा अपरंपार,
कर दे कृपा दाती भवसागर से पार,
चरणों में तेरे मुझे अब तो बिठा ले मा,
कब ताक बुलाएगी मा, कब ताक बुलाएगी...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन एक भक्त और जगत जननी माँ के बीच के उस कोमल और आत्मीय संवाद का प्रतीक है, जहाँ भक्त अपनी अधीरता और माता के प्रति अगाध प्रेम को प्रकट करता है। 'कब ताक बुलाएगी मा' पंक्ति में छिपी जिज्ञासा वास्तव में भक्त की उस आंतरिक तड़प को दर्शाती है जो वह अपनी माता के दर्शन के लिए महसूस करता है।
भजन के भावार्थ में गायक यह दर्शाता है कि सांसारिक मोह-माया और दुखों के समंदर में भटकता हुआ मनुष्य जब पूरी तरह असहाय हो जाता है, तब उसे केवल माँ का दरबार ही एकमात्र सहारा नजर आता है। भक्त पूछता है कि हे शेरावाली! मेरे भाग्य की यह लंबी प्रतीक्षा कब समाप्त होगी? मेरे नयन तेरे मार्ग को जोतते-जोतते थक चुके हैं।
दूसरे अंतरे में एक मासूम सा उलाहना (शिकायत) भी है जो भक्त अपने आराध्य से करता है—"सुना है तेरे दर पे जो भी सवाली जाता, खाली नहीं कोई भी दामन फिरा करता..." यह सनातन धर्म की उस अटूट मान्यता को पुष्ट करता है कि माँ कभी अपने बच्चों को निराश नहीं करती। यदि विलंब हो रहा है, तो वह भक्त की परीक्षा या उसकी पात्रता को परिष्कृत करने का एक माध्यम हो सकता है। अंततः, शरणगति के भाव के साथ भक्त अपने अहंकार का त्याग कर माँ के चरणों में समर्पण कर देता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- देवी प्रपत्ति (शरणगति): यह भजन जीव को भगवती दुर्गा के चरणों में पूर्ण आत्मसमर्पण करने की प्रेरणा देता है।
- पंजाबी भक्ति संगीत शैली: लोक धुनों और आधुनिक संगीत का सुंदर सम्मिश्रण इसे हर आयु वर्ग के श्रोताओं के बीच लोकप्रिय बनाता है।
- विरह और प्रेम का भाव: माता से मिलने की उत्कंठा (विरह) और मिलने के बाद की शांति का सुंदर मनोवैज्ञानिक चित्रण।
- सार्वभौमिक अपील: किसी भी जाति, संप्रदाय या वर्ग का व्यक्ति इस भजन के माध्यम से अपनी आंतरिक पुकार को माता तक पहुँचा सकता है।
अधिक जानने के लिए आप हमारे अन्य लोकप्रिय देवी भजन संग्रह और श्री दुर्गा चालीसा के पावन पाठ का भी अध्ययन कर सकते हैं।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
देवी भजनों के श्रवण और गायन का आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व होता है। इस भजन को निम्नलिखित अवसरों पर पूरी श्रद्धा के साथ गाया या सुना जा सकता है:
नित्य पूजा के समय
प्रातःकाल या संध्याकाल में माता के सम्मुख दीपक प्रज्वलित करके इस भजन का मानसिक या मौखिक स्मरण करने से मन को असीम शांति मिलती है।
नवरात्र पर्व पर
चैत्र या शारदीय नवरात्र के नौ दिनों में माता की चौकी, जागरण या माता के कीर्तन के दौरान यह भजन वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना देता है।
माता के जागरण व सत्संग में
रात्रि जागरण के समय जब संध्या ढलने लगती है और माता के जयकारे गूंजते हैं, तब इस प्रकार के भावुक भजन भक्तों को रुला देने वाले और मंत्रमुग्ध करने वाले होते हैं।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की आराध्य देवी माँ दुर्गा (शेरावाली, जगदम्बा, मेहरां वाली) हैं, जो सनातन संस्कृति में शक्ति, ऊर्जा, करुणा और ब्रह्मांडीय चेतना का सर्वोच्च प्रतीक हैं। मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत वर्णित 'दुर्गा सप्तशती' में माता के विभिन्न स्वरूपों—महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती—का विस्तार से वर्णन मिलता है।
संगीतकार और गायक विक्रम चड्डा ने अपनी सुरीली आवाज से इस भजन को संतों और भक्तों की उस परंपरा से जोड़ा है, जो संगीत के माध्यम से ईश्वर प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। गीतकार एस. मुख्तियार और पं. नरेंद्र रोशन की कलम से निकले शब्द माँ और संतान के पवित्र रिश्ते की गहराई को जीवंत करते हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
एलबम 'इक तेरा सहारा दातीये' के माध्यम से T-Series द्वारा प्रस्तुत यह भजन पंजाबी भक्ति संगीत की उस धारा का हिस्सा है जिसने उत्तर भारत में देवी जागरण संस्कृति को घर-घर तक पहुँचाया। पंजाबी लोक संगीत की मिठास और शास्त्रीय सुगम संगीत की नजाकत का यह अनूठा संगम श्रोता को सीधे वैष्णो देवी या अन्य शक्तिपीठों की यात्रा का अनुभव कराता है।
रचनाकारों ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि शब्दों की सरलता आम आदमी के दिल को छू सके। संगीत संयोजन ऐसा है जो ढोलक, चिमटा और आधुनिक कीबोर्ड की धुनों के साथ एक समां बांध देता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन मुख्य रूप से सरल हिंदी और पंजाबी मिश्रित बोलचाल की लोक-भाषा (सुगम काव्यात्मक शैली) में रचा गया है। इसमें प्रयुक्त शब्द जैसे 'दातीये', 'मेहरां वालिए', 'वरदातां वालिए' पंजाबी संस्कृति की उस मिठास को दर्शाते हैं जो माँ के प्रति अपार आदर और अपनापन प्रकट करती है।
काव्य शैली में 'प्रश्नात्मक विरह' (Questioning Separation) का प्रयोग किया गया है जहाँ भक्त माता से प्रेमपूर्वक सवाल करता है। यह शैली श्रोता के हृदय को झकझोर देती है और उसे अपने भीतर झांकने के लिए प्रेरित करती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
अटूट धैर्य और विश्वास
भजन सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां या अंधेरी रातें आएं, ईश्वर पर से विश्वास नहीं उठना चाहिए। माँ अपने समय पर अवश्य सुनती है।
अहंकार का विसर्जन
जब मनुष्य अपनी योग्यताओं के अहंकार को त्यागकर एक बच्चे की तरह निरीह होकर माता को पुकारता है, तभी असली कृपा अवतरित होती है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| शेरावाली | शेर पर सवारी करने वाली माता | माँ दुर्गा का प्रसिद्ध स्वरूप |
| दातीये | दान देने वाली, दाता | भक्तों की झोली भरने वाली माता |
| मेहरां वालिए | कृपा करने वाली | दया और करुणा की सागर माँ |
| वरदातां वालिए | वरदान देने वाली | मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली |
| भवसागर | संसार रूपी सागर | जन्म-मरण का चक्र |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | कब ताक बुलाएगी मा (Kab Tak Bulaayegi Maa) |
|---|---|
| आराध्य देवी | माँ दुर्गा / शेरावाली |
| गायक एवं संगीत | विक्रम चड्डा |
| गीतकार | एस. मुख्तियार, पं. नरेंद्र रोशन |
| एलबम | इक तेरा सहारा दातीये (Ik Tera Sahara Daatiye) |
| संगीत लेबल | टी-सीरीज (T-Series) |
| भाषा | हिंदी / पंजाबी |
| मुख्य भाव | शरणागति, विरह और माता का वात्सल्य |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख पारंपरिक भक्ति साहित्य, पंजाबी संगीत संस्कृति और श्रोताओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक जानकारी और सुंदर भजन के बोल उपलब्ध कराना है।
स्रोत एवं संदर्भ
- • T-Series Devotional Audio Archives (Album: Ik Tera Sahara Daatiye)
- • पारंपरिक पंजाबी देवी भजन संकलन
- • सनातन देवी उपासना और लोक संगीत परंपरा
संबंधित भजन एवं लेख
श्री दुर्गा चालीसा पाठ
माँ दुर्गा के 40 छंदों का संपूर्ण पाठ और सरल हिंदी भावार्थ।
लोकप्रिय देवी भजन
माता रानी के अन्य प्रसिद्ध भेंट और भजनों का विशाल संग्रह।
नवरात्र पूजा विधान
माता की नौ दिनों की आराधना और घटस्थापना की संपूर्ण विधि।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें