Parvati Stotram

शेरावाली मैया बांटे खुशियों की सौगात (Sherawali Maiya Baante Khushiyon Ki Saugaat) - Mata Bhajan - Bhaktilok

55 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ शेरावाली अर्थात शेर पर सवार होकर भक्तों की रक्षा करने वाली माँ दुर्गा, जिन्हें शेरावाली मैया, शेरों वाली माता, अम्बे माँ, वैष्णो देवी, ज्वाला जी, चामुंडा और माँ काली जैसे अनेक पवित्र नामों से पुकारा जाता है, सनातन धर्म में शक्ति, करुणा और ममता की परम अधिष्ठात्री देवी मानी गई हैं। "शेरावाली मैया बांटे खुशियों की सौगात" एक अत्यंत ही मधुर, भक्ति रस से सराबोर और श्रद्धा से भरा हुआ माता का भजन है, जिसमें भक्त अपनी माँ के चरणों में पूर्ण समर्पण भाव से यह प्रार्थना करता है कि माँ उसके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशियों की सौगात बाँटती रहे। यह भजन माता के प्रति अनन्य प्रेम, पूर्ण शरणागति और अटूट विश्वास का जीवंत उदाहरण है। सनातन परंपरा में शक्ति उपासना का विशेष महत्व है, और नवरात्रि, दुर्गा पूजा, ज्योति कलश, माता के जागरण तथा विशेष रूप से घर-घर में होने वाले माता के भजनों में यह भजन अत्यंत लोकप्रिय है। इस भजन को गाते समय भक्त का हृदय माँ की ममता में डूब जाता है और भक्ति भाव से झूम उठता है। यह भजन मुख्य रूप से माता की स्तुति, उनकी महिमा और उनके आशीर्वाद की कामना पर केंद्रित है, जिसे गायक राहुल राना की भक्ति भरी आवाज़ में प्रस्तुत किया गया है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा (Mukhda):

शेरावाली मैया बांटे खुशियों की सौगात,
जय जय जय माँ शेरावाली,
जय जय जय माँ शेरावाली।

अंतरा 1:

जो भी भक्त शरण में आए,
माँ उसका दुखड़ा मिटाए,
भर दे झोली खुशियों से,
हर पल सुख की बरसात,
जय जय जय माँ शेरावाली।

अंतरा 2:

माँ के दरबार में जो आया,
खाली हाथ नहीं लौट पाया,
माँ की महिमा अपरंपार,
हर दिल में है माँ का वास,
जय जय जय माँ शेरावाली।

अंतरा 3:

शेर पे सवार होकर आए,
भक्तों के दुख सारे मिटाए,
माँ की जयकारा लगाओ,
खुशियों का थाल सजाओ,
जय जय जय माँ शेरावाली।

अंतरा 4:

माँ की कृपा से सब कुछ मिलता,
भक्त कभी नहीं रोता,
माँ के चरणों में जो शीश झुकाए,
उसके जीवन में सुख आए,
जय जय जय माँ शेरावाली।

अंतरा 5:

माँ बांटे खुशियों की सौगात,
हर घर में हो माँ की बरसात,
जय जयकारा माँ की हो,
हर भक्त का मन प्रसन्न हो,
जय जय जय माँ शेरावाली।

समापन (Closing):

जय जय जय माँ शेरावाली,
जय जय जय माँ शेरावाली।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य भाव यह है कि माँ शेरावाली अपने भक्तों को निराश नहीं लौटातीं। जो भी भक्त सच्चे मन से माँ की शरण में आता है, माँ उसके सारे दुख-दर्द हर लेती हैं और उसके जीवन में खुशियों की सौगात बाँट देती हैं। "खुशियों की सौगात" शब्द का अर्थ है - सुख, शांति, समृद्धि, आरोग्य, संतान सुख और मान-सम्मान का उपहार। माँ अपने भक्तों को यह सब प्रेमपूर्वक प्रदान करती हैं, जैसे एक माँ अपने बच्चे को बिना किसी स्वार्थ के सब कुछ देती है।

भजन के पहले अंतरे में भक्त कहता है कि जो भी भक्त माँ की शरण में आता है, माँ उसका दुखड़ा मिटा देती हैं और उसकी झोली खुशियों से भर देती हैं। यह माँ की असीम करुणा और ममता को दर्शाता है। दूसरे अंतरे में भक्त माँ के दरबार की महिमा गाता है कि माँ के दरबार से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता। माँ की महिमा अपरंपार है और वह हर दिल में वास करती हैं। तीसरे अंतरे में माँ के शेर पर सवार होने का वर्णन है, जो यह दर्शाता है कि माँ शक्ति की प्रतीक हैं और वह अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहती हैं।

चौथे अंतरे में भक्त कहता है कि माँ की कृपा से सब कुछ प्राप्त होता है और जो भक्त माँ के चरणों में शीश झुकाता है, उसके जीवन में सुख की वर्षा होती है। पाँचवें अंतरे में भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि वह हर घर में खुशियों की बरसात करें और हर भक्त का मन प्रसन्न रहे। इस प्रकार यह भजन पूर्णतः समर्पण, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। भजन का मूल संदेश यह है कि माँ शेरावाली की शरण में आने वाला कभी निराश नहीं होता, क्योंकि माँ स्वयं अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उन्हें हर प्रकार के सुख-सुविधाएँ प्रदान करती हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन मुख्य रूप से माँ दुर्गा अर्थात शेरावाली मैया को समर्पित है। शेरावाली मैया को शक्ति, साहस, करुणा और ममता की देवी माना जाता है। सनातन धर्म में माँ दुर्गा की उपासना का विशेष महत्व है, विशेषकर नवरात्रि के पावन पर्व पर। यह भजन भक्तों को माँ के प्रति पूर्ण समर्पण और श्रद्धा का भाव सिखाता है। भजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें माँ की महिमा का सरल और मधुर शब्दों में वर्णन किया गया है, जिसे कोई भी भक्त सरलता से गा सकता है।

इस भजन को सुनने और गाने से भक्त के मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, भय और चिंता दूर होती है, और आत्मविश्वास बढ़ता है। माना जाता है कि जो भक्त श्रद्धा भाव से इस भजन का गायन करता है, माँ शेरावाली उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, दुर्गा पूजा, माता के जागरण, ज्योति कलश, और घर-घर में होने वाले सामूहिक भजन कार्यक्रमों में गाया जाता है। इसके अतिरिक्त, किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में, गृह प्रवेश, विवाह, और मंगल कार्यों में भी इस भजन का गायन किया जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का गायन किसी भी शुभ समय पर किया जा सकता है, लेकिन विशेष रूप से प्रातःकाल और सायंकाल के समय इसका गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में, विशेषकर चैत्र और शारदीय नवरात्रि में, इस भजन का गायन विशेष महत्व रखता है। मंगलवार और शुक्रवार का दिन माँ दुर्गा की उपासना के लिए विशेष माना जाता है, इसलिए इन दिनों में इस भजन का गायन अत्यंत शुभ फलदायी होता है।

भजन गाने की विधि अत्यंत सरल है। सर्वप्रथम स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। माँ शेरावाली की मूर्ति या चित्र के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें। माँ को लाल फूल, चुनरी, और प्रसाद अर्पित करें। इसके पश्चात हाथ जोड़कर माँ का ध्यान करें और श्रद्धा भाव से इस भजन का गायन प्रारंभ करें। भजन गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव रखें। भजन के समापन पर माँ की आरती करें और प्रसाद वितरित करें। यदि संभव हो तो इस भजन का गायन ढोलक, मंजीरा, और घंटे-घड़ियाल की ध्वनि के साथ करें, जिससे भक्ति भाव और भी गहरा हो जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

शेरावाली मैया माँ दुर्गा का ही एक रूप हैं, जो शेर पर सवार होकर भक्तों की रक्षा करती हैं। उन्हें शेरों वाली माता, अम्बे माँ, वैष्णो देवी, ज्वाला जी, और चामुंडा जैसे अनेक नामों से पुकारा जाता है। सनातन धर्म में माँ दुर्गा को शक्ति, करुणा और ममता की देवी माना जाता है।

यह भजन मुख्य रूप से नवरात्रि, दुर्गा पूजा, माता के जागरण, ज्योति कलश, और घर-घर में होने वाले सामूहिक भजन कार्यक्रमों में गाया जाता है। इसके अतिरिक्त, मंगलवार और शुक्रवार को भी इस भजन का गायन विशेष शुभ माना जाता है।

माना जाता है कि श्रद्धा भाव से इस भजन का गायन करने से माँ शेरावाली प्रसन्न होती हैं और भक्त की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं। इस भजन को सुनने और गाने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, भय और चिंता दूर होती है, और आत्मविश्वास बढ़ता है।

भजन का गायन करते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव रखना चाहिए। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें, माँ के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें, और हाथ जोड़कर भजन का गायन करें। भजन के समापन पर माँ की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

इस भजन को गायक राहुल राना ने अपनी मधुर आवाज़ में प्रस्तुत किया है। भजन का संगीत भी राहुल राना द्वारा ही तैयार किया गया है। भजन के बोल कुलदीप निर्मल टीटू द्वारा लिखे गए हैं। इस भजन का निर्देशन सुख सागर ने किया है और इसे युकी लेबल पर प्रस्तुत किया गया है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक (Bhaktilok.in) पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस भजन का मूल पाठ, भावार्थ, और महत्व प्रामाणिक स्रोतों एवं शास्त्रीय परंपरा के आधार पर संकलित किया गया है। भजन के बोल, संगीत, और गायन की जानकारी संबंधित कलाकारों एवं लेबल द्वारा प्रकाशित सामग्री पर आधारित है। हमारा उद्देश्य भक्तों तक माँ शेरावाली की महिमा और इस पावन भजन का सही भावार्थ पहुँचाना है।

इस भजन का गायन, श्रवण और मनन भक्तों के लिए आध्यात्मिक शांति, मानसिक स्थिरता और माँ की कृपा प्राप्त करने का सरल साधन है। यह भजन सनातन परंपरा में शक्ति उपासना की समृद्ध विरासत का एक सुंदर उदाहरण है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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