लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जायेगा लिरिक्स भजन - एक परिचय
भक्ति की पराकाष्ठा और पूर्ण शरणागति का जीवंत दर्शन यदि किसी माध्यम से सहज ही हो जाता है, तो वे हैं पावन श्यामाजी और बांके बिहारी को समर्पित भावपूर्ण भजन। भगवत सुथार द्वारा स्वरबद्ध और प्रचारित यह लोकप्रिय श्याम भजन "लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जायेगा" (Lagan Tumse Laga Baithe Lyrics in Hindi) भक्तों के हृदय में भगवान के प्रति अगाध प्रेम, अटूट विश्वास और दुनिया की चिंताओं से मुक्त होकर केवल श्यामसुंदर के चरणों में समर्पित हो जाने का अनूठा भाव जागृत करता है।
भक्ति मार्ग में साधक को अनेक प्रकार की सामाजिक बाधाओं, आलोचनाओं और लोक-लाज का सामना करना पड़ता है। परंतु जब जीव का मन भगवान के चरणों में रम जाता है, तब उसे संसार के भय या मान-अपमान की परवाह नहीं रहती। यह भजन इसी सर्वोच्च दार्शनिक स्थिति का सुंदर काव्यात्मक रूप है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व कासांगोपांग अध्ययन करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मूल मुखड़ा:
लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा
तुम्हें अपना बना बैठे जो होगा देखा जाएगा!
कभी दुनियाँ से डरते थे, छुप-छुप याद करते थे,
लो अब पर्दा उठा बैठे जो होगा देखा जाएगा!
लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा...
प्रथम अंतराल:
कभी यह ख़याल था दुनियाँ हमें बदनाम कर देगी,
शर्म अब बेच खा बैठे जो होगा देखा जाएगा!
लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा
तुम्हें अपना बना बैठे जो होगा देखा जाएगा!
द्वितीय अंतराल:
दीवाने बन गए तेरे तो फिर दुनियाँ से क्या मतलब,
तेरी गलियों में आ बैठे जो होगा देखा जाएगा!
लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा
तुम्हें अपना बना बैठे जो होगा देखा जाएगा!
समापन पंक्तियाँ:
लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा,
तुम्हें अपना बना बैठे जो होगा देखा जाएगा!
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि एक भक्त के उस आंतरिक परिवर्तन की कहानी है जहाँ उसका अहंकार और लोक-लाज का भय समाप्त हो जाता है। आइए इसके विभिन्न चरणों के गहरे आध्यात्मिक भाव को समझें:
मुखड़ा और लोक-भय से मुक्ति
भक्त भगवान श्री श्याम से कहता है कि हे प्रभु! अब हमने अपनी प्रीति (लगन) आपसे जोड़ ली है। अब भविष्य में चाहे जो भी परिणाम हो, हमें उसका कोई भय नहीं है। आरंभ में साधक संसार के बंधनों, समाज की नजरों और परिवार के डर से ईश्वर का स्मरण छुप-छुप कर करता है—अर्थात अपने अंतःकरण में चोरी-छिपे भक्ति करता है। परंतु जब प्रेम प्रगाढ़ हो जाता है, तब सारे पर्दे हट जाते हैं और भक्त खुलकर दुनिया के सामने अपने आराध्य को स्वीकार कर लेता है। यही स्थिति 'पर्दा उठा बैठे' के माध्यम से व्यक्त की गई है।
बदनामी का भय और सच्ची दीवानगी
सांसारिक लोग हमेशा इस बात से डरते हैं कि भगवान का भजन करने या साधुओं की संगति करने से समाज उन्हें बदनाम कर देगा। कवि कहता है कि जब हमने अपनी सारी प्रतिष्ठा और लोक-लाज (शर्म) को भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया है, तो अब बदनामी का डर कैसा? जब मनुष्य श्याम रंग में रंग जाता है, तो उसे दुनिया की किसी भी बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। वह भगवान की गलियों (चरणों) में आकर स्थाई रूप से बैठ जाता है, जहाँ केवल प्रेम और आनंद का साम्राज्य है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- अनन्य भक्ति का प्रतीक: यह भजन मीराबाई और सूरदास जैसी प्राचीन संत परंपरा के प्रेम-मार्गी भक्ति सिद्धांत का आधुनिक अभिव्यक्ति रूप है।
- शरणागति का भाव: इसमें जीव द्वारा ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण (आत्म-निवदन) का संदेश दिया गया है।
- भयमुक्त जीवन: ईश्वर से जुड़ने के बाद सांसारिक भय स्वतः समाप्त हो जाते हैं, यह इस भजन का मुख्य मनोवैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक संदेश है।
- लोकप्रियता: भगवत सुथार की मधुर वाणी में यह भजन खाटूश्याम जी के मेलों, संकीर्तन सभाओं और जागरणों में विशेष रूप से गाया जाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस प्रकार के भावपूर्ण श्याम भजनों को सुनने या गाने के लिए कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं होती, तथापि इन्हें करने के कुछ विशेष अवसर होते हैं:
- संध्याकालीन वंदना: संध्या के समय दैनिक पूजा-आरती के पश्चात मन को शांत करने के लिए इसे सुना जा सकता है।
- खाटू श्याम संकीर्तन: एकादशी, द्वादशी या फाल्गुन मेले के अवसरों पर होने वाले जागरणों और चौकी में यह भजन समा बांध देता है।
- सांसारिक तनाव के समय: जब व्यक्ति जीवन की परेशानियों से घिर जाए, तब इस भजन का स्मरण मन में असीम संबल प्रदान करता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से कलियुग के अवतार माने जाने वाले श्री खाटूश्यामजी (भगवान श्री कृष्ण के बर्बरीक रूप) को समर्पित है। श्याम बाबा के दरबार में आने वाला हर भक्त अपनी सारी चिंताएं और अहंकार छोड़कर केवल उनके दर्शन की लालसा रखता है। भगवत सुथार जैसे प्रतिष्ठित लोक कलाकारों ने अपनी गायकी से इस परंपरा को घर-घर तक पहुँचाया है। इसी प्रकार के अन्य लोकप्रिय भजनों के लिए आप श्री खाटू श्याम भजन संग्रह का अवलोकन कर सकते हैं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | सांकेतिक प्रसंग |
|---|---|---|
| लगन | प्रेम, निष्ठा, धुन | ईश्वर के प्रति अटूट आकर्षण |
| पर्दा उठाना | सच्चाई को सबके सामने लाना | भक्ति को अब छिपाना नहीं, खुलकर स्वीकारना |
| शर्म बेच खाना | लोक-लाज या झिझक का त्याग करना | समाज क्या कहेगा, इसकी परवाह न करना |
| दीवाने | प्रेमी, मस्तमौला भक्त | भगवान के प्रेम में सुधि-बुधि खो देने वाला |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा..."
इस पहली पंक्ति में भक्त का दृढ़ निश्चय झलकता है। उसने अपने जीवन की डोर भगवान के हाथों में सौंप दी है। अब परिणाम की चिंता उसके लिए गौण हो गई है।
"कभी दुनियाँ से डरते थे छुप छुप याद करते थे..."
यह आध्यात्मिक यात्रा की प्रारंभिक अवस्था है जहाँ साधक समाज के व्यंग्यबाणों से डरता है। लेकिन जैसे-जैसे उसका प्रेम प्रगाढ़ होता है, वह हर प्रकार के भय से मुक्त हो जाता है।
"तेरी गलियों में आ बैठे जो होगा देखा जाएगा..."
भगवान की शरण में आने के बाद भक्त को और किसी आश्रय की आवश्यकता नहीं रहती। यह पूर्ण शरणागति का सर्वोच्च बिंदु है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जायेगा (Lagan Tumse Laga Baithe) |
|---|---|
| आराध्य देव | श्री खाटू श्याम बाबा (श्री कृष्ण) |
| गायक / कलाकार | भगवत सुथार (Bhagwat Suthar) |
| भाषा | हिंदी / राजस्थानी मिश्रित |
| भक्ति का भाव | अनन्य प्रेम, शरणागति और निर्भीकता |
| प्लेटफॉर्म | भक्तलोक (Bhaktilok.in) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: "लगन तुमसे लगा बैठे" भजन के मुख्य गायक कौन हैं?
उत्तर: यह भजन प्रसिद्ध भजन गायक भगवत सुथार जी द्वारा बहुत ही सुंदर ढंग से गाया गया है, जिसे देशभर में पसंद किया जाता है।
प्रश्न 2: यह भजन किस देवी-देवता को समर्पित है?
उत्तर: यह भजन मुख्य रूप से कलियुग के हारे का सहारा श्री खाटूश्याम जी (श्री कृष्ण के रूप) को समर्पित है।
प्रश्न 3: इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?
उत्तर: इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम रखना और समाज या दुनिया के भय से मुक्त होकर पूर्ण शरणागति अपनाना है।
प्रश्न 4: क्या इस भजन को घर पर अकेले गाया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, इसे आप अपने पूजा घर में या किसी भी शांत स्थान पर मानसिक शांति और भक्ति भाव जगाने के लिए गा सकते हैं।
प्रश्न 5: ऐसे अन्य लोकप्रिय श्याम भजन कहाँ मिलेंगे?
उत्तर: आप हमारे पोर्टल भक्तलोक (Bhaktilok.in) पर जाकर विभिन्न देवी-देवताओं के लिरिक्स और भजन पढ़ सकते हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख पारंपरिक धार्मिक साहित्य, लोक संगीत परंपरा और भक्तों के अनुभवों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध भजन लिरिक्स और उसका आध्यात्मिक मर्म प्रदान करना है। यदि आपके पास इस भजन से संबंधित कोई अन्य सुझाव या प्रसंग है, तो आप हमें संपर्क कर सकते हैं।
स्रोत एवं संदर्भ
- पारंपरिक राजस्थानी एवं श्याम संकीर्तन लोकगीत परंपरा
- भगवत सुथार जी की भजन संध्या प्रस्तुतियां
- भक्ति साहित्य एवं श्रीमद्भागवत कथा आधारित शरणागति दर्शन
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