Shyam Bhajan

क्यों रूठा मेरा श्याम लिरिक्स भजन ( Kyu Rootha Mera Shyam Lyrics in Hindi ) - Sad Shyam Bhajan Sukhjeet Singh Toni - Bhaktilok

73 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तुत भजन "क्यों रूठा मेरा श्याम" (Kyu Rootha Mera Shyam) भगवान श्री खाटू श्याम जी के प्रति अनन्य भक्ति, विरह वेदना और पूर्ण समर्पण का एक अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण संकीर्तन है। यह भजन सुखजीत सिंह टोनी जी द्वारा गाया गया एक प्रसिद्ध 'सैड श्याम भजन' (Sad Shyam Bhajan) है, जो भक्त के हृदय की व्याकुलता और करुणा को दर्शाता है। जब जीवन में चारों ओर से निराशा घेर लेती है और संसार से केवल उपेक्षा और रुसवाई मिलती है, तब भक्त अपने आराध्य श्री श्याम सुंदर के चरणों में शरण लेता है। इस भजन में विरह (separation) और विनय (supplication) का अद्भुत सम्मिश्रण है, जो श्रोताओं के हृदय में अश्रुधारा प्रवाहित कर देता है। खाटू नरेश, जिन्हें 'हारे का सहारा' कहा जाता है, उनके प्रति यह पुकार केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक आर्त भक्त के अंतर्मन का क्रंदन है जो अपने प्रभु को रिझाने और उनके रूठने का कारण जानने के लिए व्याकुल है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

श्याम तेरे मैं दर पे खड़ा हूँ, दर्शन को तेरे आया हूँ।
चरणों में मैं तेरे अर्पण, खाली झोली लाया हूँ।
दर्शन को तेरे आया हूँ।

कहाँ गए संग जो बिताये दिन,
कैसे कोई जिए श्याम तेरे बिन।
श्याम तुझे ढूंढू मैं कहाँ,
तेरे बिना सूना है जहां।
कौन भला दुनिया में तेरे बिना जी सके,
कोई कह दे क्यों रूठा मेरा श्याम,
आखिर क्यों रूठा मेरा श्याम।

सूरज की किरणों से, पानी के झरनों से,
भी है ज़्यादा सुन्दर देखो देखो मेरा श्याम।
पीपल की छइयां से, ठंडी पुरवैया से,
भी है ज़्यादा शीतल देखो देखो मेरा श्याम।
ना भूल जाना लौट के आना,
कौन भला दुनिया में तेरे बिना जी सके,
कोई कह दे क्यों रूठा मेरा श्याम,
आखिर क्यों रूठा मेरा श्याम।

दर की ठोकर खाई, दुनिया ने दी रुस्वाई,
फिर भी ना ठहरा मैं तो पहुंचा तेरे द्वार।
सच ही तो कहता आया, झूठ मैं तो सहता आया,
अब तो लगा दे प्रभु नैया मेरी पार।
हारे का सहारा तू, सबसे है मुझे प्यारा तू,
कौन भला दुनिया में तेरे बिना जी सके,
कोई कह दे क्यों रूठा मेरा श्याम,
आखिर क्यों रूठा मेरा श्याम।

आँखों से ना बोले तू, होंठों से न बोले तू,
मन की मेरी बातों को तू मन से ही तोल ले तू।
शरण में आया हूँ, आसूं बहाया हूँ,
अब तो दया कर मेरे बाबा श्याम,
कोई कह दे क्यों रूठा मेरा श्याम,
आखिर क्यों रूठा मेरा श्याम।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस मर्मस्पर्शी भजन का मुख्य भाव 'विरह भक्ति' और 'शरणगति' है। भक्त अपने आराध्य श्री खाटू श्याम जी के मंदिर के द्वार पर खड़ा होकर अत्यंत दीन भाव से प्रार्थना कर रहा है। वह कहता है कि हे श्याम! मैं संसार की समस्त आशाओं को छोड़कर केवल आपके दर्शन की अभिलाषा लेकर आपके पावन दर पर आया हूँ। मेरे पास आपको अर्पित करने के लिए कोई बहुमूल्य वस्तु नहीं है, मैं तो अपनी खाली झोली और अश्रुपूरित नेत्र लेकर आपके चरणों में स्वयं को समर्पित करने आया हूँ।

भजन के अगले भाग में भक्त बीते दिनों को याद करता है जब उसे प्रभु की कृपा का प्रत्यक्ष अनुभव होता था। वह व्याकुल होकर पूछता है कि हे प्रभु! वे दिन कहाँ चले गए जब आप मेरे अत्यंत निकट थे? आपके बिना मेरा यह जीवन और संपूर्ण संसार सूना हो गया है। भक्त की यह व्याकुलता उसे प्रकृति के सौंदर्य में भी केवल श्याम के दर्शन कराती है। वह कहता है कि उसका श्याम सूरज की किरणों और झरनों से भी अधिक सुंदर है, तथा पीपल की शीतल छाया और ठंडी हवाओं से भी अधिक शांति प्रदान करने वाला है।

संसार की निष्ठुरता का वर्णन करते हुए भक्त कहता है कि उसने हर जगह ठोकरें खाई हैं और अपनों से केवल अपमान और रुसवाई ही प्राप्त की है। लेकिन इन सब दुखों के बाद भी उसका विश्वास नहीं डगमगाया और वह सीधे अपने श्याम के द्वार पर आ गया। वह प्रभु से अपनी जीवन-नैया को पार लगाने की गुहार लगाता है क्योंकि वह जानता है कि संसार में केवल श्याम ही 'हारे का सहारा' हैं। अंत में, भक्त प्रभु की मौनता से दुखी होकर कहता है कि यदि आप मुख से कुछ नहीं बोल रहे हैं, तो कम से कम मेरे मन की पीड़ा को अपने अंतर्मन से समझ लीजिए और मुझ पर अपनी असीम दया बरसाइए।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि इसके कई आध्यात्मिक आयाम हैं जो इसे विशेष बनाते हैं:

  • करुण रस और विरह भाव: इस भजन में शास्त्रीय भक्ति मार्ग के 'विरह भाव' को दर्शाया गया है, जहाँ भक्त भगवान से दूर होने की पीड़ा को सहन नहीं कर पाता।
  • पूर्ण आत्मसमर्पण (शरणागति): भक्त अपनी 'खाली झोली' और 'दर की ठोकर' का उल्लेख कर यह स्पष्ट करता है कि सांसारिक सहारे झूठे हैं और केवल ईश्वर की शरण ही अंतिम सत्य है।
  • हारे का सहारा: यह भजन श्री खाटू श्याम जी के सुप्रसिद्ध स्वरूप 'हारे का सहारा' की महिमा को जीवंत करता है, जो निराश और पराजित मनुष्यों को संबल प्रदान करते हैं।
  • प्रकृति में ईश्वर का दर्शन: भजन में सूरज की किरणों, पानी के झरनों और ठंडी पुरवैया के माध्यम से भगवान के विराट और अत्यंत सौम्य स्वरूप की तुलना की गई है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस विशिष्ट भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि अत्यंत फलदायी मानी जाती है:

  • संध्या काल की प्रार्थना: दिनभर की भागदौड़ और मानसिक तनाव के बाद, शाम के समय शांत वातावरण में इस भजन को सुनने या गाने से मन को असीम शांति मिलती है।
  • एकादशी व्रत के अवसर पर: खाटू श्याम जी की पूजा में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन श्री श्याम मंदिर या घर के मंदिर में ज्योत जलाकर इस भजन का संकीर्तन करना चाहिए।
  • मानसिक अशांति के समय: जब व्यक्ति स्वयं को अकेला, निराश या पराजित महसूस करे, तब इस भजन का श्रवण करने से आंतरिक शक्ति और ईश्वर पर विश्वास पुनः जाग्रत होता है।
  • गायन की विधि: इसे गाते समय वाद्य यंत्रों की ध्वनि को धीमा और सुरीला रखना चाहिए ताकि भजन का करुण और शांत रस पूरी तरह से अनुभूत हो सके।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन महाभारत कालीन महान योद्धा बर्बरीक, जिन्हें कलयुग में स्वयं भगवान श्री कृष्ण के वरदान स्वरूप श्री खाटू श्याम जी के रूप में पूजा जाता है, को समर्पित है। बर्बरीक ने धर्म की रक्षा के लिए अपने शीश का दान दे दिया था, जिससे प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने उन्हें अपना नाम 'श्याम' दिया और वरदान दिया कि कलयुग में जो भी भक्त सच्चे मन से और हारकर इनके द्वार पर आएगा, उसकी झोली कभी खाली नहीं रहेगी। इस भजन के गायक सुखजीत सिंह टोनी जी ने अपनी सुमधुर और भावुक आवाज से इस भजन को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन आधुनिक श्याम भजनों की श्रेणी में आता है, जो विशेष रूप से उन भक्तों के अनुभवों पर आधारित है जो जीवन के कठिन दौर से गुजर रहे होते हैं। सुखजीत सिंह टोनी जी द्वारा रचित और गाए गए इस भजन की पृष्ठभूमि खाटू धाम की पावन धरा और वहाँ आने वाले लाखों भक्तों की आस्था से जुड़ी है। जब कोई भक्त अपनी व्यक्तिगत समस्याओं, पारिवारिक संकटों या सामाजिक उपेक्षा से टूट जाता है, तो वह खाटू नरेश के दरबार में जाकर इसी प्रकार की आर्त पुकार लगाता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें राजस्थानी और ब्रजभाषा के पुट का सुंदर प्रभाव दिखाई देता है। इसकी काव्य शैली अत्यंत प्रवाहमयी और गीतात्मक है। इसमें प्रयुक्त उपमाएं (जैसे सूरज की किरणें, पीपल की छइयां) अत्यंत सजीव हैं जो श्रोता के मन में एक सुंदर दृश्य बिंब (visual imagery) का निर्माण करती हैं। अंतरा और मुखड़े का तालमेल ऐसा है कि साधारण से साधारण व्यक्ति भी इसे आसानी से गा सकता है और इसके भावों से जुड़ सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पाठ सिखाता है:

  • संसार की नश्वरता: संसार के लोग केवल सुख के साथी हैं; दुख में केवल परमात्मा ही सच्चा सहारा बनते हैं।
  • धैर्य और विश्वास: चाहे कितनी भी रुसवाई या ठोकरें मिलें, भक्त को अपने आराध्य के प्रति विश्वास कभी नहीं खोना चाहिए।
  • सत्य की राह पर चलना: "सच ही तो कहता आया, झूठ मैं तो सहता आया" - यह पंक्ति दर्शाती है कि सत्य के मार्ग पर चलने वालों को कठिनाइयां अवश्य आती हैं, परंतु अंत में विजय और प्रभु की कृपा उन्हीं को मिलती है।
  • अहंकार का त्याग: अपनी खाली झोली को स्वीकार करना इस बात का प्रतीक है कि हम भगवान के सामने अपने अहंकार को शून्य कर चुके हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
अर्पण पूरी तरह से सौंप देना / समर्पण भक्त द्वारा अपनी आत्मा और कर्मों को भगवान के चरणों में सौंपना।
रुसवाई अपमान / बदनामी सांसारिक लोगों द्वारा दी जाने वाली उपेक्षा और कटु व्यवहार।
पुरवैया पूर्व दिशा से चलने वाली ठंडी हवा भगवान की कृपा से मिलने वाली शीतलता और मानसिक शांति।
नैया पार लगाना भवसागर से पार उतारना जीवन के संकटों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष या शांति प्रदान करना।
हारे का सहारा पराजित व्यक्ति का संबल श्री खाटू श्याम जी का वह स्वरूप जो निराश लोगों की रक्षा करता है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. "श्याम तेरे मैं दर पे खड़ा हूँ, दर्शन को तेरे आया हूँ..."
हे श्याम सुंदर! मैं आपके मंदिर की चौखट पर आकर खड़ा हो गया हूँ। मेरी एकमात्र इच्छा आपके दिव्य दर्शन पाने की है। मैं अपने साथ कोई धन-दौलत नहीं लाया, बल्कि अपनी खाली झोली और अपना सर्वस्व आपके चरणों में अर्पित करने आया हूँ।

2. "कहाँ गए संग जो बिताये दिन, कैसे कोई जिए श्याम तेरे बिन..."
भक्त पुराने समय को याद करता है जब उसे प्रभु की निकटता का अनुभव होता था। वह कहता है कि आपके बिना मेरा जीवन अर्थहीन है। इस विशाल संसार में आपके बिना मैं अत्यंत अकेला और असहाय महसूस कर रहा हूँ।

3. "सूरज की किरणों से, पानी के झरनों से, भी है ज़्यादा सुन्दर देखो देखो मेरा श्याम..."
प्रकृति की सबसे सुंदर चीजें जैसे सूर्य की स्वर्णिम किरणें और पहाड़ों से गिरते पानी के झरने भी मेरे श्याम के अलौकिक सौंदर्य के सामने फीके हैं। मेरा श्याम अत्यंत मनमोहक और परम सुंदर है।

4. "दर की ठोकर खाई, दुनिया ने दी रुस्वाई, फिर भी ना ठहरा मैं तो पहुंचा तेरे द्वार..."
मैंने इस मतलबी दुनिया में हर जगह ठोकरें खाई हैं और लोगों से केवल अपमान ही पाया है। लेकिन मैं निराश होकर कहीं और नहीं गया, बल्कि सीधे आपके सुरक्षित और कृपालु द्वार पर आ गया हूँ।

5. "आँखों से ना बोले तू, होंठों से न बोले तू, मन की मेरी बातों को तू मन से ही तोल ले तू..."
यदि आप मुझसे नाराज हैं और अपनी आँखों या होठों से कुछ नहीं कह रहे हैं, तो भी आप अंतर्यामी हैं। आप मेरे हृदय की पीड़ा को बिना कहे ही अपने मन से समझ लीजिए और मुझ पर अपनी दया दृष्टि डालिए।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

श्री खाटू श्याम जी की आराधना करते समय इस भजन के साथ निम्नलिखित मंत्रों का जाप करने से भक्ति भाव और अधिक प्रगाढ़ होता है:

"ॐ श्री श्याम देवाय नमः"

"हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा।"

इसके अतिरिक्त, महाभारत में वर्णित बर्बरीक के इस श्लोक का स्मरण भी अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

"शीश दानी महायोध्दा, कलयुगे च पूजितः।
सर्व दुःख हरो देवो, श्याम देवो नमोस्तुते॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम क्यों रूठा मेरा श्याम (Kyu Rootha Mera Shyam)
आराध्य देव श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक / श्री कृष्ण स्वरूप)
गायक / संगीतकार सुखजीत सिंह टोनी (Sukhjeet Singh Toni)
भजन की भाषा सरल हिंदी (खड़ी बोली)
मुख्य रस / भाव करुण रस, विरह भाव, शरणागति (Surrender)
उपयुक्त अवसर श्याम संध्या, एकादशी, दैनिक संध्या आरती, मानसिक शांति हेतु
मुख्य संदेश संसार की नश्वरता और ईश्वर की शरण में ही सच्चा सुख है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण भजन के मूल गायक सुखजीत सिंह टोनी (Sukhjeet Singh Toni) हैं। उनकी दर्दभरी आवाज ने इस भजन को श्याम भक्तों के बीच बहुत प्रसिद्ध बना दिया है।

यह भजन हमें सिखाता है कि सांसारिक रिश्ते और सहारे अस्थायी हैं। जब मनुष्य चारों ओर से हार जाता है, तब भगवान श्री खाटू श्याम जी ही उसके सच्चे रक्षक और सहारे बनते हैं। यह पूर्ण शरणागति का संदेश देता है।

महाभारत काल में बर्बरीक (श्याम जी) ने प्रतिज्ञा की थी कि वे युद्ध में उसी पक्ष से लड़ेंगे जो हार रहा होगा। भगवान श्री कृष्ण ने उनके इस त्याग और भावना से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में वे 'हारे का सहारा' नाम से पूजे जाएंगे।

इस भजन को संध्या काल में या रात्रि के समय शांत वातावरण में सुनना अत्यंत फलदायी होता है। इसके अतिरिक्त, जब भी मन अशांत या दुखी हो, तब इसे सुनने से मानसिक शांति और संबल प्राप्त होता है।

हाँ, श्री खाटू श्याम जी के भक्त एकादशी के दिन विशेष उपवास रखते हैं और कीर्तन करते हैं। इस पावन अवसर पर इस भजन का श्रवण और गायन भक्तों के हृदय में विशेष भक्ति भाव जाग्रत करता है।

ये उपमाएं भगवान श्री श्याम के अत्यंत सौम्य, कृपालु और शांति प्रदाता स्वरूप को दर्शाती हैं। जिस प्रकार भीषण गर्मी में पीपल की छाया और ठंडी हवा राहत देती है, उसी प्रकार जीवन के दुखों में श्याम की कृपा शीतलता प्रदान करती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के बोल और इसकी व्याख्या को प्रामाणिक स्रोतों, पारंपरिक श्याम संकीर्तन पद्धतियों और भक्तों के अनुभवों के आधार पर संकलित किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को भजन के केवल शब्द ही नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे गहरे आध्यात्मिक और दार्शनिक भावों से अवगत कराना है ताकि उनकी पूजा और साधना अधिक फलदायी हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्री खाटू श्याम मंदिर महात्म्य एवं पौराणिक कथाएं।
  • महाभारत - बर्बरीक प्रसंग और श्री कृष्ण वरदान।
  • पारंपरिक श्याम भजन संग्रह एवं सुखजीत सिंह टोनी जी के आधिकारिक संकीर्तन।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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