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राम सिया राम (Ram Siya Ram) - Mangal Bhavan Amangal Hari Shri Ram Bhajan - Bhaktilok

83 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह पावन भजन "राम सिया राम (Ram Siya Ram) - Mangal Bhavan Amangal Hari Shri Ram Bhajan" मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पवित्र चरित्र, करुणा और अलौकिक चेतना का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित अमर महाग्रंथ रामचरितमानस के बालकांड से उद्गृहीत यह चौपाई सनातन संस्कृति में केवल एक भजन मात्र नहीं है, बल्कि यह भौतिक एवं आध्यात्मिक संतापों का नाश करने वाला महामंत्र है। जब साधक शुद्ध अंतःकरण से इस भजन का गान या श्रवण करता है, तो उसका मन समस्त सांसारिक प्रपंचों से विमुक्त होकर साकेत धाम की पावन ऊर्जा से जुड़ जाता है। इस भजन का मुख्य भाव शरणागति, आत्मसमर्पण और परम अभय की प्राप्ति है। इस विस्तृत गाइड में हम इस भजन के संपूर्ण बोल, शब्दार्थ, भावार्थ, गायन की विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व का गहन विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मंङ्गल भवन अमंगल हारी,
द्रवहु सु दशरथ अजिर बिहारी।
राम सिया राम, सिया राम, जय जय राम।
राम सिया राम, सिया राम, जय जय राम॥

होइ वही जो राम रचि राखा,
को करि तर्क बढ़ावै साखा।
धीरज धरम मित्र अरु नारी,
आपद काल परखिअ चारी॥

राम सिया राम, सिया राम, जय जय राम।
राम सिया राम, सिया राम, जय जय राम॥

कर्म प्रधान विश्व करि राखा,
जो जस करइ सो तस फल चाखा।
डरत न कोउ कहुँ रंक कि राजा,
प्रणत पाल रघुबीर बिराजा॥

राम सिया राम, सिया राम, जय जय राम।
राम सिया राम, सिया राम, जय जय राम॥

जौं समरथ सुनि हरइ विसादा,
हरइ दुःख प्रभु दीनदयाला।
सबहि नचावत राम गुसाईं,
गति न जाइ कहि अति प्रभुताई॥

राम सिया राम, सिया राम, जय जय राम।
राम सिया राम, सिया राम, जय जय राम॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित इन पंक्तियों का भाव अत्यंत गहरा और जीवनोपयोगी है। प्रथम पंक्ति "मंगल भवन अमंगलहारी" का अर्थ है कि भगवान श्री राम कल्याण के आगार (भवन) हैं और समस्त अमंगल व दुखों का हरण करने वाले हैं। हे दशरथ जी के आंगन में विहार करने वाले प्रभु! हम पर कृपा (द्रवहु) कीजिए।

इसके पश्चात तुलसीदास जी नियति और पुरुषार्थ के सुंदर समन्वय को दर्शाते हुए कहते हैं कि संसार में वही होता है जो भगवान राम ने पहले से रच रखा है। इस पर अनावश्यक तर्क-वितर्क करके शाखाएं बढ़ाना व्यर्थ है। संकट के समय ही धीरज, धर्म, मित्र और पत्नी—इन चारों की वास्तविक परीक्षा होती है। कर्म प्रधान इस सृष्टि में जैसा मनुष्य कर्म करता है, वैसा ही फल चखता है। शरण में आए हुओं की रक्षा करने वाले रघुकुल के वीर श्री राम संपूर्ण चराचर जगत में विराजमान हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन सनातन धर्म के आदर्श पुरुष श्रीराम की महिमा का गान करता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • तुलसीकृत महाकाव्य का सार: यह रामचरितमानस के सबसे लोकप्रिय और ऊर्जावान छंदों में से एक है।
  • मानसिक शांति और सकारात्मकता: इसके निरंतर श्रवण से मन का संताप समाप्त होता है और आंतरिक बल की प्राप्ति होती है।
  • शरणागति का भाव: यह जीव को भगवान के चरणों में पूर्ण समर्पण करना सिखाता है।
  • यह भजन श्री हनुमान चालीसा और सुंदरकांड पाठ के दौरान विशेष रूप से गाया जाता है, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को गाने या सुनने के लिए किसी कठोर नियम की आवश्यकता नहीं है, किंतु श्रद्धा और पवित्रता का होना अनिवार्य है:

  • प्रातःकाल और संध्याकाल: सूर्योदय के समय पूजा घर में दीप प्रज्वलित कर इस भजन का गान करने से दिनभर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
  • सत्संग और अनुष्ठान: रामायण पाठ, अखंड रामायण या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के आरंभ और समापन पर यह भजन अनिवार्य रूप से गाया जाता है।
  • मानसिक अशांति के समय: जब भी मन विचलित हो, इस भजन की धुन को सुनने से चित्त शांत होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के आराध्य भगवान श्री रामचंद्र और माता सीता हैं, जो त्याग, मर्यादा, प्रेम और धर्म के सर्वोच्च प्रतीक हैं। इस रचना के रचयिता महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी हैं, जिन्होंने 16वीं शताब्दी में अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना कर घर-घर तक राम कथा पहुंचाई थी। तुलसीदास जी की भक्ति दास्य भाव और अनन्य शरणागति की पराकाष्ठा थी।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन मूल रूप से रामचरितमानस के बालकांड और अरण्यकांड के विभिन्न प्रसंगों से संकलित पंक्तियों पर आधारित है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने जब काशी में संकट के समय हनुमान जी की प्रेरणा से रामचरितमानस की रचना प्रारंभ की, तो उन्होंने मंगलाचरण और विभिन्न सं संदर्भो में इन दिव्य चौपाइयों को स्थान दिया। आज यह भजन पारंपरिक लोक धुनों और आधुनिक संगीत दोनों रूपों में विश्वभर में लोकप्रिय है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन अत्यंत सरल, मधुर और प्रवाहमयी अवधी भाषा में रचित है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है। चौपाई और दोहा छंद की लयबद्धता इसे बिना किसी वाद्य यंत्र के भी आसानी से गाने योग्य बनाती है। शब्दों का चयन ऐसा है कि आम से लेकर खास व्यक्ति तक इसका मर्म सहज ही समझ जाता है.

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के सबसे बड़े सत्य से परिचित कराता है:

  • कर्म प्रधान जीवन: मनुष्य अपने कर्मों का फल स्वयं भोगता है, इसलिए सदा सत्कर्म करना चाहिए।
  • धैर्य और परीक्षा: आपदा या संकट के समय ही सच्चे मित्रों, जीवनसाथी और स्वयं के धैर्य की परख होती है।
  • अहंकार का त्याग: यह स्वीकार करना कि सब कुछ भगवान की इच्छा से चल रहा है, मनुष्य के अहंकार को समाप्त करता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ
अमंगल हारी अमंगल या दुखों का नाश करने वाला प्रभु राम का स्वभाव
अजिर बिहारी आंगन में विहार करने वाले (बाल रूप) दशरथ नंदन राम
रचि राखा पहले से निर्धारित या सृजित नियति विधान
आपद काल संकट या विपत्ति का समय परीक्षा की घड़ी
प्रणत पाल शरण में आए हुओं की रक्षा करने वाला शरणागत वत्सल राम

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मंङ्गल भवन अमangal हारी, द्रवहु सु दशरथ अजिर बिहारी।"
यहाँ तुलसीदास जी प्रार्थना करते हैं कि हे दशरथ जी के आंगन में खेलने वाले राम! आप मंगल के धाम हैं और सभी अमंगलों को हरने वाले हैं, अतः हम पर द्रवित होइए यानी कृपा कीजिए।

"होइ वही जो राम रचि राखा, को करि तर्क बढ़ावै साखा।"
संसार में वही होता है जो श्री राम ने रच रखा है। इस पर व्यर्थ के तर्क-वितर्क करके अपनी दुविधाओं की शाखाएं बढ़ाने से कोई लाभ नहीं है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन श्लोक का स्मरण करना अत्यधिक फलदायी माना जाता है:

श्री राम राम रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्र नाम ततुल्यं राम नाम वरानने॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम राम सिया राम (Mangal Bhavan Amangal Hari)
आराध्य देव भगवान श्री राम एवं माता सीता
रचिता / ग्रंथ महाकवि गोस्वामी तुलसीदास / रामचरितमानस
भाषा अवधी / हिंदी
मुख्य भाव शरणागति, भक्ति और मंगल कामना
गायन अवसर पूजा, अनुष्ठान, संकट काल, प्रातः स्मरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह पावन चौपाई गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महाकाव्य 'रामचरितमानस' के बालकांड से ली गई है।

इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति पूर्ण शरणागति, कर्म की प्रधानता और संकट के समय धैर्य रखना है।

हाँ, इस भजन को प्रातः या संध्या आरती के समय घर में गाने से सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार होता है।

'अजिर' का अर्थ आंगन होता है और 'बिहारी' का अर्थ विहार करने वाला। इसका अर्थ है जो दशरथ जी के आंगन में खेलते थे।

भजन के अनुसार संकट काल में धीरज (धैर्य), धर्म, मित्र और पत्नी—इन चारों की वास्तविक परीक्षा होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन ग्रंथों, रामचरितमानस की टीकाओं और पारंपरिक लोक संस्कृति के अध्ययन पर आधारित है। इसे पाठकों की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जिज्ञासाओं को शांत करने के उद्देश्य से संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • रामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास (गीताप्रेस गोरखपुर संस्करण)
  • वाल्मीकि रामायण - बालकांड एवं उत्तरकांड संदर्भ
  • सनातन धर्म की मौखिक एवं संगीतमय भजन परंपरा

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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