Parvati Stotram

माँ का दर्द (Maa ka Dard) - Mata Bhajan Maa Special - Bhaktilok

136 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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‘माँ का दर्द’ भजन भारतीय भक्ति परंपरा का एक अत्यंत भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी गीत है, जो माता की असीम करुणा, वात्सल्य और संतान के प्रति उनके अटूट प्रेम को समर्पित है। सनातन धर्म में 'माँ' केवल एक शब्द नहीं, बल्कि सृष्टि की जननी, पालनहार और दुखों को हरने वाली शक्ति का प्रतीक है। यह भजन विशेष रूप से माता दुर्गा, पार्वती और जगदम्बा के विभिन्न स्वरूपों की महिमा का गान करता है। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी आत्मा की पुकार माँ के चरणों में अर्पित करता है और यह अनुभव करने का प्रयास करता है कि जब भक्त दुखी होता है, तो माँ का हृदय भी द्रवित हो उठता है। यह भजन न केवल भक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि यह भी सिखाता है कि माँ और संतान का संबंध विश्वास, समर्पण और करुणा की डोर से बंधा है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

माँ का दर्द न समझे कोई, माँ की ममता न्यारी है,
सृष्टि की जो जननी है, वो करुणा की अधिकारी है।
जब-जब भक्त पुकारे माँ को, दौड़ी चली वो आती है,
अपने आंचल की छाया में, सारे दुःख मिटाती है।

माँ का दर्द है क्या, ये कोई क्या जाने,
जब संतान भटके पथ से, माँ की आँखें भर आती हैं,
वो रोती है एकांत में, पर हमें हंसाती है,
माँ का दर्द न समझे कोई, माँ की ममता न्यारी है।

संसार के मोह-माया में, हम माँ को भूल जाते हैं,
वो फिर भी राह तकती है, हम ठोकर खाकर आते हैं।
उसके हृदय की गहराई, सागर से भी गहरी है,
माँ की ममता की छाया, हर पल हमारे साथ ठहरी है।

हे जगदम्बे! हे भवानी! तू ही मेरी आस है,
तेरे चरणों की धूल में ही, मेरा सारा विश्वास है।
माँ का दर्द न समझे कोई, माँ की ममता न्यारी है,
सृष्टि की जो जननी है, वो करुणा की अधिकारी है।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। भक्त यहाँ यह स्वीकार करता है कि माँ की ममता को समझना साधारण मानव के लिए संभव नहीं है। माँ का हृदय इतना कोमल होता है कि जब उसकी संतान सांसारिक दुखों में भटकती है या अधर्म के मार्ग पर चलती है, तो माँ का हृदय विदीर्ण हो जाता है। वह स्वयं कष्ट सहकर भी अपनी संतान को सुख देने का प्रयास करती है। भजन का मुख्य संदेश यह है कि माँ की करुणा निस्वार्थ है। हम भले ही सांसारिक मोह-माया में उलझकर उसे भूल जाएं, लेकिन माँ की दृष्टि सदैव अपनी संतान पर बनी रहती है। यह भजन हमें आत्म-समर्पण और कृतज्ञता का भाव सिखाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • वात्सल्य भाव: यह भजन माँ के वात्सल्य और ममता को केंद्र में रखता है।
  • करुणा का प्रतीक: माता दुर्गा के करुणामयी स्वरूप का वर्णन।
  • आध्यात्मिक जुड़ाव: भक्त और भगवान के बीच के अटूट संबंध को दर्शाता है।
  • सांत्वना: यह भजन दुखी मन को शांति और संबल प्रदान करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को नवरात्रि के पावन दिनों में, माता की चौकी पर, या किसी भी मंगलवार और शुक्रवार को गाया जा सकता है। इसे शांत मन से, दीप प्रज्वलित करके और माता के स्वरूप का ध्यान करते हुए गाना चाहिए। यदि आप दुर्गा चालीसा का पाठ करने के बाद इस भजन को गाते हैं, तो इसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
जननी जन्म देने वाली सृष्टि की रचयिता
वात्सल्य माँ का प्रेम संतान के प्रति स्नेह
विदीर्ण दुखी होना माँ का हृदय
मोह-माया सांसारिक बंधन माया का जाल

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम माँ का दर्द
समर्पित देवता माता दुर्गा / जगदम्बा
मुख्य भाव वात्सल्य, करुणा, समर्पण
भाषा हिंदी
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता की चौकी, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इसे आप नवरात्रि या माता की विशेष पूजा के समय गा सकते हैं।

यह मुख्य रूप से माता दुर्गा और जगदम्बा के करुणामयी स्वरूप को समर्पित है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री पारंपरिक भक्ति साहित्य, देवी पुराण और लोक-भजन परंपराओं के आधार पर संकलित की गई है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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