Matarani Bhajan

जोड़े जोड़े नारियल (Jode Jode Nariyal ) - Anjali Bhardwaj Chhath Song - BhaktiLok

58 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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जोड़े जोड़े नारियल (Jode Jode Nariyal) - अंजलि भारद्वाज का लोकप्रीय छठ गीत

छठ महापर्व सनातन संस्कृति का वह अनूठा और पावन उत्सव है, जो प्रकृति, सूर्योपासना और अटूट लोक-आस्था का प्रतीक है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले इस चार दिवसीय महाव्रत में छठी मईया और भगवान सूर्य नारायण की आराधना की जाती है। लोकगीत इस पर्व की आत्मा होते हैं, जो व्रतियों के मन में छिपी श्रद्धा, तपस्या और उत्साह को स्वर देते हैं। लोक गायिका अंजलि भारद्वाज (Anjali Bhardwaj) द्वारा गाया गया प्रसिद्ध छठ भजन "जोड़े जोड़े नारियल (Jode Jode Nariyal)" इसी लोक-संस्कृति और सात्विक भक्ति का एक अत्यंत ही मधुर व हृदयस्पर्शी उदाहरण है। यह गीत न केवल भोजपुरी और मैथिली भाषियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है, बल्कि संपूर्ण भारत में छठ व्रतियों के घरों और घाटों पर श्रद्धा के साथ गूंजता है। इस गीत में सूप और बास्केट में सजी पूजा सामग्री, ठेकुआ, फल और विशेष रूप से जोड़े-जोड़े नारियल अर्पित करने के भावुक और पवित्र दृश्यों का सजीव चित्रण किया गया है, जो श्रोताओं को पूरी तरह से भक्ति रस से सराबोर कर देता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

स्थायी (Mukhda):

जोड़े जोड़े नारियल, केरवा फरेला घवद से..
सूपवा सुफाला हे छठी मईया, दर्शन दियs नियन से..

अंतरा 1:

घाट पर सोहेलियन कतार, बहे लागल पुरवइया बयार..
भउजी बनाईहें ठेकुआ मि_ठार, अरघ देबे आइहें संसार..
उगे सूरुज देव भइले परभात, दर्शन दीं न अईसे बिहान से..

अंतरा 2:

नदी के किनारे लागे भारी भीड़, दर्शन पावे खातिर उमड़ल शरीर..
अंजलि भारद्वाज गावे छठी के गान, महिमा गावे सारा जहान..
सुन लीं पुकार छठी मईया हमार, बेड़ा पार कई दिहs संसार से..

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

अंजलि भारद्वाज द्वारा गाए गए इस लोकप्रिय छठ गीत "जोड़े जोड़े नारियल" का भावार्थ प्रकृति और छठी मईया के प्रति समर्पण को समर्पित है। गीत की पंक्तियों में व्रती महिलाएं और उनके परिवारजन छठी मैया से प्रार्थना करते हैं कि जिस प्रकार प्रकृति में केले का घवद (गुच्छा) और जोड़े-जोड़े नारियल पूरी पवित्रता के साथ अर्पित किए जाते हैं, हे छठी मईया! वैसे ही हमारे जीवन में सुख-शांति और आरोग्यता का संचार कीजिए। 'केरवा फरेला घवद से' पंक्ति का अर्थ है कि केले के पौधों में जैसे फल प्राकृतिक रूप से लहलहाते हैं, वैसे ही हमारा वंश और कुल भी हरा-भरा रहे। घाट पर सजी कतारें, बहती ठंडी पुरवइया हवा और घरों में बन रहे पवित्र ठेकुआ का प्रसाद इस पर्व की सांस्कृतिक भव्यता को बढ़ाते हैं।

गीत के आगे के चरणों में सूर्योदय और सूर्यास्त के अर्घ्य का मार्मिक वर्णन किया गया है। व्रती जब नदी या तालाब के घाट पर खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं, तो वह दृश्य अलौकिक होता है। गीत के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि जीवन के सभी दुखों और बाधाओं को पार करते हुए, छठी मईया अपने हर एक सच्चे भक्त की पुकार सुनती हैं और उनके परिवार पर अपनी असीम अनुकंपा बनाए रखती हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस पावन गीत की मुख्य भावना पवित्रता, अनुशासन, पारिवारिक एकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता है। छठ महापर्व भारतीय संस्कृति का वह पर्व है जिसमें उगते हुए सूर्य के साथ-साथ अस्त होते सूर्य की भी उपासना की जाती है, जो यह सिखाती है कि जीवन के उतार-चढ़ाव में भी हमें ईश्वर के प्रति आश्वस्त रहना चाहिए। गीत का संदेश यह है कि जब मनुष्य पूरी निष्ठा, स्वच्छता और सादगी के साथ परमात्मा और प्रकृति की शरण में जाता है, तो उसके सारे संकट स्वतः दूर हो जाते हैं। यह गीत मातृशक्ति के त्याग, तपस्या और अटूट संकल्प का जीवंत दस्तावेज है।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम जोड़े जोड़े नारियल (Jode Jode Nariyal)
गायिका अंजलि भारद्वाज (Anjali Bhardwaj)
संगीत शैली पारंपरिक छठ लोकगीत / भक्ति संगीत
भाषा भोजपुरी / हिंदी लोक भाषा
विषय एवं थीम छठ महापर्व, छठी मईया महिमा, सूर्योपासना
संबंधित पर्व छठ पूजा (कार्तिक शुक्ल षष्ठी)
श्रेणी Latest Bhakti Song / Matarani Bhajan / Lok Geet

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

छठ पर्व की लोक परंपरा सदियों पुरानी है, जिसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक और संगीत के माध्यम से आगे बढ़ाया गया है। अंजलि भारद्वाज जैसी प्रसिद्ध लोक और भक्ति गायिका ने अपनी मधुर और सधी हुई आवाज में इस पारंपरिक गीत को पिरोकर आधुनिक डिजिटल माध्यमों से करोड़ों श्रोताओं तक पहुँचाया है। उनकी आवाज में उत्तर भारत के लोक संगीत की सोंधी खुशबू और छठी मईया के प्रति अनन्य प्रेम स्पष्ट झलकता है। उनके साथ जुड़े संगीतकार और वादक इस गीत को पारंपरिक लोक धुनों से सजाकर और अधिक जीवंत बनाते हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
जोड़े जोड़े नारियल जोड़े (युग्म) के रूप में रखे जाने वाले नारियल छठ पूजा में प्रसाद एवं अर्घ्य हेतु आवश्यक सामग्री
केरवा केला छठ पूजा का मुख्य पवित्र फल (घवद सहित)
घवद केले का पूरा गुच्छा पेड़ से कटा हुआ पूरा केला का बंच
सुफाला सफल / कल्याणकारी व्रत और पूजा की सफलता का प्रतीक
पुरवइया बयार पूर्व दिशा से बहने वाली ठंडी हवा कार्तिक मास के मौसम का पारंपरिक वर्णन
ठेकुआ गेहूं के आटे और गुड़ से बना पारंपरिक प्रसाद छठ पर्व का मुख्य और विशेष प्रसाद
अरघ (अर्घ्य) सूर्य देव को जल और दूध अर्पित करना छठ पूजा का मुख्य अनुष्ठान

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ महापर्व और उससे जुड़े लोकगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि यह हमारी प्राचीन सनातन संस्कृति, पर्यावरण प्रेम और सामूहिक समरसता के प्रतीक हैं। सनातन धर्म में प्रकृति के हर उपादान—जल, अग्नि, सूर्य, वायु और वनस्पति—को देवता के रूप में पूजा गया है। 'जोड़े जोड़े नारियल' जैसे गीत समाज को यह याद दिलाते हैं कि हमारी संस्कृति प्रकृति के संरक्षण पर आधारित है। इन गीतों को गाते समय व्रतियों के मन में जो एकाग्रता और सात्विक भाव होता है, वह मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। यह पर्व और इसके गीत जाति, ऊंच-नीच के भेदों को मिटाकर सभी को एक घाट पर एक सूत्र में पिरोते हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यह लोकगीत और छठ महापर्व हमें जीवन में कई मूल्यवान शिक्षाएं देते हैं:

  • कठिन परिश्रम और अनुशासन: छठ व्रत का नियम अत्यंत कठिन होता है, जो जीवन में अनुशासन और संयम का पाठ पढ़ाता है।
  • कृतज्ञता का भाव: सूर्य और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करना हमें सिखाता है कि हमारा अस्तित्व प्रकृति पर निर्भर है।
  • पारिवारिक सहयोग: छठ पूजा की तैयारी में पूरा परिवार मिलकर कार्य करता है, जो आपसी प्रेम और सहयोग को बढ़ाता है।
  • अटूट विश्वास: कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी छठी मईया और ईश्वर पर पूर्ण विश्वास बनाए रखना संकटों से पार लगाता है।
  • शुचिता और पवित्रता: तन और मन दोनों की पवित्रता जीवन को सफल बनाती है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से कार्तिक मास के छठ महापर्व के दौरान चार दिनों तक लगातार गूंजता है—नहाय-खाय से लेकर खरना, लोहंडा, संध्या अर्घ्य और उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने तक। इसके अतिरिक्त, महिलाएं चैती छठ (वासंती छठ) के पावन अवसर पर भी इस गीत को बड़े चाव से गाती हैं। गृह प्रवेश, पारिवारिक मांगलिक अनुष्ठानों या माता रानी के जागरण और संध्या आरती के उपरांत भी लोक संस्कृति से जुड़े ऐसे भक्ति गीतों को श्रवण करना मन को आनंदित करता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मानदंड विवरण
गीत का शीर्षक जोड़े जोड़े नारियल (Jode Jode Nariyal)
मुख्य गायिका अंजलि भारद्वाज
संगीत विधा छठ लोकगीत / भक्ति भजन
मुख्य आराध्य छठी मईया एवं भगवान सूर्य नारायण
क्षेत्रीय परंपरा बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं प्रवासी भारतीय समुदाय
प्रमुख पर्व छठ पूजा (कार्तिक शुक्ल षष्ठी)
मुख्य संदेश प्रकृति वंदना, पारिवारिक सुख और छठी मईया की कृपा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह प्रसिद्ध लोकगीत लोकप्रिय भक्ति और लोक गायिका अंजलि भारद्वाज (Anjali Bhardwaj) द्वारा गाया गया है, जो अपने मधुर छठ गीतों के लिए जानी जाती हैं।

यह गीत मुख्य रूप से महान लोक पर्व छठ पूजा (Chhath Puja) से जुड़ा हुआ है, जो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है।

छठ पूजा में नारियल को बहुत पवित्र और पूर्ण फल माना जाता है। जोड़े-जोड़े नारियल (युग्म रूप में) छठी मईया और सूर्य देव को अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की अखंडता के लिए अर्पित किए जाते हैं।

छठ पर्व में प्रकृति की देवी षष्ठी माता (छठी मईया) और जगत के प्रकाश पुंज भगवान सूर्य नारायण की मुख्य रूप से पूजा की जाती है।

इस पंक्ति का अर्थ है कि केले के पौधों में जैसे फल (घवद या गुच्छा) पूरी सुंदरता और प्रचुरता के साथ लहलहाते हैं, वैसे ही छठी मईया हमारे जीवन और परिवार को भी हरा-भरा और समृद्ध रखें।

छठ पूजा का सबसे प्रमुख प्रसाद शुद्ध घी और गुड़ से बना ठेकुआ (Thekua) होता है, इसके साथ ही चावल के लड्डू, विभिन्न प्रकार के मौसमी फल और गन्ने का भी विशेष महत्व है।

मूल रूप से यह बिहार, झारखण्ड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का लोकगीत है, परंतु आज के समय में देश-विदेश में जहाँ भी पूर्वांचल के लोग बसते हैं, वहाँ यह गीत अत्यंत उत्साह के साथ सुना और गाया जाता है।

यह भजन विभिन्न प्रमुख ऑडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स, यूट्यूब चैनल्स और भक्ति संगीत पोर्टल्स पर आसानी से उपलब्ध है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत जानकारी पारंपरिक लोक संगीत, छठ महापर्व की सांस्कृतिक मान्यताओं और उपलब्ध स्रोतों के आधार पर संकलित की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को सनातन लोक संस्कृति और भक्ति संगीत से जोड़ना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक लोकगीत संग्रह एवं भोजपुरी लोक-संस्कृति अध्ययन।
  • छठ महापर्व अनुष्ठान एवं सूर्योपासना परंपराएं।
  • अंजलि भारद्वाज द्वारा प्रस्तुत लोक संगीत एवं एलबम संदर्भ।
  • धार्मिक एवं सांस्कृतिक लोक-साहित्य ग्रंथ।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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