Parvati Stotram

सुख के सब साथी दुख में ना कोई (Sukh Ke Sab Sathi Dukh Me Na Koi) - Ram Bhajan - Bhaktilok

80 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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सुख के सब साथी दुख में ना कोई: मर्यादा पुरुषोत्तम राम की शरण में जीव की पुकार

भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "सुख के सब साथी दुख में ना कोई (Sukh Ke Sab Sathi Dukh Me Na Koi) - Ram Bhajan" सनातन भक्ति परंपरा का एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और लोकप्रिय पद है। यह भजन मानव जीवन के उस परम सत्य को उजागर करता है जहाँ सांसारिक सुखों के समय पूरा संसार साथ खड़ा प्रतीत होता है, परंतु विपत्ति और दुखों के काले बादलों के घिरते ही सभी अपने-अपने रास्ते अलग कर लेते हैं। ऐसे में केवल करुणासिंधु मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का नाम ही एकमात्र ऐसा संबल बचता है जो जीव की नैया को भवसागर से पार लगाता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस और लोक-संस्कृति की सरिता से प्रवाहित यह भजन साधक के अंतःकरण में शरणागति के भाव को जागृत करता है। इस भजन को सुबह की बेला में, संध्याकालीन पूजा के समय, या किसी भी सत्संग और संकट के क्षण में स्मरण करने से मन को असीम शांति और आत्मबल की प्राप्ति होती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखाड़ा (स्थायी):

सुख के सब साथी, दुख में न कोई,
मेरे राम, तेरे सिवा अब मेरा कौन है दोई!

अंतरा 1:

दुनिया के मेले में सब अपनों का मेला,
मुसीबत पड़ी तो हर कोई अकेला।
जब छोड़ दी सबने मेरी परछाईं,
मैंने हे राम! तेरी महिमा गाई।
मेरे राम, तेरे सिवा अब मेरा कौन है दोई!

अंतरा 2:

धन और वैभव के संग सब संगी-साथी,
बुझ जाए जब दीप तो अंधेरा ही माटी।
भंवर में फंसी है मेरी जीवन की नैया,
हे रघुनंदन! बन जाओ खेवैया।
मेरे राम, तेरे सिवा अब मेरा कौन है दोई!

अंतरा 3:

तुलसी ने गाया सूर ने पुकारा,
हर दीन-दुखी ने तेरा आसरा निहारा।
जो शरण तुम्हारी आ जाए प्रभुजी,
उसे भवसागर से मिले मुक्ति का किनारा।
सुख के सब साथी, दुख में न कोई,
मेरे राम, तेरे सिवा अब मेरा कौन है दोई!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन मनुष्य के स्वार्थी सांसारिक स्वभाव और ईश्वर के प्रति उसकी अनन्य निर्भरता का अत्यंत सुंदर चित्रण प्रस्तुत करता है। जब मनुष्य के पास धन, वैभव और अनुकूल परिस्थितियां होती हैं, तब उसके चारों ओर मित्रों और संबंधियों का तांता लगा रहता है। परंतु जैसे ही जीवन में दुखों का अंधकार छाता है और प्रतिकूलताएं आती हैं, वे सभी तथाकथित अपने कन्नी काट लेते हैं। इस गहन अकेलेपन की स्थिति में जब जीव पूरी तरह विचलित हो जाता है, तब उसे भगवान श्रीराम के चरणों की महत्ता का बोध होता है।

भजन का केंद्रीय भाव 'शरणागति' (Total Surrender) है। रघुनंदन राम केवल त्रेतायुग के राजा नहीं हैं, बल्कि वे हर युग में हर उस व्यक्ति के सहायक हैं जो पुकारता है। इस भजन का प्रत्येक शब्द भक्त के भीतर के अहंकार को समाप्त कर भगवान के प्रति अगाध प्रेम और अटूट विश्वास को जन्म देता है। जब सांसारिक सहारे शून्य हो जाते हैं, तब राम-नाम का संकीर्तन ही वह संजीवनी बूटी बनता है जो हताश मन में नई ऊर्जा का संचार करता है। आप राम नाम के अधिक प्रभाव को जानने के लिए श्री हनुमान चालीसा के पावन पाठ का भी स्मरण कर सकते हैं, जो संकटमोचन के रूप में भक्तों की रक्षा करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

सनातन संस्कृति में भगवान श्रीराम को मर्यादा, धर्म, करुणा और न्याय का प्रतीक माना गया है। इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता और भाव-प्रधान शैली है। इसे किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति द्वारा बिना किसी कठिन संगीत ज्ञान के आसानी से गाया जा सकता है। यह भजन व्यक्ति को सांसारिक मोह-माया के प्रति सचेत करता है और यह सिखाता है कि मनुष्य को अपने जीवन की वास्तविक डोर केवल ईश्वर के हाथों में सौंपनी चाहिए। राम नाम के जाप से न केवल मानसिक तनाव दूर होता है, बल्कि चित्त की शुद्धि भी होती है। इसी प्रकार भगवान शिव की स्तुति के लिए शिव तांडव स्तोत्र का पाठ भी साधकों को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को गाने या सुनने के लिए किसी विशेष अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं होती, फिर भी कुछ निश्चित अवसरों पर इसका पाठ विशेष फलदायी होता है:

1. प्रातःकालीन बेला: दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ करने के लिए सुबह स्नान के पश्चात पूजा घर में दीप प्रज्वलित कर इसे गाना चाहिए।

2. संकट या मानसिक तनाव के समय: जब भी जीवन में अकेलापन, निराशा या कोई संकट महसूस हो, इस भजन का स्मरण मन को तुरंत ढांढस बंधाता है।

3. सत्संग एवं पारिवारिक अनुष्ठान: रामायण पाठ, सुंदरकांड या किसी भी धार्मिक उत्सव के दौरान सामूहिक रूप से इस भजन का गायन वातावरण को पवित्र बना देता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में सर्वव्यापक, अरण्यकाण्ड से लेकर लंकाविजय तक धर्म की स्थापना करने वाले मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम हैं। साथ ही, संत तुलसीदास और सूरदास जैसे महान संतों की परंपरा से यह भजन अपनी प्रेरणा ग्रहण करता है, जिन्होंने संपूर्ण संसार को यह सिखाया कि ईश्वर ही एकमात्र शाश्वत सत्य हैं और बाकी सब नश्वर प्रपंच है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भक्ति आंदोलन के काल से लेकर आधुनिक युग तक, लोक कवियों और संतों ने राम के चरणों में अपनी विरह और भक्ति भावना को पदों के माध्यम से व्यक्त किया है। "सुख के सब साथी दुख में ना कोई" उसी मौखिक और लिखित लोक-साहित्य का एक अनमोल रत्न है, जिसे पीढ़ियों से संतों, गायकों और भक्तों द्वारा सहेजा और गाया गया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल हिंदी, ब्रज और अवधी के लोक-मुहावरों के सुंदर समन्वय से रचित है। इसमें 'सुख के साथी' और 'दुख के साथी' जैसे रूपकों का बहुत ही प्रभावी ढंग से प्रयोग किया गया है जो सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करते हैं। इसकी लयबद्ध संरचना इसे भजन मंडलियों और कीर्तन के लिए अत्यधिक उपयुक्त बनाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन मूल्य प्राप्त होते हैं:

1. असंगता का बोध: सांसारिक संबंधों की नश्वरता को समझकर अत्यधिक मोह से बचना चाहिए।

2. ईश्वर पर अटूट विश्वास: कठिन समय में धैर्य रखते हुए केवल परमात्मा का स्मरण करना चाहिए।

3. अहंकार का त्याग: यह स्वीकार करना कि जब अपने साथ छोड़ देते हैं, तब प्रभु की कृपा ही एकमात्र सहारा बनती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / भावार्थ
सुख के सब साथी अनुकूल समय के मित्र जब तक धन और वैभव है, तब तक साथ निभाने वाले लोग।
कौन है दोई दूसरा कौन है भगवान के अतिरिक्त इस संसार में कोई सच्चा हितैषी नहीं है।
खेवैया नाव चलाने वाला / नाविक जीवन रूपी नैया को भवसागर से पार लगाने वाले प्रभु राम।
भवसागर संसार रूपी सागर जन्म-मृत्यु के चक्र और दुखों से भरा यह संसार।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"सुख के सब साथी, दुख में न कोई, मेरे राम, तेरे सिवा अब मेरा कौन है दोई!"
इस शुरुआती पंक्ति में कवि जीवन के सबसे बड़े यथार्थ को सामने रखता है। जब इंसान के पास सुख और वैभव होता है, तो पूरा संसार उसके साथ खड़ा दिखता है। लेकिन जैसे ही दुख का पहाड़ टूटता है, सब मुँह मोड़ लेते हैं। ऐसी दशा में हे राम! तुम्हारे अतिरिक्त मेरा इस दुनिया में कोई दूसरा अपना नहीं है।

"भंवर में फंसी है मेरी जीवन की नैया, हे रघुनंदन! बन जाओ खेवैया।"
यहाँ भक्त अपने जीवन की तुलना एक ऐसी नाव से करता है जो भंवर (मुसीबत) में फंस चुकी है। वह रघुनंदन राम से प्रार्थना करता है कि हे प्रभु! अब आप ही मेरी नैया को सुरक्षित किनारे पर लगाइए।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

राम भजन के साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण अत्यधिक फलदायी माना गया है:

"आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्। लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नमाम्यहम।।"

अर्थात: जो सभी विपत्तियों को दूर करने वाले हैं, संपूर्ण संपदाओं को प्रदान करने वाले हैं और जो समस्त संसार को प्रिय हैं, ऐसे श्रीराम को हम बार-बार नमस्कार करते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

श्रेणी / विशेषता विवरण
भजन का नाम सुख के सब साथी दुख में ना कोई (Sukh Ke Sab Sathi Dukh Me Na Koi)
समर्पित देवता मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम
संगीत शैली पारंपरिक लोक भजन / संतवाणी
भाषा सरल हिंदी / अवधी मिश्रित
मुख्य भाव शरणागति, वैराग्य और भक्ति
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, संकट काल, सत्संग, रामनवमी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्नों के उत्तर जो भक्त अक्सर जानना चाहते हैं:

Q1: "सुख के सब साथी दुख में ना कोई" भजन मुख्य रूप से किस देवता को समर्पित है?

यह भजन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम को समर्पित है, जो संकट के समय अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।

Q2: इस भजन को कब और किस समय गाना चाहिए?

इस भजन को सुबह की पूजा के समय, एकांत में ध्यान करते समय या जीवन में किसी भी प्रकार की मानसिक अशांति या संकट के समय गाया जा सकता है।

Q3: इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?

यह भजन हमें सिखाता है कि सांसारिक रिश्ते और अपनापन स्वार्थ पर आधारित होते हैं, और केवल ईश्वर का नाम ही शाश्वत व सच्चा सहारा है।

Q4: क्या इस भजन को भजन मंडली या सामूहिक रूप से गाया जा सकता है?

हाँ, इसकी सरल लय और भावपूर्ण शब्दों के कारण यह सत्संग, रामायण पाठ और जागरण के समय सामूहिक गायन के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

Q5: भगवान राम के स्मरण से जीवन में क्या लाभ मिलता है?

राम नाम के स्मरण से मन का भय समाप्त होता है, धैर्य और आत्मबल की वृद्धि होती है तथा जीवन की कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति मिलती है।

Q6: क्या यह भजन किसी विशेष ग्रंथ से लिया गया है?

यह पारंपरिक भक्ति लोक-साहित्य और संत परंपरा का हिस्सा है, जो रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण के दर्शन से प्रेरित है।

Q7: इस भजन को गाने से मानसिक तनाव कैसे कम होता है?

जब हम अपनी चिंताएं और दुख भगवान को समर्पित कर देते हैं, तो मन का बोझ हल्का हो जाता है और ध्यान एकाग्र होने से तनाव कम होता है।

Q8: क्या इस भजन के गायन के लिए कोई विशेष नियम है?

इसके लिए कोई कठोर नियम नहीं है, बस शुद्ध उच्चारण, सच्ची श्रद्धा और भक्ति भाव का होना आवश्यक है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख को सनातन धर्म के ग्रंथों, लोक-साहित्य और पारंपरिक राम भक्ति के दृष्टिकोण से प्रामाणिक और उपयोगी बनाया गया है ताकि पाठकों को आध्यात्मिक संतुष्टि मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

1. श्री रामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास जी कृत
2. वाल्मीकि रामायण - अध्यात्म कांड प्रसंग
3. सनातन लोक-भजन परंपरा एवं संत साहित्य

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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