भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित अति मधुर एवं लोकप्रिय संकीर्तन "सीताराम सीताराम सीताराम कहिये (Sitaram Sitaram Kahiye) - Devendra Pathak Maharaj Shri Ram Bhajan" मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और माता सीता के पावन चरित्र का स्मरण कराने वाला एक दिव्य भजन है। सुप्रसिद्ध भजन गायक श्री देवेंद्र जी महाराज की मधुर वाणी और कैलास श्रीवास्तव जी के संगीत संयोजन से सजा यह भजन श्रोताओं को सीधे साकेत धाम और त्रेतायुग की पावन चेतना से जोड़ देता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, कलियुग में भगवान का नाम ही भवसागर से तरने का एकमात्र सुगम साधन है। इस भजन का मुख्य भाव शरणागति, आत्मसमर्पण और नामस्मरण की महिमा का गुणगान करना है। जब कोई भक्त समस्त सांसारिक प्रपंचों और चिंताओं से विचलित होकर भगवान श्री राम और माता सीता के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय, मानसिक शांति और आत्मिक आनंद की प्राप्ति होती है। प्रातःकालीन वंदना, संध्याकालीन सत्संग, रामायण पाठ, रामनवमी उत्सव और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान इस भजन का श्रवण और गायन अंतःकरण को पावन और ऊर्जावान बना देता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
सीताराम सीताराम सीताराम कहिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये॥
मुख में हो राम नाम, सेवा हाथ जोड़े,
धरती पे पाँव, सदा राम की ही ओट ले,
कर्म करे जा तू, फल की न इच्छा करिये॥
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये॥
जीवन है एक नांव, खेवनहार राम हैं,
दुख-सुख जो भी आए, सब उनका ही काम है,
धीरज न खोना कभी, प्रभु का ध्यान धरिये॥
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये॥
साकेत धाम जिनका, मिथिला है ससुराल,
भक्तों के संकट हरें, सदा दीनदयाल,
ऐसे कृपालु चरणों में शीश धरिये॥
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये॥
देवेंद्र गाए गुण, राम नाम सांचा है,
दुनिया का हर रिश्ता, यहाँ पर तो कच्चा है,
सच्चा साथी राम को ही मन में धरिये॥
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
"सीताराम सीताराम सीताराम कहिये, जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये" - यह पंक्ति सनातन धर्म के सबसे गहरे दार्शनिक सत्य यानी 'पूर्ण शरणागति' (Surrender to the Divine Will) को प्रकट करती है। भजन का अर्थ है कि मनुष्य को हर परिस्थिति में निरंतर भगवान श्री सीताराम के नाम का स्मरण करना चाहिए और विधाता या प्रभु राम जिस भी हाल में रखें, उसी में संतुष्ट रहना चाहिए। जीवन में सुख आए या दुःख, लाभ हो या हानि, अनुकूलता हो या प्रतिकूलता—सबको भगवान की कृपा मानकर स्वीकार करना ही सच्चे भक्त का लक्षण है।
भजन के अगले चरणों में यह समझाया गया है कि मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा से करना चाहिए, किंतु फल की आसक्ति से मुक्त रहना चाहिए। संसार में सभी रिश्ते-नाते स्वार्थ और समय के दायरे में बंधे हैं, परंतु भगवान श्री राम का नाम और उनका चरणकमल ही एकमात्र शाश्वत और सच्चा साथी है। जब भक्त इस भाव को अपने जीवन में उतार लेता है, तो उसके सारे संताप और मानसिक द्वंद्व स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- ✨ युगल उपासना: इस भजन में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और जगत जननी माता सीता के संयुक्त नाम 'सीताराम' का स्मरण किया गया है, जो भक्ति और शक्ति का प्रतीक है।
- ✨ संतोष और संतोषी जीवन: भजन मनुष्य को संतोष का संदेश देता है, जिससे मानसिक तनाव और अवसाद दूर होते हैं।
- ✨ कलियुग में नामस्मरण: कलियुग में केवल भगवान का नाम ही भवसागर से पार लगाने का सुगम मार्ग बताया गया है।
- ✨ संगीत और सुर: श्री देवेंद्र जी महाराज की भावपूर्ण गायकी इसे एक उच्च कोटि का आध्यात्मिक संकीर्तन बनाती है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस पावन भजन को किसी भी समय सुना जा सकता है, परंतु इसे गाने और सुनने का सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त) और संध्यावंदना का बेला है। इसे निम्नलिखित अवसरों पर विशेष रूप से गाया जाता है:
- दैनिक पूजा-पाठ और ध्यान के समय।
- घर में होने वाले सत्संग, रामायण पाठ या सुंदरकांड के अनुष्ठान में।
- श्री रामनवमी, विवाह पंचमी और दीपावली के पवित्र पर्वों पर।
- जब भी मन अशांत हो या जीवन में किसी प्रकार की कठिनाई महसूस हो।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के केंद्र में भगवान श्री राम और माता सीता हैं। श्रीराम सनातन धर्म में धर्म, मर्यादा, सत्य और करुणा के सर्वोच्च अवतार माने जाते हैं। उनके साथ ही इस भजन की रचना और प्रस्तुति में लोक-संस्कृति और पारंपरिक भक्ति का अद्भुत समन्वय है, जिसे भजन सम्राट श्री देवेंद्र जी महाराज ने अपनी सुमधुर आवाज से जीवंत किया है। संगीतकार कैलास श्रीवास्तव जी ने इसके सुरों में भारतीय शास्त्रीय और लोक संगीत की चाशनी घोली है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन सरल हिंदी और अवधी-ब्रज मिश्रित लोक भाषा में रचित है, जिसे आमजन आसानी से समझ सकता है और गा सकता है। इसमें रूपक अलंकार और शांत रस की प्रधानता है। शब्दों का चयन ऐसा है कि श्रोता के मन में स्वतः भक्ति और वैराग्य का भाव जागृत हो जाता है। लोकगीतों की तर्ज पर बनाई गई इसकी लय इसे बच्चों से लेकर वृद्धों तक सभी के जुबां पर आसानी से चढ़ा देती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें जीवन की कई मूल्यवान सीख देता है:
- परिस्थितियों को स्वीकार करना: मनुष्य को सुख और दुःख दोनों अवस्थाओं में समभाव रखना चाहिए।
- कर्म प्रधान जीवन: निष्काम भाव से अपने कर्म करते रहना चाहिए और परिणाम ईश्वर पर छोड़ देना चाहिए।
- अहंकार का त्याग: यह समझना कि इस संसार में हम केवल निमित्त मात्र हैं, असली खेवनहार तो भगवान राम ही हैं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| जाहि विधि | जिस प्रकार से / जैसे भी हाल में | ईश्वर की इच्छा के प्रति पूर्ण समर्पण |
| साकेत धाम | भगवान राम का दिव्य लोक | अयोध्या का आध्यात्मिक स्वरूप |
| खेवनहार | नाव को पार लगाने वाला नाविक | जीवन की नैया पार लगाने वाले भगवान राम |
| नाम सांचा है | ईश्वर का नाम ही सत्य है | संसार की नश्वरता और भगवान के नाम की शाश्वतता |
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
आपदाामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्।
लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥
अर्थात: जो सभी आपदाओं को हरने वाले हैं, सभी संपत्तियाँ प्रदान करने वाले हैं और जो सम्पूर्ण संसार को प्रिय हैं, उन श्री राम को हम बार-बार नमस्कार करते हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | सीताराम सीताराम सीताराम कहिये (Sitaram Sitaram Kahiye) |
|---|---|
| गायक कलाकार | श्री देवेंद्र जी महाराज (Shri Devendra Ji Maharaj) |
| संगीत निर्देशक | कैलास श्रीवास्तव जी (Kailash Shrivastav Ji) |
| आराध्य देव | भगवान श्री राम एवं माता सीता |
| भक्ति भाव | शरणागति, संतोष, नामस्मरण और प्रेम |
| भाषा | हिंदी / अवधी लोक शैली |
| उपयुक्त अवसर | दैनिक पूजा, सत्संग, रामनवमी, और मानसिक शांति हेतु |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख सनातन भक्ति परंपरा, राम नाम की महिमा और श्री देवेंद्र जी महाराज की भजन शैली के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को उच्च कोटि की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जानकारी प्रदान करना है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्री रामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास जी
- भारतीय संकीर्तन एवं लोक भक्ति परंपरा
- भक्तलोक (Bhaktilok.in) अर्काइव एवं संगीत निर्देशिका
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