Krishna Bhajan

श्याम तेरे मिलने की (Shyam Tere Milne Ki) - Radha Krishna Bhajan - Bhaktilok

68 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

"श्याम तेरे मिलने की (Shyam Tere Milne Ki)" एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी राधा-कृष्ण भजन है, जो वैष्णव संप्रदाय की मधुर रस और प्रेमाभक्ति की समृद्ध परंपरा को दर्शाता है। इस भजन को सुप्रसिद्ध गायक प्रेम मेहरा ने अपनी मधुर आवाज में गाया है, जिसके भावपूर्ण शब्द कमल सिंह पुट्टी द्वारा रचित हैं और संगीत अरुण मिश्रा द्वारा संयोजित किया गया है। यह भजन जीवात्मा की परमात्मा से मिलने की व्याकुलता और विरह वेदना को अत्यंत सरल परंतु गहरे शब्दों में अभिव्यक्त करता है। भक्ति मार्ग में 'सत्संग' को ईश्वर प्राप्ति का सबसे सुलभ और प्रभावी माध्यम माना गया है, और यह भजन इसी सत्य को प्रतिपादित करता है कि सत्संग तो केवल एक माध्यम या बहाना है, वास्तविक लक्ष्य तो केवल कन्हैया की प्राप्ति है। इस भजन का श्रवण और गायन भक्तों को वृंदावन की कुंज-गलियों के दिव्य वातावरण में ले जाता है, जहाँ केवल निश्छल प्रेम और पूर्ण समर्पण का साम्राज्य है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

श्याम तेरे मिलने की (Shyam Tere Milne Ki)

(स्थायी)
श्याम तेरे मिलने की सत्संग ही बहाना है,
दुनिया से क्या लेना, हमें तुझको पाना है।
श्याम तेरे मिलने की सत्संग ही बहाना है...

(अंतरा - 1)
तेरी याद में रोते हैं, दिन रात कन्हैया हम,
आँखों में बसाया है, तेरा रूप सुहाना है।
श्याम तेरे मिलने की सत्संग ही बहाना है...

(अंतरा - 2)
वृंदावन की गलियों में, हम तुमको ढूंढेंगे,
राधे राधे गाकर, तुझे पास बुलाना है।
श्याम तेरे मिलने की सत्संग ही बहाना है...

(अंतरा - 3)
मुरली की मधुर तानें, कानों में गूंजती हैं,
इस व्याकुल हृदय को, अब चैन दिलाना है।
श्याम तेरे मिलने की सत्संग ही बहाना है...

(अंतरा - 4)
प्रेम मेहरा गाए भजन, चरणों में शीश झुकाए,
कमल सिंह पुट्टी का, यह गीत पुराना है।
श्याम तेरे मिलने की सत्संग ही बहाना है...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन का मूल भाव जीवात्मा (भक्त) और परमात्मा (श्री कृष्ण) के बीच के अनन्य संबंध को उजागर करना है। वैष्णव दर्शन के अनुसार, संसार की सभी आत्माएं मूलतः परमात्मा का ही अंश हैं और वे सदा अपने मूल स्रोत से मिलने के लिए व्याकुल रहती हैं। भजन की शुरुआत इस सुंदर सत्य से होती है कि भक्त के लिए 'सत्संग' केवल एक माध्यम या बहाना है, जिसके सहारे वह अपने आराध्य श्री कृष्ण के समीप पहुँच सकता है। भक्त का इस भौतिक संसार की नश्वर वस्तुओं या संबंधों से कोई सरोकार नहीं है; उसका एकमात्र ध्येय केवल और केवल भगवान की प्राप्ति है।

भजन के अगले पदों में विरह की उस पराकाष्ठा का वर्णन है जहाँ भक्त दिन-रात कन्हैया की याद में अश्रु बहाता है। उसकी आँखों में केवल भगवान का वह मनमोहक और सुहाना रूप बसा हुआ है। वृंदावन की कुंज-गलियों में भटकते हुए, राधे-राधे का संकीर्तन करते हुए भक्त अपने श्याम सुंदर को पुकारता है, क्योंकि वह जानता है कि श्री कृष्ण स्वयं श्री राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं और जहाँ राधा नाम का संकीर्तन होता है, वहाँ श्याम खिंचे चले आते हैं। अंततः, यह भजन पूर्ण शरणागति और निष्काम प्रेम का संदेश देता है, जहाँ भक्त अपने अहंकार को मिटाकर भगवान के चरणों में लीन हो जाना चाहता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि यह भक्ति योग का एक व्यावहारिक दस्तावेज है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • सत्संग की महिमा: भजन इस बात पर बल देता है कि सत्संग वह पावन स्थान है जहाँ मन सांसारिक प्रपंचों से हटकर भगवान में लीन होता है।
  • राधा नाम का आश्रय: भजन में वृंदावन की महिमा और राधा नाम के संकीर्तन को श्री कृष्ण को रिझाने का सबसे अचूक उपाय बताया गया है।
  • विरह भक्ति (Madhurya Bhava): इसमें भक्त की तड़प और विरह को दर्शाया गया है, जो चैतन्य महाप्रभु की गौड़ीय वैष्णव पद्धति के अनुरूप है।
  • सरलता और सुगमता: इसके शब्द इतने सरल हैं कि कोई भी सामान्य भक्त इसे आसानी से गा सकता है और भगवान के साथ तादात्म्य स्थापित कर सकता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए कोई भी समय वर्जित नहीं है, फिर भी इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष परिस्थितियां और समय अत्यधिक फलदायी माने गए हैं:

  • संध्या काल (Evening Prayer): संध्या आरती के समय या उसके पश्चात सत्संग के दौरान इस भजन को गाने से मन को असीम शांति मिलती है।
  • विशेष उत्सव: श्री कृष्ण जन्माष्टमी, राधाष्टमी, होली और कार्तिक मास के दौरान इस भजन का सामूहिक गायन अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • गायन की विधि: इस भजन को गाते समय मन में पूर्ण समर्पण और विरह का भाव होना चाहिए। आँखों को बंद करके वृंदावन के कुंजों का ध्यान करते हुए और हाथों से ताली बजाकर संकीर्तन करना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से युगल सरकार—श्री राधा और श्री कृष्ण को समर्पित है। वैष्णव दर्शन में श्री राधा जी को 'ह्लादिनी शक्ति' (आनंद प्रदायिनी शक्ति) माना गया है और श्री कृष्ण 'सच्चिदानंद' हैं। इस भजन में प्रयुक्त भाव चैतन्य महाप्रभु, स्वामी हरिदास और अष्टछाप के कवियों (जैसे सूरदास, नंददास) की भक्ति परंपरा से प्रेरित है, जिन्होंने भगवान को केवल ऐश्वर्य रूप में नहीं, बल्कि अत्यंत आत्मीय और माधुर्य रूप में पूजा है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस आधुनिक भजन की रचना कमल सिंह पुट्टी द्वारा की गई है, जिन्होंने पारंपरिक ब्रज रस को आधुनिक गीतों की शैली में पिरोया है। गायक प्रेम मेहरा ने अपनी भावपूर्ण और सुरीली आवाज से इस भजन को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है। अरुण मिश्रा के संगीत निर्देशन में तैयार यह भजन 'राधा कृपा' लेबल के अंतर्गत जारी किया गया था। इसकी पृष्ठभूमि वृंदावन की पावन भूमि और वहाँ होने वाले नित्य सत्संगों से जुड़ी है, जहाँ देश-विदेश से आए श्रद्धालु केवल हरि नाम के रस में सराबोर होने आते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें ब्रजभाषा के शब्दों (जैसे कन्हैया, मुरली, सुहाना) का सुंदर सम्मिश्रण है। इसकी काव्य शैली 'गीतिका' के समान है, जिसमें एक स्थायी (मुखड़ा) और कई अंतरे हैं। रूपक और अनुप्रास अलंकार का सहज प्रयोग भजन के सौंदर्य को बढ़ाता है। "सत्संग ही बहाना है" पंक्ति में एक सुंदर आध्यात्मिक वक्रोक्ति है, जो यह दर्शाती है कि बाहरी क्रियाएं केवल एक निमित्त हैं, आंतरिक भाव ही मुख्य है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें दैनिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक सीख देता है:

  1. लक्ष्य की स्पष्टता: जैसे भक्त कहता है "दुनिया से क्या लेना", वैसे ही हमें अपने जीवन के परम लक्ष्य (ईश्वर प्राप्ति या आत्म-साक्षात्कार) के प्रति सजग रहना चाहिए।
  2. सत्संगति का महत्व: कुसंगति से बचकर हमेशा सत्संगति का आश्रय लेना चाहिए, क्योंकि यही हमें सही मार्ग पर ले जाती है।
  3. राधा-भाव (प्रेम): बिना निश्छल प्रेम और समर्पण के भगवान को पाना असंभव है। ज्ञान और कर्म के साथ भक्ति का होना अनिवार्य है।
  4. सकारात्मक विरह: भगवान के लिए तड़पना या व्याकुल होना हमारे अंतःकरण को शुद्ध करता है और हमें सांसारिक वासनाओं से दूर रखता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
सत्संग सत्य का संग, संतों की सभा वह स्थान जहाँ ईश्वर चर्चा हो और मन पवित्र बने।
बहाना निमित्त, जरिया या माध्यम साधन जो साध्य (भगवान) तक पहुँचाने में मदद करे।
कन्हैया बालकृष्ण, प्रियतम भगवान भक्त का अपने आराध्य के प्रति वात्सल्य और माधुर्य भाव।
सुहाना रूप अत्यंत सुंदर और मनमोहक छवि भगवान का त्रिभंग ललित रूप जो मन को मोह लेता है।
मुरली की तान बांसुरी की मधुर ध्वनि अनाहत नाद या दिव्य ध्वनि जो आत्मा को जाग्रत करती है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"श्याम तेरे मिलने की सत्संग ही बहाना है, दुनिया से क्या लेना, हमें तुझको पाना है।"
हे श्याम सुंदर! आपसे मिलने के लिए यह सत्संग तो केवल एक जरिया है। मेरा वास्तविक उद्देश्य तो केवल आपके दर्शन करना और आपके प्रेम को प्राप्त करना है। इस नश्वर संसार के मान-अपमान और सुख-दुख से मेरा कोई सरोकार नहीं है।

"तेरी याद में रोते हैं, दिन रात कन्हैया हम, आँखों में बसाया है, तेरा रूप सुहाना है।"
हे कन्हैया! आपके विरह में हमारी आँखें दिन-रात अश्रु बहाती हैं। हमने अपनी इन आँखों में आपकी उस मनमोहक छवि को बसा लिया है, जिसके आगे संसार का सारा सौंदर्य फीका है।

"वृंदावन की गलियों में, हम तुमको ढूंढेंगे, राधे राधे गाकर, तुझे पास बुलाना है।"
हम आपको वृंदावन की पावन कुंज-गलियों में खोजेंगे। हम जानते हैं कि आप राधा नाम के भूखे हैं, इसलिए हम निरंतर 'राधे-राधे' का संकीर्तन करेंगे ताकि आप हमारी पुकार सुनकर दौड़े चले आएं।

"मुरली की मधुर तानें, कानों में गूंजती हैं, इस व्याकुल हृदय को, अब चैन दिलाना है।"
आपकी बांसुरी की वह दिव्य ध्वनि हमारे कानों में निरंतर गूंजती रहती है। आपके बिना यह हृदय अत्यंत व्याकुल और अशांत है, अब आप दर्शन देकर इस तड़पती हुई आत्मा को शांति प्रदान करें।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भावों को पुष्ट करने के लिए निम्नलिखित श्लोक और मंत्र अत्यंत प्रासंगिक हैं:

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥

श्रीमद्भागवत महापुराण का यह श्लोक भगवान के प्रति अनन्य भक्ति को दर्शाता है:

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।
मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे॥

(अर्थात: मुझमें अपना मन लगाओ, मेरे भक्त बनो, मेरी पूजा करो और मुझे नमस्कार करो। इस प्रकार तुम निश्चित रूप से मुझे प्राप्त करोगे।)

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण बिंदु जानकारी
भजन का नाम श्याम तेरे मिलने की (Shyam Tere Milne Ki) मुख्य आराध्य श्री राधा-कृष्ण (युगल सरकार)
गायक (Singer) प्रेम मेहरा (Prem Mehra)
गीतकार (Lyricist) कमल सिंह पुट्टी (Kamal Singh Putty)
संगीतकार (Music) अरुण मिश्रा (Arun Mishra)
भाषा (Language) हिंदी (ब्रज मिश्रित)
भक्ति भाव (Bhava) माधुर्य भाव, विरह और समर्पण
उपयुक्त अवसर सत्संग, संध्या आरती, जन्माष्टमी, राधाष्टमी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

'श्याम तेरे मिलने की' भजन के मुख्य गायक कौन हैं?

इस भजन के मुख्य गायक प्रेम मेहरा हैं, जिन्होंने अपनी अत्यंत सुरीली और भावपूर्ण आवाज में इसे गाया है।

इस भजन के रचयिता कौन हैं?

इस भजन के सुंदर और हृदयस्पर्शी शब्दों की रचना कमल सिंह पुट्टी द्वारा की गई है।

"सत्संग ही बहाना है" का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

इसका अर्थ है कि सत्संग वह माध्यम या निमित्त है जिसके द्वारा हम सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर भगवान के करीब पहुँचते हैं। वास्तविक लक्ष्य तो केवल भगवान की प्राप्ति है, सत्संग उसका द्वार है।

इस भजन में किस भाव की प्रधानता है?

इस भजन में 'माधुर्य भाव' और 'विरह भाव' की प्रधानता है, जहाँ भक्त अपने आराध्य से मिलने के लिए व्याकुल है।

क्या यह भजन यूट्यूब और अन्य म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है?

हाँ, यह भजन 'राधा कृपा' यूट्यूब चैनल और अन्य सभी प्रमुख ऑडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है।

इस भजन को गाने का सबसे उत्तम समय कौन सा है?

इसे सुबह या शाम के समय, विशेषकर संध्या कालीन आरती या सत्संग के दौरान गाना और सुनना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

भजन में 'राधे राधे' गाने पर क्यों बल दिया गया है?

वैष्णव मान्यता के अनुसार, श्री कृष्ण अपनी ह्लादिनी शक्ति श्री राधा रानी के प्रेम के वश में रहते हैं। इसलिए, राधा नाम का संकीर्तन करने से श्री कृष्ण अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

इस भजन का संगीत किसने तैयार किया है?

इस भजन का मधुर संगीत अरुण मिश्रा द्वारा तैयार किया गया है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "श्याम तेरे मिलने की" भजन के आध्यात्मिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसमें वैष्णव दर्शन के सिद्धांतों और प्रामाणिक भक्ति परंपराओं का ध्यान रखा गया है। इस भजन के माध्यम से भक्त सहजता से ध्यान और नाम-संकीर्तन की गहराइयों को छू सकते हैं।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण (रासपंचाध्यायी प्रसंग)
  • गौड़ीय वैष्णव भक्ति ग्रंथ और संकीर्तन पद्धति
  • राधा कृपा म्यूजिक लेबल और आधिकारिक रिलीज विवरण

संबंधित भजन एवं लेख

भक्ति रस में और अधिक डूबने के लिए आप हमारे निम्नलिखित लेख और भजन भी पढ़ सकते हैं:

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!